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adminApril 11, 20191min00

दुनिया की दिग्गज माइक्रो ब्लॉगिंग साइट ट्विटर के सीईओ जैक डोर्सी ने साल 2018 में कितनी कम सैलरी ली है, यह जानकर आप चौंक जाएंगे. असल में उन्होंने इस पूरे साल में सिर्फ 1.40 डॉलर (करीब 97 रुपये) की सैलरी ली है. यही नहीं, उन्होंने साल 2015 में सीईओ बनने के बाद पहली बार सैलरी ली है, यानी इसके पहले उन्होंने कोई सैलरी नहीं ली.

कंपनी ने यूएस सिक्योरिटीज ऐंड एक्सचेंज कमीशन (SEC) को बताया है कि ट्विटर इंक के सीईओ जैक डोर्सी को साल 2018 में 1.40 डॉलर (करीब 97 रुपये) सैलरी मिली है. डोर्सी ट्विटर के को-फाउंडर भी हैं. वे कंपनी की शुरुआत के दौर में भी दो साल तक सीईओ थे, लेकिन 2008 में उन्होंने इस पद को छोड़ दिया था. साल 2015 में वह फिर से ट्विटर के प्रमुख बने. इसके बाद 2015, 2016 और 2017 में कंपनी की तरफ कोई भी सैलरी या बेनिफिट नहीं लिया. इसके अलावा उन्हें मोबाइन पेमेंट कंपनी ‘स्क्वायर’ से भी 2.75 डॉलर सालाना की सैलरी मिलती है. दिसंबर 2018 में डोर्सी ने स्क्वायर के अपने 17 लाख शेयर बेचे थे. फोर्ब्स के मुताबिक उन्हें इससे करीब 8 करोड़ डॉलर की कमाई हुई थी. फिलहाल उनका कुल नेटवर्थ करीब 4.7 अरब डॉलर का है, जिसमें करीब 3.9 अरब डॉलर मूल्य के स्क्वायर के 6.1 करोड़ शेयर भी शामिल हैं. ट्विटर के भी डोर्सी के पास करीब 60 करोड़ डॉलर मूल्य के शेयर हैं. उन्होंने इसके कोई शेयर नहीं बेचे हैं, जबकि ट्विटर के दूसरे को-फाउंडर इवान विलियम्स ने अप्रैल 2018 से अब तक अपने पास मौजूद ट्विटर के करीब 50 फीसदी शेयर बेच दिए या दान कर दिए हैं.

हालांकि डोर्सी अकेले ऐसे व्यक्ति नहीं हैं जो 1 डॉलर के आसपास की सैलरी लेते हों. फेसबुक के सीईओ मार्क जुकरबर्ग, ओरेकल के लैरी एलिसन और गूगल के लैरी पेज एवं सर्जे ब्रिन भी साल में एक डॉलर की सैलरी लेते हैं. साल 2012 में मार्क जुकरबर्ग ने सालाना सैलरी और बोनस के रूप में 7.70 लाख डॉलर लिए थे, अब वह सबसे कम वेतन हासिल करने वाले फेसबुक कर्मचारी हैं.

एक डॉलर सैलरी क्यों लेते हैं बड़े अधिकारी

अमेरिकी कंपनियों के बड़े अधिकारियों में प्रतीकात्मक रूप में एक डॉलर के आसपास की सैलरी लेने का रिवाज चल पड़ा है. असल में उनकी शेयरों से या अन्य तरीकों से इतनी कमाई होती है कि वे सैलरी न लेकर कंपनी के कर्मचारियों को अच्छा संदेश देना चाहते हैं.  इसलिए प्रतीकात्मक रूप से वे एक डॉलर की सैलरी लेते हैं. 19वीं सदी की शुरुआत में जब जंग का माहौल था, तब भी अमेरिकी कंपनियों के शीर्ष अधिकारियों ने एक डॉलर का वेतन लेने का चलन शुरू किया था. इतनी कम सैलरी लेने से यह संकेत मिलता है कि सीईओ अपना पूरा ध्यान कंपनी के शेयरों के मूल्य बढ़ाने पर लगाएगा, क्योंकि उसको कमाई इन शेयरों से ही होती है.


