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adminFebruary 12, 20191min60

वेलेंटाइन डे का दिन नजदीक है. ऐेसे में अगर आप अपने किसी खास को गिफ्ट के तौर पर स्मार्टफोन देना चाहते हैं तो सैमसंग अपने फ्लैगशिप स्मार्टफोन्स पर ऑफर्स दे रहा है. कंपनी ने अपने Galaxy Note 9 और Galaxy S9+ स्मार्टफोन पर ‘बेस्ट डेज’ ऑफर की घोषणा की है. यहां आपको डिस्काउंट, कैशबैक और गैलेक्सी वॉच पर बंडल ऑफर डिस्काउंट मिलेगा. ये हैं ऑफर्स:

 

Samsung Galaxy Note 9 डील

Galaxy Note 9 8GB रैम और 512GB स्टोरेज वेरिएंट को 84,900 रुपये में लॉन्च किया गया था, लेकिन 7,000 रुपये के फ्लैट डिस्काउंट के बाद इसे 77,900 रुपये में सेल किया जा रहा है. साथ ही HDFC क्रेडिट और डेबिट कार्ड यूजर्स इस पर 8,000 रुपये का अतिरिक्त डिस्काउंट प्राप्त कर सकते हैं. ऐसे में इसकी कीतम घटकर 69,900 रुपये हो जाएगी.

यदि आपके पास HDFC बैंक क्रेडिट और डेबिट कार्ड नहीं है तो आप अपग्रेड ऑफर के तहत एक्सचेंज बोनस में 9,000 रुपये तक की छूट का भी फायदा उठा सकते हैं. इसी तरह ऑफर के तहत 6GB रैम और 128GB स्टोरेज ग्राहकों के लिए 58,900 रुपये और 8GB रैम और 512GB स्टोरेज वेरिएंट 68,900 रुपये में बिक्री के लिए उपलब्ध है.

केवल इतना ही नहीं Galaxy Note 9 को खरीदने वाले ग्राहक Galaxy Watch (42mm) को महज 9,999 रुपये में खरीद सकते हैं. इस स्मार्टवॉच की वास्तविक कीमत 24,990 रुपये है, यानी आपको यहां 14,991 रुपये का डिस्काउंट मिलेगा.

 

Samsung Galaxy S9+ डील

Galaxy S9+ पर भी 7,000 रुपये का डिस्काउंट दिया जा रहा है. इसके बाद 64GB वेरिएंट 57,900 रुपये, 128GB वेरिएंट 61,900 रुपये और 256GB वेरिएंट को ग्राहक 65,900 रुपये में खरीद सकते हैं. HDFC बैंक कैशबैक के तहत यहां 6,000 रुपये की छूट मिलेगी. ऐसे में इन वेरिएंट्स की कीमत क्रमश: 51,900 रुपये, 55,900 रुपये और 59,900 रुपये हो जाएगी.

Galaxy Note 9 की ही तरह Galaxy S9+ पर भी उन लोगों के लिए जिनके पास HDFC बैंक डेबिट या क्रेडिट कार्ड नहीं है, 9,000 रुपये तक अपग्रेड बोनस ऑफर मिलेगा. आप अपना पुराना स्मार्टफोन देकर Galaxy S9+ के 256GB वेरिएंट को 56,900 रुपये, 128GB वेरिएंट को 52,900 रुपये और 64GB वेरिएंट को 48,900 रुपये में खरीद सकते हैं.  


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adminFebruary 11, 20191min60

ग्राहक जैसे ही रेस्त्रां में आते हैं, उन्हें टैब दिया जाता है. ग्राहक टैब से सीधे खाना ऑर्डर करते हैं और इसके बाद रोबोट उन तक खाना पहुंचा देता है.

हैदराबाद में ऐसा पहला रेस्त्रां खोला गया है जहां ग्राहकों को खाना रोबोट परोसता है. रोबो किचेन नाम के रेस्त्रां में फिलहाल चार रोबोट हैं. रोबोट किचेन से सीधे खाना लेकर ग्राहकों को टेबल पर पहुंचा देते हैं. इस रेस्त्रां को ग्राहकों का अच्छा रेस्पॉन्स मिल रहा है.

रोबो किचेन के पार्टनर मनिकंठ ने कहा कि ग्राहक जैसे ही रेस्त्रां में आते हैं, उन्हें टैबलेट दिया जाता है. ग्राहक टैबलेट से सीधे खाना ऑर्डर करते हैं और इसके बाद रोबोट उन तक खाना पहुंचा देता है.

खाना पहुंचाने वाले रोबोट को ब्यूटी सर्विंग रोबोट नाम दिया गया है. पूरे दिन रोबोट के काम करने के लिए इन्हें करीब 3 घंटे चार्ज करना होता है. आपको बता दें कि ऐसा ही रेस्त्रां चेन्नई में भी खुल चुका है.

 

दुनियाभर में हो रहे हैं ऐसे प्रयोग

हाल ही में बुडापेस्ट में एक कैफे खोला गया जहां रोबोट खाना सर्व करते हैं, कस्टमर से बातें करते हैं और उनके साथ डांस भी करते हैं. आईटी कंपनी E-Szoftverfejlesztő ने एन्जॉय बुडापेस्ट कैफे शुरू किया.

