Wow Zindagi

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adminApril 18, 20191min00

रूह अफजा या रोज सिरप बाजार में तो मिलता है. अगर आप इसे घर पर बनाना चाहें तो तरीका बहुत आसान है. शक्कर, पानी और टाट्रिक एसिड से इसे घर बनाया जा सकता है.

एक नज़र

समय : 5 से 15 मिनट

मील टाइप : वेज

आवश्यक सामग्री

1 1/2 कप पानी

4 कप शक्कर

1/2 टीस्पून टाट्रिक (सिट्रिक एसिड)/ 1 टेबलस्पून नींबू का रस

1/4 टीस्पून नमक

1 कप गर्म पानी

1 टीस्पून रेड फूड कलर

2 टीस्पून रोज वॉटर

1/4 टीस्पून केवड़ा वॉटर

विधि

– रूह अफ्जा बनाने के लिए एक बर्तन में पानी डालकर मीडियम आंच पर रखें.
– इसमें शक्कर, टाट्रिक एसिड और नमक डालें, चलाते हुए पकाएं.
– इसे तब तक चलाते रहना है जब तक शक्कर घुल नहीं जाती.
– शक्कर घुलने के बाद पानी में उबाल आने का इंतजार करें.
– 6 मिनट तक उबलने के बाद रूह अफ्जा की चाशनी तैयार हो जाती है.
– अब चाशनी में थोड़ा-थोड़ा करके गर्म पानी डालते जाएं और मिलाते जाएं. (ऐसा करने से चाशनी में उबलनी बंद हो जाएगी.)
– अब इसमें दो कप बची हुई शक्कर डालकर मिला लें.
– शक्कर घुलने तक इसे हिलाते हुए पकाएं.
– फिर इसमें लाल रंग डालकर मिला लें.
– इसके बाद रोज और केवड़ा वॉटर डालकर मिला लें.
– चलाते जाएं और आंच बंद कर दें. ठंडा होने के बाद इसे एक कांच की बॉटल में भरकर स्टोर कर लें.
– तैयार है रूह अफ्जा. इससे जब मनचाहे ड्रिंक्स बनाएं और पिएं.


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adminApril 17, 20191min00

उम्र कोई भी हो सफेद बालों की समस्या से आजकल ज्यादातर लोग परेशान हैं. पहले जहां एक तय उम्र के बाद ही लोगों के बाल सफेद होते थे, वहीं अब बच्चों के बाल भी सफेद होने लगे हैं. कम उम्र में बालों के सफेद होने का कारण अक्सर जेनेटिक्स को समझा जाता है. लेकिन बालों के सफेद होने के पीछे कई दूसरे कारण भी हो सकते हैं. आइए बताते हैं आखिर कम उम्र में ही लोगों के बाल सफेद क्यों हो जाते हैं-

1. प्रदूषण- वायु प्रदूषण से भी बालों को काफी नुकसान पहुंचता है. हवा में मौजूद प्रदूषित तत्व बालों को डैमेज करने के साथ उन्हें तेजी से सफेद करने लगते हैं. एक्सपर्ट के मुताबिक, प्रदूषित हवा में मौजूद फ्री रेडिकल्स मेलानिन को डैमेज कर के बालों को सफेद करने का काम करते हैं.

2. तनाव- उम्र से पहले बालों के सफेद होने का एक कारण तनाव भी है. तनाव लेने से बाल जल्दी अपना नेचुरल रंग खो देते हैं. आप अगर आपने बालों को सफेद होने से रोकना चाहते हैं, तो तनाव से दूर रहें.

3. धूम्रपान- धूम्रपान भी बालों के कम उम्र में ही सफेद होने का एक कारण है. साल 2013 में प्रकाशित एक स्टडी के मुताबिक, जो लोग धूम्रपान करते हैं, उनके बाल जल्दी सफेद होने की संभावना दूसरे लोगों के मुकाबले 25 फीसदी ज्यादा होती है. इसके अलावा भी धूम्रपान की आदत सेहत को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचाती है.

4. हार्मोन- शरीर में हार्मोन का स्तर बिगड़ने से भी बाल जल्दी सफेद हो जाते हैं. हार्मोंस के असंतुलित होने से बाल रूखे-सूखे हो जाते हैं. बालों की चमक खत्म हो जाती है. साथ ही बालों के झड़ने की समस्या भी आम हो जाती है.

