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adminFebruary 9, 20191min10

छह साल से सिडनी (ऑस्ट्रेलिया) में मानुस आईलैंड के डिटेनशन सेंटर में कैदी का जीवन बिता रहे लेखक बेहरोज बूचानी ने बच-बचाकर मोबाइल पर एक ऐसी किताब ‘नो फ्रैंड बट द माउंटेन्स’ लिख डाली, जिसे देश का सर्वश्रेष्ठ 6.4 करोड़ रुपए के बराबर का 125000 ऑस्ट्रेलियन डॉलर वाला पुरस्कार मिला है। जिस वक़्त समारोह में यह पुरस्कार बूचानी को दिया जा रहा था, वह कैदखाने में पड़े रहे। 

संघर्षशील सृजन किसी भी तरह की उपेक्षा, अवहेलना, मानापमान अथवा यश-प्रतिष्ठा का मोहताज नहीं होता है। गोर्की, टॉलस्टाय, ब्रेख्त, बॉलजाक, धूमिल, राहुल सांकृत्यायन, प्रेमचंद, कबीर, तुलसी, मीरा, राजकमल चौधरी अथवा चार्ल्स डिकेंस की सृजन यात्राएं वैसी रचनात्मक पटकथाओं जैसी इतिहास में दर्ज हैं। इसी तरह हम आर्थर मिलर, जॉन स्मिथ, सुज़ैन कोलिन्स, कर्ट वॉनगुत की किताबें पढ़ते समय उनके सृजन कर्म को याद करते हैं। कभी कभी कोई ऐसी किताब दुनिया के हाथ लगती है, जो नए तरह का इतिहास रच देती है।

हाल ही में एक ऐसी ही किताब लिखी है पिछले छह साल से सिडनी (ऑस्ट्रेलिया) के मानुस आईलैंड के डिटेनशन सेंटर में कैदी का जीवन बिता रहे कुर्दिश-ईरानी शरणार्थी बेहरोज बूचानी ने। हैरत की बात तो ये है कि उन्होंने ये पूरी किताब कैदखाने में रहते हुए मोबाइल पर लिखकर अपने दोस्त को वॉट्सऐप कर दिया। जब यह किताब ‘नो फ्रैंड बट द माउंटेन्स’ छपकर आई तो अब ऑस्ट्रेलिया सरकार ने ही बचूनी को अपने देश के सबसे बड़े 6.4 करोड़ रुपए (125000 ऑस्ट्रेलियन डॉलर) के पुरस्कार से सम्मानित करने का ऐलान कर दिया है। कितना दुखद है कि बूचानी को जब यह पुरस्कार दिया जा रहा था, वह अपने सम्मान में आयोजित समारोह में स्वयं अनुपस्थित, कैदखाने में पड़े रहे।

साहित्यकारों, लेखकों के साथ ऐसा इतिहास अपने को बार-बार दुहराता रहता है। ‘फांसी के तख्ते से’ जैसी विश्व की श्रेष्ठ पुस्तक जूलियस फ्यूचिक ने नात्सी जल्लादों के फाँसी के तख्ते की छाया में लिखी थी। हमारे देश में पाश जैसे श्रेष्ठ कवि को पंजाब में उग्रवादियों ने गोली से भून दिया। निराला जीवन भर संघर्षरत रहे और दवा-इलाज की मुश्किलों में चल बसे। दरअसल, बेहरोज बूचानी मूलतः लेखक, फिल्म मेकर और पत्रकार हैं। वह पिछले छह साल से पापुआ न्यू गिनी के मानुस आईलैंड के डिटेनशन सेंटर में बंद हैं। उनकी इस किताब को हाल में विक्टोरियन प्राइज फॉर लिटरेचर अवॉर्ड 2019 के लिए चुना गया। 

