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adminJanuary 6, 20211min5080

जाइल्स फुक्स अपने ए-लेवल के नतीजों में फेल हो गए थे और पहले की तरह ही उस रात उनका पूरा परिवार खाने की मेज़ पर डिनर कर रहा था.

खाने के दौरान उनके पिता ने उनसे कुछ नहीं कहा. जब प्लेटें हटा ली गईं तो उन्होंने अपने बेटे से कहा, ‘जाइल्स, मैं उम्मीद करता हूं कि तुम मेहनत कर सकते हो.’

ख़राब नतीजों के बाद भी अगले दिन मिस्टर फुक्स ने नॉर्थैम्पटनशायर की सबसे बड़ी एस्टेट एजेंट चेन का दरवाज़ा नौकरी मांगने के लिए खटखटाया.

उस किशोर ने मैनेजर से कहा, ‘मैं सबसे बढ़िया मोल-तोल करूंगा.’ जवाब मिला, ‘तुम सोमवार से आ सकते हो?’

52 साल के जाइल्स फुक्स अब अरबपति हैं. वह ‘ऑफिस स्पेस इन टाउन’ (ओसिट) के सह-संस्थापक और बॉस हैं. वह बताते हैं कि ईस्ट मिडलैंड्स में एस्टेट एजेंसी में तीन साल के काम से उन्हें बेशकीमती अनुभव मिला.

 

सालाना राजस्व 166 करोड़ रुपये

वह बताते हैं, ‘मैंने सीखा कि लोगों से कैसे बात करनी है और कैसे बेचना है.’

1987 में जाइल्स 21 साल के थे, जब उन्होंने एक दोस्त के साथ एस्टेट एजेंट्स की अपनी कंपनी शुरू की.

उनका बिजनेस कामयाब रहा. इसके बाद उन्होंने मुनाफ़ा देने वाले कई काम शुरू किए, जिनमें एक डिज़ास्टर रिकवरी कंपनी भी शामिल थी.

फिर 2010 आया, जब उन्होंने अपनी बहन निकी के साथ मिलकर ‘ओसिट’ कंपनी शुरू की. सिर्फ सात साल में ओसिट का सालाना राजस्व 20 मिलियन पाउंड्स यानी 166 करोड़ रुपये है.

उनकी कंपनी की कीमत 1665 करोड़ रुपये (200 मिलियन पाउंड्स) से ज़्यादा आंकी गई है. लंदन में उनकी छह और बाकी ब्रिटेन में चार इमारतें हैं.

 

मां के नक्श-ए-क़दम पर

जाइल्स फुक्स और उनकी बहन का ओसिट शुरू करने का फैसला अपने परिवार की परंपरा के नक्शे-कदम पर चलने जैसा ही था. 1979 में उनकी मां ने ब्रिटेन में ऐसा पहला बिजनेस शुरू किया था. बाद में उसे निकी चलाने लगी थीं और फिर जाइल्स फुक्स भी उनके साथ आ गए थे. लेकिन 2005 में आख़िर कंपनी बेच दी गई.

भीड़ से अलग दिखने के लिए ओसिट की हर इमारत को अलग तरीके से डिज़ाइन किया गया है. जाइल्स कहते हैं, ‘इससे हर इमारत को अनूठा किरदार और व्यक्तित्व मिल गया है.’

चूंकि ये मलिकाना हक़ वाली इमारतें हैं, इसलिए ओसिट के लिए बाल काटने का सैलून, जिम, कैफ़े, बार जैसी अतिरिक्त सुविधाएं जोड़ना भी आसान हो गया.

 

आज मां-पिता ख़ुश हैं

जाइल्स ब्रेग्ज़िट के पक्के समर्थक हैं और मानते हैं कि ब्रिटेन काफ़ी अच्छा कर रहा है. वह कहते हैं, ‘लंदन में इस वक़्त पैसों की दीवार पहुंच रही है.’

ओसिट में जाइल्स चीफ़ एग्जीक्यूटिव हैं और उनकी बहन मैनेजिंग डायरेक्टर हैं.