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adminApril 8, 20191min00

टोक्यो के एक रेस्त्रां में दुनिया के सबसे महंगे बर्गर की बिक्री शुरू हो गई है. इसे Oak Door स्टीकहाउस में काम करने वाले शेफ पैट्रिक शिमादा ने तैयार किया है. इसे बनाने के लिए खास चीजों का इस्तेमाल किया गया है.

दुनिया का सबसे महंगा बर्गर, कीमत 63000, तीन दिन पहले होगी बुकिंग

दुनिया के सबसे महंगे बर्गर की बिक्री करीब 63 हजार रुपये में हो रही है. इसकी बिक्री जून तक ही की जाएगी. इसका नाम गोल्डेन जॉयंट बर्गर रखा गया है.

दुनिया का सबसे महंगा बर्गर, कीमत 63000, तीन दिन पहले होगी बुकिंग

इस बर्गर को बनाने के लिए बीफ स्लाइस, चीज, टोमैटो और अन्य आइटम का इस्तेमाल किया गया है. लेकिन इसमें सबसे खास है डस्टेड गोल्ड से बना हुआ इसका बन.

दुनिया का सबसे महंगा बर्गर, कीमत 63000, तीन दिन पहले होगी बुकिंग

यह बर्गर 6 इंच चौड़ा और 10 इंच लंबा है. इसे जापान के क्राउन प्रिंस नरुहितो के पद संभालने के सेलिब्रेशन के सिलसिले में तैयार किया गया है.

दुनिया का सबसे महंगा बर्गर, कीमत 63000, तीन दिन पहले होगी बुकिंग

जो भी व्यक्ति इस बर्गर का ऑर्डर करना चाहता है, उसे तीन दिन एडवांस में बुकिंग करनी होगी. इसे बनाने वाले शेफ पैट्रिक ने कहा कि जापान नए इम्पीरियल एरा में प्रवेश कर रहा है. ये मौका जिंदगी में एक बार आता है और इसलिए उन्होंने कुछ खास करने का सोचा.


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adminApril 3, 20191min00

दुनिया भर में सऊदी अरब की इस कंपनी ने साल 2018 में कमाई का सारा रिकॉर्ड तोड़ दिया है. सऊदी अरामको नाम की इस कंपनी ने 2018 में कुल 111.1 अरब डॉलर (7.66 लाख करोड़ रुपये) की कमाई की है. आप सोच रहे होंगे कि इतनी कमाई करने वाली यह कंपनी पहले सुर्खियों में क्यों नहीं थी? इसकी वजह यह है कि कंपनी किसी स्टॉक एक्सजेंच में रजिस्टर नहीं है. हालांकि पिछले साल यह कंपनी आईपीओ जारी करने वाली थी.

1. कंपनी की खासियत: सऊदी अरामको (Saudi Aramco) दुनिया की सबसे बड़ी तेल उत्पादक कंपनी के रूप में जानी जाती है. इस कंपनी का मुनाफा एप्पल, अल्फाबेट और एग्जॉन से काफी ज्यादा है. एग्जॉन मोबिल अमेरिका की सबसे बड़ी तेल तेल कंपनी है. आंकड़ों के मुताबिक साल 2018 में इस कंपनी का मुनाफा एप्पपल से 46 फीसदी ज्यादा था. 2018 में एप्पल की कमाई 59.5 अरब डॉलर थी.

2. सऊदी सरकार के लिए संजीवनी: सऊदी अरामको के पास दुनिया के कई बड़े तेल क्षेत्र हैं और कंपनी को यह बेहद सस्ते में मिले हैं. 2018 में अरामको ने सऊदी सरकार को 160 अरब डॉलर की रकम दी थी. वहीं क्राउन प्रिंस सलमान चाहते हैं कि अरामको दो ट्रिलियन डॉलर की कंपनी बनकर उभरे. भारत की कुल अर्थव्यवस्था पांच ट्रिलियन डॉलर की है.