5. अनहेल्दी डाइट- डाइट का सीधा असर सेहत पर पड़ता है. इसलिए डाइट का खास ख्याल रखना बहुत जरूरी होता है. दरअसल, डाइट में न्यूट्रिएंट्स की कमी होने से कम उम्र में ही बाल सफेद हो जाते हैं. वहीं, शरीर में विटामिन बी-12 की कमी से बाल रूखे-सूखे और बेजान होने लगते हैं और अपना नेचुरल रंग खो देते हैं.


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adminApril 8, 20191min00

सैर करने के फायदे-

-रोजाना 30 मिनट की वॉक करने से शरीर की हड्डियां मजबूत बनती है.

-यदि आप रोजाना सैर करते हैं तो आप अपना अतिरिक्त वजन भी आसानी से कम कर सकते हैं.

-भागदौड़ भरी जिंदगी के चलते  तनाव आपको मुफ्त में मिलता है. ऐसे में सेहत के इस दुश्मन को आप रोजाना सैर पर जाकर दूर भगा सकते हैं.

-सैर करने से शुगर, कैंसर जैसी बीमारियों के होने का खतरा भी कम हो जाता है.

-सैर करने से शरीर की मांसपेशियां मजबूत बनने के साथ आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ जाती है.

-रोजाना वॉक करने से आपका ब्लड प्रेशर कंट्रोल रहता है.   

सैर पर जाने से पहले ध्यान रखें ये बातें-

– शायद ही आप जानते होंगे कि भ्रमण पर जाने से पहले व्यक्ति को शौच जरूर जाना चाहिए.

-सैर पर जाने से पहले मौसम के अनुसार कपड़े पहनें, अन्यथा आप बीमार पड़ सकते हैं.

-यदि सैर करते समय आपको चलने में तकलीफ महसूस हो रही हो या फिर सांस फूलना, सीने में दर्द जैसा कुछ महसूस हो रहा हो तो तुरंत अपने डॉक्टर को दिखाएं.

सैर करने का तरीका कुछ इस तरह बदलें-

अगर आप चाहते हैं कि सुबह सैर पर दिए 30 मिनटों का आपको भरपूर फायदा मिले तो आपको अपनी सैर को पावर वॉकिंग में बदल दें. इसके लिए आपको इन बातों का ध्यान रखना होगा.

-कभी भी अपनी सैर को 20 से 30 मिनट से जयादा का समय न दें.

-कोशिश करें कि सैर करते समय हाथों और पैरों पर कोई डम्बल या हल्का वेट बांध लें. ऐसा करने से आपको सैर का ज्यादा फायदा मिल पाएगा.

-अच्छे रिजल्ट पाने के लिए हफ्ते में 3 से 4 दिन सैर करना भी काफी होता है.


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adminMarch 26, 20191min00

गणित एक ऐसा विषय है जिसे कई बच्चे तो बेहद पसंद करते हैं तो वहीं कुछ इस विषय से बेहद खौफ में रहते हैं. आपने भी कई बार अपने बच्चे के दिल में इस विषय के प्रति  इंटरेस्ट पैदा करने के लिए उसे कहा होगा कि यह एक स्कोरिंग सब्जेक्ट है. इस विषय पर थोड़ी से मेहनत करने पर आप आसानी से फुल मार्क्स ला सकते हैं. लेकिन उस समय क्या वाकई आप अपने बच्चे की मनोवस्था समझ रहे होते हैं. बता दें, बच्चों पर इस विषय को लेकर जरूरत से ज्यादा दबाव बनाने पर वो तनाव में आने लगता है. इसकी वजह से थोड़े समय बाद उन्हें इस विषय से ही नफरत हो जाती है. हाल ही में हुई एक स्टडी की मानें तो बच्चों में मैथ्स के लिए बढ़ती नफरत की वजह से अब वो ‘मैथ्स एंजाइटी’ का भी शिकार होने लगे हैं.

सेंटर फॉर न्यूरोसाइंस इन एजुकेशन द्वारा की गई एक स्टडी में पता चला कि ज्यादातर बच्चे मैथ्स की वजह से तनाव का शिकार हो रहे हैं. इस स्टडी में बच्चों के माता पिता और स्कूल टीचर्स को उनके तनाव का कारण बताया गया. यह शोध 1000 इटालियन बच्चों और 1700 लंदन में रहने वाले बच्चों पर किया गया.

