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adminFebruary 4, 20191min50

सभी माता-पिता अपने बच्चे का भविष्य उज्ज्वल बनाना चाहते हैं. इसके लिए वो हर मुमकिन कोशिश भी करते हैं. हम आपको कुछ टिप्स बता रहे हैं, जिन्हें फॉलो करके आप अपने बच्चे को इंटेलिजेंट बना सकते हैं

सभी माता-पिता अपने बच्चे के भविष्य को लेकर चिंतित रहते हैं. अपने बच्चों को सही दिशा देने और उन्हें समझदार बनाने के लिए कई प्रयत्न करते हैं. बच्चों की रुचि पढ़ाई में पैदा करने और उन्हें इंटेलिजेंट बनाने के लिए माता-पिता उनकी पढ़ाई पर अधिक जोर देते हैं. बच्चे को मानसिक तौर पर सक्षम और इंटेलिजेंट बनाने के लिए शुरुआत से ही कोशिश करनी चाहिए, क्योंकि इसी दौरान बच्चे का दिमाग विकसित होता है. हम आपको कुछ टिप्स बता रहे हैं, जिन्हें फॉलो करके आप अपने बच्चे को इंटेलिजेंट बना सकते हैं, आइए जानें कैसे….

1. अपने बच्चे से बात करें– बच्चे को इंटेलिजेंट बनाने में कम्युनिकेशन स्किल्स बहुत मायने रखते हैं. बच्चे से बात करने से आपके और बच्चे के बीच रिश्ता मजबूत तो होता है साथ ही बच्चे में आत्मविश्वास भी आता है. अपने बच्चे को शुरुआत से ही हेल्दी वर्बल एक्टिविटी का हिस्सा बनाएं. उनसे इंग्लिश, हिंदी या अपनी भाषा के अनुसार बात करें, ताकि आगे चलकर भाषा उनके करियर में रुकावट ना बने.

2. घर में पॉजिटिव माहौल बनाएं- बच्चे को घर में एक अच्छा माहौल दें, ताकि चीजों के प्रति बच्चे की सोच भी पॉजिटीव रहे. बच्चे को शुरुआत से ही आत्मनिर्भर बनने दें. बच्चे के साथ खेलें, उनकी परेशानियों को जानने की कोशिश करें. इस तरह बच्चे में कॉन्फिडेंस बढ़ेगा.

3. बच्चों की उम्र के हिसाब से खिलौने चुनें- बच्चों के लिए खिलौने चुनते समय उनकी उम्र का ध्यान दें. क्योंकि खिलौनों का असर बच्चों के मानसिक विकास पर पड़ता है. खिलौने बच्चे को खुश भी कर सकते हैं और उन्हें उदास भी. हमेशा ऐसे खिलौने चुनें, जिससे बच्चे को ज्ञान संबंधित जानकारी भी मिले.

4. बच्चे को घर में भी पढ़ाएं- बच्चे के स्कूल जाकर कॉपी-किताब से पढ़ने का इंतजार न करें, बल्कि खेल के साथ बच्चों को इंग्लिश अल्फाबेट्स, काउंटिंग सिखाते रहें. आप खिलौनों के माध्यम से भी बच्चों को पढ़ा सकते हैं. इससे शुरुआत से ही बच्चों की समझ बढ़ेगी और बच्चा इंटेलिजेंट बनेगा.


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adminFebruary 1, 20191min70

बेली फैट कम करने के लिए प्लैंक एक्सरसाइज असरदार मानी जाती है लेकिन इसे कितनी देर तक और कैसे करना चाहिए?

 

बेली फैट कम करना कोई आसान काम नहीं है. अधिकतर लोगों के शरीर में सबसे ज्यादा फैट पेट पर ही जमा होता है लेकिन लाख कोशिशें करने के बावजूद भी तोंद कम नहीं होती है. बेली फैट कम करने के लिए कई एक्सरसाइज हैं, इन्हीं एक्सरसाइज में से एक एक्सरसाइज है- प्लैंक.