बुडापेस्ट के कैफे में रोबोट तय रास्तों से अपने हाथों में खाना लेकर कस्टमर तक पहुंचते हैं. लोगों को रोबोट के रास्ते से अलग रहने को कहा जाता है. वहीं कुछ रोबोट रिसेप्शनिस्ट के तौर पर काम करते हैं. करीब 12 घंटे तक इन रोबोट के काम करने के लिए कई टेक्नेशियन को भी यहां नौकरी पर रखा गया.


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adminFebruary 11, 20191min70

स्वस्थ रहने के लिए फल खाना तो जरूरी है लेकिन क्या आपको फल खाने का सही वक्त पता है? अगर फल सही समय पर नहीं खाते हैं तो फायदे की जगह नुकसान भी उठाना पड़ सकता है.

अगर हेल्दी रहना है तो फलों को अपनी डाइट में शामिल करना ही पड़ता है. फलों के सेवन से शरीर को कई जरूरी पोषक तत्व मिल जाते हैं. वक्त की कमी होने पर हम फल आराम से खा सकते हैं. फलों में कई पोषक तत्व, खनिज, एंटीऑक्सिडेंट होते हैं लेकिन एक जरूरी बात ये है कि इन पोषक तत्वों को अधिकतम मात्रा में कैसे लिया जाए. फलों के खाने का सही वक्त क्या है, इस बात का भी आपको खास ख्याल रखना चाहिए.

आपको खाने से पहले या बाद में कभी भी फल नहीं खाने चाहिए. सुबह आप ब्रेकफास्ट में फल खा सकते हैं. खाना खाने के बाद फल खाने से बचना चाहिए.

औसतन आप एक बार के खाने में 300-400 कैलोरी लेते हैं. फलों में फ्रक्टोज होता है जो आपकी कैलोरी की संख्या बहुत बढ़ा देता है. यही वजह है कि खाने के बाद फलों को खाने से मना किया जाता है. खाने के साथ इनका पाचन मुश्किल हो जाता है.

खाने से पहले या खाने के बाद फलों का सेवन आपको गैस, कब्ज या पेट दर्द का शिकार बना सकता है. जब आप खाने के साथ फलों को शामिल कर लेते हैं तो पेट में फलों का पाचन रुक जाता है. आपका पाचन तंत्र उस वक्त खाने को पचाने के काम में लगा होता है.

पेट में पड़े फल जहरीले बन जाते हैं और डाइट ट्यूब में इकठ्ठा होना शुरू हो जाते हैं. यह पेट की अम्लीयता को प्रभावित कर सकता है और कब्ज की समस्या पैदा कर सकता है. आपको पेट में जलन भी महसूस हो सकती है.

फल खाते वक्त कुछ और भी बातों का ध्यान रखना चाहिए-

 

फलों के साथ दूध या दही का सेवन ना करें. फल खाने के कम से कम आधा घंटे तक कुछ ना खाएं.

फलों को खाने का सबसे सही समय सुबह माना जाता है. खाली पेट फल खाना आपकी सेहत के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है. हालांकि, खट्टे फलों को खाली पेट ना खाएं क्योंकि एसिडिटी की समस्या हो सकती है. सुबह सेब, आम और केला जैसे फल खा सकते हैं.

जब आप तरबूज खाएं तो इसके साथ कुछ खाने से बचें. इसमें पानी की खूब मात्रा होती है जिससे पाचन मुश्किल हो जाता है.

मौसम के हिसाब से फल खाना भी सेहत के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है. गर्मी के दौरान कच्चे और मीठे फलों को खाने की सलाह दी जाती है.


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adminFebruary 11, 20193min100

वैसे खूबसूरती तो देखने वाले की आंखों में होती है इसलिए ‘सुटेबल बॉय’ की तलाश कभी भी और कहीं भी पूरी हो सकती है. हालांकि, कई सर्वे के आधार पर कुछ देशों के मर्दों को सबसे ज्यादा आकर्षक और हैंडसम बताया गया है. अगर आपको भी रोमांटिक हैंडसम पार्टनर की तलाश है तो आपको इन 10 देशों की सैर करने जाना होगा.

 

दुनिया के 10 देश जहां के पुरुष माने जाते हैं सबसे सेक्सी

 

इटली-
पूरी दुनिया में इटली के पुरुषों को सबसे हैंडसम माना जाता है. डार्क लुक और अपने फैशन सेंस की वजह से इटालियन पुरुष इस लिस्ट में सबसे ऊपर हैं. ये अपने रोमांटिक अंदाज के लिए और भी ज्यादा पॉपुलर हैं. अगर फिर भी यकीन ना हो तो कैसोनोवा का नाम याद कर लीजिए!

 
दुनिया के 10 देश जहां के पुरुष माने जाते हैं सबसे सेक्सी

 

स्पेन-
डार्क हेयर और ब्राइट आईज..स्पैनिश स्पोर्ट्स के दीवाने होते हैं और इन्हें अक्सर फुटबॉल खेलते देखा जा सकता है. इनकी फिटनेस किसी को भी अपना दीवाना बनाने के लिए काफी है.

