ज्ञानचंद

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adminFebruary 11, 20191min70

स्वस्थ रहने के लिए फल खाना तो जरूरी है लेकिन क्या आपको फल खाने का सही वक्त पता है? अगर फल सही समय पर नहीं खाते हैं तो फायदे की जगह नुकसान भी उठाना पड़ सकता है.

अगर हेल्दी रहना है तो फलों को अपनी डाइट में शामिल करना ही पड़ता है. फलों के सेवन से शरीर को कई जरूरी पोषक तत्व मिल जाते हैं. वक्त की कमी होने पर हम फल आराम से खा सकते हैं. फलों में कई पोषक तत्व, खनिज, एंटीऑक्सिडेंट होते हैं लेकिन एक जरूरी बात ये है कि इन पोषक तत्वों को अधिकतम मात्रा में कैसे लिया जाए. फलों के खाने का सही वक्त क्या है, इस बात का भी आपको खास ख्याल रखना चाहिए.

आपको खाने से पहले या बाद में कभी भी फल नहीं खाने चाहिए. सुबह आप ब्रेकफास्ट में फल खा सकते हैं. खाना खाने के बाद फल खाने से बचना चाहिए.

औसतन आप एक बार के खाने में 300-400 कैलोरी लेते हैं. फलों में फ्रक्टोज होता है जो आपकी कैलोरी की संख्या बहुत बढ़ा देता है. यही वजह है कि खाने के बाद फलों को खाने से मना किया जाता है. खाने के साथ इनका पाचन मुश्किल हो जाता है.

खाने से पहले या खाने के बाद फलों का सेवन आपको गैस, कब्ज या पेट दर्द का शिकार बना सकता है. जब आप खाने के साथ फलों को शामिल कर लेते हैं तो पेट में फलों का पाचन रुक जाता है. आपका पाचन तंत्र उस वक्त खाने को पचाने के काम में लगा होता है.

पेट में पड़े फल जहरीले बन जाते हैं और डाइट ट्यूब में इकठ्ठा होना शुरू हो जाते हैं. यह पेट की अम्लीयता को प्रभावित कर सकता है और कब्ज की समस्या पैदा कर सकता है. आपको पेट में जलन भी महसूस हो सकती है.

फल खाते वक्त कुछ और भी बातों का ध्यान रखना चाहिए-

 

फलों के साथ दूध या दही का सेवन ना करें. फल खाने के कम से कम आधा घंटे तक कुछ ना खाएं.

फलों को खाने का सबसे सही समय सुबह माना जाता है. खाली पेट फल खाना आपकी सेहत के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है. हालांकि, खट्टे फलों को खाली पेट ना खाएं क्योंकि एसिडिटी की समस्या हो सकती है. सुबह सेब, आम और केला जैसे फल खा सकते हैं.

जब आप तरबूज खाएं तो इसके साथ कुछ खाने से बचें. इसमें पानी की खूब मात्रा होती है जिससे पाचन मुश्किल हो जाता है.

मौसम के हिसाब से फल खाना भी सेहत के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है. गर्मी के दौरान कच्चे और मीठे फलों को खाने की सलाह दी जाती है.


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adminFebruary 9, 20191min40

चाय पीने के शौकीन लोगों को अब चाय पीने की एक और वजह मिल गई है क्योंकि एक स्टडी में दावा किया गया है कि चाय पीने से लोगों की क्रिएटिविटी बढ़ जाती है.

चाय के दीवाने चाय पीने का कोई मौका नहीं छोड़ना चाहते हैं. गॉसिप करनी हो या काम से ब्रेक लेना हो, चाय पीने वाले बस बहाना ढूंढते रहते हैं. अब चाय पीने वालों को एक और वजह मिल गई है. पेर्किंग यूनिवर्सिटी का दावा है कि चाय पीने से लोगों की ध्यान केंद्रित करने की क्षमता ज्यादा बढ़ जाती है और उनकी क्रिएटिविटी भी बेहतर होती है.

चाय पीने से फोकस कैसे बढ़ जाता है?

दरअसल चाय में कैफीन और थियनाइन मौजूद होता है जो अलर्टनेस बढ़ाने का काम करते हैं. एक स्टडी के मुताबिक, एक कप चाय पीने के बाद कोई भी दिमाग की चुस्ती महसूस कर सकता है. मनोवैज्ञानिकों की एक टीम ने 50 स्टूडेंट्स पर एक स्टडी की जिनकी औसतन उम्र 23 साल थी. आधे छात्रों को पीने के लिए पानी दिया गया जबकि आधे छात्रों को ब्लैक टी पीने के लिए दी गई.

 

फूड क्वॉलिटी ऐंड प्रिफरेंस जर्नल में प्रकाशित स्टडी में कहा गया कि दिन में चाय पीने से क्रिएटिविटी का स्तर बढ़ जाता है. स्टडी के मुताबिक, इस अध्ययन से यह समझने में मदद मिल रही है कि चाय जैसी ड्रिंक का लोगों की संज्ञानात्मक क्षमता पर कैसा प्रभाव पड़ता है.

हालांकि, स्टडी में यह भी कहा गया है कि किसी भी चीज की अधिकता नुकसानदायक होती है और यही बात चाय पर लागू होती है.


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adminFebruary 6, 20191min210

अनिल अंबानी दिवालिया होने की कगार पर हैं. उनकी रिलायंस कम्युनिकेशंस RCoM ने दिवालिया कानून के तहत नेशनल कंपनी लॉ ट्राइब्यूनल NCLT में अर्जी देने का फैसला किया है. NCLT में दिवालिया मामलों की सुनवाई होती है. NCLT में रिलायंस कम्युनिकेशंस की अर्जी मंजूर हो जाने पर अनिल अंबानी को कर्ज चुकाने के लिए करीब 9 महीने का वक्त मिल जाएगा. RCOM पर अलग-अलग बैंकों का करीब 38,000 करोड़ रुपए का कर्ज है. अनिल अंबानी की कंपनी पर स्वीडन की टेलीकॉम कंपनी एरिक्सन का भी करीब 550 करोड़ रुपए बकाया है. एरिक्सन से विवाद के चलते अनिल अंबानी की मुश्किलें और बढ़ गईं. क्या है ये पूरा मामला और अनिल अंबानी इस हाल में कैसे पहुंच गए? आइए जानते हैं.