प्लैंक कैलोरी बर्न करने के लिए बेहतरीन एक्सरसाइज है. प्लैंक की पोजिशन में कई सारी मांसपेशियां एक साथ ऐक्टिव होती हैं जिससे पूरे शरीर को फायदा होता है. फ्लैट टमी के अलावा इस एक्सरसाइज से आपके शरीर का पोस्चर भी सुधरता है. प्लैंक भले ही आपको देखने में आसान लगे लेकिन इसे करना थोड़ा सा मुश्किल है. इस एक्सरसाइज में सबसे ज्यादा जरूरत संतुलन की होती है. जितने ज्यादा समय के लिए आप प्लैंक पोजिशन में खुद को रख सकते हैं, उतना ही आपकी सेहत के लिए अच्छा है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर आप 60 सेकेंड तक प्लैंक 3 बार करते हैं तो इससे बेली फैट कम करने में मदद मिलती है.

फिजिकल ट्रेनर्स के मुताबिक, 60 सेकेंड तक प्लैंक होल्ड करने से आपको बेहतर रिजल्ट मिलेंगे. शुरुआत में आपके लिए 60 सेकेंड तक प्लैंक करना थोड़ा मुश्किल हो सकता है लेकिन धीरे-धीरे अभ्यास के साथ आप इस एक्सरसाइज को कर सकेंगे.

एक बात ध्यान में रखें कि प्लैंक की पोजिशन सही रखें. सिर से लेकर पैर तक, आपका शरीर एक सीधी रेखा में होना चाहिए. थोड़ा सा ऊपर या नीचे रहने से प्लैंक असरदार साबित नहीं होगा.


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adminJanuary 28, 20191min240

आधुनिक जीवन में ज्यादातर युवाओं में देर रात तक पार्टी करना, दोस्तों के साथ घूमना, फिल्म एंजॉय करने का ज्यादा क्रेज होता है. वहीं, जिन लोगों को अकेले समय बिताना पसंद होता है, उन्हें एंटी-सोशल का टैग दे दिया जाता है. लेकिन हाल ही में हुई स्टडी में एक चौंकाने वाली बात सामने आई है.

स्टडी की रिपोर्ट के मुताबिक, अगर आप देर रात पार्टी करने के बजाए अपने घर पर रहकर कोई अच्छी किताब पड़ने को ज्यादा अहमियत देते हैं तो ये आपके इंटेलिजेंट होने की पहचान है.

सिंगापुर मैनेजमेंट यूनिवर्सिटी और लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स के शोधकर्ताओं के मुताबिक, इंटेलिजेंट लोग घूमने के बजाए खुद के साथ टाइम स्पेंड करने को ज्यादा अहमियत देते हैं.

इस स्टडी में शोधकर्ताओं ने 18 से 28 वर्ष के लगभग 15,000 से अधिक लोगों को शामिल किया. इसमें शोधकर्ताओं ने ये जानने की कोशिश कि आखिर ये लोग कितनी आबादी वाली जगहों पर रहते हैं और कितना अपने दोस्तों के साथ घूमते हैं. इसके साथ शोधकर्ताओं ने ये भी पता लगाया कि कितने लोग अपने जीवन से संतुष्ट हैं.

नतीजों में सामने आया कि जो लोग कम आबादी वाली जगहों पर रहते हैं, वे दूसरे लोगों के मुकाबले ज्यादा खुश होते हैं. वहीं, इनमें से कई लोगों को सिर्फ खास लोगों से मिलने पर ही खुशी का एहसास हुआ.

इस स्टडी के लिए शोधकर्ताओं ने ‘द सवाना थ्योरी ऑफ हैप्पीनेस’ पर अपने निष्कर्षों को आधार बनाया है. इस थ्योरी के मुताबिक, जीवन में एक व्यक्ति की संतुष्टि सिर्फ वर्तमान में होने वाली घटनाओं पर निर्धारित नहीं होती है, बल्कि इस बात से भी प्रभावित होती है कि हमारे पूर्वज ऐसी स्थिति में किस तरह रिएक्ट करते थे.

इस थ्योरी के मुताबिक, हमारे पूर्वजों को दूसरे लोगों के साथ समय बिताना काफी पसंद था और वो अपने जीवन में किसी के साथ समय बिताने को खास अहमियत देते थे. ठीक उसी तरह मौजूदा दौर में भी कई लोगों को अकेले रहना पसंद नहीं होता है और ऐसे लोग किसी ना किसी की कंपनी पाने की तलाश में रहते हैं.