उन्हें पुरस्कार के तौर पर 6.4 करोड़ (125000 ऑस्ट्रेलियन डॉलर) मिले हैं। वर्ष 2012 में ईरान में कई लेखकों, पत्रकारों और फिल्मकारों को गिरफ्तार कर लिया गया था। उस दौरान बूचानी वहां से तो निकलने में कामयाब रहे लेकिन समुद्र के रास्ते ऑस्ट्रेलिया में घुसते समय ऑस्ट्रेलियन नेवी ने उनकी बोट को कब्जे में ले लिया। फिर उन्हें 2013 में मानुस आईलैंड के डिटेनशन सेंटर भेज दिया गया। डिटेंशन सेंटर में रहते हुए भी पत्र-पत्रिकाओं में उनके लिखे लेख छपते रहे हैं। उनकी पुस्तक ‘नो फ्रैंड बट दि माउंटेन्स’ डिटेनशन सेंटर के उनके अनुभवों पर ही आधारित है। इसके लिए वे अपने मोबाइल पर फारसी में एक-एक चैप्टर पूरा करते और फिर इसे अपने अनुवादक दोस्त ओमिड टोफिगियान को भेज दिया करते। किताब लिखने के दौरान उनको सबसे बड़ा इस बात का डर बना रहता था कि कहीं उनका फोन न छिन जाए।

बूचानी बताते हैं कि सेंटर के सुरक्षाकर्मी बैरक की तलाशी के दौरान कैदियों के सामान जब्त कर लेते हैं। इसलिए वह अपनी किताब के एक-एक चैप्टर फोन पर टाइप कर वॉट्सऐप के जरिए तुरंत अपने दोस्त को भेज देते थे। ऐसे में एक सवाल किसी को भी हैरान कर सकता है कि लेखक के भीतर आखिर ऐसी कौन सी बात होती है कि ऐसे कठिन हालात में भी वह अपने शब्दों से इस तरह टूटकर प्यार करता है। पीड़ादायी कैदखाने में भी उसका अपने सृजन से गहरा याराना बना रहता है। छह करोड़ रुपए से अधिक का जो पुरस्कार बूचानी को दिया गया है, उस अवॉर्ड के लिए ऑस्ट्रेलिया की नागरिकता या यहां का स्थायी नागरिक होना जरूरी है, लेकिन बूचानी के मामले में यह छूट दी गई। 

जूरी ने उनकी कहानी को ऑस्ट्रेलिया की कहानी के तौर पर स्वीकारा है। यह अतिप्रतिष्ठित सम्मान पाने पर बूचानी कहते हैं कि ‘उन्हे खुशी हो रही है, क्योंकि यह मेरे और मेरे जैसे शरणार्थियों के लिए बड़ी उपलब्धि है। यह सिस्टम के खिलाफ बड़ी जीत है।’ उल्लेखनीय है कि जूलियस फ़्यूचिक ने अपनी पुस्तक ‘सी के तख्ते से’ की पाण्डुलिपि अदम्य साहस और सूझ-बूझ के साथ नात्सी जेल में काग़ज़ के छोटे-छोटे टुकड़ों पर पेंसिल से लिखी थी, जिन्हें लेखक ने एक-एक करके प्राग की पैंक्रेट्स गेस्टापो जेल से एक हमदर्द चेक सन्तरी की मदद से छिपाकर बाहर भेजा था। फ़्यूचिक एक ऐसे व्यक्ति थे जो अपने-आपको धोखा देने से घृणा करते थे और यह जानते थे कि इस रचना को पूरा करने के लिए वह जीवित न रहेंगे और यह कभी भी बीच में ही रुक जायेगी किन्तु वह अपनी आस्था छोड़ने के लिए तैयार नहीं थे।


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adminFebruary 6, 20191min60

अमेरिका के मिशिगन से ताल्लुक रखने वाले एक कपल ने इतनी बार लॉटरी में जीत हासिल की कि इससे कुल 186 करोड़ रुपये कमा लिए. अब इनकी कहानी पर हॉलीवुड मूवी बनाई जा रही है. रिटार्यड हो चुके कपल ने एक टीवी शो में बार-बार लॉटरी जीतने के ट्रिक का खुलासा किया है. (प्रतीकात्मक फोटो- Reuters)

 

लॉटरी जीतने का फॉर्मूला जानता है कपल, जीत चुका 186 करोड़
 

ये कपल हैं- जेरी और मार्ज सेल्बी. कपल का कहना है कि उन्होंने सामान्य अंकगणित का इस्तेमाल करके ही ये करिश्मा कर दिखाया है. उन्होंने अपने फ्रेंड्स और दोस्तों को भी ऐसा करने के लिए प्रेरित किया. (प्रतीकात्मक फोटो- Reuters)