 

कैसे हुई संकट की शुरुआत?
रिलायंस कम्युनिकेशंस ने स्वीडन की एक कंपनी एरिक्सन से साल 2013 में एक समझौता किया. ये समझौता रिलायंस कम्युनिकेशंस को तकनीकी सुविधाएं मुहैया कराने के लिए हुआ. समझौते के मुताबिक एरिक्सन को रिलायंस के मोबाइल फोन टावर, फिक्स्ड टेलीफोन लाइन, ब्रॉडबैंड, वायरलेस वॉयस और डेटा आदि काम संभालने थे. समझौता 7 साल के लिए हुआ. लेकिन इसी बीच RCOM बुरी तरह घाटे में आ गई. बड़े भाई मुकेश अंबानी की रिलायंस जियो ने पूरे बाजार का गणित बिगाड़ दिया. अनिल अंबानी को साल 2017 तक अपना वायरलेस बिजनेस बंद करना पड़ा. फिर मई, 2018 में NCLT ने एरिक्सन की RCom के खिलाफ दायर तीन दिवालिया याचिकाएं मंजूर कर लीं. एरिक्सन ने आरोप लगाया कि आरकॉम ने उससे काम करा लिया. और इसके बदले उसके 1100 करोड़ रुपए नहीं दे रही है. इस पर आरकॉम ने एरिक्सन के खिलाफ नेशनल कंपनी लॉ अपीलिएट ट्राइब्यूनल में अपील की. ऑरकॉम ने दिवालिया प्रक्रिया का विरोध किया. और कहा कि उसकी रिलायंस जियो और ब्रुकफील्ड के साथ असेट्स बेचने की बात चल रही है. वो पैसे चुका देगी. इस पर दोनों कंपनियों के बीच सेटलमेंट हो गया. RCOM ने एरिक्सन को 550 करोड़ रुपए देने का वादा किया. मगर ये रकम अनिल अंबानी ने अब तक नहीं चुकाई है. अनिल को ये रकम 30 सितंबर, 2018 तक चुकानी थी.

 

क्यों नहीं चुका पा रहे हैं पैसा?
एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक अनिल अंबानी ने भाई मुकेश अंबानी की कंपनी जियो को RCOM का वायरलेस और कनाडा की कंपनी ब्रुकफील्ड को जमीन बेचने का फैसला लिया था. इस डील के जरिए अनिल ने 18,000 करोड़ रुपए जुटाने का प्लान बनाया था. मगर अनिल की कंपनी स्पेक्ट्रम को लेकर सरकार की भी कर्जदार थी. इस वजह से संचार मंत्रालय ने इस डील को परमीशन नहीं दी. इससे सौदा लटक गया. कंपनी पर इस वक्त करीब 38 हजार करोड़ रुपए का कर्ज है. इसमें से 19,800 करोड़ रुपए का कर्ज भारतीय बैंकों का है. बाकी 18,200 करोड़ रुपए विदेशी बैंकों का है. इस कर्ज को निपटाने के लिए अनिल अंबानी ने दिसंबर, 2017 में कर्ज के नवीनीकरण का ऐलान किया. मगर कानूनी विवादों की वजह से ये प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पाई. अब RCOM नेशनल कंपनी लॉ ट्राइब्यूनल में नए दिवालिया नियमों के तहत समस्या का समाधान चाहती है. इन नियमों से RCOM को 9 महीने का वक्त मिल सकता है. इस दौरान अनिल की कंपनी अपने कर्जों का निपटारा करेगी. RCOM के मुताबिक ये फैसला सभी शेयरधारकों के हित में है.

 

RCOM को क्या फायदा होगा?
इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक RCOM को उसके कई कर्जदाता बैंक एनओसी नहीं दे रहे थे. ये एनओसी कर्ज के नवीनीकरण के लिए जरूरी है. इसी वजह से कंपनी NCLT गई है. अब  अनिल की कंपनी को सिर्फ 66 फीसदी बैंकों की मंजूरी चाहिए होगी. कंपनी एनसीएलटी में अपना प्रपोजल रखेगी. माना जा रहा है कि कंपनी यहां भी स्पेट्रम और कुछ प्रॉपर्टी बेचने का प्रस्ताव रख सकती है. कंपनी ने ग्लोबल क्लाउड एक्सचेंज जैसे अन्य बिजनेस, इंटरनेट डेटा सेंटर और इंडियन एंटरप्राइज बिजनेस को भी बेचना चाहती है. अनिल अंबानी, धीरूभाई अंबानी नॉलेज सिटी कॉम्प्लेक्स में 3 करोड़ वर्ग फुट स्पेस और दूसरी प्रॉपर्टी को भी बेचने की तैयारी में हैं. जियो को वायरलेस बिजनेस और ब्रुकफील्ड को प्रॉपर्टी बेचने का प्लान है. इन सारे प्रस्ताव को एनसीएलटी में दिया जा सकता है.