लेकिन इसके विपरीत साइकोलॉजिस्ट का मानना है कि इंटेलिजेंट लोग इस बात में यकीन नहीं रखते हैं. बल्कि ऐसे लोग अपनी कंपनी में ज्यादा खुश रहते हैं. आपको भी अगर जीवन में अकेले रहने से डर नहीं लगता है और आप अपनी खुद की कंपनी में ज्यादा खुश रहते हैं, तो समझ लीजिए आप इंटेलिजेंट हैं.


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adminJanuary 23, 20191min80

सेल्फी लेना कई बार लोगों के लिए जानलेवा बन चुका है लेकिन अब एक नई स्टडी में यह बात सामने आई है कि सेल्फी लेने के कई और भी खतरनाक नतीजे होते हैं. स्टडी में पाया गया कि सेल्फी कई लोगों को कॉस्मेटिक सर्जरी कराने के लिए प्रोत्साहित कर रही है.

स्टडी के मुताबिक, सेल्फी लेने के बाद मानसिक स्थिति पर बहुत बुरा असर पड़ता है. ज्यादा सेल्फी लेने वाले लोग अधिक चिंतित महसूस करते हैं. उनका आत्मविश्वास कम हो जाता है और वे शारीरिक आकर्षक में कमी महसूस करते हैं. सेल्फी लेने वाले कई लोगों में अपने लुक को लेकर हीनभावना इस कदर बढ़ जाती है कि वे उसमें बदलाव के लिए कॉस्मेटिक सर्जरी कराने के लिए सोचने लगते हैं.

यह स्टडी एस्थेटिक क्लीनिक्स ने की है जिसमें कॉस्मेटिक सर्जरी कराने के लिए कोलकाता, दिल्ली, मुंबई और हैदराबाद स्थित एस्थेटिक क्लिनिक जाने वाले 300 लोगों को शामिल किया गया था.

इस अध्ययन में पाया गया कि किसी फिल्टर का उपयोग किए बिना सेल्फी पोस्ट करने वाले लोगों में चिंता बढ़ने और आत्मविश्वास में कमी देखी जाती है. सेल्फी लेने और उन्हें सोशल मीडिया पर पोस्ट करने के बाद मूड खराब होता है और इसका सीधा असर आत्मविश्वास पर पड़ता है. जो लोग सोशल मीडिया पर अपनी सेल्फी को पोस्ट करने से पहले दोबारा सेल्फी लेते हैं या उन्हें एडिट करते हैं, वे भी बेचैनी महसूस करते हैं.

सेल्फी पोस्ट करने के बाद लोग कॉस्मेटिक सर्जरी कराने के लिए प्रेरित हो जाते हैं.

स्टडी में पाया गया कि मरीजों ने सेल्फी लेने और उन्हें सोशल मीडिया पर पोस्ट करने के बाद अधिक चिंतित, आत्मविश्वास में कमी और शारीरिक रूप से आकर्षक में कमी महसूस किया. यही नहीं, जब मरीजों ने अपनी सेल्फी बार-बार ली तथा अपनी सेल्फी में बदलाव की तो सेल्फी के हानिकारक प्रभाव को महसूस किया.

स्टडी में पाया गया कि जिन लोगों में आत्मविश्वास की कमी होती है, उन पर सेल्फी का सबसे ज्यादा बुरा असर पड़ता है.


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adminJanuary 22, 20191min80

सभी लोगों के सोने का तरीका एक दूसरे से काफी अलग होता है. कुछ लोगों को जहां दाईं करवट लेकर सोना पसंद होता है, तो वहीं कुछ लोग बाईं तरफ ज्यादा सोते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपकी सोने की पोजिशन आपकी सेहत पर कई तरह से असर डालती है. इसलिए हम आपको सोने की ऐसी पोजिशन के बारे में बता रहे हैं, जो सेहत को बेहतर बनाने में काफी मददगार साबित होती हैं.