काम का बंटवारा बताते हुए वह कहते हैं, ‘निकी रोज़ाना के बिजनेस चलाने का काम-काज देखती है. मैं फाइनेंस जुटाने, इमारतें खोजने और नीति बनाने का काम करता हूं.’

भले ही जाइल्स फुक्स ए लेवल की परीक्षाओं में अच्छा नहीं कर पाए, लेकिन आज उनके पिता उनसे बहुत ख़ुश हैं. वह बताते हैं, ‘हमारे माता-पिता हम पर बहुत गर्व करते हैं.’


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adminJanuary 6, 20212min5510

जहां कोरोना महामारी के दौर में कई लोगों के कारोबार घाटे में चले गए वहीं कुछ लोग ऐसे भी हैं जिन्हें ये महामारी पहले से भी ज़्यादा अमीर बना गई.

ये साल कई लोगों के लिए मुश्किलों भरा रहा है.

दुनिया भर में कोरोना के कारण 16 लाख लोगों की मौत हो चुकी है और आर्थिक संकट के चलते कई कारोबार बंद हो गए और लाखों नौकरियां चली गईं.

लेकिन, कई अमीरों के लिए हालात इतने बुरे भी नहीं रहे हैं.

दुनिया के 60 प्रतिशत से ज़्यादा अरबपति साल 2020 में और अमीर हो गए हैं और इनमें से पांच वो लोग हैं जिनकी कुल दौलत 310.5 अरब डॉलर हो गई है. आपको बताते हैं कि ये लोग कौन हैं-

 

एलन मस्क, टेस्ला के सह-संस्थापक और सीईओ

स्पेस एक्स के संस्थापक और टेस्ला के सीईओ एलन मस्क की संपत्ति में साल 2020 में 140 अरब डॉलर और जुड़ गए हैं. ब्लूमबर्ग के मुताबिक पिछले सोमवार को उनकी कुल संपत्ति 167,000 मिलियन डॉलर (1 खरब 67 अरब डॉलर) तक पहुंच गई है.

इसके साथ ही एलन मस्क अरबतियों की सूची में कई पायदान ऊपर चढ़ गए हैं और नवंबर में बिल गेट्स को पीछे छोड़ दूसरे स्थान पर आ गए हैं. उनसे ऊपर पहले पायदान पर अमेज़न के संस्थापक जेफ़ बेज़ोस का नाम है.

फोर्ब्स के मुताबिक जब से पत्रिका ने दुनिया के अमीर लोगों की सूची बनानी शुरू की है तब से लेकर अब तक किसी अरबपति की एक साल में की गई ये सबसे ज़्यादा कमाई है.

एलन मस्क की कंपनी टेस्ला एक इलैक्ट्रिक कार निर्माता कंपनी है. इस साल कंपनी में कारों की रिकॉर्ड बिक्री हुई है. वहीं, मस्क की दूसरी कंपनी स्पेस एक्स ने भी इस साल तरक्की की है और वो अंतरिक्ष में एस्ट्रोनॉट लॉन्च करने वाली पहली निजी कंपनी बनी है.

 

 

जेफ़ बेज़ोस, अमेज़न के संस्थापक और सीईओ

जेफ़ बेज़ोस वो शख़्सियत हैं जिन्होंने साल 2020 की शुरुआत दुनिया के सबसे अमीर शख़्स बनकर की थी और उसका अंत भी इसी तरह किया है.

जेफ़ बेज़ोस सिर्फ़ ऑनलाइन शॉपिंग प्लेटफॉर्म अमेज़न के संस्थापक ही नहीं है बल्कि इसके अलावा वो अमेरिकी अख़बार ‘द वॉशिगटन पोस्ट’ के मालिक भी है.

उन्होंने इस साल अपनी संपत्ति में 72 अरब डॉलर और जोड़े हैं. इसकी वजह है कोरोना महामारी के दौरान ऑनलाइन खरीदारी का बढ़ना. लॉकडाउन में दुकाने बंद होने के कारण लोगों ने बढ़-चढ़कर ऑनलाइन खरीदारी की है.