3. पहली बार कमाई की घोषणा: सऊदी अरामको कंपनी ने पहली बार अपनी कमाई की घोषणा की है. कंपनी की तरफ से जारी किए गए वित्तीय नतीजों के अनुसार सालभर में अरामको का कुल रेवेन्यू 355.9 अरब डॉलर रहा. दिसंबर 2018 के अंत तक इस कंपनी के पास 48.8 अरब डॉलर की नकदी थी.

4. कंपनी का अगला प्लान: कंपनी का अगला प्लान बॉन्ड बेचकर 10 अरब डॉलर जुटाना का है. सऊदी अरब सरकार के लिए यह कंपनी आय का बड़ा जरिया है. क्रेडिट रेटिंग एजेंसी मूडीज और फिंच की मानें कुल टैक्स का 50 फीसदी सरकार को इसी कंपनी से मिलती है. फिंच के मुताबिक 2015-17 तक देश का 70 फीसदी रेवेन्यू इसी कंपनी से था.

5. कंपनी का इतिहास: दुनिया भर में आज अपनी कमाई को लेकर चर्चित इस कंपनी की स्थापना अमरीकी तेल कंपनी ने की थी. अरामको यानी ‘अरबी अमरीकन ऑइल कंपनी’ का सऊदी अरब ने 1970 के दशक में राष्ट्रीयकरण कर दिया था. हालांकि यह कंपनी पारदर्शिता को लेकर विवादों में भी रही है.


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adminApril 1, 20191min00

घूमना और खाना किसे पसंद नहीं होता. अगर आप भी इन्हीं लोगों में से हैं, तो आपके लिए एक बेस्ट जॉब का ऑफ़र है. इसमें बस आपको घूमना है और वेगन फ़ूड यानी शाकाहारी खानों की तलाश करनी है. इसके लिए कंपनी आपको 46 लाख रुपये सालाना तक देने को तैयार है. सैलरी के अलावा आपके सारे ख़र्च कंपनी ही उठाएगी.

इस जॉब का ऑफ़र दे रही है यूके की Vibrant Vegan Co. ये कंपनी “Director of Taste” की पोस्ट के लिए ऐसे कैंडिडेट की तलाश कर रही है, जिसे दुनिया घूमने और नई-नई रेसिपीज़ ट्राई करना पसंद हो.

सेलेक्टेड कैंडिडेट को कंपनी भारत, चीन, चिली, मैक्सिको और जापान के टूर पर भेजेगी. यहां जाकर उसे कंपनी के लिए अलग-अलग प्रकार के वेगन फ़ूड की तलाश करनी होगी. इसके बाद लोकल वेंडर से मिलकर उस रेसिपी में पड़ने वाली सभी सामग्री को यूके पहुंचाने के सारे इंतज़ाम करने होंगे.

इस काम के लिए कैंडिटेट को 48 लाख रुपये दिए जाएंगे. उसे सप्ताह में 35 घंटे काम करना होगा और आने-जाने और रहने-खाने का ख़र्च कंपनी ही उठाएगी. इसके साथ ही चुने गए शख़्स को सालभर में 28 अधिकारिक छुट्टियां देने की भी बात कही गई है.

कम्पनी के फ़ाउंडर Burke-Hamilton ने एक इंटरव्यू में इसके बारे में बात करते हुए कहा- ‘दुनियाभर के सैंकड़ों Ingredients और Recipes से अभी तक यूके के उपभोक्ता वंचित हैं. मुझे उम्मीद है हमारा नया साथी दुनियाभर का स्वाद हमारी फ़ूड चेन में शामिल करने में कामयाब होगा.’