 

दुनिया के 10 देश जहां के पुरुष माने जाते हैं सबसे सेक्सी
 

इंग्लैंड-
ब्रिटिश बहुत ही विनम्र और मैनर्ड होते हैं. अगर आपको राजकुमारी की तरह का ट्रीटमेंट चाहिए तो फिर आप किसी ब्रिटिशर्स को डेट कर सकती हैं. यहां के लोगों की स्ट्रॉन्ग जॉ लाइन, स्पार्कलिंग आईज और फैशन सेंस इन्हें इस लिस्ट में शामिल कराती हैं.

 

दुनिया के 10 देश जहां के पुरुष माने जाते हैं सबसे सेक्सी
 

ऑस्ट्रेलिया-
अगर हैंडसम पुरुषों की तलाश है तो ऑस्ट्रेलिया आपको निराश नहीं करेगा. इस बात को साबित करने के लिए क्रिस हेम्सवर्थ की मिसाल ही काफी है.

 

दुनिया के 10 देश जहां के पुरुष माने जाते हैं सबसे सेक्सी
 

साउथ अफ्रीका-
इस देश में दुनिया के सबसे हॉट पुरुष मिल जाएंगे. इस देश में लंबे कद-काठी और आत्मविश्वास से भरपूर पुरुषों की कमी नहीं है.

 

 
दुनिया के 10 देश जहां के पुरुष माने जाते हैं सबसे सेक्सी
 

जर्मनी-

इनका ऐटीट्यूड इन्हें सबसे खास बनाता है. ये अपनी फिटनेस को लेकर बहुत क्रेजी होते हैं. जर्मन पुरुषों का ड्रेसिंग सेंस भी बहुत शानदार होता है.

 

दुनिया के 10 देश जहां के पुरुष माने जाते हैं सबसे सेक्सी
 

जापान-
दुनिया के सबसे टॉप मॉडल्स जापान से ही आते हैं. यहां के पुरुष अपने लुक्स और फैशन को लेकर बहुत सजग रहते हैं. अच्छी डाइट और एक्सरसाइज इनकी नियमित दिनचर्या में सबसे खास जगह रखती है.

 

दुनिया के 10 देश जहां के पुरुष माने जाते हैं सबसे सेक्सी
 

यूएसए-
यूएसए में आपको अलग-अलग टेस्ट के लोग मिल जाएंगे. हॉलीवुड में दिखने वाले हीरो यहां रियल लाइफ में भी मिल सकते हैं.

 

दुनिया के 10 देश जहां के पुरुष माने जाते हैं सबसे सेक्सी

 

फ्रांस-
फ्रांस में ही रोमांस का जन्म हुआ. फ्रेंच दुनिया की सबसे रोमांटिक भाषा भी कही जाती है. इन्हें इंटेलेक्चुअल माना जाता है. स्मोकी लुक्स इन्हें इस लिस्ट में शामिल कराता है.

 

 
दुनिया के 10 देश जहां के पुरुष माने जाते हैं सबसे सेक्सी
 

तुर्की-

तुर्की के पुरुषों की पर्सनैलिटी शानदार होती है. मेहमत गुंसुर को देखकर आप तुर्कियों के बारे में अंदाजा लगा सकते हैं.


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adminFebruary 11, 20192min70

टीना मुनीम 80 के दशक में बॉलीवुड की ग्लैमरस अभिनेत्रियों में शुमार थीं. 1978 में उन्होंने देव आनंद की फिल्म देश परदेश से अपने बॉलीवुड करियर की शुरुआत की. इसके बाद वे देव साहेब संग कुछ और फिल्मों में भी नजर आईं.

 

संजय दत्त संग था टीना मुनीम का अफेयर, इस वजह से हुए अलग
 

सबसे ज्यादा पॉपुलैरटी उन्हें ऋषि कपूर के अपोजिट कर्ज और संजय दत्त के अपोजिट रॉकी फिल्म से मिली. रॉकी फिल्म की शूटिंग के दौरान संजय संग उनके अफेयर की भी चर्चाएं रहीं. बाद में टीना ने बड़े उद्दयोगपति धीरूभाई अंबानी के छोटे बेटे अनिल अंबानी संग शादी की.

 

संजय दत्त संग था टीना मुनीम का अफेयर, इस वजह से हुए अलग
 

फरवरी 1991 में टीना ने अनिल अंबानी से शादी की. इसके बाद उन्होंने फिल्मों में काम नहीं किया. उनके दो बेटे अनमोल और अंशुल हैं.

 

संजय दत्त संग था टीना मुनीम का अफेयर, इस वजह से हुए अलग

 

1981 में फिल्म रॉकी की शूटिंग के दौरान टीना और संजय दत्त के बीच रोमांस के चर्चे थे. दोनों डेट भी करते रहे, लेकिन कहा जाता है कि संजय की नशे और ड्रग की लत के कारण इस रिश्ते का अचानक अंत हो गया.

 

संजय दत्त संग था टीना मुनीम का अफेयर, इस वजह से हुए अलग
 

सुपरस्टार राजेश खन्ना संग भी उनके अफेयर की अफवाहें उड़ी थीं. यासिर उस्मान द्वारा लिखी संजय दत्त पर लिखी गई विवादित बायोग्राफी “द क्रेजी अनटोल्ड स्टोरी ऑफ बॉलीवुड बेड बॉय” के मुताबिक ब्रेकअप के बाद संजय दत्त को काफी मुश्क‍िल हालात का सामना करना पड़ा था.