इन अध्यन को अच्छी तरह करने के बाद शोधकर्ता इस नतीजे पर पहुंचे कि प्राइमरी और सेकेंडरी स्कूल में पढ़ने वाले लड़कों की तुलना में लड़कियां मैथ्स एंजाइटी की ज्यादा शिकार होती हैं. स्टडी में इस बात का भी खुलासा हुआ कि ऐसा इसलिए होता है क्योंकि बच्चे पहले ही इस विषय को मुश्किल समझ लेते हैं. जिसकी वजह से उन्हें तनाव होने लगता है. इसके अलावा इस विषय में कम अंग प्राप्त करने का डर भी उन्हें इस तनाव से उबरने नहीं देता है. इस शोध को करने वाले डेनिस कहते हैं, ‘ ये सच है कि ‘मैथ्स एंजाइटी’ हर बच्चे में अलग कारण से हो सकती है लेकिन हमने अपनी रिसर्च के माध्यम से कुछ ऐसे कारण खोज लिए हैं जो प्राइमरी और सेकेंडरी दोनों बच्चों में एक समान हैं.’

इस शोध में एक और बात जो सामने निकलकर आई वो थी कि स्कूल में टीचर्स के पढ़ाने का स्टाइल. जी हां, इस स्टडी में खुद बच्चों ने इस बात की शिकायत की है कि उनके स्कूल में इस विषय को अलग-अलग ढंग से पढ़ाया जाता है जिसके चलते वो अक्सर कंफ्यूज हो जाते हैं. वहीं सेकेंडरी स्कूल के बच्चों का कहना था कि पेरेंट्स और दोस्तों के साथ खराब रिश्तों की वजह से उन्हें तनाव रहता है. इसके अलावा हर क्लास के साथ पढ़ाई के बढ़ते दवाब की वजह से भी बच्चों को तनाव हो रहा है. वैसे हैरानी तो इस बात की है कि जो बच्चे मैथ्स में मजबूत है, वो भी कई मौकों पर तनाव महसूस करते हैं. दरअसल जो बच्चे मैथ्स में अच्छे होते हैं, उनके पेरेंट्स को हमेशा सिर्फ उनके मार्क्स से ही मतलब होता है. ऐसा करने से उन बच्चों में धीरे-धीरे तनाव बढ़ने लगता है और वो भविष्य में उस फील्ड में भी परफॉर्म नहीं कर पाते जहां वो बेहतर होते हैं.

शोधकर्ताओं की मानें तो वो इस बढ़ते ट्रेंड को काफी चिंताजनक मानते हैं. उनके अनुसार बच्चे इस तरह से एक तरह के चक्रव्यू में फंस जाते हैं. जहां से भविष्य में उनका निकलना बहुत मुश्किल होगा. उनके मुताबिक पहले मैथ्स एंजाइटी के चलते बच्चे अच्छा परफॉर्म नहीं करेंगे और फिर कम मार्क्स लाने की वजह से तनाव से पीड़ित होंगे.

इस स्टडी में शोधकर्ताओं ने इस परेशानी को हल करने के लिए कुछ महत्वपूर्ण विकल्पों पर भी जोर दिया गया है. उन्होंने बताया कि इस परेशानी से निजात पाने के लिए सबसे पहले स्कूल के टीचर्स को इस बात को स्वीकार करना होगा कि बच्चों भी मैथ्स एंजाइटी का शिकार हो सकते हैं. जिसका सीधा असर  उनकी परफॉर्मेंस पर पड़ता है. इसके अलावा टीचर्स को बच्चों को पढ़ाने के अपने स्टाइल में भी जरूरी परिवर्तन लाना चाहिए. इतना ही नहीं बच्चों के माता- पिता भी इस बात का ख्याल रखें कि मैथ्स के लिए बच्चों पर दवाब बनाने से बच्चों पर इसका बुरा असर पड़ सकता है.

शोधकर्ताओं ने उम्मींद जताई कि अगर इन समाधानों पर अमल किया जाए तो जल्द ही स्थिति में सुधार लाया जा सकता है. उन्होंने इस बात को भी स्वीकार किया कि वर्तमान स्थति काफी चिंताजनक है. एक शोध के मुताबिक यूके में हर पांच में से एक इंसान को मैथ्स की प्रॉब्लम सुलझाने में दिक्कत होती है.