बाईं करवट पर सोने से होते हैं ये फायदे-

1. आयुर्वेद में बाईं करवट पर सोने को सबसे बेस्ट पोजिशन बताया गया है. आयुर्वेद के मुताबिक, बाईं करवट पर सोने से सेहत अच्छी बनी रहती है, क्योंकि इस पोजिशन में सोने से शरीर के ऑर्गन बेहतर तरीके से काम करते हैं.

2. दिल हमारी बाईं तरफ होता है और जब आप उसी तरफ करवट लेकर सोते हैं, तो इससे दिल पर प्रेशर कम पढ़ता है और दिल सेहतमंद रहता है.

3. बाईं तरफ सोने से डाइजेशन भी बेहतर होता है. दरअसल बाईं तरफ करवट लेकर सोने से शरीर में मौजूद वेस्ट मटेरियल आसानी से छोटी आंत से बड़ी आंत तक पहुंच जाता है. इसके बाद वेस्ट मटेरियल शरीर से आसानी से बाहर निकल जाता है और व्यक्ति को पेट संबंधी समस्याएं होने का खतरा कम होता है.

3. हेल्थ एक्सपर्ट के मुताबिक, गर्भवती महिलाओं को ज्यादा से ज्यादा अपनी बाईं ओर ही सोना चाहिए. दरअसल, गर्भावस्था के दौरान बाईं तरफ सोने से महिलाओं की कमर पर प्रेशर कम पड़ता है और साथ ही गर्भाशय और भ्रूण में खून का बहाव सही ढंग से होता है. बाईं तरफ सोने से सभी न्यूट्रिएंट्स प्लेसेंटा तक भी आसानी से पहुंच जाते हैं.

4. आपको शायद जानकर हैरानी होगी कि बाईं ओर सोने से खर्राटों की समस्या काफी कम हो जाती है. दरअसल, बाईं करवट लेकर सोने से जुबान और गला न्यूट्रल पोजिशन में रहते हैं, जिससे सोते समय सांस लेने में कोई दिक्कत नहीं होती है.

5. इन सभी सेहत संबंधी फायदों के अलावा  बाईं करवट लेकर सोने से गर्दन और कमर दर्द से राहत मिलती है. किडनी और लिवर बेहतर तरीके से काम करते हैं. गैस और सीने में जलन की समस्या नहीं होती है. अल्जाइमर का खतरा भी कम होता है.


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adminJanuary 17, 20191min130

अच्छी सेहत के लिए सभी चीजें खाना बेहद जरूरी है चाहे वो फल हों या सब्जी या फिर दूध. लेकिन इनका सही समय पर सेवन भी जरूरी है. एक्स्पर्ट्स के मुताबिक फल खाने का एक वक्त होता है. अगर सही समय इन्हें न खाया जाए तो फायदा पहुंचाने के बदले हानिकारक साबित हो सकते हैं.

ज्यादातर लोग सेब खाते हैं. An apple a day keeps the doctor away ये कहावत भी खूब प्रचलित है. आयुर्वेद में भी कहा गया है कि फलों को सही समय पर खाने से ज्यादा फायदा होता है. विभिन्न शोध अध्ययन में भी ये निकलकर आया है कि सेब खाने का सही समय सुबह है. अधिक फायदा चाहिए तो उठने के बाद यानी खाली पेट खाना बेहतर हो सकता है.

सेब में बहुत ज्यादा मात्रा में पौष्टिक तत्व होते हैं. मिनरल और विटामिन से भरपूर सेब में फाइबर भी बहुत होता है. इसमें कॉलेस्ट्रॉल बिल्कुल नहीं होता है. सेब को छील कर नहीं खाना चाहिए. सेब अगर खाली पेट खाया जाए तो शरीर का टॉक्सिक (गंदगी) आसानी से बाहर निकल जाएगी. एनर्जी ज्यादा मिलेगी.