 

संजय दत्त संग था टीना मुनीम का अफेयर, इस वजह से हुए अलग
 

किताब के मुताबिक 1982 में एक शाम संजय दत्त के पड़ोसी बंदूक चलने की आवाज सुनकर चौंक गए. संजय दत्त ने अपने घर पर हवा में 22 बोर की रायफल लहराई थी. कुछ ही मिनटों में पड़ोसी और जानने वाले लोग इकट्ठे हो गए.

 

संजय दत्त संग था टीना मुनीम का अफेयर, इस वजह से हुए अलग

 

टीना से ब्रेकअप के बाद संजय परेशान हो गए थे. ओपन फायर करने के अलावा उन्होंने तोड़फोड भी की थी. बता दें कि संजय दत्त इन बातों का खंडन भी कर चुके हैं. उनके मुताबिक ये बातें बेबुनियाद हैं.


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adminFebruary 9, 20191min10

छह साल से सिडनी (ऑस्ट्रेलिया) में मानुस आईलैंड के डिटेनशन सेंटर में कैदी का जीवन बिता रहे लेखक बेहरोज बूचानी ने बच-बचाकर मोबाइल पर एक ऐसी किताब ‘नो फ्रैंड बट द माउंटेन्स’ लिख डाली, जिसे देश का सर्वश्रेष्ठ 6.4 करोड़ रुपए के बराबर का 125000 ऑस्ट्रेलियन डॉलर वाला पुरस्कार मिला है। जिस वक़्त समारोह में यह पुरस्कार बूचानी को दिया जा रहा था, वह कैदखाने में पड़े रहे। 

संघर्षशील सृजन किसी भी तरह की उपेक्षा, अवहेलना, मानापमान अथवा यश-प्रतिष्ठा का मोहताज नहीं होता है। गोर्की, टॉलस्टाय, ब्रेख्त, बॉलजाक, धूमिल, राहुल सांकृत्यायन, प्रेमचंद, कबीर, तुलसी, मीरा, राजकमल चौधरी अथवा चार्ल्स डिकेंस की सृजन यात्राएं वैसी रचनात्मक पटकथाओं जैसी इतिहास में दर्ज हैं। इसी तरह हम आर्थर मिलर, जॉन स्मिथ, सुज़ैन कोलिन्स, कर्ट वॉनगुत की किताबें पढ़ते समय उनके सृजन कर्म को याद करते हैं। कभी कभी कोई ऐसी किताब दुनिया के हाथ लगती है, जो नए तरह का इतिहास रच देती है।

हाल ही में एक ऐसी ही किताब लिखी है पिछले छह साल से सिडनी (ऑस्ट्रेलिया) के मानुस आईलैंड के डिटेनशन सेंटर में कैदी का जीवन बिता रहे कुर्दिश-ईरानी शरणार्थी बेहरोज बूचानी ने। हैरत की बात तो ये है कि उन्होंने ये पूरी किताब कैदखाने में रहते हुए मोबाइल पर लिखकर अपने दोस्त को वॉट्सऐप कर दिया। जब यह किताब ‘नो फ्रैंड बट द माउंटेन्स’ छपकर आई तो अब ऑस्ट्रेलिया सरकार ने ही बचूनी को अपने देश के सबसे बड़े 6.4 करोड़ रुपए (125000 ऑस्ट्रेलियन डॉलर) के पुरस्कार से सम्मानित करने का ऐलान कर दिया है। कितना दुखद है कि बूचानी को जब यह पुरस्कार दिया जा रहा था, वह अपने सम्मान में आयोजित समारोह में स्वयं अनुपस्थित, कैदखाने में पड़े रहे।

साहित्यकारों, लेखकों के साथ ऐसा इतिहास अपने को बार-बार दुहराता रहता है। ‘फांसी के तख्ते से’ जैसी विश्व की श्रेष्ठ पुस्तक जूलियस फ्यूचिक ने नात्सी जल्लादों के फाँसी के तख्ते की छाया में लिखी थी। हमारे देश में पाश जैसे श्रेष्ठ कवि को पंजाब में उग्रवादियों ने गोली से भून दिया। निराला जीवन भर संघर्षरत रहे और दवा-इलाज की मुश्किलों में चल बसे। दरअसल, बेहरोज बूचानी मूलतः लेखक, फिल्म मेकर और पत्रकार हैं। वह पिछले छह साल से पापुआ न्यू गिनी के मानुस आईलैंड के डिटेनशन सेंटर में बंद हैं। उनकी इस किताब को हाल में विक्टोरियन प्राइज फॉर लिटरेचर अवॉर्ड 2019 के लिए चुना गया। 