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adminMarch 29, 20194min00

लाखों छात्रों का सपना होता है कि उन्हें गूगल, फेसबुक और माइक्रोसॉफ्ट जैसी शीर्ष वैश्विक कंपनियों में काम करने का मौका मिले. ऐसे में वह IIT में एडमिशन लेने के लिए दिन रात मेहनत करते हैं और अगर वह IIT में एडमिशन लेने में असफल हो जाते हैं तो उन्हें लगता है कि वह कभी एक बड़ी कंपनी में नौकरी नहीं कर सकते, ऐसे में वह अपना सपना छोड़ देते हैं. लेकिन अब्दुल्ला खान ने ऐसा नहीं किया. वह IIT के छात्र नहीं है फिर उन्हें गूगल ने एक करोड़ रुपये से ज्यादा का पैकेज ऑफर किया है. आइए जानते हैं कौन हैं ये लड़का और कैसे मिली ये नौकरी. अब्दुल्ला खान की उम्र 21 साल की है. वह मुबंई में रहते हैं और इंजीनियरिंग स्टू़डेंट हैं. बता दें, वह सितंबर में 1.2 करोड़ रुपये के सालाना पैकेज पर गूगल के लंदन के ऑफिस में  शामिल होंगे.

खान “श्री एलआर तिवारी इंजीनियरिंग कॉलेज”, मीरा रोड, मुंबई से अपनी इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है.

गूगल में कभी नहीं किया अप्लाई, फिर भी मिली 1. 2 करोड़ की नौकरी

कमाल की बात ये हैं उन्होंने गूगल की नौकरियों के लिए आवेदन नहीं किया था. कंपनी के द्वारा उन्हें इंटरव्यू के लिए बुलाया गया था. जब उन्होंने “प्रतिस्पर्धी प्रोग्रामिंग चुनौतियों” (competitive programming challenges) को होस्ट करने वाली साइट पर खान की प्रोफाइल देखी. जिसके बाद उन्हें गूगल से कॉल आया.

गूगल में कभी नहीं किया अप्लाई, फिर भी मिली 1. 2 करोड़ की नौकरी

“टाइम्स ऑफ इंडिया” की रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने  बताया कि गूगल से आया हुआ कॉल की मुझे उम्मीद नहीं थी. ये कॉल मेरे लिए अचानक से आया था.

गूगल में कभी नहीं किया अप्लाई, फिर भी मिली 1. 2 करोड़ की नौकरी

खान ने कहा- जब उन्होंने प्रतियोगिता में भाग लिया, तो उन्होंने नौकरी की उम्मीद नहीं की, बल्कि मजे के लिए मैंने प्रतियोगिता में हिस्सा लिया था. पिछले नवंबर में उन्हें गूगल की ओर से एक आधिकारिक ईमेल प्राप्त हुआ. जिसके बाद खान की जिंदगी पूरी तरह से बदल गई.

ईमेल ने उन्हें सूचित किया गया था कि कंपनी ने वेबसाइट पर उनकी प्रोफाइल देखी है और वे पूरे यूरोप के लोगों की तलाश कर रहे हैं. इसके बाद कुछ ऑनलाइन इंटरव्यू हुए. जिसके बाद फाइनल स्क्रीनिंग के लिए लंदन में Google के कार्यालय में गए.

बता दें, खान को कोडिंग में मजा आता है. उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा सऊदी अरब से पूरी की है.  वह अपनी कक्षा 12 के बाद मुंबई चले गए और आईआईटी पास करने की कोशिश की, लेकिन नहीं कर पाए. लेकिन उनके इस सफर में ये जानने का मौका मिलता है कि इंसान को मौका उनके हूनर से मिलता है न की किसी बड़े संस्थान में पढ़ाई करने से. बता दें खान सितंबर में लंदन में गूगल की साइट “विश्वसनीयता इंजीनियरिंग”,  (reliability engineering) टीम में शामिल होंगे


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adminMarch 28, 20191min00

साल 1881 को स्पेन के मलागा शहर में पाब्लो पिकासो का जन्म हुआ. पिकासो को बचपन से ही चित्र बनाना बेहद पसंद था. वो अक्सर अपने दोस्तों के विचित्र  चित्र बनाकर सबको अचरज में डाल देते थे. 20 साल पहले पाब्लो पिकासो की एक पेंटिग चोरी हो गई थी जो अब मिल गई है. आर्थर ब्रांड की मानें तो यह पेंटिग साल 1999 में एक सऊदी शेख के जहाज से चोरी होने के बाद कई सालों तक डच अंडरवर्ल्ड के अपराधियों के बीच घूमती रही.