 
लॉटरी जीतने का फॉर्मूला जानता है कपल, जीत चुका 186 करोड़
 

कपल की कहानी पर फिल्म बनाने के लिए हॉलीवुड प्रोड्यूसर्स ने राइट्स खरीद लिए हैं. कपल करीब 6 साल तक विभिन्न लॉटरी के टिकट खरीदते रहे और हर बार अपनी जीत दर्ज कराते रहे. (प्रतीकात्मक फोटो- Reuters)

 

लॉटरी जीतने का फॉर्मूला जानता है कपल, जीत चुका 186 करोड़

 

पति ने वेस्टर्न मिशिगन यूनिवर्सिटी से गणित में बैचलर डिग्री ली थी. जब पहली बार लॉटरी का एक ब्राउशर उनके हाथ लगा, उन्होंने अंकगणित का फॉरमुला लगाना शुरू कर दिया. इससे पहले कपल 17 साल से किराने की दुकान चलाते थे, लेकिन उन्होंने इसे 2003 में बंद कर दिया. (प्रतीकात्मक फोटो- Reuters)

 
लॉटरी जीतने का फॉर्मूला जानता है कपल, जीत चुका 186 करोड़
 

कपल को मालूम हुआ कि जब कोई भी लॉटरी में 50 लाख डॉलर का जैकपॉट नहीं जीत पाता है तो पैसे को उन लोगों में बांट दिया जाता है जिनके 5, 4 या तीन नंबर भी मैच करते हों. इसके बाद कपल लाखों रुपये के हजारों टिकट खरीद लेते थे और इससे उन्हें हर बार दोगुने के करीब पैसे वापस मिल जाते थे.  (प्रतीकात्मक फोटो- Reuters)


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adminFebruary 5, 20191min100

चीन में गधों को काफी खास माना जाता है क्योंकि इनका इस्तेमाल पारंपरिक चीनी दवा बनाने में किया जाता है.

आर्थिक किल्लत का सामना कर रहा पाकिस्तान अब गधे बेचकर अपनी कुछ मुश्किलें दूर करेगा. गधों की सबसे बड़ी आबादी के मामले में पाकिस्तान दुनिया में तीसरे नंबर पर आता है. वहीं चीन दुनिया का ऐसा देश है जहां गधों की आबादी सबसे अधिक है. पाकिस्तान में गधों की आबादी करीब 50 लाख मानी जाती है.

इससे पहले फरवरी में पाकिस्तान की आर्थिक दिक्कतों को दूर करने के लिए चीन ने करोड़ों रुपये के लोन की पेशकश की थी. अब इसके बदले में पाकिस्तान गधों को चीन भेजेगा. चीन में गधों को काफी खास माना जाता है क्योंकि इनका इस्तेमाल पारंपरिक चीनी दवा बनाने में किया जाता है. गधों की स्किन से तैयार होने वाले जिलेटिन को औषधीय गुणों वाला बताया जाता है. इससे खून और इम्यून सिस्टम बेहतर होता है.

खैबर पख्तूनख्वा के एक अधिकारी ने कहा कि चीनी कंपनियां पाकिस्तान में गधों की फार्मिंग करने के लिए इन्वेस्टमेंट करने की इच्छुक हैं. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, विदेशी कंपनियां पाकिस्तान में 21 हजार करोड़ रुपये इन्वेस्ट कर सकती है.

देश के निर्यात को बढ़ाने के लिए लाइव स्टॉक डिपार्टमेंट ने कहा है कि देश में पहली बार गधों के खास फार्म शुरू किए जाएंगे. डेरा इस्मायल खान और मनसेहरा में विदेशी साझेदारी में फार्म शुरू किए जा रहे हैं. पहले तीन वर्षों में सरकार करीब 80 हजार गधों का निर्यात करना चाहती है.


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adminFebruary 1, 20191min60

इजरायली वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि एक साल के भीतर कैंसर जैसी खतरनाक बीमारी को जड़ से खत्म करने का इलाज मौजूद होगा.

एक इजरायली फार्मा कंपनी ने दावा किया है कि उसके पास एक साल के भीतर कैंसर जैसी खतरनाक बीमारी को जड़ से खत्म करने का इलाज मौजूद होगा.