उन्हें पुरस्कार के तौर पर 6.4 करोड़ (125000 ऑस्ट्रेलियन डॉलर) मिले हैं। वर्ष 2012 में ईरान में कई लेखकों, पत्रकारों और फिल्मकारों को गिरफ्तार कर लिया गया था। उस दौरान बूचानी वहां से तो निकलने में कामयाब रहे लेकिन समुद्र के रास्ते ऑस्ट्रेलिया में घुसते समय ऑस्ट्रेलियन नेवी ने उनकी बोट को कब्जे में ले लिया। फिर उन्हें 2013 में मानुस आईलैंड के डिटेनशन सेंटर भेज दिया गया। डिटेंशन सेंटर में रहते हुए भी पत्र-पत्रिकाओं में उनके लिखे लेख छपते रहे हैं। उनकी पुस्तक ‘नो फ्रैंड बट दि माउंटेन्स’ डिटेनशन सेंटर के उनके अनुभवों पर ही आधारित है। इसके लिए वे अपने मोबाइल पर फारसी में एक-एक चैप्टर पूरा करते और फिर इसे अपने अनुवादक दोस्त ओमिड टोफिगियान को भेज दिया करते। किताब लिखने के दौरान उनको सबसे बड़ा इस बात का डर बना रहता था कि कहीं उनका फोन न छिन जाए।

बूचानी बताते हैं कि सेंटर के सुरक्षाकर्मी बैरक की तलाशी के दौरान कैदियों के सामान जब्त कर लेते हैं। इसलिए वह अपनी किताब के एक-एक चैप्टर फोन पर टाइप कर वॉट्सऐप के जरिए तुरंत अपने दोस्त को भेज देते थे। ऐसे में एक सवाल किसी को भी हैरान कर सकता है कि लेखक के भीतर आखिर ऐसी कौन सी बात होती है कि ऐसे कठिन हालात में भी वह अपने शब्दों से इस तरह टूटकर प्यार करता है। पीड़ादायी कैदखाने में भी उसका अपने सृजन से गहरा याराना बना रहता है। छह करोड़ रुपए से अधिक का जो पुरस्कार बूचानी को दिया गया है, उस अवॉर्ड के लिए ऑस्ट्रेलिया की नागरिकता या यहां का स्थायी नागरिक होना जरूरी है, लेकिन बूचानी के मामले में यह छूट दी गई। 

जूरी ने उनकी कहानी को ऑस्ट्रेलिया की कहानी के तौर पर स्वीकारा है। यह अतिप्रतिष्ठित सम्मान पाने पर बूचानी कहते हैं कि ‘उन्हे खुशी हो रही है, क्योंकि यह मेरे और मेरे जैसे शरणार्थियों के लिए बड़ी उपलब्धि है। यह सिस्टम के खिलाफ बड़ी जीत है।’ उल्लेखनीय है कि जूलियस फ़्यूचिक ने अपनी पुस्तक ‘सी के तख्ते से’ की पाण्डुलिपि अदम्य साहस और सूझ-बूझ के साथ नात्सी जेल में काग़ज़ के छोटे-छोटे टुकड़ों पर पेंसिल से लिखी थी, जिन्हें लेखक ने एक-एक करके प्राग की पैंक्रेट्स गेस्टापो जेल से एक हमदर्द चेक सन्तरी की मदद से छिपाकर बाहर भेजा था। फ़्यूचिक एक ऐसे व्यक्ति थे जो अपने-आपको धोखा देने से घृणा करते थे और यह जानते थे कि इस रचना को पूरा करने के लिए वह जीवित न रहेंगे और यह कभी भी बीच में ही रुक जायेगी किन्तु वह अपनी आस्था छोड़ने के लिए तैयार नहीं थे।


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adminFebruary 9, 20191min30

Jagjit Singh Birthday जगजीत सिंह गजलों की दुनि‍या के बेताज बादशाह माने जाते थे. वे एक समय के लि‍ए गजलों की जुबां बन गए थे. देश-दुन‍िया में उनके सैकड़ों कंसर्ट हुए.

जगजीत सिंह गजलों की दुनि‍या के बेताज बादशाह माने जाते थे. वे एक समय के लि‍ए गजलों की जुबां बन गए थे. देश-दुन‍िया में उनके सैकड़ों कंसर्ट हुए. 8 फरवरी 1941 को जन्मे जगजीत ने कई फिल्मों में संगीत दिया, लेकिन बाद में गज़ल गायकी में ही रम गए. उन्होंने गज़ल को बिल्कुल अलग अंदाज में गाया. इसके लिए उनकी आलोचना हुई और आरोप लगा कि जगजीत ने गज़ल के शास्त्रीय अंदाज की अनदेखी की. हालांकि, जगजीत ऐसे आरोपों को सिरे से खारिज करते रहे. बात निकलेगी तो फिर दूर तलक जाएगी, वो कागज की कस्ती, तुम इतना जो मुस्करा रहे हो, आहिस्ता-आहिस्ता जैसे तमाम गज़ल-गीत संगीत की दुनिया को जगजीत की अनमोल भेंट हैं.

ऐसा बीता जगजीत का बचपन

जगजीत सिंह का जन्म 8 फरवरी, 1941 को बीकानेर (राजस्थान) में हुआ था. जन्म के वक्त उनका नाम जगजीवन सिंह था. उन्होंने सरकारी स्कूल और खालसा कॉलेज से पढ़ाई की. उनके पिता चाहते थे कि जगजीत इंजीनियर बने. पढ़ाई के बाद जगजीत सिंह ने ऑल इंडिया रेडियो जालंधर में एक सिंगर और म्यूजिक डायरेक्टर के रूप में काम शुरू कर दिया. उसके बाद कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी हरियाणा से पोस्ट ग्रेजुएट की पढ़ाई भी की. जगजीत सिंह ने गुरुद्वारे में पंडित छगनलाल मिश्रा और उस्ताद जमाल खान से क्लासिकल संगीत की शिक्षा ली.