सेब के छिलके पेक्टिन जैसे डाइटरी फाइबर में समृद्ध हैं. अनियमित मल त्याग या कब्ज से पीड़ित व्यक्ति को सुबह एक सेब खाने से बड़ी मदद मिल सकती है. इसके अलावा, इसमें पाया जाने वाला पेक्टिन लैक्टिक एसिड की रक्षा कर, लैक्टिक एसिड बैक्टीरिया के पेट में अच्छी तरह से विकसित होने में मदद करते हैं. जब सेब शाम को खाया जाता है, वही पेक्टिन जो मल त्यागने में मदद करता है, वास्तव में आंतों के पाचन कार्य को कम करता है. इसलिए रात में सेब नहीं खाना चाहिए. वहीं अगर पाचन तंत्र मजबूत हो तो इसे रात में खाया जा सकता है.


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adminJanuary 16, 20191min110

एक कप मसाला चाय थकान और ठंड दोनों भगाती है. लेकिन अब इसे बनाने के लिए मसाला बाजार से क्यों लिया जाए, जब आप इसे घर पर ही तैयार कर सकते हैं.

आवश्यक सामग्री

    • आधी कटोरी सूखा अदरक (सौंठ)

 

    • दालचीनी के 5-6 टुकड़े

 

    • एक बड़ा चम्मच छोटी इलायची

 

    • एक बड़ी इलायची

 

    • एक बड़ा चम्मच लौंग

 

    • आधा बड़ा चम्मच काली मिर्च

 

    • चुटकीभर जायफल पाउडर

 

    • आधा चम्मच सौंफ (चाहें तो)

 

टिप्‍स

– सबसे पहले सूखी हुई अदरक को मिक्सर में अच्छी तरह से पीस लें और एक कटोरी में अलग रख दें.

– मीडियम आंच में एक पैन में लौंग, काली मिर्च , इलायची और दालचीनी डालकर हल्का भून लें.
– मसालों को ठंडाकर ग्राइंडर में डालकर इनका पाउडर बनाएं.
– अब इस पाउडर में पिसी हुई सूखी अदरक और जायफल पाउडर मिलाकर कुछ देर के लिए दोबारा पीसें.
– तैयार है चाय मसाला पाउडर. ठंडा कर बोतल में भरकर रखें.
 
 
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adminJanuary 16, 20191min80

नट्स में भरपूर मात्रा में  विटामिन, मिनरल्स, कैल्शियम, और अनसैचुरेटेड फैटी एसिड पाए जाते हैं. रोजाना नट्स का सवन करने से सेहत बनी रहती है.  लेकिन डायबिटीज के मरीजों को सोच समझकर ही नट्स का सेवन करना चाहिए. क्योंकि डायबिटीज के मरीजों के लिए डाइट बहुत महत्वपूर्ण होती है. डायबिटीज के मरीज जो भी खाते हैं, उसका सीधा असर उनके ब्लड शुगर पर पड़ता है. आइए जानते हैं डायबिटीज के मरीजों को कौन से नट्स का सेवन करना चाहिए.

1. बादाम-  अप्रैल 2011 में मेटाबॉलिज्म जर्नल में प्रकाशित स्टडी के मुताबिक, बादाम खाने से शरीर में ग्लुकोज का स्तर सामान्य रहता है. बादाम ऑक्सीडेटिव तनाव को कम करते हैं और व्यक्ति को डायबिटीज और दिल संबंधी समस्याओं में फायदा पहुंचाते हैं. रोजाना बादाम के सेवन से शरीर में मैग्नीशियम की कमी भी दूर होती है.

2. अखरोट- डायबिटीज, ओबेसिटी और मेटाबॉलिज्म जर्नल में प्रकाशित स्टडी के मुताबिक, अखरोट के सेवन से पेट भरा रहता है और ज्यादा खाने की क्रेविंग नहीं होती है. स्टडी में यह भी बताया गया है कि रोजाना अखरोट का सेवन करने से वजन कम होता है. साथ ही ये डायबिटीज के मरीजों के लिए भी फायदेमंद होते हैं.

3. पिस्ता- पिस्ते में भरपूर मात्रा में प्रोटीन और गुड फैट होता है. इसको खाने के बाद लंबे समय तक भूख नहीं लगती है. 2014 में हुई एख स्टडी की रिपोर्ट में बताया गया है कि पिस्ता खाने से डायबिटीज के मरीजों में ब्लड शुगर का स्तर नॉर्मल बना रहता है. रोजाना फलों के साथ पिस्ते का सेवन फायदेमंद होता है.