एक्सीलरेटेड एवॉल्यूशन बायोटेक्नॉलजीस (AEBi) नाम की कंपनी ने कैंसर का इलाज ढूंढ निकालने की बात कही है. इस कंपनी के बोर्ड चेयरमैन डैन एरिडोर ने कहा कि कैंसर का पूरी तरह से इलाज जल्द ही संभव होगा.

कंपनी के बोर्ड चेयरमैन एरिडोर ने द जेरुसलम पोस्ट को बताया, “हमारा कैंसर का इलाज पहले दिन से ही प्रभावी होगा और यह कुछ हफ्तों तक चलेगा. इसका कोई साइड इफेक्ट नहीं होगा और बाजार में मौजूद दूसरे ट्रीटमेंट की तुलना में काफी सस्ता होगा. हमारा ट्रीटमेंट जेनरिक और पर्सनल दोनों होगा.”

द जेरूसलम पोस्ट के मुताबिक, AEBi के कैंसर के इलाज को MuTaTo नाम दिया गया है जिसका अर्थ ‘मल्टी टार्गेट टॉक्सिन’ है. कंपनी का कहना है कि इस ट्रीटमेंट में कई पेप्टाइड्स एक साथ कैंसर कोशिकाओं पर हमला कर उन्हें खत्म कर देंगे. ये पेप्टाइड्स अमीनो एसिड की श्रृंखला के कंपाउंड होंगे. कई स्तरों पर कैंसर कोशिकाओं पर होने वाला यह हमला ही इलाज को असरदार बनाएगा.

 

AEBi CEO इलान मोराड ने बताया, हमने यह भी सुनिश्चित किया है कि कैंसर का इलाज म्यूटेशन से प्रभावित ना होने पाए, कैंसर कोशिकाएं इस तरीके से म्यूटेट हो सकती हैं कि टार्गेट किए गए रिसेप्टर्स कैंसर से बच जाएं. हम एक बार में रिसेप्टर्स पर एक हमला करने के बजाय एक बार में तीन अटैक करेंगे. यहां तक कि कैंसर भी एक बार में तीन रिसेप्टर्स को म्यूटेट नहीं कर सकता है.”

मोराड ने दावा किया कि AEBi ने अपने कैंसर ट्रीटमेंट का प्रयोग चूहों में किया और इस प्रक्रिया में चूहों की स्वस्थ कोशिकाओं को बिल्कुल नुकसान नहीं पहुंचा. कंपनी ने कई in-vitro ट्रायल पूरे कर लिए हैं और जल्द ही इसका क्लीनिकल ट्रायल शुरू हो जाएगा. AEBi के CEO ने कहा कि ये परीक्षण कुछ सालों के भीतर ही पूरे हो जाएंगे और कुछ खास कैंसर मामलों के लिए जल्द उपलब्ध भी होंगे.

इजरायली कंपनी ने दावे तो बहुत किए हैं लेकिन किसी ऐसी रिसर्च का जिक्र नहीं किया है जिससे उनके दावे की पुष्टि हो सके. हालांकि, AEBi ने जिस तरह के ट्रीटमेंट का दावा किया है, वह वाकई अनोखा है. दुनिया भर में होने वाली मौतों में कैंसर दूसरी सबसे बड़ी वजह है इसलिए कैंसर के इलाज का मेडिकल दुनिया बेसब्री से इंतजार कर रही है.


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adminJanuary 28, 20191min100

चीन का नया साल आने वाला है और अधिकतर कंपनियां अपने कर्मचारियों को बोनस दे रही हैं. हालांकि, चीन के जियाशी प्रांत में नान्चांग शहर में स्टील प्लांट की एक कंपनी का बोनस बांटने का अंदाज सबसे अनोखा है.

शंघाइस्ट के मुताबिक, स्टील प्लांट ने करीब 44 मिलियन डॉलर के बैंक के नोटों से कैश का एक पहाड़ बना दिया. यह कैश सभी कर्मचारियों को बोनस में दिया जाना था लेकिन कंपनी ने ये अनोखा तरीका अपनाया. कंपनी ने अपने 5000 कर्मचारियों में कैश बांटा.