घर वालों को बिना बताए चले गए मुंबई

मार्च 1965 में जगजीत सिंह अपने परिवार को बिना बताए मुंबई चले आए और स्ट्रगल शुरू कर दिया. स्ट्रगलिंग के समय में उन्होंनं 200 रुपये के लिए भी गाया. मुंबई में जगजीत सिंह की मुलाकात एक बंगाली महिला चित्रा दत्ता से हुई और दोनों 1969 में शादी के बंधन में बंध गए. इन्हें एक बेटा विवेक भी हुआ. साल 1976 में जगजीत सिंह और चित्रा की एल्बम ‘The Unforgettable’ रिलीज हुई, जिसे काफी सराहा गया. इसकी वजह से ये दोनों कपल स्टार बन गए. एल्बम का गीत ‘बात निकलेगी’ काफी पसंद किया गया. जगजीत सिंह और चित्रा सिंह एक साथ कई सारे कॉन्सर्ट किया करते थे और अलग-अलग गजल एल्बम का हिस्सा भी बने. इनका 1980 में आया हुआ एल्बम ‘वो कागज की कश्ती’ बेस्ट सेलिंग एल्बम बन गया था. उस जमाने में जगजीत सिंह गजल किंग बन गए थे. प्राइवेट एल्बम के साथ-साथ जगजीत ने फिल्मों में भी कई गजलें गाईं , उनमें ‘प्रेम गीत’, ‘अर्थ’, ‘जिस्म’, ‘तुम बिन’, ‘जॉगर्स पार्क’ जैसी फिल्में प्रमुख हैं.

 

बेटे के न‍िधन के बाद टूट गए थे जगजीत

 जगजीत सिंह के बेटे विवेक की मात्र 18 साल की उम्र में एक सड़क दुर्घटना में मौत हो गई थी. इसकी वजह से उनकी पत्नी चित्रा सिंह काफी अपसेट रहने लगी थीं और एक वक्त के बाद उन्होंने गाना तक छोड़ दिया था.

जब गजत सम्राट ने दुन‍िया को कहा अलव‍िदा

भारत सरकार की तरफ से जगजीत सिंह को साल 2003 में ‘पद्म भूषण’ सम्मान से नवाजा गया था. साल 2011 में जगजीत सिंह को यूके में गुलाम अली के साथ परफॉर्म करना था, लेकिन cerebral hemorrhage की वजह से उन्हें 23 सितम्बर 2011 को मुंबई के लीलावती अस्पताल में भर्ती कराया गया. हालत बिगड़ती गई, जगजीत सिंह कोमा में चले गए और 10 अक्टूबर 2011 को जगजीत सिंह ने आखिरी सांसें ली.


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adminFebruary 9, 20193min20

Priyanka chopra creates history प्रियंका केवल भारत और अमेरिका में ही नहीं बल्कि कई एशियाई देशों में भी जानी पहचानी जाएंगी.

प्रियंका चोपड़ा एक ग्लोबल आइकॉन हैं. प्रियंका अपने पहले सॉन्ग इन माई सिटी के साथ ही अमेरिका में भी काफी लोकप्रिय हो गईं थी. इसके बाद उन्होंने टीवी सीरीज़ क्वाटिंको में काम किया था. इसके अलावा वे अब तक तीन हॉलीवुड फिल्म्स बेवॉच. एक किड लाइक जेक और जल्द रिलीज़ होने वाली फिल्म इसेंट इट रोमैंटिक में काम कर रही हैं. साफ है कि बॉलीवुड में अपने आपको स्थापित करने के बाद प्रियंका हॉलीवुड में भी खूब नाम कमा रही हैं. उन्होंने हाल ही में एक और खास उपलब्धि अपने नाम की है.

प्रियंका केवल भारत और अमेरिका में ही नहीं बल्कि कई एशियाई देशों में भी जानी पहचानी जाएंगी. दरअसल मैडम तुसाद वैक्स म्यूज़ियम ने हाल ही में इंस्टाग्राम पर पोस्ट किया है. इस पोस्ट में प्रियंका अपने वैक्स स्टैचू का अमेरिका के न्यूयॉर्क में उद्घाटन करते हुए देखी जा सकती हैं. इसके अलावा प्रियंका का मोम का पुतला लंदन, सिडनी, बैंकाक और सिंगापुर में भी लगाया जाएगा. प्रियंका, मशहूर सिंगर विटनी हाउसट्न के बाद दूसरी वर्ल्ड सेलेब्रिटी हो गई हैं जिनके दुनिया में छह वैक्स स्टैचू हैं.

 

गौरतलब है कि निक जोनास संग शादी रचाने के बाद प्रियंका मिनी ब्रेक पर थीं और अब वे वापस लौटी हैं और अपनी हॉलीवुड फिल्म को प्रमोट कर रही हैं. वे हाल ही में गुड मॉर्निंग अमेरिका शो पर अपनी मैरिड लाइफ के बारे में भी बात करते हुए नज़र आईं थी. इसके अलावा वे बॉलीवुड में भी तीन साल बाद वापसी कर रही हैं. प्रियंका फिलहाल शोनाली बोस की फिल्म द स्काई इज़ पिंक में व्यस्त हैं. ये फिल्म आयशा चौधरी की ज़िंदगी पर आधारित है जो एक गंभीर बीमारी से ग्रस्त होने के बावजूद एक मोटिवेशनल स्पीकर बनती हैं. इस फिल्म में आयशा का किरदार दंगल गर्ल जायरा शेख ने निभाया है. इसके साथ ही प्रियंका और फरहान अख्तर भी एक साथ अपनी दूसरी फिल्म में काम करते हुए नज़र आएंगे.