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adminMarch 23, 20191min00

सेहतमंद रहने के लिए रोजाना अखरोट का सेवन बहुत जरूरी है. अखरोट में ओमेगा-3 फैटी एसिड और फाइबर भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं. एक नई स्टडी की रिपोर्ट में सामने आया है कि अखरोट के सेवन से दिल की बीमारी, स्ट्रोक और डायबिटीज का खतरा कम होता है.

स्टडी की रिपोर्ट में बताया गया है कि अखरोट के सेवन से शरीर में गुड कोलेस्ट्रोल की मात्रा बढ़ जाती है, जिससे मेटाबोलिक सिंड्रोम से पीड़ित लोगों में टाइप-2 डायबिटीज, दिल की बीमारी और स्ट्रोक का खतरा कम होता है.

ये स्टडी न्यूट्रिशन रिसर्च और प्रेक्टिस जर्नल में प्रकाशित की गई है. स्टडी के लिए शोधकर्ताओं ने मेटाबोलिक सिंड्रोम से पीड़ित 119 कोरियन पुरुष और महिलाओं को 2 ग्रुप में बांटा. इसमें एक ग्रुप को 16 हफ्तों तक प्रति दिन 45 ग्राम अखरोट का सेवन करने के लिए कहा गया. जबकि, दूसरे ग्रुप ने व्हाइट ब्रेड का सेवन किया.

दोनों ग्रुपों को 16 सप्ताह के अंत में 6 सप्ताह के लिए आराम करने के लिए कहा गया. इसके बाद दोनों ग्रुपों को दोबारा से 16 हफ्तों के लिए अखरोट और व्हाइट ब्रेड दिए गए. परीक्षण के दौरान, लिपिड प्रोफाइल, एचबी 1 एसी स्तर, एडिपोनेक्टिन के स्तर के साथ-साथ लेप्टिन, एपोलिपोप्रोटीन बी को एंथ्रोपोमेट्रिक और बायोइम्पिडेंस डेटा के साथ चार बार मापा गया.

मेटाबोलिक सिंड्रोम से होने वाली 5 गंभीर बीमारियां जैसे- ब्लड शुगर, ब्लज प्रेशर, कोलेस्ट्रोल लेवल, ट्राइग्लिसराइड और पेट का फैट भी मापा गया. नतीजों से सामने आया कि अखरोट के सेवन से मेटाबोलिक सिंड्रोम से पीड़ित लोगों की सेहत में काफी सुधार आया.


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adminMarch 19, 20191min00

भारतीय घरों में मसाले के रूप में इस्तेमाल होने वाली हल्दी सेहत के लिए बहुत फायदेमंद होती है. हल्दी खाने का स्वाद बढ़ाने के साथ सदियों से कई सेहत संबंधित कई समस्याओं के इलाज के लिए इस्तेमाल की जा रही है. कई स्टडी में इस बात की पुष्टि की गई है कि हल्दी के सेवन से शरीर और दिमाग दोनों को फायदा पहुंचता है. हल्दी जोड़ों और गठिया के दर्द में भी बहुत फायदेमंद होती है.

ये हैं हल्दी के फायदे-

डाइजेस्टिव सिस्टम बेहतर करे- आप अगर पेट की परेशानियों से जूझ रहे हैं, तो हल्दी के सेवन से फायदा होगा. आयुर्वेद में सदियों से हल्दी का इस्तेमाल डाइजेशन को बेहतर करने के लिए किया जा रहा है. हल्दी में एंटी-ऑक्सीडेंट और एंटी-इंफ्लामेट्री गुण पाए जाते हैं, जो डाइजेस्टिव सिस्टम को बेहतर करने में मदद करता है. स्टडी के मुताबिक, हल्दी के सेवन गैस की समस्या भी दूर होती है.

हेल्दी स्किन- बढ़ती उम्र से चेहरे पर आई झुर्रियों को दूर करने में हल्दी बहुत कारगर है. हल्दी में एंटी-ऑक्सीडेटिव और एंटी-इंफ्लामेट्री गुण पाए जाते हैं. ये चेहरे की झुर्रियों को दूर करमे में मदद करते हैं. रोजाना हल्दी का सेवन करने से स्किन पर ग्लो आता है.