हर लकी एंप्लायी को साल के अंत में बोनस के तौर पर 62 लाख रुपए मिले. एक कर्मचारी ने शंघाइस्टि को बताया, ‘इतना बड़ा बोनस है, मुझे समझ नहीं आ रहा है कि मैं इसे कहां खर्च करूं.’

 

 

यह पहली बार नहीं है जब किसी चीनी कंपनी ने बोनस बांटने के लिए अजब-गजब तरीका अपनाया हो. पिछले साल एक कंपनी ने अपने कर्मचारियों को एक गेमशो पर आधारित कैश ग्रैब में शामिल किया था. इसमें एक सीमित समय के भीतर कैश इकठ्ठा करने का मौका दिया जाता था.


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adminJanuary 23, 20191min120

 

कल्पना कीजिए कि आप सड़क पर कार से जा रहे हों और अचानक सामने शेरों का एक झुंड आ जाए! इसकी वजह से रोड पर ट्रैफिक रुक जाए! सोशल मीडिया पर एक ऐसा ही वीडियो वायरल हो रहा है जिसमें शेरों की वजह से सड़क पर ट्रैफिक जाम होता दिख रहा है.  (फोटोज साभार- Facebook/ Lions Of Kruger Park And Sabi Sand)

अचानक सड़क पर आए इतने शेर तो डर गए कार सवार, हुआ ट्रैफिक जाम
 
इस वीडियो को Lions Of Kruger Park  के फेसबुक पेज पर अपलोड किया गया है. इसे एक कार सवार व्यक्ति ने ही रिकॉर्ड किया है. वीडियो के मुताबिक, करीब 4 शेर अचानक सड़क पर आ गए. इसकी वजह से कई लोग काफी डर गए थे.
 
अचानक सड़क पर आए इतने शेर तो डर गए कार सवार, हुआ ट्रैफिक जाम
 
हालांकि, सोशल मीडिया पर इस वीडियो को लोगों ने काफी पसंद किया है और कई लोगों ने इसे Stunning करार दिया है. वीडियो को 22 लाख से अधिक लोग देख चुके हैं.
 
अचानक सड़क पर आए इतने शेर तो डर गए कार सवार, हुआ ट्रैफिक जाम
 
ये मामला साउथ अफ्रीका के क्रुगर नेशनल पार्क का है. एक शख्स ने वीडियो पर कमेन्ट करते हुए लिखा- शेर काफी अधिक कॉन्फिडेंस के साथ चलते हैं. वहीं कुछ लोगों ने लिखा कि इस पल का गवाह होना बेहद खास रहा होगा.
 
अचानक सड़क पर आए इतने शेर तो डर गए कार सवार, हुआ ट्रैफिक जाम
 
वीडियो को फेसबुक पर कम से कम 38 हजार लोगों ने शेयर किया है. एक शख्स ने वीडियो पर कमेन्ट में लिखा- शेरों के चलने के अंदाज से साफ पता चलता है कि इन्हें जंगल का राजा क्यों कहते हैं.

 


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adminJanuary 22, 20191min90

बेहोश होना और उलटी करना. किसी नाटक के साथ इन दो क्रियाओं का ज़िक्र आने पर हम यही सोचते हैं कि वो अझेल रहा होगा. तो लोग अपना अनुभव बताते हुए ये जुमले इस्तेमाल कर रहे हैं. लेकिन अगर आपको बताया जाए कि एक नाटक ऐसा भी खेला जा रहा है जो इतना बढ़िया था कि देखने वालों ने सच में उलटी कर दी, होश खो दिया तो आप यकीन करेंगे?

अगर आपको यकीन नहीं आ रहा तो आपको न्यूयॉर्क के हडसन थिएटर जाकर ब्रॉडवे का नाटक ‘1984’ देखना चाहिए. इसमें डिस्टोपिया का चित्रण इतना जीवंत है कि देखने वाले होश खो देते हैं.

इस नाटक में ऐसा है क्या?

न्यूयॉर्क में खेला जा रहा ‘1984’ रॉबर्ट आइक डंकन मैक्मिलन का लिखा है. इन्होंने ही मिलकर नाटक का निर्देशन भी किया है. ये वाला ‘1984’ जॉर्ज ऑर्वेल के लिखे उपन्यास ‘1984’ पर आधारित है. 1949 में लिखे इस नाटक में जॉर्ज ने द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद के भविष्य में एक डिस्टोपिया गढ़ा है. डिस्टोपिया माने एक ऐसी जगह जहां सब कुछ बुरा ही होता है.

