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adminFebruary 14, 20191min30

भारत सरकार की टेलीकॉम विंग बीएसएनल बंद होने के कगार पर है? देश की सबसे बड़ी टेलीकॉम कंपनियों में से एक बीएसएनल नुकसान में चल रही है. रिपोर्ट के मुताबिक सरकार ने कंपनी से सभी ऑप्शन तलाशने को कहा है. इनमें कंपनी को बंद करने का भी ऑप्शन है. कुल मिला कर रिपोर्ट्स के मुताबिक अगर सभी ऑप्शन्स फेल होते हैं तो मुमकिन है बीएसएनल को बंद करना पड़े या सरकार इसे बेच दे.

टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक सरकार बीएसएनल को दिया गया ये आदेश, कंपनी के आला अधिकारी और टेलीकॉम सेकरेटरी अरूण सुंदरराजन की मुलाकात के बाद आया है. रिपोर्ट के मुताबिक बीएसएनल के चेयरमैन अनुपम श्रीवास्तव ने इस मीटिंग में कंपनी के मौजूदा आर्थिक हालात के बारे में बातचीत की है. इसमें कंपनी को हुए नुकसान और जियो की एंट्री से पड़े प्रभाव के बारे में बातचीत की गई हैं.

सरकार के अधिकारियों ने बीएसएनल से एक नोट तैयार करने को कहा है कि अगर बिजनेस बंद हो जाएगा तो क्या होगा. दूसरे ऑप्शन के तौर पर सरकार बीएसएनल के रिवाइवल के लिए इसका विनिवेश कर सकती है. बीएसएनल को इन सभी ऑप्शन्स पर कॉम्पैरिटिव अनालिसिस जमा करने को कहा गया है.

 

गौरतलब है कि बीएसएनल भारत में, लैंडलाइन और ब्रॉडबैंड सर्विस सहित बैंडविथ का बिजनेस करती है. इसने 2016-17 में 4,793 करोड़ रुपये का नुकसान दिखाया है. हालांकि अब तक 2017-18 की आर्थिक स्थिति नहीं बताई गई है. पिछले तीन साल से लगातार बीएसएनल नुकसान में है. डिपार्टमेंट ऑफ पब्लिक एंटरप्राइजेज द्वारा जारी की गई गाइडलाइन के मुताबिक बीएसएनल को ‘Incipient Sick’ घोषित किया गया है.

बीएसएनल के एक प्रवक्ता ने TOI  को बताया है, ‘बीएसएनल ने सरकार से कहा है कि मार्केट में ‘कट थ्रोट’ कॉम्पटीशन के अलावा कंपनी बढ़ती उम्र वाले ज्यादा कर्मचारियों की वजह से मुश्किल में है. अगर 2019-20 से रिटायरमेंट की आयु कम दी जाती है तो बिल में लगभग 3,000 करोड़ रुपये की बचत होगी’

पिछले कुछ सालों से बीएसएनल का स्ट्रगल ज्यादा बढ़ गया है. इसकी वजह मार्केट में जियो की आमद है. जियो के साथ ही लगभग सभी प्राइवेट कंपनियों ने अपने प्लान सस्ते कर दिए. कई कंपनियां मर्ज हो गईं, कुछ कंपनियां बाजार से साफ हो गई और ऐसे में मार्केट में बने रहने के लिए बीएसनएल ने भी अपने प्लान को रिलायंस जियो से मैच किया है. हालांकि बीएसएनल पिछले कुछ साल में दूसरे कंपनियों के मुकाबले 4G अपग्रेड में फेल रही है और फाइबर सर्विस देने में भी कंपनी ने दूसरों के मुकाबले कुछ देरी कर दी है.


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adminFebruary 14, 20191min40

अजमेर में सर्जरी का एक अनोखा मामला सामने आया है. यहां ब्रेन ट्यूमर की सर्जरी के दौरान मरीज आराम से कुरान पढ़ता रहा. प्राइवेट हॉस्पिटल में की गई इस सर्जरी का वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा में है.  अब्दुल नाम के शख्स को ब्रेन ट्यूमर था. उसे सुनाई भी कम दे रहा था. इसके बाद डॉक्टरों ने उसे सर्जरी कराने की सलाह दी. इस दौरान उसे बेहोश नहीं किया गया. डॉक्टरों ने अब्दुल की सर्जरी को सफल बताया है. हालांकि, सर्जरी के दौरान मरीज के धर्मग्रंथ पढ़ने का ये पहला मामला नहीं है. कई लोगों का मानना है कि लोगों के मन में धार्मिक आस्था होती है. कठिन वक्त में धार्मिक पाठ करने से उन्हें आत्मबल मिलता है. आपको बता दें कि अब्दुल को हॉस्पिटल से छुट्टी दे दी गई है.

ब्रेन सर्जरी काफी संवेदनशील होती है और डॉक्टर ऑपरेशन के दौरान मरीज को कुछ गुनगुनाने के लिए कहते हैं. (प्रतीकात्मक फोटो)


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adminFebruary 14, 20191min30

हाल ही में एक लड़की को देखा तो ऐसा लगा में दमदार किरदार में नजर आई जूही चावला मिस इंडिया भी रह चुकी हैं. मिस इंडिया के दौरान की उनकी एक तस्वीर सोशल मीडिया में खूब वायरल हो रही हैं.
बॉलीवुड की खूबसूरत अदाकारा जूही 1984 में मिस इंड‍िया बनी थीं. उन्हें मिस इंड‍िया का ताज एक्ट्रेस रेखा ने पहनाया था. दोनों की ये अनसीन तस्वीर सामने आई है. तस्वीर को खूब पसंद किया जा रहा है.

