कहानी उस ISRO वैज्ञानिक की, जिसे 24 साल तक गद्दार माना गया फिर पद्म भूषण मिला

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पद्म भूषण नंबी नारायणन की कहानी ऐसी है, जिस पर फ़िल्म बन सकती है और बन भी रही है. एक प्रतिभावान वैज्ञानिक जिसपर देश से गद्दारी का आरोप लगा, जेल भी गए और अंत में सरकार से सम्मान भी मिला.  

ISRO के इस वैज्ञानिक की एक पहचान ‘विकास इंजन’ बनाने की भी है, इस इंजन की वजह से ही भारत ने अपना पहला PSLV लॉन्च किया था. आज भी ISRO के एतिहासिक मिशनों में इसी इंजन का इस्तेमाल होता है, जैसे- चंद्रयान और मंगलयान. आज भारतीय स्पेस तकनीक का अगुवाई करने वाले नंबी नारायणी को 24 साल लग गए अपने आप को निर्दोष साबित करने में.

एक वक्त था जब भारत ठोस ईंधन के लिए रॉकेट के उच्च तकनीक के लिए विदेशों पर निर्भर था. नारायणन पहले व्यक्ति थे जिन्होंने द्रव्य इंधन की दिशा में बदलाव की शरुआत की.  

उनके इस विचार से उनके सीनियर जैसे डॉक्टर ए. पी. जे. अब्दुल कलाम, विक्रम साराभाई आदि सहमत नहीं थे लेकिन उन्हें आगे शोध करने की इजाज़त दे दी गई.  

वो Princeton University में Rocket Propulsion विषय पर शोध करने के लिए गए. उसके बाद उन्होंने पांच साल French Viking Engine और Liquid Propulsion तकनीक पर शोध किया. वही तकनीक आगे चल कर ‘विकास इंजन’ को तैयार करने में कारगर साबित हुआ.

साल 1994 तक नंबी नारायणन ISRO के Cryogenic Space Engine प्रोग्राम के इंचार्ज बन चुके थे. इस दौरान उन पर जासूसी करने का ग़लत आरोप लगा.  

नारायणन के साथ चार अन्य को गुप्त सुचनाओं को मालदीव के इंटेलिजेंस अधिकारी मरियम रशीदा और फ़ौज़िया हसन को देने के आरोप में गिरफ़्तार कर लिया गया. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार वो 50 दिनों तक जेल में भी रहे थे.

यह केस 1996 में CBI को सौंप दिया गया, CBI ने जांच की रिपोर्ट केरल कोर्ट में पेश की और सभी आरोपों को निराधार बताया.  

लेकिन इससे नारायणन के चरित्र पर गहरा दाग लग चुका था और उनके नाम के साथ धोखेबाज़ लग चुका था. वो जहां भी जाते थे उनको और उनके परिवार को शर्मिंदगी झेलनी पड़ती थी.  

लंबी लड़ाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने उनपर लगाए सभी आरोपों को ख़ारिज कर दिया और केरल की सरकार को उन्हें हर्जाने के तौर पर 50 लाख देने का आदेश दिया. ख़ुद को निर्दोष साबित करने में उन्हें 24 साल लग गए.

जब जनवरी में उन्हें पद्म भूषण अवॉर्ड देने की घोषणा हुई, तब उन्होंने कहा, ‘मैं बहुत ख़ुश हूं, मुुझ पर जासूसी का आरोप था, मेरी पहचान उस रूप में ज़्यादा चर्चित थी, ये सम्मान मेरे योगदान को पहचान दिलाएगा.’

नारायणन ने अपनी कहानी को किताब की शक्ल भी दी है, जिसका नाम है Ready To Fire, इस किताब के ऊपर Rocketry: The Nambi Effect नाम की फ़िल्म भी बन रही है.


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