‘डोरा मार’ नाम की इस पेंटिग को साल 1938 में चित्रित किया गया था, जिसकी कीमत आज लगभग 449 करोड़ आंकी जा रही है. दरअसल  डोरा मार पाब्लो पिकासो से बेहद प्यार करती थी. पाब्लो पिकासो की बनाई यह पेंटिंग साल 1973 तक डोरा के घर में उनकी मृत्यु तक टंगी हुई थी.

आर्थर ब्रांड पिछले साल सेंट मार्क के बीजान्टिन मोजेक को पकड़ने की वजह से सुर्खियों में आए थे. जिसे साल 1970 के दशक में साइप्रस के एक चर्च से पकड़ा गया था. आर्थर ब्रांड के अनुसार पिकासो की इस पेंटिंग को कई सालों से संपार्श्विक के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा था.

डच अखबार डी वोल्क्सक्रान्ट से बात करते हुए आर्थर ब्रांड कहते हैं, “सभी को यह लगने लगा था कि यह पेंटिग नष्ट हो गई है , जैसा कि ज्यादातर 90 प्रतिशत चोरी हुए कला से जुड़ी वस्तुओं के साथ होता है. ऐसा इसलिए भी है क्योंकि इस तरह की वस्तुओं को बेचा नहीं जाता है. अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए आर्थर ने कहा कि इस पेंटिंग को बरामद करने के बाद, उन्होंने इसे अपने घर की दीवार पर रातभर लटकाकर इस पेंटिग का आनंद उठाया.

ब्रांड ने बताया कि इस पेंटिग की खोज  साल 2015 में शुरू हुई जब उन्होंने किसी से सुना कि पिकासो की एक पेंटिग जिसे जहाज से चुराया गया था वो  नीदरलैंड में अपराधियों के पास है. उन्होंने बताया हालांकि उस समय तक उन्हें यह भी नहीं पता था कि यह पेंटिग किस बारे में है. उन्होंने बताया कई वर्षों की खोज के बाद, उन्हें पता चला कि यह पेंटिंग डोरा मार की है.

डोरा मार का जन्म साल 1907 में थियोडोरा मार्कोविच में हुआ था. डोरा एक प्रसिद्ध फोटोग्राफर और कलाकार थीं. डोरा मार और पिकासो का करीबी रिश्ता करीब नौ सालों तक चला था. पिकासो ने 1939 में डोरा की ये तस्वीर बनाई थी. तब पिकासो 58 साल के थे और डोरा 31 की. डोरा साल 1936 से लेकर 1943 तक पिकासो के साथ रिश्ते में रहीं. लेकिन 1997 में 89 वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया. बता दें, इस पेंटिंग को कोरल आईलैंड से सऊदी अरब के शेख अब्दुल मोहसिन अब्दुलमालिक अल-शेख की लग्जरी याट से चुराया गया था.

ब्रांड ने बताया कि अब वो जानते थे कि उन्हें पिकासो की किस कलाकृति की तलाश है. जिसकी वजह से  अब वो आसानी से ऐसे लोगों तक पहुंच सकते थे जो अनजाने में इस पेंटिग को खरीद सकते थे. जिसके बाद  इस महीने की शुरुआत में ही उन्हें एक उम्मींद की किरण दिखी. कुछ समय बाद एक डच व्यापारी के दो प्रतिनिधियों ने उनसे संपर्क करते हुए बताया कि उनके क्लाइंट  के पास एक पेंटिंग है. जिसके बाद वो एम्स्टर्डम में मौजूद उसके फ्लैट में एक चादर में लपेटकर उस पेंटिग को लाए.

फ्रांस और नीदरलैंड की पुलिस के अनुसार वो पेंटिंग के आखिरी मालिक के खिलाफ मुकदमा नहीं चला सकती है. यह अब एक बीमा कंपनी द्वारा आयोजित किया जा रहा है, जो यह तय करेगा कि आगे क्या करना है.