 

इस हाल में कैसे पहुंच गए अनिल?
1-साल, 2006 में रिलायंस ग्रुप का बंटवारा हुआ था. उस वक्त मुकेश अंबानी और अनिल अंबानी की संपत्तियों में कोई खास अंतर नहीं था.
2-बंटवारे में अनिल अंबानी के हिस्से में रिलायंस इन्फोकॉम, रिलायंस एनर्जी और रिलायंस कैपिटल जैसी कंपनियां आईं. मुकेश के पास मूल कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज और आईपीसीएल थीं.
3-फोर्ब्स मैगजीन के मुताबिक अक्टूबर, 2018 में मुकेश की नेटवर्थ 47.3 अरब डॉलर. करीब 3,30,321 करोड़ रुपए थी. वहीं अनिल की नेटवर्थ 2.44 अरब डॉलर यानी कोई 14,680 करोड़ रुपए थी.
4-फोर्ब्स के मुताबिक साल 2007 में अनिल अंबानी की संपत्ति 45 अरब डॉलर यानी करीब 2,97,000 करोड़ रुपए और मुकेश की नेटवर्थ 49 अरब डॉलर यानी 3,23,000 करोड़ रुपए थी.
5-बंटवारे के वक्त अनिल की कंपनियों के कारोबार में भविष्य की संभावनाएं देखी गई थीं. मगर आज दोनों भाइयों की दौलत में जमीन-आसमान का फर्क आ चुका है.
6-ब्लूमबर्ग के मुताबिक, बंटवारे के बाद 10 साल में मुकेश की रिलायंस इंडस्ट्रीज ने 17.8 फीसदी का रिटर्न दिया. जबकि अनिल के समूह के लिए की रिटर्न दर -1.7 फीसदी.
7-2007 में RCom 17 पर्सेंट मार्केट शेयर के साथ टेलिकॉम सेक्टर की दूसरी बड़ी कंपनी थी. 2016 में बाजार में इसकी हिस्सेदारी 10 फीसदी से कम रह गई.
8-बाजार में हिस्सेदारी कम होने के साथ RCOM का कर्ज बढ़ता गया. 2009-10 में 25 हजार करोड़ रुपए का कर्ज बढ़कर अब 38 हजार करोड़ रुपए तक पहुंच गया है.
9-इस वक्त अनिल अंबानी की कंपनियों का बाजार पूंजीकरण 4 अरब डॉलर से कम है. रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिडेट का बाजार पूंजीकरण 98.7 अरब डॉलर है.

 

और कितनी मुश्किलें हैं छोटे अंबानी के सामने?
1-ब्लूमबर्ग के मुताबिक अनिल की रिलायंस नेवल एंड इंजीनियरिंग लिमिटेड पर करीब 5,300 करोड़ रुपए का कर्ज है. इस कंपनी को अनिल अंबानी ने साल 2015 में खरीदा था.
2-डिफेंस कंपनी दसॉ-रिलायंस एयरोस्पेस लिमिटेड यानी डीआरएएल फ्रांस से किए गए रफाएल सौदे को लेकर विवादों में है.
3-मुंबई की पहली मेट्रो लाइन तैयार करने वाली अनिल की कंपनी रिलायंस इन्फ्रा अगस्त महीने में बॉन्ड पेमेंट से चूक गई. कंपनी ने पावर ट्रांसमिशन असेट्स गौतम अडानी की अ़डानी ट्रांसमिशन लिमिटेड को बेच दिए हैं. ये सौदा करीब 18,800 करोड़ रुपए में हुआ है.
4-अनिल अंबानी की अगुवाई वाली कंपनी रिलायंस पावर लिमिटेड अपने एक प्रोजेक्ट में 713 करोड़ रुपए में हिस्सेदारी बेच चुकी है.
5-रिलायंस कैपिटल लिमिटेड कर्ज से राहत पाने के लिए गैर-वित्तीय बिजनेस से बाहर आने की कोशिश में है. रिलायंस कैपिटल असेट मैनेजमेंट, इक्विटी एंड कमोडिटी ब्रोकिंग, इंश्योरेंस, होम फाइनेंस के बिजनेस में हैं.
6-अनिल अंबानी ने RCOM का 1 लाख 78 हजार किलोमीटर का फाइबर-ऑप्टिक नेटवर्क भाई मुकेश की कंपनी जियो को बेच दिया है. अनिल मोबाइल फोन बिजनेस से पूरी तरह अलग होने की तैयारी में हैं.


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adminFebruary 6, 20192min00

आज से 12 साल पहले 2007 में भारतीय मूल की सुनीता विलियम्स अंतरिक्ष में सबसे ज्यादा वक्त बिताने वाली पहली महिला बनीं. उन्होंने साल 2006 में सुनीता ने अंतरिक्ष में 195 दिन अंतरिक्ष में बिताए थे, जिसकी वजह से उनकी काफी चर्चा हुई थी. ऐसे में सवाल खड़ा होता है कि आखिर जब कोई एस्ट्रोनोट अंतरिक्ष में जाता है तो वहां कैसे रहता है और क्या उनकी दिनचर्या रहती है.

 

Photos: स्पेस में ऐसे रहते हैं एस्ट्रोनॉट, खास होता है टॉयलेट-किचन
 

सुनीता विलियम्स ने खुद अपनी अंतरिक्ष यात्रा के दौरान एक वीडियो बनाया था और बताया था कि एस्ट्रोनोट स्पेस में कैसे रहते हैं. उन्होंने बताया था कि वे वहां कैसे खाते-पीते और सोते हैं? वे कैसे बाथरूम करते हैं? इस वीडियो के आधार पर हम आपको बता रहे हैं कि आखिर वो वहां कैसे रहते हैं…

 

Photos: स्पेस में ऐसे रहते हैं एस्ट्रोनॉट, खास होता है टॉयलेट-किचन
 

स्‍पेस स्‍टेशन अंतरिक्ष यात्रियों का घर होता है, लेकिन यहां सोने के लिए स्पेशल व्यवस्था होती है. दरअसल गुरुत्वाकर्षण बल ना होने की वजह से वहां एस्ट्रोनॉट के लिए अलग अलग सुविधाएं होती है. इसलिए सोने के लिए स्‍लीपिंग स्‍पेस बने होते हैं और ये एक फोन बूथ की तरह होते हैं. इसमें एक केबिन की तरह घुसना होता है. सोने के लिए खुद को एक स्‍लीपिंग बैग के अंदर पैक करना पड़ता है.