 
35 साल पहले रेखा ने जूही चावला को यूं पहनाया था मिस इंड‍िया का ताज
 

1984 में मिस इंड‍िया का ताज जीतने के बाद जूही चावला ने बॉलीवुड में 1986 में डेब्यू किया था. पुरानी तस्वीर में जूही चावला और रेखा को देखना काफी दिलचस्प है.

 

35 साल पहले रेखा ने जूही चावला को यूं पहनाया था मिस इंड‍िया का ताज
 

इसके बाद 1988 में आई फिल्म “कयामत से कयामत तक” की सफलता ने जूही को शोहरत की बुलंदी पर पहुंचा द‍िया. फिल्म में वे आमिर खान के साथ जोड़ी में थीं. जूही चावला हाल ही में फिल्म एक लड़की को देखा तो ऐसा लगा में नजर आई थीं. इस फिल्म में उनकी जोड़ी अनिल कपूर संग नजर आई. जूही चावला बॉलीवुड एक्ट्रेस होने के साथ प्रोड्यूसर, आईपीएल टीम कोलकाता नाइट राइडर्स में शाहरुख खान संग पाटर्नर हैं.


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adminFebruary 14, 20191min30

Gully Boy Movie Review सिनेमाघरों में रिलीज हुई रणवीर सिंह और आलिया भट्ट की फिल्म गली बॉय. ये फिल्म रैपर डिवाइन और नैजी की जिंदगी से प्रेरित है. मूवी का डायरेक्शन जोया अख्तर ने किया है. जानते हैं कैसी बनी है फिल्म.

फिल्म: Gully Boy
कलाकार: Ranveer Singh, Alia Bhatt, Siddhant Chaturvedi, Vijay Raaz, Kalki Koechlin
निर्देशक: Zoya Akhtar

लीक से हटकर फिल्में बनाने के लिए मशहूर डायरेक्टर जोया अख्तर इस बार फिल्मी पर्दे पर स्ट्रीट रैपर्स के संघर्ष की कहानी लेकर आई हैं. फिल्म के जरिए रणवीर सिंह ने अपना सपना जिया है. बतौर रैपर उन्होंने अपना टैलेंट एक और दुनिया को दिखाया है. मगर रैप कल्चर पर फोकस करती गली बॉय ‘हार्ड’ नहीं बन पाई है. एक्टिंग जोन में तो रणवीर का ‘टाइम’ पहले से आया हुआ है. लेकिन रैप वर्ल्ड में जरूर उनका ‘टाइम आ गया’ है. चलिए जानते हैं कैसी बनी है ये फिल्म.

कहानी

गली बॉय मुंबई के धारावी में रहने वाले मुराद (रणवीर सिंह) की कहानी है. जो गरीबी से ऊपर उठकर कुछ बड़ा करने का सपना देखता है. लेकिन क्या ये नहीं जानता. अपने दर्द और लफ्जों को वो अक्सर नोटबुक में लिखता है. सफीना (आलिया भट्ट) मुराद की गर्लफ्रेंड है. जो अच्छे खानदान से ताल्लुक रखती है. दोनों के स्टेट्स में जमीन-आसमान का फर्क है, इसलिए उनका रोमांस चोरी छिपे चलता है. इस बीच मुराद के पिता शाकिर (विजय राज) दूसरा निकाह करते हैं. दूसरी अम्मी के आने के बाद अपनी मां की दयनीय हालत देखकर मुराद दुखी रहता है. वो पिता से डरता है और उनकी हर बात को सिर झुकाकर मानता है.

मुराद की जिंदगी में यूटर्न मशहूर रैपर एमसी शेर (सिद्धांत चतुर्वेदी) की एंट्री होने के बाद होती है. एमसी शेर मशहूर रैपर है. मुराद भी एमसी शेर की तरह बनना चाहता है. वे उससे रैप की ट्रेनिंग लेता है. इस बीच पिता के बीमार होने की वजह से मुराद को घर की जिम्मेदारी उठानी पड़ती है. वो पिता की जगह ड्राइवरी का काम करता है. म्यूजिक प्रोग्रामर स्काई (कल्कि कोचलिन) मुराद और एमसी शेर को गाने का ऑफर देती है. ये गाना सनसनी मचा देता है. तब मुराद के गली बॉय बनने का सफर शुरू होता है. लेकिन मुराद के पिता रैप के खिलाफ होते हैं. नौकरी और रैप प्रैक्टिस के बीच फिर कैसे उसकी जिंदगी करवट लेती है. कैसे मुराद अपने रैपर बनने का सपना पूरा करता है, ये जानने के लिए आपको फिल्म देखनी पड़ेगी.

एक्टिंग

ट्रेलर देखकर लगा था कि गली बॉय की कहानी में सिर्फ रणवीर ही छाए रहेंगे. लेकिन ऐसा कहना गलत होगा. मूवी में आलिया भटट् और सिद्धांत चतुर्वेदी को भी बराबर स्पेस मिला है. कई सीन्स में आलिया और सिद्धांत, रणवीर पर भारी पड़े हैं. रणवीर का करेक्टर ज्यादातर डरा और सहमा दिखा है, जो अपने पिता के सामने जुबां नहीं खोलता है. ये भी वजह है कि रणवीर का रोल आलिया-सिद्धांत से दबता नजर आया. सिद्धांत मूवी का सरप्राइज फैक्टर हैं. उन्होंने उम्दा काम किया है. रैपर के स्वैग, एटिट्यूड, बॉडी लैंग्वेज और एक्सप्रेशन को उन्होंने बखूबी पकड़ा है. सिद्धांत-आलिया जब जब स्क्रीन पर आते हैं छा जाते हैं. अलहड़, बोल्ड, एग्रेसिव और हठेली लड़की के रोल में आलिया ने दमदार अभिनय किया है. खड़ूस पिता की भूमिका में विजय राज जमे हैं. कल्कि कोचलिन छोटी सी भूमिका में ठीक ठाक लगी हैं.