इम्यूनिटी मजबूत करता है- हल्दी में एंटी-बैक्टीरियल, एंटी-वायरल और एंटी-फंगल गुणों के साथ Lipopolysaccharide कंपाउंड भी पाया जाता है. हल्दी के सेवन से इम्यूनिटी पावर मजबूत होती है और आप कई तरह  के इंफेक्शन से सुरक्षित रहते हैं. रोजाना एक गिलास गर्म दूध के साथ एक चम्मच हल्दी का सेवन करने से सर्दी, जुकाम, फ्लू आदि समस्याओं से ऱाहत मिल सकती है.

दिमाग के लिए फायदेमंद- हल्दी में मौजूद Aromatic Turmerone कंपाउंड दिमाग के लिए बहुत फायदेमंद होता है. इससे दिमाग की स्टेम कोशिकाओं की मरम्मत होती है. इसके अलावा हल्दी में मौजूद कर्क्यूमिन भी दिमाग में पाए जाने वाले प्रोटीन को बूस्ट करता है.

वजन कम करने में मददगार- आजकल अधिकतर लोग अपने बढ़ते वजन से परेशान हैं.  लेकिन हल्दी के सेवन से आप अपने वजन को कंट्रोल में रख सकते हैं. हल्दी शरीर में फैट टीश्यूज को बनने से रोकती है, जिससे वजन कंट्रोल में रहता है. 


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adminMarch 18, 20191min00

अक्सर ऐसा होता है कि जल्द बाजी में किचन में रखी कई सारी चीजों का इस्तेमाल सही ढंग से नहीं हो पाता है. कई चीजें तो बिना इस्तेमाल किए रखे-रखे ही खराब हो जाती हैं. ऐसे में चलिए आज हम आपको बताते हैं कुछ ऐसे टिप्स जिन्हें अपनाकर आप अपना काफी हद तक आसान कर सकते हैं.

 

टिप्‍स

– घी अगर ज्यादा दिन का हो जाए तो उसका ताजापन कम हो जाता है, टेस्ट बिगडने लगता है . ऐसे में घी में ताजा पन बरकरार रखने के लिए एक टुकड़ा गुड़ और सेंधा नमक डाल दें.
– नींबू अगर कड़क या सख्त हो जाए तो यूज करने से पहले इसे गरम पानी में थोड़ी देर के लिए डाल दें और फिर इसका इस्तेमाल करें.
– दाल को जल्दी पकाने के लिए इसमें थोड़ा सा घी या बादाम का तेल डाल दें.
– अगर आपको ज्यादा दिनों तक लाल मिर्च पाउडर सही रखना है तो इसमें थोड़ी सी हींग डाल दें, मिर्च ज्यादा वक्त तक चलेगी.
– मिक्सर का इस्तेमाल किचन में अक्सर होता है, और इसकी ब्लेडस के बिगड़ने की शिकायत हमेशा रहती है. इससे छुटकारा पाने के लिए मिक्सर महीने में एक या दो बार मिक्सर में नमक डालकर चला दें. ब्लेडस तेज हो जाएंगे.
– अगर पराठे बना रहीं  है और वो भी आलू के तो इसके मिश्रण में थोड़ी सी कसूरी मेथी डाल दें टेस्ट बढ़ जाएगा.
– अगर आप मूली या गाजर के पराठे बना रहें है तो किसी हुई मूली या गाजर में चने की दाल का पाउडर और हींग डाल दें स्वाद बढ़ जाएगा.
– निचोडे़ हुए नींबू के छिल्कों को फेंके नहीं. इसे साफ बरनीं में डालते जाएं और साथ में ही नमक भी डाल दें . इसे बीच-बीच में धूप में रखें कुछ दिनों में आचार तैयार हो जाएगा.
– आप अगर मिक्स वेजिटेबल या इसके कटलेट बना रहे हैं तो इन सब्जियों को उबालने के बाद बचे हुए पानी को सूप या दाल पकाने में डाल दें. स्वाद बढ़ जाएगा.
– दालों को अगर आप अंकुरित इस्तेमाल करते हैं तो इन को ज्यादा समय तक ताजा रखने के लिए इसमें नींबू का रस मिलाकर इसे फ्रिज में रखें, दाल में ताजगी बनी रहेगी.