 

फिल्म ‘1984’ से एक दृश्य

‘1984’ की दुनिया में ब्रिटेन ओशियानिया नाम के देश का प्रांत बन जाता है और वहां समाजवाद के नाम पर एक ऐसी सरकार का नियंत्रण हो जाता है जो सोचने और प्यार करने को अपराध बना देती है. लोग बग़ावत न कर दें इसलिए प्रोपगैंडा और झूठी खबरों से लोगों का ब्रेनवॉश किया जा रहा है. लोग इस से बच नहीं सकते क्योंकि हर जगह ‘बिग ब्रदर’ नाम के एक मिथक का पहरा है. वो सब देख सकता है, सब सुन सकता है. जो किसी भी तरह की पहलकदमी करता है, उसे भयंकर टॉर्चर के ज़रिए वापस रास्ते पर लाया जाता है.

ऐसे में ओशियानिया का रहना वाला विंस्टन स्मिथ दो ‘गलतियां’ करता है – वो जूलिया से प्यार करने की हिमाकत करता है और ब्रदर को भी मानने से इनकार करता है. कुछ दिनों बाद विंस्टन और जूलिया पकड़े जाते हैं. विंस्टन को बुरी तरह टॉर्चर किया जाता है और अपने प्यार और चेतना के खिलाफ जाने के लिए मजबूर किया जाता है. विंस्टन ये सब कैसे झेलता है, यही उपन्यास की कहानी है.

साल 1984 में आई माइकल रैडफोर्ड की बनाई ‘1984’ को ऑर्वेल के उपन्यास पर बनी सबसे इमानदार फिल्म बताया जाता है. इसके एक दृश्य में विंस्टन (जॉन हर्ट) को टॉर्चर होते देखकर अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि ब्रॉडवे के दर्शकों का अपनी आंखों के सामने ये सब होते देख क्या हाल होता होगा –

 

जॉर्ज ऑर्वेल के उपन्यास पर कई नाटक और फिल्में बनीं. अमूमन सबने टॉर्चर के दृश्यों को लोगों के मुफीद बनाने के लिए कुछ कम वीभत्स किया. लेकिन राबर्ट आइक और डंकन मैक्मिलन के ‘1984’ ने जॉर्ज की कल्पना से कतई छेड़छाड़ नहीं की. इसलिए नाटक के मंचन के दौरान टॉर्चर के दृश्य दर्शकों को बेतरह विचलित करते हैं. मंच पर बड़ी तेज़ रोशनी होती है और हिंसा के दौरान खून के फव्वारे उड़ते हैं. इसी के मुताबिक ध्वनि भी होती है. इस सब से ऐसी दहशत पैदा होती है कि लोग आयोजकों से नाटक रोकने की अपील करने लगते हैं.

न्यूयॉर्क टाइम्स के लिए नाटकों की आलोचना लिखने वाले बेन ब्रैंटले ने नाटक के दृश्यों को टॉर्चर पॉर्न के करीब माना है.

जो लोग ये सब नहीं झेल पाते, उलटियां कर देते हैं, बेहोश हो जाते हैं. लंदन में जब इस नाटक का प्रिव्यू हो रहा था, तब एक बार लोग इतने भावुक हो गए थे कि झगड़ने पर उतारू हो गए थे. हंगामा रोकने के लिए पुलिस बुलानी पड़ी थी. इसीलिए न्यूयॉर्क में नाटक देखने आने वालों को टिकट खरीदते वक्त चेतावनी दी जाती है.

 

इस कदर जीवंत मंचन की कीमत नाटक के कलाकार भी चुका रहे हैं. नाटक में विंस्टन का किरदार निभाने वाले टॉम स्टरिज की नाक टूट चुकी है और जूलिया का किरदार निभाने वाली ओलीविया वाइल्ड के होंठो पर चोट लग चुकी है. नाटक के दौरान ही ओलिविया को रीढ़ के सिरे पर भी चोट लगी थी.