क्यों देखें

फिल्म का सबसे मजबूत पक्ष कलाकारों की शानदार एक्टिंग और गाने हैं. रैप कल्चर के दीवानों के लिए ये फिल्म ट्रीट है. गली बॉय के गाने मूवी रिलीज से पहले ही हिट हो चुके हैं. रणवीर ने अपने सिंगिंग टैलेंट का लोहा मनवाया है. उनकी आवाज में बने गाने शानदार बन पड़े हैं. सभी गानों के लिरिक्स दमदार हैं और सीधा दिल से कनेक्ट करते हैं. कई सीक्वेंस में फिल्माए गए रैप बैटल जबरदस्त बन पड़े हैं. मूवी के डायलॉग अच्छे हैं. आलिया भट्ट और रणवीर सिंह की फ्रेश पेयरिंग असरदार है. गली बॉय देखने के बाद फैंस उन्हें दोबारा से किसी मूवी में जरूर देखना चाहेंगे.

क्यों नहीं देखें

गली बॉय की कहानी बेहद सिंपल और सरल है. शायद यही इसके कमजोर होने की बड़ी वजह भी बनी है. मूवी में एंटरटेनमेंट और बॉलीवुड फिल्मों के हिट मसालों की कमी अखरती है. अगर आप थियेटर एंटरटेनमेंट के बारे में सोचकर जाएंगे तो यकीनन ही निराश होकर लौटेंगे. फिल्म काफी लंबी है. फर्स्ट हाफ बोर करता है. जोया अख्तर ने इंटरवल किरदारों की भूमिका बांधने में ही खत्म कर दिया. सेकंड हाफ धीरे-धीरे स्पीड पकड़ता है, लेकिन बीच में कहानी फिर स्लो हो जाती है. मूवी दर्शकों को बांधे रखने में बुरी तरह से नाकामयाब साबित होती है. गली बाय का क्लाइमेक्स निराशाजनक है. कहानी में दम नहीं है.

रैपर बनने के रणवीर सिंह के जुनून, स्ट्रगल को और बढ़िया तरीके से पेश किया जा सकता था. गरीबी की बेड़ियों को तोड़कर रणवीर ने परिवार और अपने समाज के दायरे से ऊपर उठकर कुछ बड़ा करने का सपना देखा, लेकिन उसकी कहानी में दर्द और जुनूनियत की कमी साफ झलकी.

बॉक्स ऑफिस

रैप म्यूजिक पर बेस्ड गली बॉय को लेकर जबरदस्त बज बना हुआ है. फिल्म का बजट 50 करोड़ के करीब बताया जा रहा है. 8 करोड़ तक मूवी एडवांस बुकिंग से कमा चुकी है. फिल्म को वैलेंटाइन वीक में रिलीज होने फायदा मिलेगा. गली बॉय को 4 दिन का लंबा वीकेंड भी मिल रहा है. सिंगल रिलीज होने की वजह से मूवी के बॉक्स ऑफिस पर अच्छा कलेक्शन करने की पूरी उम्मीद है. बाकी कलेक्शन वर्ड ऑफ माउथ पर निर्भर करेगा.


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adminFebruary 13, 20191min40

क्या आप सोच सकते हैं कि एक छोटे से गांव से ताल्लुक रखने वाली 12वीं पास महिला, बिना किसी भारी निवेश के करोड़ों का बिज़नेस खड़ा कर सकती है? जी हां, तमिलनाडु की अरुलमोझी सर्वानन ने यह कारनामा कर दिखाया है और उनकी सफलता की कहानी का पूरा देश गवाह बन चुका है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मासिक तौर पर प्रसारित होने वाले अपने कार्यक्रम ‘मन की बात’ में 2017 में पहली बार अरुलमोझी की कहानी देश के साथ साझा की थी और सभी महिलाओं को उनसे प्रेरणा लेने का संदेश दिया था। इसके बाद भी कई बार प्रधानमंत्री मोदी अरुलमोझी की मिसाल दे चुके हैं।

अरुलमोझी तमिलनाडु के मदुरै ज़िले में स्थित उसिलामपट्टी कस्बे के पास एक गांव में पली-बढ़ीं। 12वीं कक्षा के बाद वह अपनी पढ़ाई जारी नहीं रख सकीं क्योंकि उनके परिवार की आर्थिक स्थिति इस बात की इजाज़त नहीं देती थी। एक साल घर पर ही बिताने के बाद 19 साल की उम्र में उनकी शादी कर दी गई।

जल्द ही, वह एक बच्चे की मां बन गईं और परिवार के साथ मदुरै में ही रहने लगीं। दो साल बाद, उनके घर एक बच्ची का जन्म हुआ और इसके बाद उन्होंने एक ट्रेनिंग कोर्स में दाखिला ले लिया। ट्रेनिंग पूरी होने के बाद भी उन्होंने नौकरी तलाश नहीं की क्योंकि उनका मानना था कि ऐसा करके वह अपने बच्चों के साथ अन्याय करेंगी और उन्हें पूरा वक़्त नहीं दे पाएंगी।