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adminMarch 16, 20191min00

Holi 2019: रंगों का त्योहार होली बस कुछ ही दिन दूर है. सभी लोग इस त्योहार को लेकर काफी उत्साहित हैं. हर साल होली का त्योहार बहुत धूम-धाम से मनाया जाता है. रंगों के बिना होली का त्योहार अधूरा रहता है. इस दिन सभी लोग एक दूसरे को खास-तौर पर रंग लगाते हैं. होली का त्योहार है, तो रंग लगाना और लगवाना तो लाजमी है, लेकिन इस मौके पर अगर अपनी स्किन का ख्याल नहीं रखेंगे तो बाद में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है. हम आपको कुछ टिप्स बता रहे हैं, जो होली के केमिकल युक्त रंगों से आपकी स्किन को सुरक्षित रखेंगे और होली के जिद्दी रंगों के धब्बे भी स्किन पर नहीं पड़ेंगे.

तेल लगाना ना भूलें- होली खेलने से पहले अगर आप अपनी स्किन पर बादम का तेल लगाएंगे, तो कोई भी रंग आपकी स्किन पर ज्यादा देर तक नहीं टिकेगा और आसानी से हट भी जाएगा. बता दें, बादम के तेल में विटामिन ई की मात्रा भी अधिक होती है, जो आपकी त्वचा के लिए लाभदायक होता है.

बालों में तेल लगाएं- इसी प्रकार होली खेलने से पहले अपने बालों में नारियल का तेल अच्छी तरह से लगा लें. ऐसा करने से बालों की जड़े मजबूत होती हैं. महिलाएं अपने बालों को खुला छोड़ने के बजाए बांधकर ही रखें.

सनस्क्रीन लगाएं- अधिकतर लोग धूप में बाहर निकलने से पहले सनस्क्रीन तो लगाते ही है. होली के दिन भी सनस्क्रीन जरूर लगाएं, क्योंकि चिलचिलाती धूप में होली खेलने से सन बर्न होने का खतरा रहता है. अगर आप सनस्क्रीन लगाकर जाएंगे, तो तेज धूप में आपकी स्किन के लिए एक सुरक्षा कवच की तरह काम करेगी.

सही कपड़े चुनें-  होली के दिन ऐसे कपड़े पहनें, जो आपकी पूरी बॉडी को ढक सके. ऐसे कपड़े पहनने से होली के रंगों से स्किन को ज्यादा नुकसान नहीं होगा. साथ ही रंग साफ करने में भी ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ेगी. इस तरीके से आपकी बॉडी सूरज की किरणों से भी सुरक्षित रह सकेगी.

लिक्विड चीजों का सेवन करें- अब आप सोच रहे होंगे कि पानी या जूस पीने से होली के रंग कैसे हटेंगे? बता दें, हाइड्रेटेड बॉडी में ड्राइनेस की शिकायत नहीं होती और स्किन हमेशा मुलायम रहती है. जबकि, ड्राई स्किन में केमिकल युक्त रंग के धब्बे आसानी से छुटते नहीं हैं. इसलिए होली के समय ज्यादा से ज्यादा लिक्विड चीजों का सेवन करते रहें.

होली खेलने के बाद इन टिप्स को फॉलो करें-

हर्बल साबुन से नहाएं- होली खेलने के बाद हर्बल साबुन से ही नहाएं, क्योंकि ये आपकी त्वचा को नुकसान नहीं पहुंचाएगा और आपकी स्किन की कोमलता को बरकरार रखेगा.

जैतून का तेल- होली खेलकर नहाने के बाद आप जैतून के तेल का इस्तेमाल कर सकते हैं. इसके लिए कॉटन में इस तेल की कुछ बूंदे डालें. शरीर पर जहां-जहां भी रंग के धब्बे लगे हों, उसपर जैतून का तेल लगाएं. रंग के धब्बे धीरे-धीरे हल्के होने लगेंगे.

बेसन और दूध का पेस्ट लगाएं- होली के कुछ रंग इतने पक्के होते हैं कि वो कई दिनों तक हटते ही नहीं हैं. लेकिन बेसन और दूध की मदद से आप होली के जिद्दी रंगों से छुटकारा पा सकते हैं. इसके लिए बेसन और दूध को अच्छी तरह मिक्स करें और गाढ़ा पेस्ट बना लें. फिर उस पेस्ट को पूरे चेहरे पर अच्छी तरह मलें, रंगों के धब्बे हल्के पड़ने लगेंगे.