लेकिन आल्हा के बाद तो लोग मर्डर ही कर देते थे

‘1984’ देखकर लोग बेहोश हो जाते हैं. लेकिन अपने यहां ही एक ऐसी प्रस्तुति होती थी जिसके बाद मर्डर तक हो जाते थे. बंदेलखंड और उत्तर भारत के कुछ और हिस्सों में गाए जाने वाले आल्हा से लोग इतने उद्वेलित हो जाते थे कि अपने पुराने दुश्मनों को मारने निकल पड़ते थे. आल्हा के चलते इतने मर्डर हुए हैं कि सरकार ने इसके गाए जाने पर ही पाबंदी लगा दी थी.


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adminJanuary 22, 20191min90

एक मीडिया रिपोर्ट में ये दावा किया गया है कि कई लोग अपने फेसबुक अकाउंट को किराए पर देकर कैश और फ्री लैपटॉप जैसी सुविधाएं ले रहे हैं. हालांकि, ऐसा करने से प्राइवेसी और सिक्योरिटी को खतरा हो सकता है और लोगों के अकाउंट ब्लॉक किए जा सकते हैं. इंटरनेट मार्केटिंग करने वाली कुछ एजेंसियां इस काम में शामिल बताई जाती हैं. (प्रतीकात्मक फोटो- Reuters)

लोग किराए पर दे रहे फेसबुक अकाउंट, मिल रहा 35 हजार तक कैश
 
buzzfeednews.com की रिपोर्ट के मुताबिक, जिन एजेंसियों को फेसबुक ने विज्ञापन चलाने से बैन कर दिया था, वे आम लोगों को पैसे देकर किराए पर अकाउंट एक्सेस ले रहे हैं. रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इस उदाहरण से ये साबित होता है कि फेसबुक के ऐड प्लेटफॉर्म सिस्टम का किस तरह से दुरुपयोग किया जा सकता है.  (प्रतीकात्मक फोटो- Reuters)
 
लोग किराए पर दे रहे फेसबुक अकाउंट, मिल रहा 35 हजार तक कैश
 
रेंटेड अकाउंट से तुरंत विज्ञापन चलाए जाते हैं और जब फेसबुक उन ऐड और अकाउंट को बंद करता है, तब इसी तरह के दूसरे अकाउंट से नए ऐड चलाए जाते हैं. रेंटेंड अकाउंट से व्यक्ति तुरंत एक पेज बनाता है और विज्ञापन शुरू कर देता है.  (प्रतीकात्मक फोटो- Reuters)
 
लोग किराए पर दे रहे फेसबुक अकाउंट, मिल रहा 35 हजार तक कैश
 
यूजर्स को अकाउंट किराए पर देने के बदले 35 हजार रुपये प्रति महीने तक दिए जाने का दावा किया गया है. ऐड लॉन्ड्रिंग करने वाली एजेंसियां ऐसे लोगों को लैपटॉप तक भेजती है. लैपटॉप में पहले से एक सॉफ्टवेयर इंस्टॉल होता है जिसके जरिए यूजर के अकाउंट के माध्यम से ऐड शुरू कर दिए जाते हैं.  (प्रतीकात्मक फोटो- Reuters)
 
लोग किराए पर दे रहे फेसबुक अकाउंट, मिल रहा 35 हजार तक कैश
 
वहीं, रिपोर्ट के मुताबिक, फेसबुक प्रोडक्ट मैनेजर रॉब लीदर्न ने कहा है कि फेसबुक को इस मामले की जानकारी है. कंपनी पिछले करीब 2 सालों से अकाउंट रेंट पर देने के खिलाफ कार्रवाई कर रही है. ऐसे अकाउंट का पता चलने पर फेसबुक उसे बंद कर देती है.  (प्रतीकात्मक फोटो- Reuters)

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adminJanuary 21, 20191min70

पहली बार चांद पर कोई पौधा उगाया गया है. चीन के नेशनल स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन ने कहा है कि चैंगे-4 मिशन ने कपास का पौधा उगाने में सफलता हासिल की है. अंतरिक्ष रिसर्च के क्षेत्र में ये एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.