अरुलमोझी बताती हैं, “मैं ऐसे किसी काम की तलाश में थी, जिसके माध्यम से मेरे परिवार को आर्थिक रूप से सहयोग मिल जाए और मुझे काम के लिए बाहर भी न जाना पड़े। इस दौरान ही मैंने सरकार द्वारा संचालित ई-मार्केटप्लेस (GeM) के बारे में सुना। इस मार्केटप्लेस पर आमतौर पर उपयोग में आने वाले सामान और सुविधाएं मौजूद रहती हैं। मैंने ऑफ़िस प्रोडक्ट्स की सप्लाई के लिए इस प्लेटफ़ॉर्म पर रजिस्ट्रेशन कराया। मैंने अपने जे़वरों को गिरवी रखकर 40 हज़ार रुपए जुटाए और धीरे-धीरे सामान ख़रीदना शुरू कर दिया।” वह बताती हैं कि जीईएम पर रजिस्ट्रेशन तो बस पहला कदम था। इसके बाद जो इंतज़ार था, वह अरुलमोझी के काफ़ी चुनौतीपूर्ण साबित हुआ। करीब दो महीनों तक उन्हें एक भी ऑर्डर नहीं मिला, लेकिन उन्होंने धैर्य नहीं छोड़ा। इसका फल अरुलमोझी को मिला और उन्हें पहला ऑर्डर 10 स्टैंप पैड्स का मिला, जिसकी क़ीमत 243 रुपए थी।

शुरुआती तौर पर मिले ऑर्डरों और मुनाफ़े से उनकी हिम्मत में इज़ाफ़ा हुआ और उन्होंने अपने पोर्टफ़ोलियो में उत्पाद बढ़ाने पर विचार शुरू किया। इसके लिए उन्होंने केंद्र सरकार द्वारा संचालित मुद्रा योजना का लाभ उठाते हुए बैंक से 50 हज़ार रुपए का लोन लिया। पैसे मिलने के बाद उन्होंने थोक बाज़ार से सामान ख़रीदना शुरू कर दिया। ऑफ़िस प्रोडक्ट्स के चुनाव के विषय में जानकारी देते हुए अरुलमोझी ने बताया कि इन उत्पादों में जोख़िम कम रहता है और इसलिए ही उन्होंने इन उत्पादों के साथ काम शुरू किया। अरुलमोझी अपने इस काम में अपने परिवार के 5 सदस्यों की मदद लेती हैं।

वह बताती हैं कि उन्होंने डिलिवरी के लिए इंडिया पोस्ट सर्विस का चुनाव किया क्योंकि यह सुविधा बेहद किफ़ायती होती है और साथ ही, देश के हर कोने तक इन पहुंच होती है। अरुलमोझी ने जानकारी दी कि उन्होंने हाल ही में लेह तक भी अपने सामान की डिलिवरी की है।

कुछ समय पहले उनके पास प्रधानमंत्री कार्यालय से 1,600 रुपए के एक थर्मस फ्लास्क का ऑर्डर आया। उन्होंने प्रधानमंत्री को धन्यवाद देते हुए एक पत्र लिखा और साथ में ऑर्डर भी भेजा। अपने पत्र में उन्होंने ज़िक्र किया कि किस तरह सरकार की योजनाओं ने उनकी मदद की और उनकी ज़िंदगी को बदलकर रख दिया। इसके बाद प्रधानमंत्री ने 2017 में मासिक रूप से प्रसारित होने वाले अपने कार्यक्रम मन की बात में अरुलमोझी और उनकी प्रेरणाप्रद कहानी का ज़िक्र किया। प्रधानमंत्री कार्यालय से जानकारी लेने के लिए उनके पास कॉल आया था और इस समय तक भी उन्हें इस बारे में कोई अंदाज़ा नहीं था। बाद में उन्होंने तमिल अख़बारों में इस बारे में पढ़ा और उनकी ख़ुशी का ठिकाना नहीं रहा

2017 के बाद से कई बार प्रधानमंत्री मोदी अरुलमोझी का जिक़्र कर चुके हैं। वह अक्सर महिला सशक्तिकरण की मिसाल के तौर पर अरुलमोझी का नाम लेते रहते हैं। अरुलमोझी की वेबसाइट पर उपलब्ध जानकारी के मुताबिक़, उनके एंटरप्राइज़ ने हालिया वित्तीय वर्ष में 1 करोड़ रुपए से भी अधिक का टर्नओवर कर लिया। छोटे-छोटे ऑर्डर से शुरू हुई यात्रा, अब लाखों रुपए के प्रोडक्ट्स की मांग तक पहुंच चुकी है। अरुलमोझी अपने व्यवसाय को इसी तरह से जारी रखना चाहती हैं और जल्द ही ऑफ़िस प्रोडक्ट्स के लिए एक मैनुफ़ैक्चरिंग यूनिट की भी शुरूआत करने की योजना बना रही हैं।

वह कहती हैं, “अगर आपके पास एक अच्छा बिज़नेस आइडिया है, लेकिन उसे शुरू करने के लिए आपके पास पर्याप्त पैसा नहीं है तो आपको हताश नहीं होना चाहिए। सरकार द्वारा कई अच्छी योजनाएं चलाई जा रही हैं, जिनके अंतर्गत बेहद सहजता के साथ आप लोन ले सकते हैं। अगर आपके अंदर अपने लक्ष्य को लेकर पूरी निष्ठा है और आप कड़ी मेहनत के लिए तैयार हैं तो आपको सफल होने से कोई नहीं रोक सकता।”


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adminFebruary 13, 20191min60

सीबी इनसाइट नाम की एक फर्म है जो दुनियाभर के स्टार्टअप्स को ट्रैक करती है। इस फर्म ने कई सारे डेटा का अध्ययन करते हुए 50 स्टार्टअप्स की एक लिस्ट तैयार की है जो आने वाले समय में बड़ा नाम बन सकते हैं और दुनिया के बड़े स्टार्टअप्स में शुमार हो सकते हैं। 

एयरवैलेक्स (Airwallex)

हॉन्गकॉन्ग का यह एक ऐसा स्टार्टअप है जो बिजनेस करने वाले लोगों को दुनियाभर में पैसा भेजने और इकट्ठा करने की सुविधा प्रदान करवाता है।

ऑल्टो फार्मेसी (Alto Pharmacy)

सैन फ्रांसिस्को का यह स्टार्टअप एक ऑनलाइन फार्मेसी है जहां ऑनलाइन दवाओं की खरीद फरोख्त की जा सकती है।