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adminMarch 27, 20191min00

ऐसा कई बार होता है कि आप सोते रह जाते हैं तो किसी काम में लेट हो जाते हैं. लेकिन ब्रिटेन में एक मामला सामने आया है, जहां एक लड़की एक-दो घंटे नहीं बल्कि करीब 3 हफ्तों तक सोती रही. इतनी लंबी नींद की वजह से उसके कई अहम काम छूट गए और यहां तक कि वो परीक्षा देने के लिए भी नहीं उठ सकी. यह परीक्षा उसकी यूनिवर्सिटी की अहम परीक्षा थी, जिसमें वो हिस्सा नहीं ले सकी,

हालांकि ऐसा नहीं है कि यह लड़की शौक से इतनी देर सोती है. Rhoda Rodriguez Diaz नाम की इस लड़की को रेयर सिंड्रोम है, जिसकी वजह से उसे काफी नींद आती है. रिपोर्ट्स के अनुसार यह लड़की एक बार की नैप में भी 21 घंटे तक की नींद लेती है. लोगों का मानना है कि वो आलसी है, जिस वजह से वो सोती रहती हैं. Rhoda अभी सेकेंड ईयर में है और कई बार उन्हें नींद की वजह से दिक्कतों का सामना करना पड़ता है.

अपनी नींद से परेशान Rhoda ने पहले इसका इलाज करवाया, लेकिन कुछ फायदा नहीं हुआ. बताया जा रहा है कि बीते साल सितंबर में उन्हें पता चला था कि वो कोई सिंड्रोम से पीड़ित हैं, जिसकी वजह से उन्हें काफी नींद आती है. हालांकि डॉक्टर्स का कहना है कि ये एक न्यूरोलॉजी बीमारी है और उम्र के साथ-साथ ये सिंड्रोम का असर कम होता जाता है.

Rhoda का कहना है कि जब मैं सो रही होती हूं, तो जीवन चलता रहता है. वास्तविकता यह है कि जब मैं उठती हूं, तो महसूस होता है कि मैंने अपने जीवन का एक हफ्ता मिस कर दिया. उन्होंने बताया कि जब वो छोटी थी, तो वह अपने दोस्तों के साथ समय बिताने में असमर्थ


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adminMarch 20, 20191min00

पूरी दुनिया जलवायू परिवर्तन के गंभीर संकट से जूझ रही है। पर्यावरणविदों का मानना है कि अगर सही समय पर कार्बन उत्सर्जन को कम करने के प्रयास नहीं किए गए को पृथ्वी के सभी जीवों का अस्तित्व खतरे में आ जाएगा। धरती को बचाने के लिए दुनियाभर में कई तरह के आंदोलन चल रहे हैं। इस कड़ी में नया नाम जुड़ा है महज 16 साल की उम्र में जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को रोकने के लिए आवाज उठाने वाली ग्रेटा थनबर्ग का। स्वीडिश पर्यावरण एक्टिविस्ट ग्रेटा को हाल ही में नोबल शांति पुरस्कार के लिए नामित किया गया है।

ग्रेटा ने अगस्त 2018 में स्वीडिश संसद के बाहर पर्यावरण को बचाने के लिए स्कूल स्ट्राइक की थी। स्कूल की यह हड़ताल इतनी चर्चा में रही कि पूरी दुनिया के स्कूली बच्चों ने इसमें हिस्सा ले लिया। अब इस आंदोलन में लगभग 100,000 स्कूली बच्चे शामिल हो गए हैं। इतना ही नहीं ग्रेटा को नोबल शांति पुरस्कार के लिए भी नामित कर दिया गया है। तीन नॉर्वेजियन सांसदों ने ग्रेटा को नोबल अवॉर्ड के लिए नामित किया गया है। इस बार 2019 में नोबल पुरस्कार पाने की दौड़ में 301 उम्मीदवार हैं जिसमें 223 व्यक्ति और 78 संगठन शामिल हैं।