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adminMarch 13, 20191min00

आज के समय में अस्थमा से पीड़ित बच्चों की सख्यां कम नहीं है. जिसका सबसे बड़ा कारण बच्चों की खराब दिनचर्या और वातावरण में बढ़ता प्रदूषण भी है. छोटे-छोटे बच्चे कम आयु में ही इस रोग की चपेट में आ रहे हैं. जो कि काफी चिंताजनक है. कहा जाता है कि बदलते मौसम में अस्थमा के मरीजों को खुद पर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत होती है. एक नई स्टडी के अनुसार, अगर अस्थमा के मरीज अपनी डाइट में विटामिन डी की मात्रा ठीक रखते हैं तो वो आसानी से बदलते मौसम में भी बिना किसी तकलीफ के अपना ध्यान रख सकते हैं.

जर्नल ऑफ एलर्जी एंड क्लीनिकल इम्यूनोलॉजी में प्रकाशित एक नई स्टडी के मुताबिक, डाइट में कम विटामिन डी होने से अस्थमा से पीड़ित बच्चों की समस्या काफी बढ़ सकती है. स्टडी के अनुसार जिन बच्चों में विटामिन डी की कमी होती है, उनकी सेहत पर सिगरेट और कैंडल तक का धुआं बाकी बच्चों की तुलना में ज्यादा नकारात्मक असर डालता है.

बता दें, स्टडी में 120 अस्थमा से पीड़ित स्कूली छात्रों को शामिल किया गया. इस अध्ययन में 3 चीजों पर विशेष ध्यान दिया गया- घर में वायु प्रदूषण का स्तर, खून में विटामिन डी की मात्रा, और अस्थमा के लक्षण. वैसे यहां पर यह जानना भी जरूरी है कि 120 में से कई बच्चे मोटापे का भी शिकार थे.

इस स्टडी में जो परिणाम निकलकर आए, उनसे पता चला कि अगर आपके घर में वायु प्रदूषण ज्यादा है लेकिन अस्थमा से पीड़ित बच्चे के शरीर में  विटामिन डी की अच्छी मात्रा है, तो उसको इस वातावरण में सामंजस्य बैठाने में ज्यादा तकलीफ नहीं होगी. वहीं अगर मोटापे के शिकार बच्चों को विटामिन डी की उचित मात्रा दी जाए ,तो उनके अंदर तो और व्यापक परिवर्तन दिखने को मिलेगा.

स्टडी में इस बात पर भी जोर दिया गया है कि धूप में ज्यादा देर बैठने से अस्थमा से पीड़ित बच्चों को विटामिन डी तो मिल जाएगा, लेकिन उनकी स्किन पर इसका खराब असर पड़ सकता है. स्टडी में बताया गया कि धूप से विटामिन डी लेने की जगह अगर बच्चे को मछली, मशरूम, ऑरेंज जूस का सेवन करवाएंगे तो उनकी बॉडी में विटामिन डी की कमी को बिना किसी साइड इफेक्ट के पूरा किया जा सकता है.

वैसे स्टडी की मुख्य शोधकर्ता सोनाली बोस कहती हैं, ‘अस्थमा एक ऐसी बीमारी है जिसका कोई स्थायी इलाज संभव नहीं है. लेकिन कई सारी स्टडी से यह पता चला है कि विटामिन डी से सांस संबधी बीमारियों को ठीक तो नहीं लेकिन उस पर काबू पाया जा सकता है.’

तो अगर आपके बच्चे को भी अस्थमा की समस्या है तो उसकी डाइट में विटामिन डी की मात्रा बढ़ा दें, थोड़े समय में सकारात्मक परिवर्तन दिखना शुरू हो जाएगा.


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adminFebruary 21, 20191min00

अक्सर एग्जाम का नाम सुनते ही बच्चों की तबीयत बिगड़ने लगती है, डर के कारण घबराहट भी होने लगती है. ऐसे में बच्चों की सेहत का ख्याल रखना बेहद कठिन हो जाता है. तो आइए आज हम आपको बताते हैं कि एग्जाम टाइम पर बच्चों की डाइट में क्या-क्या शामिल करें और क्या न करें जिससे कि उनकी सेहत और उनका दिमाग दोनों तंदरुस्त रहे.