 

Photos: स्पेस में ऐसे रहते हैं एस्ट्रोनॉट, खास होता है टॉयलेट-किचन

 

अंतरिक्ष में सभी सामान के लिए भी स्पेशल व्यवस्था होती है, क्योंकि ऐसे हर चीज हवा में तैरने लगेगी. इसलिए हर सामान पैक होता है और सोते वक्त भी वैज्ञानिकों को पैक होकर रहना पड़ता है.

 

Photos: स्पेस में ऐसे रहते हैं एस्ट्रोनॉट, खास होता है टॉयलेट-किचन
 

अंतरिक्ष में एस्ट्रोनॉट के लिए टॉयलेट भी खास तरीके का होता है. इसमें ही यहां पेशाब जाने के लिए एक खास तरीके का पाइप होता है, जिसका इस्तेमाल किया जाता है. पेशाब करने के लिए टॉयलेट सीट का इस्तेमाल नहीं किया जाता है.

 

Photos: स्पेस में ऐसे रहते हैं एस्ट्रोनॉट, खास होता है टॉयलेट-किचन
 

यहां खाने के लिए अलग किचन होती है. इसमें खाने का सामान होता है और अर्थ से ही एस्ट्रोनॉट खाने का सामान लेकर जाते हैं.

 

Photos: स्पेस में ऐसे रहते हैं एस्ट्रोनॉट, खास होता है टॉयलेट-किचन

 

वहीं फ्रेश होने के लिए एक खास सीट होती है, जिसमें आपको खुद को फिट करना होता है. उसके बाद आप इसका इस्तेमाल कर सकते हैं. वहीं टॉयलेट में इस्तेमाल करने के लिए अलग अलग टॉयलेट पेपर भी होते हैं.

 

Photos: स्पेस में ऐसे रहते हैं एस्ट्रोनॉट, खास होता है टॉयलेट-किचन
 

साथ ही वे प्रोटीन आदि आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए मेडिसिन, पेस्ट आदि का इस्तेमाल भी करते हैं. खाने में अंडे, मीट सब्‍जियां, ब्रेड, स्‍नैक्‍स जैसी सभी वैराइटी मिलेगी.


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adminFebruary 4, 20191min50

महानगरों की दौड़-भाग से हर किसी का मन ऊब जाता है और फिर वह सुकून की तलाश में भटकता रहता है. अगर आप दिल्ली में हैं तो जहरीली हवा से कुछ समय के लिए ही सही, छुटकारा पा सकते हैं. दिल्लीवालों के लिए अच्छी बात ये है कि वे वीकेंड में कम दूरी की जगहों पर कम पैसे और कम वक्त में घूमने जा सकते हैं.

यकीन मानिए, बस कुछ घंटों का सफर करने के बाद आप एक अलग ही दुनिया में पहुंच जाएंगे. शुद्ध हवा और शांत वातावरण में आपका वीकेंड शानदार रहेगा. हालांकि, इन जगहों की सैर करने के लिए आप सुबह ही निकल जाएं ताकि आपको ज्यादा से ज्यादा समय बिताने का मौका मिल सके.

 

नौकुचियाताल-

नैनीताल के नजदीक नौकुचियाताल बहुत ही अच्छा डेस्टिनेशन है. नौकुचियाताल में आप बोटिंग का भी मजा ले सकते हैं. यहां पहुंचने के लिए आपको दिल्ली से काठगोदाम तक की ट्रेन लेनी होगी. काठगोदाम से नौकुचियाताल कार से डेढ़ घंटे में पहुंच जाएंगे. ट्रेन और कार से कुल जर्नी में 7 घंटे तक का टाइम लग जाएगा. आप दिल्ली से अपनी कार से भी जा सकते हैं. इसमें आपको करीब 8.30 घंटे का वक्त लगेगा लेकिन टूटी-फूटी सड़कों पर सावधानी से गाड़ी चलाएं.

 

 

कसौली-

कसौली संभवत: दिल्ली से सबसे नजदीक हिल स्टेशनों में से एक है. यह बेहद खूबसूरत जगह है. कसौली रिलैक्स करने के लिए बेहतरीन जगह है. कसौली पहुंचने के लिए आप काल्का तक की ट्रेन ले सकते हैं. ट्रेन से काल्का पहुंचने में साढ़े चार घंटे लगते हैं. इसके बाद काल्का से कसौली तक पहुंचने में डेढ़ घंटा लगता है. दिल्ली से कसौली तक आप कार से भी जा सकते हैं. ड्राइव करके जाने में भी आपको लगभग ट्रेन जितना ही समय लगेगा.

 

 

ऋषिकेश-

ऋषिकेश एक ऐसी जगह है जहां पर आप बहुत कुछ कर सकते हैं- एडवेंचर स्पोर्ट, योग और मंदिर दर्शन… सब कुछ यहां मौजूद है. दिल्ली से ऋषिकेश पहुंचने में आपको 6 घंटे लगते हैं. आप देहरादून  की फ्लाइट भी ले सकते हैं और वहां से ड्राइव करके ऋषिकेश पहुंच सकते हैं. दिल्ली से देहरादून की फ्लाइट 50 मिनट लेती है. देहरादून से ऋषिकेश पहुंचने में करीब डेढ़ घंटे लग जाएंगे.

 

 

तो फिर बना लीजिए अपने अगले वीकेंड का शानदार प्लान.