थनबर्ग ने स्टॉकहोम, हेलसिंकी, ब्रुसेल्स और लंदन समेत कई देशों में अलग-अलग मंचो पर जाकर जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए आवाज उठाई। आपको बता दें कि ग्रेटा ने सिर्फ नौ साल की उम्र में क्लाइमेट एक्टिविजम में हिस्सा लिया था, जब वे तीसरी कक्षा में पढ़ रही थीं। द न्यू यॉर्कर से बात करते हुए ग्रेटा ने कहा, ‘बिजली बल्ब बंद करने से लेकर पानी की बर्बादी रोकने और खाने को न फेंकने जैसी बातें मैं हमेशा से सुनती आई थी। जब मैंने इसकी वजह पूछी तो मुझे बताया गया कि जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए ऐसा किया जा रहा है। मुझे यह जानकर हैरानी हुई कि लोग इसके बारे में कम ही बात करते हैं। अगर हम इंसान जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को रोक सकते हैं तो हमें इसके बारे में बात करनी चाहिए।’

पिछले साल दिसंबर में पोलैंड के काटोविस में संयुक्त राष्ट्र की COP24 बैठक में भी ग्रेटा ने हिस्सा लिया था और पर्यावरण पर भाषण दिया था। इस मंच से ग्रेटा ने कहा, ‘हम दुनिया के नेताओं से भीख मांगने नहीं आए हैं। आपने हमें पहले भी नजरअंदाज किया है और आगे भी करेंगे। अब हमारे पास वक्त नहीं है। हम यहां आपको यह बताने आए हैं कि पर्यावरण खतरे में है।’ ग्रेटा के इस भाषण को कार्यकर्ताओं के साथ-साथ राजनीतिक नेताओं ने भी खूब सराहा। ग्रेटा ने दावोस में भी भाषण दिया था।

इतना ही नहीं ग्रेटा ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी एक वीडियो के जरिए संदेश भेजा था। स्वीडन की इस छात्रा ने पीएम नरेंद्र मोदी को जलवायु परिवर्तन को लेकर गंभीर कदम उठाने की मांग की थी। आज ग्रेटा से प्रभावित होकर लगभग 2,000 स्थानों पर पर्यावरण को बचाने को लेकर प्रदर्शन हो रहे हैं। ग्रेटा ने अपनी बात लोगों तक पहुंचाने के लिए ट्विटर का सहारा लिया है। अगर ग्रेटा को नोबल पुरस्कार मिल जाता है तो वह यह पुरस्कार पाने वाली सबसे कम उम्र की शख्सियत बन जाएगी। इसके पहले मलाला युसुफजई ने सिर्फ 17 वर्ष की उम्र में नोबल पुरस्कार जीता था।


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adminMarch 19, 20191min00

भारतीय प्रतिभाओं ने अपनी काबिलियत के दम पर दुनियाभर में अपनी पहचान बनाई है। इस कड़ी में नया नाम है लिडियन नादस्वरम का। मूल रूप से चेन्नई में रहने वाले लिडियन नादस्वरम ने पियानो के कीबोर्ड पर अपनी कारीगरी दिखाते हुए। अमेरिकी रियलिटी शो ‘द वर्ल्ड्स बेस्ट’ का खिताब जीता है। उन्होंने दक्षिण कोरिया के द फ्लाइंग ताइक्वांडो मास्टर्स ‘कुकीवोन’ को हराकर प्रतिष्ठित खिताब और 10 लाख अमेरिकी डॉलर का नकद पुरस्कार भी जीता।

लिडियन के पिता वर्शन सतीश तमिल फिल्मों के जाने माने संगीतकार हैं। लिडियन ने संगीत की तालीम अपने गुरू और देश के जाने माने संगीतकार एआर रहमान से ली है। लिडियन अनोखे तरीके से पियानो बजाकर सबको हैरत में डाल देते हैं। रियालिटी शो ‘द वर्ल्ड्स बेस्ट’ में उन्होंने आंखों पर काली पट्टी बांधकर बिजली की गति से दो पियानो एक साथ बजाकर सबको चकित कर दिया।