कुछ महीनों पहले जेफ़ बेज़ोस की कुल संपत्ति 200 अरब डॉलर का आंकड़ा पार कर गई थी. हालांकि, फिलहाल उनकी संपत्ति 187 अरब डॉलर है.

जेफ़ बेज़ोस सामाजिक कार्यों में भी अपना योगदान देते रहते हैं. फरवरी में उन्होंने 10 अरब डॉलर जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए दान दिए थे. नवंबर में 80 करोड़ डॉलर उन्होंने पर्यावरण पर काम करने वालीं संस्थाओं को दिए थे.

उनकी पूर्व पत्नी मैकेंज़ी स्कॉट ने इस साल कम से कम 5.8 अरब डॉलर गैर-सरकारी संस्थाओं को दान किए थे.

ज़ोंग शनशन, नों फू स्प्रिंग के संस्थापक

ब्लूमबर्ग के मुताबिक ज़ोंग शनशन की कुल संपत्ति 62.6 अरब डॉलर तक बढ़ गई है (मौजूदा 69 डॉलर).

जोंग सितंबर में चीन के सबसे ज़्यादा अमीर शख़्स बन गए थे. उनकी बोतलबंद पानी की कंपनी नों फू स्प्रिंग ने शेयर की सार्वजनिक बिक्री शुरू करने के बाद 1.1 अरब डॉलर से ज़्यादा की कमाई की थी.

नों फू स्प्रिंग की स्थापना 1996 में हुई थी जो एशिया में बोतलबंद पानी के बाज़ार के पांचवे हिस्से को नियंत्रित करती है. उनकी कंपनी का मूल्य 70 अरब डॉलर है.

66 साल के ज़ोंग कंपनी के 84 प्रतिशत से अधिक हिस्से के मालिक हैं, जिसकी शेयर वैल्यू लगभग 60 अरब डॉलर है.

इसके कारण ज़ोंग शनशन टेनसेंट्स के पोनी मा और अलीबाब के जैक मा जैसे अरबपतियों से आगे निकल गए हैं. वो हाल के महीनों में चीन के सबसे अमीर आदमी बन गए हैं. वह वैक्सीन निर्माता बीजिंग वॉन्टा बायोलॉजिकल फार्मेसी का स्वामित्व रखते हैं.

ये कंपनी कोविड-19 के लिए नाक से लिया जाने वाला स्प्रे बना रही है जो नवंबर में दूसरे फेज़ का ट्रायल कर रही थी.

बर्नार्ड आरनॉल्ट, एलवीएमएच ग्रुप के मालिक

फ्रांस के बर्नार्ड आरनॉल्ट अपने देश के सबसे अमीर व्यक्ति हैं और फोर्ब्स ने उन्हें अमीर लोगों की सूची में दूसरे नंबर पर रखा था. ब्लूमबर्ग ने उन्हें रैंकिंग में चौथे नंबर पर रखा था.

लग्ज़री सामानों की कंपनी एलवीएमएच के मालिक आरनॉल्ट की कुल संपत्ति इस साल के अंत तक 146.3 अरब डॉलर हो गई है. उनके लिए ये मुश्किल साल होने के बावजूद भी साल 2020 में आरनॉल्ट की संपत्ति 30 प्रतिशत तक बढ़ी है.

कोरोना महामारी के कारण एलवीएमएच ने टिफनी एंड कंपनी का अधिग्रहण करने की योजना अस्थायी तौर पर रोक दी थी. लेकिन, अक्टूबर में उन्होंने 15.8 अरब डॉलर में कंपनी के अधिग्रहण का समझौता किया जो कि इसके मूल प्रस्ताव से 40 करोड़ डॉलर कम है.

लग्ज़री उत्पादों की बिक्री में लगातार कमी आ रही है लेकिन एलवीएमएच ने इस मामले में सबको हैरान किया है. दक्षिण कोरिया और चीन में उनके कुछ उत्पादों की बढ़े स्तर पर बिक्री हुई है.