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adminFebruary 1, 20191min50

Digital India के तहत अभी आपको कई योजनाएं दिखती हैं. सरकार लगातार डिजिटल इंडिया की उपलब्धी गिनाती है. मोदी सरकार के पांच साल पूरे होने वाले हैं. ऐसे में जानना दिलचस्प होगा कि अब तक कहां पहुंचा डिजिटल इंडिया?

1 जुलाई, 2015 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने डिजिटल इंडिया लॉन्च किया था. इसके कई मकसद हैं. इनमें से मुख्य, ग्रामीण इलाकों को हाई स्पीड इंटरनेट नेटवर्क से कनेक्ट करना और डिजिटल लिटरेसी को बेहतर करना है. पांच साल होने को हैं. अब तक डिजिटल इंडिया का रेस्पॉन्स क्या है?

ग्रामीण इलाकों में इंटरनेट कनेक्टिविटी कहने को तो पहुंच रही है, लेकिन इसे इस्तेमाल कैसे किया जाए ये साफ नहीं है. कई ग्रामीण इलाकों का हाल ये है कि वहां फाइबर पहुंचा दिए गए हैं. कंप्यूटर्स भी उपलब्ध कराए गए हैं, लेकिन अब आगे क्या किया जाएगा, अब तक कुछ नहीं दिखता है.

वाईफाई कनेक्टिविटी लगाने का भी प्रोजेक्ट चालू है, लेकिन यूजर्स को इससे कितना लाभ मिल रहा है इसका ऐस्सेमेंट अभी होना बाकी है. झारखंड के कई ऐसे ग्रामीण इलाके हैं जहां ऑप्टिकल फाइबर पहुंचा दिए गए हैं. इक्विप्मेंट्स भी उपलब्ध हैं, लेकिन इंटरनेट यूज करना है ये मुखिया को ही पता नहीं है. उन्हें ये पता है कि इंटरनेट आ रहा है ताकि लोगों को योजना के बारे में बताया जा सके.

राष्ट्रपति राममाथ कोविंद ने बजट से पूर्व अपने अभिभाषण में डिजिटल इंडिया का जिक्र किया है. राष्ट्रपति ने डिजिटल इंडिया की उपलब्धि गिनाई है. उन्होंने कहा है कि 2014 में देश में सिर्फ 59 ग्राम पंचायतों तक ही डिजिटल कनेक्टिविटी पहुंच पाई थी. आज 1 लाख 16 हजार ग्राम पंचायतों को ऑप्टिकल फायबर से जोड़ दिया गया है और लगभग 40 हजार ग्राम पंचायतों में वाईफाई हॉट स्पॉट लगाए गए हैं. उन्होंने यह भी कहा है कि ग्रामीण इलाकों में सर्विस पहुंचाने के लिए कॉमन सर्विस सेंटर्स तेजी से बने हैं. इन केंद्रों में बैंकिंग से लेकर बीमा और पेंशन से लेकर स्कॉलरशिप जैसी सुविधाएं ऑनलाइन उपलब्ध कराई जा रही हैं.

राष्ट्रपति के मुताबिक 2014 में देश में सिर्फ 84 हजार कॉमन सर्विस सेंटर थे, लेकिन अब ये तेजी से बढ़ें हैं और ये तीन लाख से ज्यादा हो गए हैं. उन्होंने डेटा सस्ते होने पह कहा है कि अब लोगों को कम दर पर ज्यादा डेटा मिल रहा है. 2014 में जहां 1 जीबी डेटा की कीमत लगभग 250 रुपये होती थी अब वो घटकर 10-12 रुपये हो गई है. इसी तरह लोगों को मोबाइल पर बात करने में ज्यादा पैसे खर्च होते थे वो अब आधे से भी कम हो गए हैं.

जुलाई 2018 में पीएम मोदी ने कहा कि डिजिटल इंडिया इनिशिएटिव से देश में 3 लाख जॉब्स बने हैं और सिटिजन जागरूक हुए हैं. पीएम ने कहा है कि 3 लाख कॉनम सर्विस सेंटर का नेटवर्क तैयरा किया गया है जिन्हें डिजिटल सर्विस डिलिवरी का ऐक्सेस प्वॉइंट के तौर पर यूज किया जाता है.  डिजिटल इंडिया के बारे में पीएम मोदी का कहना है कि डिजिटल एंपावरमेंट का हर ऐस्पेक्ट काम कर रहा है. इनमें गांवों में फाइबर ऑप्टिक्स बिछाने से लेकर डिजिटल लिटरेसी तक शामिल है. 

 

मोबाइल फोन यूजर्स में तेजी से ग्रोथ देखने को मिली है. केंद्रिय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने एक ट्वीट किया था. इसके मुताबिक जून 2014 में भारत में 90 करोड़ मोबाइल यूजर्स थे जो मार्च 2018 में बढ़ कर 121 करोड़ हो गए हैं.

आधार की बात करें तो ये भी तेजी से बढ़ा है और अब काफी लोगों ने अपना आधार कार्ड बनवा लिया है. 31 मार्च 2018 तक 120.7 करोड़ आधर एनरॉलमेंट हुए है. जबकि मई 2014 में ये आंकड़ा 63.22 करोड़ ही था.

मिनिस्टर ऑफ स्टेट फॉर इलेक्ट्रॉनिक्स एंड आईटी के.जे अलफॉन्स ने लोकसभा को दिए एक लिखित जवाब में कहा है कि 15 फरवरी 2018 तक देश में 89.2 फीसदी लोगों को आधार इश्यू कर दिए गए हैं.

डिजिटल साक्षरता अभियान (DISHA) की बात करें तो इसका मकसद 2020 तक हर फैमिली में से कम से कम किसी एक को डिजिटल साक्षर बनाना है. 2 लाख 50 हजार ग्राम पंचायत को वाईफाई से जोड़ना और ब्रॉडबैंड मुहैय्या कराना है.