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adminFebruary 9, 20191min40

चाय पीने के शौकीन लोगों को अब चाय पीने की एक और वजह मिल गई है क्योंकि एक स्टडी में दावा किया गया है कि चाय पीने से लोगों की क्रिएटिविटी बढ़ जाती है.

चाय के दीवाने चाय पीने का कोई मौका नहीं छोड़ना चाहते हैं. गॉसिप करनी हो या काम से ब्रेक लेना हो, चाय पीने वाले बस बहाना ढूंढते रहते हैं. अब चाय पीने वालों को एक और वजह मिल गई है. पेर्किंग यूनिवर्सिटी का दावा है कि चाय पीने से लोगों की ध्यान केंद्रित करने की क्षमता ज्यादा बढ़ जाती है और उनकी क्रिएटिविटी भी बेहतर होती है.

चाय पीने से फोकस कैसे बढ़ जाता है?

दरअसल चाय में कैफीन और थियनाइन मौजूद होता है जो अलर्टनेस बढ़ाने का काम करते हैं. एक स्टडी के मुताबिक, एक कप चाय पीने के बाद कोई भी दिमाग की चुस्ती महसूस कर सकता है. मनोवैज्ञानिकों की एक टीम ने 50 स्टूडेंट्स पर एक स्टडी की जिनकी औसतन उम्र 23 साल थी. आधे छात्रों को पीने के लिए पानी दिया गया जबकि आधे छात्रों को ब्लैक टी पीने के लिए दी गई.

 

फूड क्वॉलिटी ऐंड प्रिफरेंस जर्नल में प्रकाशित स्टडी में कहा गया कि दिन में चाय पीने से क्रिएटिविटी का स्तर बढ़ जाता है. स्टडी के मुताबिक, इस अध्ययन से यह समझने में मदद मिल रही है कि चाय जैसी ड्रिंक का लोगों की संज्ञानात्मक क्षमता पर कैसा प्रभाव पड़ता है.

हालांकि, स्टडी में यह भी कहा गया है कि किसी भी चीज की अधिकता नुकसानदायक होती है और यही बात चाय पर लागू होती है.


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adminFebruary 6, 20191min160

कहते हैं कि जो वक्त के साथ कदम नहीं मिला पाता वो पीछे छूट जाता है। आज के दौर में यह बात हर किसी पर सटीक बैठती है। जिस तरह से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग जैसी चीजों का दौर आ रहा है उसे देखते हुए यही कहा जा सकता है कि दुनिया तेजी से बदलने वाली है। इस तेजी से बदलती दुनिया में बिजनेस की संभावनाएं भी बढ़ रही हैं और नए द्वार भी खुल रहे हैं। विजय राम कुमार ने तकनीक की मदद से ऐसा बिजनेस शुरू किया कि आज उनका टर्नओवर 25 करोड़ रुपये पहुंच गया है।

विजय ने 2012 में बेंगलुरु में ही डिजिटल एडवर्टाइजिंग के क्षेत्र में कदम रखा था। उनका मकसद अपने स्टार्टअप ‘ऑटोमेटेड’ की मदद से ई-कॉमर्स वेबसाइट्स समेत कंटेंट पब्लिशर्स की आमदनी बढ़ाने का था। यह आइडिया कुछ ऐसा था जिसमें सभी को फायदा होने वाला था। कंटेंट पब्लिशर्स वेबसाइट को ई-कॉमर्स वेबसाइट की मदद से पैसे कमाने और ट्रैफिक बढ़ाने का का मौका मिला। विजय की दस लोगों की टीम ने ऐसी तकनीक विकसित की जिसकी मदद से किसी वेबसाइट पर दिखने वाला सामान से मिलता जुलता सामान ई-कॉमर्स साइट प्लेटफॉर्म पर भी मिले। 

हालांकि विजय कहते हैं कि उन्होंने तकनीक तो बना ली थी, लेकिन अभी मार्केट उस हिसाब से तैयार नहीं हुआ था। उस वक्त पब्लिशर्स केवल एडवर्टाइजमेंट पर ही निर्भर रहते थे, इसलिए विजय का आइडिया उनके काम नहीं आया। उस वक्त विजय के पास 12 लाख रुपये थे। 2017 में वे न्यू यॉर्क चले गए। वे बताते हैं, ‘हमारा आइडिया प्रोग्रामेटिक एडवर्टाइजिंग में सेलेक्ट हुआ था। इसके बाद हमने आगे सोचना शुरू किया और डिजिटल मीडिया में ऐसे प्रॉडक्ट बनाने की कोशिश की जिससे कंटेंट पब्लिशिंग कंपनियां अपनी वेबसाइट की जगह को बेच सकें।’

 

ऑटोमेटेड कंपनी क्या करती है?