एम्प्लीट्यूड (Amplitude)

सैन फ्रांसिस्को का यह स्टार्टअप डिजिटल क्षेत्र में बिजनेस करने वाली कंपनियों के लिए ऐनालिटिक्स टूल डेवलप करता है।

बेइसेन (Beisen)

चीन की राजधानी बीजिंग से चलने वाला यह स्टार्टअप टैलेंट मैनेजमेंट और माप करने वाले टूल तैयार करता है।

बेंचलिंग (Benchling)

सैन फ्रैंसिस्को स्थित यह स्टार्टअप लाइफ साइंस रिसर्चर्स और कंपनियों के लिए सॉफ्टवेयर तैयार करता है।

बेटरक्लाउड (BetterCloud)

न्यू यॉर्क स्थित यह स्टार्टअप विभिन्न कंपनियों को साइबर सिक्यॉरिटी और क्लाउड सॉफ्टवेयर की सुविधाएं मुहैया करवाता है।

ब्लेंड (Blend)

गिरवी या लोन देने के लिए ऋणदाताओं के लिए कंज्यूमर लोन ऐप्लिकेशन सॉफ्टवेयर तैयार करता है।

ब्रेज (Braze)

न्यू यॉर्क का यह स्टार्टअप मोबाइल मार्केटिंग सॉफ्टवेयर तैयार करता है।

सी2एफओ (C2FO)

अमेरिका के लीवुड कनास इलाके में स्थित यह स्टार्टअप एक तरह का फाइनैंशियल सर्विस प्लेटफॉर्म है जो तमाम कंपनियों को पूंजी तक पहुंच संभव कराता है।

कारदेखो ग्रुप (CarDekho Group)

यह भारतीय स्टार्टअप राजस्थान की राजधानी जयपुर से संचालित होता है। यह ऑटो इंडस्ट्री से जुड़ी जानकारी उपलब्ध कराने के साथ-साथ ऑनलाइन सेल्स, फाइनैंसिंग, इंश्योरेंस जैसी सर्विस प्रदान करता है।

कारगोएक्स (CargoX)

ट्रांसपोर्टिंग कंपनियों को काम में सहूलियत के लिए ब्राजील का यह स्टार्टअप कई तरह की तकनीकें उपलब्ध करवाता है।

कार्टा (Carta)

सैनफ्रैंसिस्को स्थित यह स्टार्टअप इन्वेस्टर्स, फाउंडर्स और कर्मचारियों के लिए इक्विटी मैनेजमेंट की सर्विस उपलब्ध करवाता है।

चेकर (Checkr)

सैनफ्रैंसिस्को का यह स्टार्टअप कंपनियों को किसी भी कर्मचारी के लिए सारी जानकारी मुहैया करा के देता है।

सिटीमैपर (Citymapper)

लंदन का यह स्टार्टअप शहरों में ट्रांजिट और नेविगेशन ऐप की सर्विस देता है।

क्लियरटैक्स (ClearTax)

भारत में स्टार्टअप का गढ़ कहे जाने वाले बेंगलुरु की यह कंपनी टैक्स फाइल करने और इन्वेस्टमेंट को मैनेज करने से जुड़ी सारी जानकारी उपलब्ध कराती है। 

कॉन्टेंटफुल (Contentful)

बर्लिन का यह स्टार्टअप डिजिटल कॉन्टेंट तैयार करने के लिए सॉफ्टवेयर बनाता है।

डेलीहंट (DailyHunt)

बेंगलुरु से ही चलने वाला यह स्टार्टअप पहले न्यूजहंट के नाम से शुरू हुआ था। समाचारों और मनोरंजन की सुविधा उपलब्ध कराता है।

डेट्रियम (Datrium)

सनीवेल कैलिफॉर्निया में स्थित यह स्टार्टअप क्लाउड स्टोरेज की सुविधा उपलब्ध कराता है।

डीपमैप (DeepMap)

पेलो ऑल्टो कैलिफॉर्निया स्थित यह स्टार्टअप ऑटोनोमस गाड़ियों के लिए मैपिंग तकनीक विकसित करता है।

डेप्युटी (Deputy)

ऑस्ट्रेलिया की सिडनी में स्थित यह स्टार्टअप कंपनियों के लिए कार्यक्रम और टाइमशीट्स तैयार करने वाले सॉफ्टवेयर बनाता है।

डोमिनो डेटा लैब (Domino Data Lab)

कैलिफॉर्निया का यह स्टार्टअप डेटा का प्रबंध करने के लिए सॉफ्टवेयर बनाता है।

ईयरइन (Earnin)

पेलो कैलिफॉर्निया का यह स्टार्टअप छोटी अवधि के लिए लोन प्रोवाइड करवाता है।

एम्बार्क ट्रक्स (Embark Trucks)

सैन फ्रैंसिस्को का यह स्टार्टअप सेल्फ ड्राइविंग सेमी ट्रक्स बनाता है।

एक्सपेन्स (Expanse)

कैलिफॉर्निया का यह स्टार्टअप बड़े संस्थानों को इंटरनेट कनेक्टेड डिवाइसों के लिए सुरक्षा मुहैया करवाता है।

फेयरे (Faire)

सैनफ्रैंसिस्को का यह स्टार्टअप बुटीक और छोटे वेंडर्स के लिए व्होलसेल मार्केटप्लेस का काम करता है। 

फार्मर्स बिजनेस नेटवर्क (Farmers Business Network)

सैन कार्लोस कैलिफॉर्निया का यह एक ऐसा ऑनलाइन प्लेटफॉर्म है जो किसानों को उपज बेचने की सुविधा देता है और साथ ही साथ डेटा एनालाइज करता है।

फ्लाइवायर (Flywire)