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adminJanuary 28, 20192min70

इंडिया टुडे ग्रुप ने कार्वी के साथ मिलकर एक सर्वे किया है जिसमें भारत के अंदरूनी मामलों के साथ-साथ सरकार के लिए गए फैसलों पर भी सवाल पूछे गए. सर्वे का नाम है ‘मूड ऑफ़ द नेशन’. ये सर्वे साल में दो बार कराया जाता है. सर्वे के कुछ सवाल और उनपर लोगों की प्रतिक्रिया कुछ इस प्रकार रही:

सबसे ज्यादा भ्रष्ट कौन?

सर्वे में भारत में भ्रष्टाचार पर सवाल पूछा गया. सवाल था कि देश में सबसे भ्रष्ट कौन है?

पहले तीन जवाब थे नेता, पुलिस और अफसर. 12,166 लोगों पर किए गए सर्वे में करीब 48 फीसदी ने नेताओं को सबसे ज्यादा भ्रष्ट बताया. 23 फीसदी ने पुलिस और 7 फीसदी ने अफसरों को भ्रष्ट कहा. अगस्त 2018 में किए गए सर्वे में भी पुलिस और नेताओं को लगभग इतने ही लोगों ने भ्रष्ट बताया था लेकिन इस बार अफसरों को करीब 6 फीसदी ज्यादा लोगों ने भ्रष्ट कहा.

उत्तर और दक्षिण भारत में नेता और पुलिस के भ्रष्ट होने में भी काफी अंतर देखा गया. दक्षिण भारत में 58 फीसदी लोग नेताओं को भ्रष्ट मानते हैं और केवल 11 फीसदी पुलिस को भ्रष्ट मानते हैं. जबकि उत्तर भारत में ये स्थिति एक दम उलट है. उत्तर में 37 फीसदी ने नेताओं और 33 फीसदी ने पुलिस को सबसे ज्यादा भ्रष्ट माना. सर्वे में देश के किसी भी हिस्से में पुलिस भ्रष्ट होने के मामले में नेताओं को ओवरटेक नहीं कर सकी है.

 

नोटबंदी कितनी फायदेमंद?

दूसरा सवाल था नोटबंदी पर. क्या नोटबंदी ने आम जनता को फायदे से ज्यादा नुकसान पहुंचाया है?

सर्वे बेस में से करीब 72 फीसदी ने कहा कि नोटबंदी से उन्हें नुकसान हुआ है. अगस्त 2018 के सर्वे में भी 73 फीसदी लोगों ने नोटबंदी को लोगों के नुकसान में बताया था.

 

क्या जीएसटी से नुकसान हुआ?

नोटबंदी के साथ-साथ जीएसटी पर भी सवाल किया गया. सवाल था कि व्यक्तिगत स्तर पर लोगों को जीएसटी से फायदा हुआ या नहीं?जवाब में 40 फीसदी लोगों का मानना था कि उन्हें जीएसटी से व्यक्तिगत स्तर पर नुकसान हुआ.

अगस्त 2018 में हुए सर्वे में भी 39 फीसदी लोगों ने जीएसटी को खुद के लिए अच्छा नहीं कहा था. देश में एक भी ऐसा व्यवसाय नहीं है जिससे जुड़े लोगों ने जीएसटी को फायदे का सौदा बताया हो.

 

पटेल की मूर्ति बननी चाहिए थी कि नहीं बननी चाहिए थी?

सरकार ने 3000 करोड़ रुपये खर्च करके सरदार पटेल की भव्य मूर्ति बनाई है. लोगों से सवाल किया गया कि क्या ये मूर्ति बनाई जानी चाहिए थी या नहीं?

50 फीसदी लोगों ने सरकार के फैसले को गैरज़रूरी बताया. बाकी बचे 50 फीसदी में से भी केवल 38 फीसदी सरकार के इस फैसले के पक्ष में थे. 12 फीसदी लोग अभी भी तय नहीं कर पा रहे हैं.

 

सीबीआई पर भरोसा है कि नहीं?

लोगों से सीबीआई के बारे में भी सवाल किया गया. पूछा गया कि क्या आपको अभी भी सीबीआई पर उतना ही भरोसा है जितना पहले था?

इसके जवाब में करीब 43 फ़ीसदी लोगों ने कहा कि उन्हें सीबीआई पर कभी भरोसा नहीं था या अब कम हो गया है. 41 फीसदी मानते हैं कि सीबीआई पर उनका भरोसा बढ़ा है.

 

 

आरबीआई की आज़ादी छिन गई है?

सीबीआई के साथ-साथ एक दूसरी संस्था आरबीआई के बारे में लोगों से पूछा गया कि क्या एनडीए सरकार के साथ हालिया विवाद के बाद आरबीआई को अपनी संप्रभुता से समझौता करना पड़ा है?

43 फीसदी लोगों ने इसका जवाब हां में दिया है. 34 फीसदी मानते हैं कि ऐसा कुछ नहीं है. जबकि 23 फीसदी अभी तक तय नहीं कर पाए हैं.

 

कर्ज मिलने में आसानी है क्या?

सर्वे में लोगों से कर्ज मिलने की आसानी पर भी सवाल किया गया. पूछा गया कि क्या उन्हें उन्हें पर्सनल और बिज़नस की ज़रूरतों के लिए स्थानीय बैंकों से उचित ब्याज दर पर कर्ज मिल जाता है?

करीब 40 फीसदी लोगों ने इसका जवाब ना में दिया. 22 फीसदी ऐसे थे जिन्होंने कभी लोन के लिए अप्लाई ही नहीं किया और 31 फीसदी ऐसे भी थे जिन्हें लगता है कि उन्हें सही ब्याज दर पर कर्ज मिल जाता है. लोन मिलने में सबसे ज्यादा दिक्कत बेरोजगारों, किसानों और व्यापारियों को आती है.

