इस चायवाले ने किया गजब काम, मोदी हुए थे मुरीद, अब मिला पद्मश्री

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राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने पद्म अवॉर्ड के लिए चुनी गईं हस्तियों को पुरस्कार से सम्मानित किया. इस साल 112 हस्तियों के नाम पद्म अवॉर्ड के लिए फाइनल किए गए थे और राष्ट्रपति ने पहले एक पद्म विभूषण, आठ पद्म भूषण और 46 पद्मश्री वितरित किए थे और अन्य हस्तियों को आज अवॉर्ड दिए गए. इसमें एक ऐसा नाम भी शामिल रहा, जो दिन में चाय बेचकर पैसा कमाते हैं और अपनी कमाई को गरीब बच्चों की पढ़ाई के लिए खर्च कर देते हैं. इनका नाम है डी प्रकाश राव.

इस चायवाले ने किया गजब काम, मोदी हुए थे मुरीद, अब मिला पद्मश्री
 
डी प्रकाश राव ओडिशा के कटक के रहने वाले हैं और आज राष्ट्रपति ने उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया. वे पिछले कई सालों से चाय बेच रहे हैं.
 
इस चायवाले ने किया गजब काम, मोदी हुए थे मुरीद, अब मिला पद्मश्री
 
खास बात ये है कि वो चाय से होने वाली कमाई का बड़ा हिस्सा समाज के लिए खर्च कर रहे हैं. वे अपनी कमाई से गरीब बच्चों को शिक्षा और खाने का समान उपलब्ध करवाते हैं.
 
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शुरुआत में स्कूल चलाने का पूरा खर्चा वो खुद उठाते थे, लेकिन अब कुछ अन्य लोग भी इस काम में उनकी मदद कर रहे हैं. वे स्कूल आने वाले बच्चों को दूध और फ्रूट भी उपलब्ध करवाते हैं. साथ ही प्रकाश राव बच्चों को पढ़ाते हैं.
 
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बता दें कि वे 7 साल की उम्र से काम कर रहे हैं और लॉअर टॉर्सो पैरालाइसिस से पीड़ित हैं. अभी तक 200 से अधिक बार रक्त दान कर चुके प्रकाश राव की तारीफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी की है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 27 मई, 2018 को रेडियो पर मन की बात करते हुए इनकी तारीफ की थी.
 
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उस दौरान पीएम मोदी ने भी कहा था कि पिछले 50 साल से चाय बेचने वाले प्रकाश राव अपनी आधी आमदनी 70 गरीब बच्चों की शिक्षा पर खर्च करते हैं. वो हम सब के लिए एक प्रेरणास्त्रोत हैं.
 
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बता दें कि डी. प्रकाश राव कटक के बख्शीबाजार में एक स्लम में रहते हैं. यहीं उनकी चाय की दुकान भी है. प्रकाश बचपन में पढ़ाई करना चाहते थे, लेकिन उनके पिता उनसे अपने काम में मदद चाहते थे. जब वो ग्यारहवीं क्लास में थे तो उनके पिता को गंभीर बीमारी हो गई. इस वजह से पढ़ाई छोड़ वो दुकान चलाने लगे. हालांकि बाद में उन्होंने 2000 में एक स्कूल खोला और झुग्गी झोपड़ियों के बच्चों को पढ़ाना शुरू किया.

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