बोस्टन स्थित यह स्टार्टअप वैश्विक लेनदेन के लिए भुगतान सॉफ्टवेयर बनाता है।

फ्रंट (Front)

सैन फ्रैंसिस्को का यह स्टार्टअप ईमेल कॉलैबरेशन सॉफ्टवेयर बनाता है।

ग्लोसियर (Glossier)

न्यूयॉर्क का स्टार्टअप जो स्किन केयर और ब्यूटी प्रॉडक्ट तैयार करता है।

ग्रो मोबिलिटी (Grow Mobility)

मेक्सिको सिटी और साओ पाउलो ब्राजील का या स्टार्टअप डॉकलेस बाइक और स्कूटर सर्विस प्रोवाइड कराता है।

हैकरवन (HackerOne)

सैनफैंसिस्को का यह स्टार्टअप सॉफ्टवेयर की दिक्कतों को दूर करता है।

केआरवाई (KRY)

स्टॉकहोम, स्वीडन का यह स्टार्टअप मरीजों रो डॉक्टरों से सीधे सलाह देने की सुविधा उपलब्ध कराता है।

मैपबॉक्स (MapBox)

वॉशिंगटन और सैनफ्रैंसिस्को में स्थित यह स्टार्टअप भी मैपिंग टेक्नॉलजी से जुड़ा हुआ है।

मार्केटा (Marqeta)

ऑकलैंड कैलिफॉर्निया का यह स्टार्टअप भौतिक, आभासी या टोकन भुगतान कार्ड जारी करने के लिए भुगतान की बुनियादी सुविधाएं प्रदान करता है।

मेडबैंक्स नेटवर्क टेक्नॉलजी (Medbanks Network Technology)

बीजिंग का यह स्टार्टअप ट्यूमर के इलाज के लिए प्रणाली विकसित करता है।

मिआशोऊ डॉक्टर (Miaoshou Doctor)

गुआंगझाउ चीन का यह स्टार्टअप डॉक्टरों और मरीजों के बीच संवाद स्थापित करने में सहायता प्रदान करता है।

ऑनशेप (Onshape)

कैंब्रिज स्थित यह स्टार्अप मैन्युफैक्चरिंग के लिए क्लाउड बेस्ड डिजाइन और टूल्स विकसित करता है।

आउटरीच (Outreach)

सिएटल का यह स्टार्टअप सेल्स एंगेजमेंट प्लेटफॉर्म है।

प्रैक्टो (Practo Technologies)

बेंगलुरु स्थित यह स्टार्टअप भी मरीजों और डॉक्टरों के बीच संवाद स्थापित करने का काम करता है।

क्विंटोऐंडर (QuintoAndar)

ब्राजील के साओ पोलो का एक रिएल एस्टेट रेंटल प्लेटफॉर्म है।

रेजरपे (Razorpay)

ऑनलाइन मर्चेंट्स के लिए पेमेंट गेटवे की तरह काम करता है।

रिगअप (RigUp)

ऑस्टिन, टेक्सस में ऊर्जा के क्षेत्र में नौकरी खोजने वाले लोगों के लिए काम उपलब्ध करवाता है।

सेल्सलॉफ्ट (SalesLoft)

अटलांटा स्थित यह स्टार्टअप कंपनियों की सेल्स बढ़ाने का काम करता है।

सेगमेंट (Segment)

सैनफ्रैंसिस्को स्थित यह स्टार्टअप डेटा प्रबंधन करने में सहायता करता है।

सिसेन्स (SiSense)

न्यू यॉर्क स्थित यह स्टार्टअप डेटा से जुड़े सॉफ्टवेयर तैयार करता है।

सोन्डर (Sonder)

सैनफ्रैंसिस्को का यह स्टार्टअप अपार्टमेंट जैसे होटल की सुविधा खोजने में मदद करता है।

स्टैंडर्ड कॉग्निशन (Standard Cognition)

सैनफ्रैंसिस्को स्थित यह स्टार्टअप स्टोर्स के लिए आर्टिफीशियल इंटेलिजेंस की सुविधा मुहैया कराता है।

अपग्रेड (Upgrade)

सैनफ्रैंसिस्को का यह स्टार्टअप भी लोन देने का काम करता है।

शिआंगवुशुओ (Xiangwushuo)

शंघाई में पुरानी चीजों को बेचने का एक प्लेटफॉर्म

जोला (Zola)

न्यू यॉर्क में शादी विवाह की योजना बनाने वाली कंपनी।


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adminFebruary 13, 20191min110

क्या आपको लगता है कि आप एक सफल शादीशुदा जिंदगी जी सकते हैं? इसका जवाब आपके जीन में छिपा है. हालिया एक शोध में यह बात सामने आई है कि आपके सफल वैवाहिक जीवन में जीन की अहम भूमिका होती है.

इससे पहले हुए कई शोधों में भी इस बात के संकेत दिए गए हैं कि सफल वैवाहिक जीवन आंशिक तौर पर आनुवांशिक कारकों से प्रभावित होता है और ऑक्सीटोसिन सोशल सपोर्ट में भी मददगार होता है.

हालिया शोध के अनुसार, विशेष जीनों में भिन्नता ऑक्सीटोसिन की कार्यपद्धति से जुड़ी होती है और यह समग्र तौर पर सफल वैवाहिक जीवन पर असर डालती है.

जीन पार्टनर्स के बीच समन्वय के लिए भी महत्वपूर्ण होते हैं.

इस शोध में विभिन्न तरह के जीनोटाइप- ऑक्सीटोन रिसेप्टर जीन (ओएक्सटीआर) के संभावित जीन संयोजन-का मूल्यांकन किया गया है, जो बताते हैं कि किस तरह जीवनसाथी एक-दूसरे का सहयोग करते हैं. यह सफल वैवाहिक जीवन का प्रमुख निर्धारक होता है.