सुविधाएं मिल रही हैं या नहीं?

लोगों से पूछा गया कि क्या उन्हें सरकार द्वारा दी जा रही सुविधाएं मिल रही हैं मसलन गैस सब्सिडी, विधवा पेंशन, टॉयलेट और घर बनाने के लिए पैसे आदि.

सरकारी सुविधाएं मिलने के सवाल पर 51 फीसदी लोगों ने ‘हां’ में जवाब दिया. 34 फीसदी लोग ऐसे भी थे जिन्होंने कहा कि उन्हें सुविधाएं नहीं मिल रहीं. सर्वे के मुताबिक गांव की बजाय शहरों में लोगों को सरकारी सुविधा लेने में ज्यादा आसानी रहती है.

 


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adminJanuary 28, 20191min70

भारत रत्न और पद्म अवॉ्र्डस की घोषणा के बाद कहीं खुशी कहीं गम वाला माहौल है. किसी को इन अवॉर्ड्स में 2019 का गणित नजर आ रहा है तो कोई इन्हें अच्छा चुनाव कह रहा है. अब एक नया विवाद खड़ा हो गया है. पूर्वी भारत से. वहीं से जहां पर बीजेपी सबसे ज्यादा नजरें गड़ाए बैठी है. बंगाल की बात नहीं कर रहे हैं. बात कर रहे हैं ओडिशा की. जहां के मुख्यमंत्री हैं नवीन पटनायक. जिनको झटका देने में बीजेपी कोई कसर नहीं छोड़ रही. पर अब पटनायक की बहन गीता मेहता ने बीजेपी सरकार को झटका दिया है. गीता मेहता को पद्मश्री देने की घोषणा की गई थी. पर उन्होंने इसे लेने से इनकार कर दिया है. उन्होंने इसकी वजह भी बताई. उनका कहना है –

केंद्र की मोदी सरकार आगामी लोकसभा चुनाव में राजनीतिक फायदा लेने के लिए यह पुरस्कार दे रही है, जिसके चलते वो इसको स्वीकार नहीं कर सकती हैं.

25 जनवरी को ही राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने पद्म पुरस्कारों की घोषणा की थी. इसमें 112 पद्म पुरस्कारों में 94 लोगों को पद्मश्री, 14 हस्तियों को पद्म भूषण और 4 लोगों को पद्म विभूषण से नवाजे जाने की बात थी. इसी में गीता मेहता का भी नाम था. उनको साहित्य और शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धि के लिए यह पुरस्कार दिए जाने की घोषणा की गई थी.

गीता मेहता इस वक्त अमेरिका की नागरिक हैं और न्यूयॉर्क से ही उन्होंने ये अवॉर्ड नहीं लेने की घोषणा की है. उन्होंने यह भी कहा कि –

मुझे पद्मश्री पुरस्कार के लिए चुना गया, यह मेरे लिए बेहद सम्मान की बात है. हालांकि मुझे यह पुरस्कार लेने से इनकार करते हुए बहुत दुख हो रहा है, क्योंकि यह पुरस्कार उस समय दिए जाने की घोषणा की गई है, जब आम चुनाव बेहद करीब आ गए हैं. इस समय पुरस्कार लेना गलत हो सकता है. जिससे कि सरकार और मुझे शर्मिंदगी उठानी पड़ सकती है और मुझे इसका पछतावा होगा.

 

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार गीता मेहता और उनके पति सोनी मेहता कुछ महीने पहले भारत आए थे तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात भी की थी. ये बातचीत करीब 90 मिनट तक चली थी.

अब लेखिका मेहता की बात करें तो उन्होंने कई मशहूर किताबें लिखी हैं. इनमें सबसे पहले 1979 में कर्म कोला, 1989 में राज, 1993 में ए रिवर सूत्र, 1997 में स्नेक्स एंड लैडर्स: ग्लिम्पसिस ऑफ मॉडर्न इंडिया और 2006 में इटरनल गणेश: फ्रॉम बर्थ टू रीबर्थ जैसी किताबें आईं. 76 साल की मेहता ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री बीजू पटनायक के तीन बच्चों (प्रेम, गीता और नवीन) में दूसरी संतान हैं. वो नवीन से बड़ी और प्रेम से छोटी हैं. उनकी शादी पब्लिशिंग हाउस अल्फ्रेड ए-नोफ के मुखिया सोनी मेहता से हुई है. सोनी मेहता ने अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा और तमाम बड़ी शख्सियतों की किताबें पब्लिश की हैं.


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adminJanuary 24, 20191min70

Rashtriya Bal Puraskar: 26 बच्चों को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने ‘राष्ट्रीय बाल पुरस्कार’ से नवाजा है. इस साल प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार के कुल 783 आवेदन आए थे, जिसमें से 26 बहादुर बच्चों को चुना गया. ये पुरस्कार दो कैटेगरी में दिए जाते हैं पहला बाल शक्ति पुरस्कार और दूसरा बाल कल्याण पुरस्कार.

आपको बता दें, सरकारी संस्था इंडियन काउंसिल फॉर चाइल्ड वेलफेयर (आईसीसीडब्ल्यू) 1957 से ‘राष्ट्रीय बाल पुरस्कार’ का वितरण कर रही थी, लेकिन वित्तीय गड़बड़ी के आरोप लगाए जाने के चलते सरकार ने खुद को इससे अलग कर लिया है. जिसके बाद ऐसा पहली बार हो रहा जब 26 जनवरी को होने वाली परेड में बहादुर बच्चे दिखाई नहीं देंगे.

