इन युवाओं ने शरीर पर शहीद जवानों के नाम गुदवा कर दी श्रद्धांजलि

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राजस्थान और उत्तर प्रदेश के इन दो युवाओं अभिषेक गौतम और गोपाल सारण के जज़्बे को भी सलाम करिए। इस जज़्बे को शहीदों के लिए श्रद्धांजलि समझिए या देशभक्ति के जुनून की अनोखी मिसाल, उनकी पहल नई पीढ़ी के लिए प्रेरक जरूर है। 

पुलवामा की शहादत ने हापुड़ (गाज़ियाबाद) के तीस वर्षीय युवा अभिषेक गौतम को कुछ इस कदर मर्माहत किया है कि उन्होंने अपने पूरे बदन पर शहीदों के नाम से टैटू के साथ ही कुर्बानी देने वाले देशभक्तों के चित्र और पांच सौ अस्सी जवानों के नाम भी गुदवा लिए हैं। अभिषेक बताते हैं कि पुलवामा में हमारे देश के जवान जब शहीद हुए तो उन्होंने सोचा कि वह उन्हे किस तरह की कोई ऐसी सलामी दें, जिसे दुनिया याद करे। उनके मन में विचार आया कि क्यों न वह अपना बदन पुलवामा अथवा स्वतंत्रता संग्राम के शहीदों के नामों और चित्रों से संवार लें।

उन्होंने अपने शरीर पर शहीद जवानों के साथ-साथ इंडिया गेट, शहीद स्मारक, स्वाधीनता संग्राम में मुख्य भूमिका निभाने वाले शहीदेआजम भगत सिंह, रानी लक्ष्मी बाई, चंद्रशेखर आजाद, महाराणा प्रताप, महात्मा गांधी आदि की छवियां भी अंकित करा ली हैं। अभिषेक की तरह बीकानेर (राजस्थान) की तहसील श्रीडूंगरगढ़ के गांव मोमासर निवासी गोपाल सारण ने भी अपने बदन पर पुलवामा के 42 शहीदों के अलावा 20 और शहीदों के नाम का टेटू गुदवा लिए हैं। उनकी पीठ पर देश के लिए कुर्बान होने वाले बीस उन शहीदों के नाम छपे हैं, जो मूलतः बीकानेर व राजस्थान अन्य इलाकों के रहने वाले थे।

देश में एक ओर पुलवामा हमले के शहीदों के परिजनों और घायलों की मदद के लिए लोगों के हाथ बढ़ते जा रहा हैं, दूसरी तरफ तरह-तरह से उन्हे हमेशा के लिए याद करने के देशभक्तिपूर्ण प्रयोग भी सामने आ रहे हैं। देहरादून के शहीद मेजर चित्रेश बिष्ट, मेजर विभूति शंकर ढौंडियाल और शहीद मोहनलाल रतूड़ी के नाम पर चौराहों का नाम रखे जाने के साथ ही इनके नाम पर नगर निगम शहीद द्वार भी बनाएगा।

फरीदाबाद (हरियाणा) के गांव अटाली पहुंचकर राज्य के मुख्यमंत्री मनोहर लाल शहीद संदीप कालीरमण के परिजनों को 500 गज का प्लॉट देने का ऐलान किया। इसके अलावा मुख्यमंत्री ने शहीद के तीनों बच्चों की पढ़ाई का खर्चा प्रदेश सरकार के उठाने का भरोसा भी दिया। अजमेर (राजस्थान) में तो भीख मांग कर गुज़ार-बसर करनेवाली एक महिला भिखारिन देवकी शर्मा ने शहीदों के परिवारों के लिए 6 लाख, 61 हजार, 600 रुपए डोनेट कर दिए। इस महिला ने मंदिर के बाहर सालों भीख मांग कर ये रक़म जुटाई थी, लेकिन शहीद के परिवारों की मदद के लिए एक झटके में ही सारी रकम उसने डोनेट कर दी।

रेवाड़ी (हरियाणा) के गांव राजगढ़ की राधा, जो अपने शहीद पति हरि सिंह चौहान के पार्थिव शरीर पर दहाड़ मारकर गिर पड़ी थीं, बताती हैं- ‘मेरे पति कहते थे, मैं फौजी हूं, मेरे पिता फौजी थे, मैं अपने बेटे को भी फौजी ही बनाऊंगा। उनका यह सपना अब मुझे अकेले पूरा करना है।’ खेतड़ी (राजस्थान) के गांव टीबाबसई के शहीद श्योराम की पत्नी (नौ माह की गर्भवती) सुनीता देवी बताती हैं- ‘उन्होंने अपने पति की अस्थियों को अंतिम बार इसलिए छुआ, सिर-माथे से लगाया ताकि कोख में पल रही उनकी संतान भी उनके साहस को महसूस कर सके। वह अपनी आने वाली संतान को भी सैनिक बनाएंगी।’ उन्नाव (उ.प्र.) के शहीद अजीत कुमार की बेटी ईशा को कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने आश्वासन दिया है कि वह उसे पढ़ा-लिखाकर डॉक्टर बनाएंगी।


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