4. मूंगफली- मूंगफली में भरपूर मात्रा में प्रोटीन और फाइबर पाया जाता है. टाइप-2 डायबिटीज के मरीजों के लिए मूंगफली बहुत फायदेमंद होती है. रोजाना मूंगफली के सेवन से वजन कम होने के साथ दिल संबंधी बीमारी होने का खतरा भी कम होता है. डायबिटीज के मरीजों को मूंगफली के सेवन से बहुत फायदा पहुंचता है, क्योंकि ये डायबिटीज के मरीजों में ब्लड शुगर के लेवल को नॉर्मल रखती है.

5. काजू- ब्लड प्रेशर के मरीजों को अपनी डाइट में काजू जरूर शामिल करने चाहिए. काजू ब्लड प्रेशर नॉर्मल रखने के साथ दिल की बीमारियों में भी फायदेमंद होते हैं. डायबिटीज के मरीजों को भी काजू के सेवन से फायदा पहुंचता है. 

 

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adminJanuary 10, 20191min120

आजकल हर किसी को दांत की समस्याएं परेशान करती हैं लेकिन एक फल ऐसा है जो आपके दांतों की लंबे समय तक सुरक्षा कर सकता है. डेंटिस्ट का मानना है कि अगर मैन्यूफैक्चरर टूथपेस्ट और माउथवॉश में ब्लूबेरी का इस्तेमाल करें तो दांतों की सेहत बनी रहेगी.

‘द ओरल हेल्थ फाउंडेशन’ ने दावा किया है कि ब्लू बेरी ओरल हेल्थ के लिए बहुत ज्यादा फायदेमंद है.

इस दावे से पहले ही वैज्ञानिकों ने बताया था कि मुंह में बैक्टीरिया की गतिविधि कम करके दांत खराब होने का खतरा कम किया जा सकता है.

ब्लूबेरी जैसे फल पॉलीफिनॉल्स का अच्छा स्रोत होते हैं. पॉलिफिनॉल्स एंटीऑक्सिडेंट होते हैं जो शरीर को बैक्टीरिया के खिलाफ सुरक्षा प्रदान करते हैं.

ओएचएफ के चीफ एग्जेक्युटिव डॉ. निगेल कार्टर डेंटल प्रोडक्ट के इन्ग्रेडिएंट्स में ब्लू बेरी को भी शामिल करने की मांग कर रहे हैं. डॉ. निगेल ने कहा, पॉलिफिनॉल्स हमारे सलाइवा में चिपके रह जाते हैं और लंबे समय तक मुंह में बैक्टीरिया से लड़ने में मदद करते हैं.

डॉ. कार्टर ने कहा, अच्छी बात ये है कि ये शुगर फ्री होते हैं जिससे इन्हें ओरल केयर प्रोडक्ट्स में कई तरीकों से शामिल किया जा सकता है.

 

यूनिवर्सिटी ऑफ क्वीन्सलैंड के शोधकर्ताओं ने मुंह के बैक्टीरिया पर क्रैनबेरी, ब्लूबेरी और स्ट्राबेरी के असर का परीक्षण किया. जर्नल ओरल साइसेंज में प्रकाशित हुए नतीजों में पाया गया कि ब्लूबेरी के सेवन से बैक्टीरिया की संख्या में काफी कमी देखी गई.

शोधकर्ताओं का मानना है कि इन्हें कैविटीज से लड़ने में प्राकृतिक हथियार के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है.

OHF की रिपोर्ट के मुताबिक, दिन में एक मुठ्ठी बेरीज खाने से ओरल हेल्थ की समस्याएं घट सकती हैं. ब्लूबेरीज को ब्रेकफास्ट में कॉर्नफ्लेक्स, योगर्ट या कई तरीकों से इस्तेमाल किया जा सकता है.