चैंगे-4 पहला ऐसा मिशन है जो चंद्रमा के दूरस्थ स्थलों का जायजा लिया. वे जगहें जो धरती से काफी दूरी पर हैं. चैंगे-4 मिशन 3 जनवरी को चंद्रमा पर पहुंचा था. इसका उद्देश्य चंद्रमा की भौगोलिक स्थिति का अध्ययन करना था. इससे पहले इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पर पौधा उगाया गया था, लेकिन चंद्रमा पर नहीं. इस सफलता के बाद आने वाले दिनों में लंबे स्पेस मिशन के दौरान साइंटिस्ट पौधे उगाने की और कोशिशें करेंगे.

इसका मतलब ये हुआ है कि एस्ट्रोनॉट भविष्य में अंतरिक्ष में अपने लिए खाना उगाने में सक्षम हो सकते हैं. इससे सप्लाई के लिए जल्दी धरती पर वापस आने की जरूरत खत्म हो सकती है. चीन के मून लैंडर के जरिए कपास और आलू के बीज भेजे गए थे. पौधे सील किए हुए कंटेनर में उगाए गए हैं. पौधे उगाने में सफलता से ये भी संभावना बढ़ी है कि अंतरिक्ष में सेल्फ सस्टेनिंग एन्वायरमेंट बनाया जा सकता है.

चीन के लुनर मिनी बायोस्फेयर एक्सपेरिमेंट को इस तरह से डिजायन किया गया था जिससे फोटोसिंथेसिस और रेस्पिरेशन प्रोसेस को टेस्ट किया जा सके. इन प्रोसेस के जरिए ही इनर्जी का प्रोडक्शन होता है. ये पूरा एक्सपेरिमेंट 18 सेमी लंबे, 3 किलो के कंटेनर में हुआ. इसे चीन की 28 यूनिवर्सिटी ने मिलकर तैयार किया था.

कंटेनर के भीतर पानी, हवा की सप्लाई की व्यवस्था थी. हालांकि, साइंटिस्ट के लिए सबसे बड़ी मुश्किल टेंपरेचर को कंट्रोल में रखना था. क्योंकि चांद पर -173C से 100C के बीच तापमान में अंतर होता है.


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adminJanuary 21, 20191min100

सोशल मीडिया पर एक तस्वीर वायरल हो रही है जिसमें दुनिया के दूसरे नंबर के सबसे अमीर शख्स लाइन में खड़े दिख रहे हैं. वे काफी वक्त तक दुनिया के सबसे अमीर लोगों की लिस्ट में टॉप पर भी रह चुके हैं. लेकिन अचानक जब वे बर्गर, फ्राइज और कोक के लिए लाइन में खड़े दिखे तो कई लोग चौंक गए. ऐसा करने वाले शख्स का नाम है- बिल गेट्स.

माइक्रोसॉफ्ट के एक पूर्व कर्मचारी ने इस फोटो को फेसबुक पर शेयर किया है. तस्वीर में वे अमेरिका के सिएटल में Dick नाम के रेस्त्रां के बाहर खड़े दिख रहे हैं. इस तस्वीर को पहले माइक्रोसॉफ्ट एलुमनी ग्रुप में पोस्ट किया गया था.

 

 

बिल गेट्स इस वक्त अमेजन के मालिक जेफ बेजॉस के बाद दूसरे सबसे अमीर व्यक्ति हैं. उनकी संपत्ति 68,68,98 करोड़ रुपये है. माइक्रोसॉफ्ट के पूर्व प्रोग्राम मैनेजर माइक गलोस ने फोटो शेयर करते हुए लिखा कि दुनिया के धनी लोग इस तरह व्यवहार करते हैं, न कि व्हाइट हाउस में सोने की टॉयलेट सीट के साथ फोटो क्लिक कराते हुए.

सोशल मीडिया पर कई लोगों ने कमेन्ट करते हुए लिखा कि जो लोग अमीर होने के बाद अपने लिए विशेष सुविधाएं चाहते हैं, उन्हें इस फोटो से सीखना चाहिए. ट्विटर पर @mr_simple22 ने लिखा- जब आप हजारों बर्गर कंपनियों को खरीद सकते हैं, आप अपने बर्गर के लिए लाइन में खड़े होते हैं. वहीं एक अन्य यूजर ने फोटो शेयर करते हुए लिखा- बिल गेट्स की सफलता के पीछे डिक्स बर्गर….



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