उपमा:
सुबह के ब्रेकफास्ट में बच्चों को उपमा दें. उपमा लाइट और हेल्दी होता है. लाइट होने के कारण इसे खाने के बाद भी बच्चे हल्का महसूस करते हैं जिससे उन्हें पढ़ाई करने में आसानी होती है. उपमा के अलावा बच्चों को खिचड़ी या इडली भी दे सकते हैं. ये भी लाइट फुड होते हैं.

हरी सब्जियां:

खाने में ताजी सब्जियां का इस्तमाल करें. खासकर हरी सब्जियां का उपयोग करें जैसे मैथी ,पालक, पत्तागोभी आदि. इनके अलावा गाजर, कद्दू भी डाइट में शामिल करें. ये बच्चों की रोग प्रतिरोधक शक्ति को बढ़ाएंगी और बीमार होने से भी बचाएंगी .
 

ब्राउन राइस:
एग्जाम टाइम में बच्चों को व्हाइट राइस की जहग ब्राउन राइस खिलाएं. व्हाइट राइस में स्टार्च की मात्रा ज्यादा होती है जिससे बच्चों में आल्सय बढ़ता है.

नींबू पानी:

एग्जाम के समय बच्चे ज्यादा देर तक पढ़ाई करते हैं ऐसे में ध्यान रखें की बच्चे के शरीर में पानी की कमी न हो और उन्हें नींबू पानी जरूर पिलाएं. नींबू पानी से शरीर में एनर्जी बनी रहेगी और मुहं का टेस्ट भी बदल जाएगा . जितना ज्यादा पानी पिएंगे, उतना ही उनका कंसंट्रेशन बढ़ेगा. नींबू पानी के अलवा बच्चों को जूस, ग्रीन टी या छाछ पिलाएं. कोल्ड ड्रिंक्स के सेवन से बिल्कुल दूर रखें .
 

फ्रूट्स:
फ्रूट्स सेहत के लिए बहुत लाभदायक होते है. एग्जाम टाइम में बच्चों को थोड़ी-थोड़ी देर में कुछ न कुछ खिलाते रहें. खाने में ज्यादा देर का गैप न करें. इसका सबसे अच्छा विकल्प है फ्रूट्स. थोड़ी-थोड़ी देर में बच्चों को फ्रूट्स दें. फ्रूट्स में , सेब, अनार, अंगूर दें. अंगूर से शरीर को पानी मिलेगा. खट्टे फ्रूट्स न दें जिससे कि उनकी तबीयत बिगड़े.

जंक फूड का सेवन नहीं करें:  

एग्जाम टाइम पर जंक फूड्स से बच्चों को रखें दूर. बाहर के फूड्स जैसे बर्गर, पिज्जा, चाट आदि से बच्चों को दूर रखना ही बेहतर है.
 
   

अंडे:  
बच्चों की डाइट में प्रोटीन की मात्रा बढ़ाएं. अंडे में काफी मात्रा में प्रोटीन पाया जाता है. अंडे के अलावा पोहा, इडली, डोसा, ढोकला भी दे सकते हैं .ये चीजें खून और ब्रेन में अमिनो एसिड की मात्रा बढ़ाती हैं जिससे बच्चों का दिमाग तंदुरुस्त रहता है.
 
ओमेगा 3 फैटी एसिड की चीजें दें:  

ओमेगा 3 फैटी एसिड सबसे जादा नॉन वेज में होता है जैसे फिश. फिश में ओमेगा 3 फैटी एसिड की मात्रा काफी पाई जाती है. ओमेगा 3 फैटी एसिड मेमोरी बढ़ाने में काफी मदद करता है. अगर आप वेजिटेरियन हैं तो खाने में अलसी के बीज, कद्दू के बीज, तिल, सोयाबीन का तेल आदि शामिल करें.
 

मीठा ज्यादा न खिलाएं:   
मीठा ज्यादा खाने से भूख मिटती नहीं बल्कि थोड़ी-थोड़ी देर में और लगने लगती है, जिससे कि बच्चों के शरीर में आलस बढ़ता है और उन्हें नींद आती है.

चाय से रखें दूर:

एग्जाम टाइम में बच्चों को चाय, कॅाफी से दूर रखें. कैफीन होने की वजह से इन चीजों के सेवन से उन्हें नींद आएगी और एग्जाम टाइम में पूरी नींद होना बेहद जरूरी है.


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