 

ऑक्सीटोसीन के नियमन व रिलीज से जुड़े होने की वजह से ओएक्सटीआर को लक्ष्य बनाया गया.

अमेरिका के बिंघमटन विश्वविद्यालय के एसोसिएट प्रोफेसर रिचर्ड मैटसन ने कहा, “सफल वैवाहिक जीवन के लिए जीन मायने रखते हैं, क्योंकि व्यक्ति के लिए जीन प्रासंगिक होते है और व्यक्तियों की विशेषताएं शादी पर असर डालती हैं.”


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adminFebruary 13, 20191min100

दूरसंचार नियामक ट्राई ने प्रसारण और केबल सेवाओं के लिए नई गाइडलाइंस के तहत ग्राहकों को अपने मनपसंद चैनल चुनने के लिए 31 मार्च तक का समय दिया है. ट्राई ने कहा कि उसने सभी वितरण प्लेटफार्म परिचालकों (डीपीओ) से अपने उन ग्राहकों के लिए ‘बेहतर चैनल पैक’ बनाने को कहा जिन्होंने अब तक चैनल का चयन नहीं किया है.

दूरसंचार नियामक ट्राई ने प्रसारण और केबल सेवाओं के लिए नई गाइडलाइंस के तहत ग्राहकों को अपने मनपसंद चैनल चुनने के लिए 31 मार्च तक का समय दिया है. ट्राई ने कहा कि उसने सभी वितरण प्लेटफार्म परिचालकों (डीपीओ) से अपने उन ग्राहकों के लिए ‘बेहतर चैनल पैक’ बनाने को कहा जिन्होंने अब तक चैनल का चयन नहीं किया है.

TRAI ने अपने बयान में कहा, ‘उन ग्राहकों के लिए चैनलों के चयन की समयसीमा बढ़ाकर 31 मार्च 2019 कर दिया गया है जिन्होंने अब तक यह विकल्प नहीं चुना है. ग्राहक अपने सहूलियत से योजना को 31 मार्च 2019 को या उससे पहले किसी भी समय बदलने के लिए स्वतंत्र होंगे और ग्राहक द्वारा ‘सबसे बेहतर योजना’ बताए जाने के 72 घंटे के भीतर कंपनी को चैनल पैक में बदलना होगा.’

ट्राई के मुताबिक देश में 10 करोड़ घरों में केबल सेवा वाले टेलीविजन और 6.7 करोड़ डीटीएच टीवी हैं. करीब 65 प्रतिशत केबल ग्राहक और 35 फीसदी डीटीएच सेवा लेने वाले अपने मनपसंद चैनल चयन का विकल्प अपना चुके हैं.

ट्राई ने कहा कि ‘बेहतर माकूल योजना’ ग्राहकों के उपयोग के अनुरूप, बोली जाने वाली भाषा तथा चैनल की लोकप्रियता के आधार पर तैयार की जानी चाहिए. नियामक ने कहा कि व्यापक जनहित को देखते हुए सभी डीपीओ को यह निर्देश दिया गया है जिन ग्राहकों ने अपने विकल्प का चयन नहीं किया है, उनके लिये बेहतर पैक उपलब्ध करायी जाएगी और जिसे वह अपना सकते हैं. ट्राई ने कहा कि ग्राहकों की पुरानी योजना तब तक जारी रहेगी जब तक वे अपना विकल्प नहीं चुनते या बेहतर योजना को नहीं अपना लेते हैं.


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adminFebruary 13, 20191min40

टिक- टॉक से कानून-व्यवस्था संबंधी समस्याएं पैदा हो रही है. लोग इस ऐप के लिए खुद की जान को खतरे में डाल रहे हैं. अब तक कई ऐसे मामले सामने आए हैं जिसमें लोगों की मौत हुई है. बहुत से लोग अश्लील गतिविधि चला रहे हैं. इसलिए तमिलनाडु सरकार ऐप को बैन करने के लिए केंद्र सरकार से बात करेगी.

टिक टॉक ऐप के कारण आए दिन हो रहे हादसे और बढ़ते अश्लील वीडियो के खिलाफ अब तमिलनाडु सरकार इसे बैन करवाने केंद्र सरकार से बात करेगी. इस बारे में तमिलनाडु राज्य के सूचना और प्रसारण मंत्री एम. मणिकंदन ने कहा कि तमिलनाडु सरकार टिक टॉक ऐप को बैन करने पर विचार कर रही है. क्योंकि इस ऐप से तमिल संस्कृति को नीचा दिखाने की कोशिश हो रही है.   

उन्होंने कहा कि राज्य की कई राजनीतिक पार्टियों ने इस बारे में चिंता जताई है. इसलिए ब्लू व्हेल गेम को जिस तरह प्रतिबंधित किया गया है उसी तरह टिक टॉक को भी बैन किया जाए.

बच्चों को सरकार कर रही गुमराह…

मंत्री एम. मणिकंदन ने यह भी कहा कि इस ऐप से बच्चे और युवा इससे गुमराह हो रहे हैं. उन्होंने केंद्र सरकार से ऐप को बैन करने की मांग उठाने की भी बात कही है.

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क्या कहना है विधायकों का…

 

एआईडीएमके नेताओं का कहना है कि टिक- टॉक से कानून-व्यवस्था संबंधी समस्याएं पैदा हो रही है. लोग इस ऐप के लिए खुद की जान को खतरे में डाल रहे हैं. अब तक कई ऐसे मामले सामने आए हैं जिसमें लोगों की मौत हुई है.

इस बारे में विधायक थमीमुन अंसारी का कहना है कि टिक टॉक पर बहुत से लोग अश्लील गतिविधि चला रहे हैं. इसलिए तमिलनाडु में इस ऐप को बैन कर देना चाहिए. इसके लिए तमिलनाडु सरकार आगे केंद्र सरकार से बात करे.