 

 

डैन गिलबर्ट, रॉकेट कंपनीज़ के अध्यक्ष

58 साल के गिलबर्ट एनबीए क्लीवलैंड कैवेलियर्स के मालिक हैं और ऑनलाइन मॉर्टेज कंपनी क्विकन लोन्स के सह-संस्थापक हैं. ब्लूमबर्ग के आंकड़ों के मुताबिक 2020 में उनकी कुल संपत्ति 28.1 अरब डॉलर तक बढ़ गई है. अब उनकी कुल संपत्ति 35.3 अरब डॉलर है.

इसकी वजह ये है कि क्विकन लोन्स की मूल कंपनी रॉकेट कंपनीज़ ने अगस्त में शेयर और अन्य वित्तीय साधनों की सार्वजनिक बिक्री शुरू की थी. गिलबर्ट के पास रॉकटे कंपनीज़ का 80 प्रतिशत से ज़्यादा मालिकाना हक है जिसका कुल मूल्य 31 अरब डॉलर से ज़्यादा है.

गिलबर्ट की कुल संपत्ति एक साल में छह गुना बढ़ी है जिसकी वजह है क्विकन लोंस का आईपीओ.


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adminJanuary 6, 20211min3870

2021 एक सही नोट पर शुरू हुआ है. कम से कम कपिल शर्मा के फैंस के लिए तो. कपिल अपना डिजिटल डेब्यू करने जा रहे हैं. और वो भी नेटफ्लिक्स के साथ. कपिल ने खुद इसकी जानकारी अपने ट्विटर पर दी. अपनी इस कौलेबोरेशन का एक छोटा सा प्रोमो शेयर किया.

कैप्शन में लिखा,

रूमर्स पर भरोसा मत कीजिए, सिर्फ मुझपे कीजिए. मैं आ रहा हूं जल्द ही नेटफ्लिक्स पर. ये शुभ समाचार है.

1 मिनट 8 सेकंड का वीडियो कपिल से शुरू होता है. जहां वो अपने अंदाज़ में अंग्रेज़ी शब्द ‘auspicious’ बोलने की कोशिश कर रहे हैं. अंग्रेज़ी में बोलने लगते हैं पर इस शब्द पर आकर अटक जाते हैं. फिर अपनी बात हिंदी में कहना शुरू करते हैं. कहते हैं कि नेटफ्लिक्स खुद देसी है तो अपने को क्या ज़रूरत है इंग्लिश बोलने की.

 

 

कपिल ने अपने डिजिटल डेब्यू पर एक स्टेट्मेंट भी रिलीज़ किया. कहा,

नेटफ्लिक्स के साथ पहली बार काम करने को लेकर मैं बहुत खुश हूं. 2020 सबके लिए उथल-पुथल भरा रहा है. मेरा मोटिव यही है कि लोग अपने दुख और परेशानियों को भूल जाएं. इस नए साल का स्वागत प्यार, हंसी और पॉज़ीटिविटी के साथ करें. मैं हमेशा से नेटफ्लिक्स पर आना चाहता था पर मेरे पास इनका नंबर नहीं था. ये प्रोजेक्ट मेरे दिल के बेहद करीब है और मैं इससे जुड़ी जानकारी शेयर करने के लिए बेताब हूं.

कपिल ने कल भी एक ट्वीट किया था. पूछा था कि शुभ समाचार को इंग्लिश में क्या कहते हैं?

 

 

बता दें कि प्रोजेक्ट को लेकर अभी कोई भी बात बाहर नहीं आई है. ये एक सीरीज़ है या स्टैंड अप स्पेशल, इसपर भी कुछ नहीं कहा गया. उनकी ‘दी कपिल शर्मा शो’ की टीम का कोई सदस्य इसका हिस्सा होगा या नहीं, ये भी अभी साफ नहीं. कपिल पिछले कुछ महीनों से अपने शो पर एक वेब प्रोजेक्ट का ज़िक्र करते रहे हैं. शायद इसी प्रोजेक्ट की बात कर रहे थे. जब तक कोई ऑफिशियल अनाउंसमेंट नहीं आ जाता, कुछ भी बता पाना मुश्किल है.