 

इन क्षेत्रों में अपनी प्रतिभा दिखाने वाले बच्चों को दिए जाते हैं ‘बाल शक्ति पुरस्कार’

* नवोन्मेष (इनोवेशन)

* समाज सेवा

* विद्वता

* खेल

* कला और संस्कृति

* वीरता

 

प्राइज:

बहादुर बच्चों को मेडल, 1 लाख रुपये नकद राशि, 10 हजार रुपये का बुक वाउचर और सर्टिफिकेट मिलते हैं.

 

‘बाल कल्याण पुरस्कार’

* व्यक्तिगत :व्यक्तिगत  पुरस्कार हासिल करने वाले को 1,00,000  रुपये, मेडल , एक प्रशस्ति पत्र और एक सर्टिफिकेट दिया जाता है.

* संस्था:  संस्था के लिए 5,00,000  रुपये, मेडल , एक प्रशस्ति पत्र और एक सर्टिफिकेट दिया जाता है.

 

जानें- कैसे होता है चयन

विजेताओं को विभिन्न विषयों जैसे समाजशास्त्र, मनोविज्ञान, गणित, विज्ञान, कला, संगीत और खेल के विशेषज्ञों की एक समिति तैयार की जाती है. जिसके महत्वपूर्ण विश्लेषण और मुश्किल  प्रक्रिया के माध्यम से विजेता को चुना जाता है. जिसके बाद  महिला और बाल विकास मंत्री मेनका गांधी की निगरानी में अंतिम सूची तैयार की जाती है.

 

आप कैसे कर सकते हैं आवेदन

जो बच्चे अगले साल के लिए आवेदन करना चाहते हैं वह आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर  www.nca-wcd.nic.in रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं.

 

कौन करता है आवेदन

जो बच्चा भारत का नागरिक वह अपना रजिस्ट्रेशन कर सकता है. बता दें, भारत का कोई नागरिक ऐसे किसी बच्चे का रजिस्ट्रेशन कर सकता है जिसने समाज सेवा,  शैक्षिक क्षेत्र, खेल, कला एवं संस्कृति में ऐसा काम किया हो जिसका सकारात्मक प्रभाव डाला हो.


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adminJanuary 23, 20191min70

Republic Day: 26 जनवरी के दिन का इंतजार गणतंत्र दिवस परेड के लिए भी रहता है. इस दिन राजपथ पर भारतीय सेना अपना शक्ति प्रदर्शन करती है और सभी राज्यों की सांस्कृतिक झलक भी देखने को मिलती है. लेकिन क्या आप जानते हैं 26 जनवरी के दिन राजपथ पर होने वाले इस कार्यक्रम में सिर्फ परेड ही नहीं होती है, बल्कि कई अन्य औपरचारिकताएं होती हैं. आइए जानते हैं इस दिन क्या-क्या होता है…

 

प्रधानमंत्री करते हैं शुरुआत

नई दिल्‍ली में राष्‍ट्र‍पति भवन के समीप रायसीना पहाड़ी से राजपथ पर गुजरते हुए इंडिया गेट तक और बाद में ऐतिहासिक लाल किले तक शानदार परेड का आयोजन किया जाता है. यह आयोजन भारत के प्रधानमंत्री की ओर से  इंडिया गेट पर अमर जवान ज्‍योति पर पुष्‍प अर्पित करने के साथ शुरू करवाया जाता है.

 

फिर होती है 21 तोपों की सलामी

प्रधानमंत्री के पुष्प अर्पित करने के बाद 21 तोपों की सलामी दी जाती है और भारत के राष्ट्रपति राष्‍ट्रीय ध्‍वज फहराते हैं और और राष्‍ट्रीय गान होता है.

 

फिर परेड होती है शुरू

इसके बाद परेड शुरू होती है. साथ ही महामहिम राष्‍ट्रपति के साथ एक मौजूद विदेशी राष्‍ट्र प्रमुख आते हैं, जिन्‍हें आयोजन के मुख्‍य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया जाता है.

 

सलामी दी जाती है

उसके बाद राष्‍ट्रपति के सामने से खुली जीपों में वीर सैनिक गुजरते हैं. भारत के राष्‍ट्रपति, जो भारतीय सशस्‍त्र बल, के मुख्‍य कमांडर हैं, विशाल परेड की सलामी लेते हैं. साथ ही भारतीय सेना की ओर से नवीनतम हथियारों और बलों का प्रदर्शन किया जाता है.

 

बहादुरी पुरस्कार सम्मान समारोह

इसके बाद राष्‍ट्रपति सशस्‍त्र सेना के सैनिकों को बहादुरी के पुरस्‍कार और मेडल देते हैं और उन्हें उनकी वीराता का सम्मान दिया जाता है. इसके बाद सशस्‍त्र सेना के हेलिकॉप्‍टर दर्शकों पर गुलाब की पंखुडियों की बारिश करते हुए फ्लाई पास्‍ट करते हैं.

 

फिर शुरू होती है सांस्कृतिक परेड

सेना की परेड के बाद रंगारंग सांस्‍कृतिक परेड होती है. कई राज्‍यों से आई झांकियों के रूप में भारत की समृद्ध सांस्‍कृतिक विरासत को दर्शाया जाता है. प्रत्‍येक राज्‍य अपने अनोखे त्‍यौहारों, ऐतिहासिक स्‍थलों और कला का प्रदर्शन करते है. विभिन्‍न सरकारी विभागों और भारत सरकार के मंत्रालयों की झांकियां भी राष्‍ट्र की प्र‍गति में अपने योगदान प्रस्‍तुत करती है.

 

वायु सेना करती है फ्लाई पास्ट

इस परेड में परेड का सर्वाधिक प्रतीक्षित भाग फ्लाई पास्‍ट है, जो भारतीय वायु सेना द्वारा किया जाता है. फ्लाई पास्‍ट परेड का अंतिम पड़ाव है, जब भारतीय वायु सेना के लड़ाकू विमान राष्‍ट्रपति का अभिवादन करते हुए मंच पर से गुजरते हैं.



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