इस शानदार जीत के बाद एआ रहमान ने लिडियन की जमकर तारीफ की। उन्होंने अपने सोशल मीडिया हैंडल पर लिडियन की तारीफ में कसीदे पढ़े। लिडियन एआर रहमान की म्यूजिक अकैडमी केएम म्यूजिक कंजर्वेट्री के छात्र हैं। अपने पियानो बजाने की इस अनोखी तकनीक के जरिए वे दुनियाभर में लोगों का दिल जीतने के साथ ही कई अवॉर्ड जीत चुके हैं।

लिडियन ने एक शो में बात करते हुए बताया कि उन्होंने दो साल की उम्र से ही ड्रम बजाना शुरू कर दिया था। इसके बाद वे अपने पिता वर्शन सतीश के साथ पब्लिक कंसर्ट्स में जाना शुरू कर दिया। लिडियन की बड़ी बहन अमृतवर्षिनी पियानो बजाती थीं जिन्हें देखकर उनके मन में पियानो बजाने की इच्छा जागृत हुई। लिडियन ने चार साल पहले ही पियानो बजाना शुरू किया है। वे अपनी बहन को ही इसके लिए प्रेरणास्रोत मानते हैं

इस जीत के बाद लिडियन ने बताया, ‘मेरे लिए यह गौरव की बात है कि मुझे एक बड़े अतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी कला का प्रदर्शन करने का मौका मिला। मैंने इस कॉम्पिटिशन के लिए काफी प्रैक्टिस की थी।’


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adminMarch 18, 20191min00

टेक्सास के ह्यूस्टन में एक महिला ने छह बच्चों को एकसाथ जन्म दिया है. न्यूज एजेंसी भाषा के मुताबिक, दुनियाभर में 4.7 अरब में से कोई एक मामला ही ऐसा होता है जब कोई महिला छह बच्चों को जन्म देती है.

महिला ने अमेरिका के ‘द वुमेन्स हॉस्पिटल ऑफ टेक्सास’ में छह बच्चों को जन्म दिया. अस्पताल ने बताया कि थेलमा चैका ने शुक्रवार को स्थानीय समयानुसार सुबह चार बजकर 50 मिनट से सुबह चार बजकर 59 मिनट के बीच चार लड़कों और दो लड़कियों को जन्म दिया, थेलमा स्वस्थ है.

 

 

अस्पताल के बयान के अनुसार बच्चों का वजन 790 ग्राम से लेकर 1.3 किलो के बीच है. उनकी हालत स्थिर है और अस्पताल की नवजात गहन देखभाल इकाई में उन्हें रखा गया है. थेलमा ने अपनी बेटियों का नाम जीना और जुरियल रखा है, उन्होंने अपने चारों बेटों का नाम अभी नहीं रखा है.

 

जब महिला ने दिया था 7 बच्चे को जन्म

कुछ वक्त पहले इराक से भी एक मां का ऐसा ही मामला सामने आया था. तब 25 साल की महिला ने एक ही साथ 6 बेटी और एक बेटे को जन्म दिया. पूर्वी इराक के दियाली प्रोविन्स के एक हॉस्पिटल में महिला ने बच्चों को जन्म दिया. बच्चों के पिता यूसेफ फैदल ने कहा था कि उन्होंने परिवार बढ़ाने की प्लानिंग नहीं की थी और अब 10 बच्चों की देखभाल करनी होगी.

 

 

वहीं, ऐसा माना जाता है कि दुनिया में सात जीवित बच्चों को एक साथ जन्म देने की घटना पहली बार अमेरिका के लोवा राज्य में हुई थी. यह 1997 की बात है.  अमेरिका की घटना में कपल के फर्टिलिटी ट्रीटमेंट के बाद बच्चों का जन्म हुआ था. जब ये सामने आया कि महिला 7 बच्चों के साथ प्रेग्नेंट हो गई है, तब उन्होंने कुछ बच्चों का अबॉर्शन कराने से मना कर दिया था और कहा था कि अब उनकी जिंदगी भगवान के हाथ में है.



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