डॉ. कार्टर ने कहा, बेरीज में भी थोड़ी मात्रा में नैचुरल शुगर होती है इसलिए इन्हें स्नैक्स की तरह खाने के बजाए भोजन के समय खाना चाहिए. ज्यादा मात्रा में और बार-बार खाने से दांतों को खतरा हो सकता है इसलिए कोशिश करें कि इन्हें ब्रेकफास्ट या डिनर के बाद खाएं. ब्लूबेरीज में पाया जाने वाला पॉलिफिनॉल्स हार्ट डिसीज और कैंसर से भी लड़ने में मदद करता है. इसके अलावा इसमें एंटीऑक्सिडडेंट होते हैं जो हाइड्रेशन में मदद करते हैं.

 

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adminJanuary 8, 20191min160

बढ़ती उम्र के साथ बालों का सफेद होना आम बात है. लेकिन मौजूदा समय में आधुनिक जीवनशैली और अन्हेल्दी डाइट के कारण कम उम्र में ही लोगों के बाल सफेद होने लगते हैं. हालांकि, कई बार जींस और हार्मोन में बदलाव के कारण भी बाल सफेद होने लगते हैं. अगर आपके बाल भी कम उम्र में ही सफेद होने लगे हैं तो घबराएं नहीं. हम आपको बालों को नेचुरली काला रखने के तरीके बता रहे हैं, जिन्हें फॉलो कर के आप सफेद बालों से छुटकारा पा सकेंगे.

क्यों होते हैं बाल सफेद-

दरअसल, बालों का काला रंग बालों के फोल्लिकल्स में पाए जाने वाले मेलानिन पिंगमेंट की वजह से होता है. जब यह पिगमेंट बनना बंद हो जाता है या फिर कम बनता है तो बाल सफेद होने लगते हैं.

ऐसे करें सफेद बालों की समस्या को दूर-

1. मेहंदी- मेहंदी का इस्तेमाल बालों को नेचुरल कलर देने के लिए किया जाता है. बालों पर केमिकल युक्त कलर करने के बजाए मेहंदी लगाना फायदेमंद होता है. इससे बालों को नेचुरल कलर तो मिलता ही है, साथ ही बालों में चमक भी आती है. बालों में मेहंदी लगाने के लिए इसे रातभर भिगोकर रख दें. अगले दिन इसमें कॉफी और नींबू का रस मिलाकर बालों पर लगाएं.

2. चाय पत्ती- चाय पत्ती में एंटीऑक्सीडेंट गुण पाए जाते हैं, जो बालों के रंग को डार्क करने के साथ-साथ सफेद बालों की ग्रोथ को भी कम करती है. इसके लिए चाय की पत्ती को पानी में उबाल लें. उस पानी को ठंडा करके जड़ों में मसाज करें. एक घंटे बाद ताजे पानी से बाल धो लें. चाय पत्ती का पानी इस्तेमाल करने के बाद बालों में शैंपू न करें.

3. तिल और बादाम का तेल- बादाम का तेल कई न्यूट्रिएंट्स से भरपूर होता है. ये बालों की ग्रोथ को बढ़ाकर उन्हें झड़ने से रोकता है. साथ ही दोमुंहे बालों की समस्या को भी कम करता है. बादाम के तेल से बाल लंबे समय तक काले रहते हैं. वहीं तिल का तेल भी बालों के लिए बहुत फायदेमंद होता है. हफ्ते में कम से कम 2 बार इनमें से किसी एक तेल से बालों में जरूर मालिश करें.

4. आंवला- बालों को स्वस्थ रखने के लिए सदियों से आंवले का इस्तेमाल किया जा रहा है. आंवले में भरपूर मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट्स पाए जाते हैं, जो बालों को सफेद होने से रोकते हैं. आंवला से डैमेज बालों की समस्या भी दूर होती है. बालों को लंबे समय तक काला और हेल्दी बनाए रखने के लिए कई तरह से आंवला का इस्तेमाल किया जा सकता है.

5. मेथी दाना- मेथी दाने में भी कई न्यूट्रिएंट्स पाए जाते हैं, जो बालों को समय से पहले सफेद होने से रोकते हैं. इसके लिए आप मेथी दाने को पानी में भिगोकर पीस लें. इसके बाद मेथी के पेस्ट को नारियल या बादाम के तेल में मिलाकर बालों को जड़ों में लगाएं. जल्दी सफेद बालों की समस्या से छुटकारा मिल जाएगा.

 

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