आखिर क्या है टिक-टॉक ऐप…

‘टिक-टॉक’ चीनी कंपनी ‘बाइट डान्स’ का एक ऐप है. जिसके जरिये 15 सेकेंड तक के वीडियो बनाकर शेयर किए जा सकते हैं. इसे चीन में सितंबर 2016 में लॉन्च किया गया था. साल 2018 में ‘टिक-टॉक’ की लोकप्रियता तेज़ी से बढ़ी. यह अमेरिका में सबसे ज़्यादा डाउनलोड किया जाने वाला ऐप भी बन गया. भारत में भी एक ऐप का क्रेज तेजी से बढ़ रहा है.


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adminFebruary 13, 20192min130

वैलेंटाइन डे आने में कुछ ही समय बाकी है. अधिकतर कपल्स वैलेंटाइंस को सेलिब्रेट करने में व्यस्त हैं. वहीं, कई सिंगल लोग अभी तक ‘ड्रीम गर्ल’ की तलाश में हैं. हर पुरुष के मन में अपनी लाइफ पार्टनर को लेकर कुछ सपने होते हैं. ज्यादातर लोगों को लगता है कि पुरुष महिलाओं की सिर्फ उनके लुक्स से आकर्षित होते हैं. लेकिन खूबसूरती और अच्छी ड्रेसिंग सेंस के अलावा भी कई ऐसी क्वालिटीज हैं, जो पुरुष महिलाओं में ढूंढते हैं. आइए जानते हैं पुरुष अपने जीवनसाथी के रूप में किस तरह की महिलाएं चाहते हैं.

 
अपनी 'ड्रीम गर्ल' में ये 6 खूबियां ढूंढते हैं पुरुष
 
 

खुशमिजाज- पुरुषों को अधिकतर ऐसी महिलाएं ज्यादा पसंद आती हैं, जो स्वभाव से खुशमिजाज होती हैं. हर समय गंभीर और गुस्से में रहने वाली महिलाओं से पुरुष दूर भागते हैं. एक रिश्ते को मजबूत बनाने के लिए जरूरी है कि आप अपने पार्टनर के साथ एक दोस्त की तरह हंसते-खेलते रहें. उनके साथ हंसी-मजाक करें. इसके अलावा ऐसी महिलाओं के साथ पुरुष रिलैक्स महसूस करते हैं और ज्यादा से ज्यादा समय उनके साथ बिताना चाहते हैं, ताकि वो तनाव से बच सकें. इस बात की पुष्टि कई स्टडी में भी हो चुकी है.

अपनी 'ड्रीम गर्ल' में ये 6 खूबियां ढूंढते हैं पुरुष
 

केयरिंग- अधिकतर पुरुष ऐसी महिलाओं से ज्यादा प्रभावित होते हैं, जो उनकी हर पसंद और नापसंद का ख्याल रखती हैं. जीवन के हर पल में उनके साथ खड़ी रहती हैं, उनको सपोर्ट करती हैं. जीवन में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करती हैं. साथ ही महिलाओं का अपने पार्टनर के लिए उनकी पसंद का खाना बनाना भी पुरुषों को खूब भाता है. आपने अक्सर लोगों को ये कहते तो सुना होगा कि पुरुषों के दिल का रास्ता उनके पेट से होकर गुजरता है.

 

अपनी 'ड्रीम गर्ल' में ये 6 खूबियां ढूंढते हैं पुरुष
 

मैच्योर- पुरुष मैच्योर महिलाओं की तरफ ज्यादा आकर्षित होते हैं. दरअसल, पुरुषों को लगता है कि एक मैच्योर और समझदार महिला हर परिस्थिति को अपनी सूझ-बूझ से सही तरीके से सामना करने में सक्षम होती है. साथ ही उनकी भावनाओं और परिस्थितियों को भी समझ सकती हैं.  

 

अपनी 'ड्रीम गर्ल' में ये 6 खूबियां ढूंढते हैं पुरुष
 

आत्मनिर्भर- स्वतंत्र सोच रखने वाली एक आत्मनिर्भर महिला की लगभग हर पुरुष को ख्वाहिश होती है. आज की युवा पीढ़ी को ऐसी महिलाएं ज्यादा आकर्षित करती हैं, जो अपने लक्ष्य को लेकर ज्यादा गंभीर होती हैं. जो दुनिया के साथ कदम से कदम मिलाकर चल सकती हैं और दुनिया की तमाम महिलाओं के लिए प्रेरणा बन सकती हैं.

 

 

अपनी 'ड्रीम गर्ल' में ये 6 खूबियां ढूंढते हैं पुरुष
 

परिवर को महत्व देने वाली- पुरुष अपने जीवनसाथी के रूप में एक ऐसी लड़की चाहते हैं, जो उनके साथ उनके परिवार के लोगों की भी इज्जत और प्यार करे. अपने पैरेंट्स की तरह उनके पैरेंट्स का ख्याल रखे.

 

अपनी 'ड्रीम गर्ल' में ये 6 खूबियां ढूंढते हैं पुरुष
 

ड्रेसिंग सेंस- अक्सर आपने लोगों को ये कहते हुए सुना होगा कि जहां प्यार होता है, वहां लुक्स मायने नहीं रखता है. यही कारण है कि रिलेशनशिप में आने के बाद महिलाएं अपने कपड़ों और फिजिकल अपीयरेंस को लेकर ज्यादा ध्यान नहीं देती हैं. लेकिन आज की युवा पीढ़ी प्यार के साथ अच्छी अपीयरेंस को भी बहुत महत्व देती है. पुरुष ऐसी महिलाओं की ओर ज्यादा आकर्षित होते हैं, जिनका व्यक्तित्व अच्छा होने के साथ उनकी ड्रेसिंग सेंस भी अच्छी होती है.



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