विजय की कंपनी ऑटोमेटेड तमाम वेबसाइट्स के साथ साझेदारी करती है और उनकी वेबसाइट की जगह के बदले अच्छा मुनाफा कमाने का जरिया प्रदान करती है। वेबसाइट की दुनिया में कई ऐसे टूल्स होते हैं जिनसे वेबसाइट पर क्लिक और इंप्रेशन पर असर पड़चा है। इन्हीं सब टूल्स पर ऑटोमेटेड काम करती है। विजय कहते हैं, ‘हमने एक फुल स्टैक एंटरप्राइज ग्रेड का सॉफ्टवेयर सॉल्यूशन बनाया है जिसे ऐड सर्वर में लगा दिया जाता है और फिर पब्लिशर्स के माध्यम से उसे ऑप्टिमाइज कर दिया जाता है। इससे वेबसाइट का ट्रैफिक बढ़ जाता है।’

अब चूंकि वेबसाइट्स के वैरिएबल बदलते रहते हैं इसलिए हर तीन महीने में नई जरूरतें सामने आती रहती हैं इसलिए हर पब्लिशसर्स को ऑटोमेटेड जैसी कंपनियों की जरूरत पड़ती है ताकि उनका सॉफ्टवेयर सही से मेनटेन रहे। ऑटोमेटेड के प्लेटफॉर्म की मदद से पब्लिशर्स की वेबसाइट अपना व्यापार और अच्छे से बढ़ा सकती है।

 

बाजार का दायरा

ईमार्केटर की एक नई रिपोर्ट के मुताबिक प्राइवेट सेटअप्स की मदद से वेबसाइट के जरिए अच्छे पैसे कमाए जा सकते हैं। 2018 में अमेरिका में 46 बिलियन डॉलर बनाए गए जो कि पिछले साल की तुलना में 10 बिलियन डॉलर अधिक है। इसका मतलब अमेरिका में 82.5 प्रतिशत डिजिटल डिस्प्ले ऑटोमेटेड चैनल की मदद से चलता है। हालांकि भारत में डिजिटल एडवर्टाइजिंग का कारोबार सिर्फ 1 बिलियन डॉलर का है।

बीते पांच सालों में विजय की कंपनी ने कई सारे प्रॉडक्ट्स विकसित किए हैं जो कि 100 से अधिक कंटेंट पब्लिशर्स के लिए उपयोगी साबित हो रहे हैं। इनमें भारत के अलावा अमेरिका और यूके, स्वीडन के भी कंटेंट पब्लिशर्स शामिल हैं। ऑटोमेटेड ने 16 ग्लोबल एडवर्टाइजिंग एजेंसी के साथ टाइ अप किया है। सबसे खास बात ये है कि विजय की कंपनी शुरू से ही मुनाफा कमा रही है इसलिए उन्हें कभी किसी बाहरी स्रोत से फंड जुटाने की जरूरत नहीं पड़ी। 

हालांकि विजय कहते हैं कि फंड्स की मदद से वे अच्छे लोगों को टीम में शामिल कर सकते हैं। वे यह भी मानते हैं कि खुद के पैसों से स्टार्टअप खड़ा करने में काफी धैर्य और मेहनत की जरूरत पड़ती है, खासकर शुरुआती दिनों में। विजय कहते हैं कि मुनाफा कमाने और लंबे समय के लिए बिजनेस चलाने में किसी एक चुनना काफी कठिन फैसला है। वे यह भी मानते हैं कि तकनीक कभी भी बदल सकती है और हो सकता है कि एक ही महीने में उनका काम बर्बाद हो जाए।

बिजनेस इनसाइडर के मुताबिक फेसबुक और गूगल जैसी कंपनियां दुनिया भर का 62 फीसदी डिजिटल एडवर्टाइजिंग पर कब्जा रखती हैं। ऑटोमेटेड का रियल टाइम एडववर्टाइजिंग सिस्टम किसी भी पब्लिशर्स के साथ काम कर सकता है। इसकी तकनीक पूरे दुनिया में फैले पब्लिशर्स के साथ काम करती है। विजय कहते हैं, ‘हमारे पास ऐसा सिस्टम है जो कि सेकेंड्स भर के भीतर किसी भी वैरिएशन्स को कंट्रोल कर सकती है। हमारा डेटा एनालिटिक्स और रिपोर्टिंग सिस्टम पब्लिशर्स के रेवेन्यू को सही से मापता है।’

कंपनी के प्रतिद्वंद्वियों में BounceX, StackAdapt, Convertro, Segment, LiveRamp और Outreach जैसी कंपनियां शामिल हैं। हालांकि कंपनी ने अपने क्लाइंट्स के बारे में किसी भी जानकारी को साझा करने से इनकार कर दिया लेकिन उनका कहना है कि वे मार्केटके सबसे बड़े खिलाड़ियों के साथ काम करते हैं। विजय कहते हैं कि बीते चार साल से इस फील्ड में काम करने की वजह से उनके पास देश की सबसे बड़ी मीडिया कंपनियां जुड़ी हुई हैं। अब विजय भारत के बाहर भी अपना विस्तार करने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। विजय ने बताया कि इस साल उनका रेवेन्यू 25 करोड़ पहुंचने वाला है।



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