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adminJanuary 6, 20211min4420

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने अपना भारत दौरा रद्द कर दिया है. इस साल गणतंत्र दिवस के अवसर पर बोरिस जॉनसन मुख्य अतिथि थे. बोरिस ने कोरोना के नए स्ट्रेन के चलते भारत दौरा रद्द किया है. बोरिस के इस फैसले के बाद जानकारी मिली है कि इस बार के गणतंत्र दिवस समारोह में किसी भी मुख्य अतिथि को नहीं बुलाया जाएगा.

यह चौथा ऐसा मौका होगा जब भारतीय गणतंत्र दिवस समारोह में कोई भी चीफ गेस्ट नहीं होगा. इससे पहले 1952, 1953 और 1966 में ऐसा हो चुका है. वहीं, कई बार ऐसे मौके भी आए जब देश के गणतंत्र दिवस समारोह में दो-दो अतिथि भी शामिल हुए. साल 1956, 1968 और 1974 में दो-दो मुख्य अतिथि शामिल हुए.

 

जब 10 देश हुए शामिल

साल 2018 में 10 एशियाई देशों के प्रमुख गेस्ट के रूप में भारतीय गणतंत्र दिवस समारोह में शामिल हुए थे. यह पहला मौका था जब इतने देशों के मुखिया 26 जनवरी के परेड में शामिल हुए थे.

बोरिस ने अपने फैसले पर खेद भी जताया है. उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी से बात की और भारत नहीं आ पाने के लिए खेद व्यक्त किया. पीएम से बात करते हुए जॉनसन ने कहा कि जिस गति से ब्रिटेन में नया कोरोना वायरस फैल रहा है, उनके लिए ब्रिटेन में रहना महत्वपूर्ण है, ताकि वह वायरस की घरेलू प्रतिक्रिया पर ध्यान केंद्रित कर सकें.

 

हालात सुधरने पर करेंगे भारत का दौरा

26 जनवरी को भारत के गणतंत्र दिवस समारोह में ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन को बतौर मुख्य अतिथि शामिल होना था, लेकिन उनका कार्यक्रम अब रद्द हो गया है. दरअसल कोरोना के नए स्ट्रेन के कहर के चलते ब्रिटेन में फिर से टोटल लॉकडाउन लगा दिया गया है. बोरिस जॉनसन ने उम्मीद जताई है कि हालात सुधरने पर वो इसी साल भारत का दौरा करेंगे.

ब्रिटिश पीएम बोरिस जॉनसन को भारत सरकार ने 26 जनवरी के मौके पर बतौर मुख्य अतिथि शामिल होने का न्यौता दिया था. इस पर ब्रिटेन के विदेश मंत्रालय ने अपनी सहमति भी जता दी थी, लेकिन अचानक बदले हालात के मद्देनजर उन्हें अपना भारत दौरा रद्द करना पड़ा है. पीएम मोदी ने भी ब्रिटेन में कोरोना संक्रमण के हालात पर चिंता जताते हुए उम्मीद जताई है कि स्थिति जल्द सुधरेगी.

 

सादगी और कोरोना प्रोटोकॉल के साथ होगा समारोह

आजतक को सूत्रों से जानकारी मिली है कि बदली हुई परिस्थितियों में गणतंत्र दिवस के मौके पर कोई विदेशी चीफ गेस्ट नहीं बुलाया जाएगा. कोरोना संक्रमण को देखते हुए 26 जनवरी का कार्यक्रम भी सादगी और कोरोना प्रोटोकॉल के साथ ही मनाया जाएगा.

कोरोना का नया स्ट्रेन भारत में भी चिंता बढ़ा रहा है. लेकिन ब्रिटेन में स्थिति बहुत गंभीर हो चली है. रोजाना संक्रमण के आंकड़े और मौत की संख्या पिछले रिकॉर्ड से काफी ऊपर निकल चुकी है. यही वजह है वैक्सीनेशन शुरू होने के बावजूद ब्रिटेन में तीसरी बार लॉकडाउन लगाना पड़ा है.


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adminJanuary 6, 20211min3240

भारत में कोरोना वायरस की दो वैक्सीन को मंजूरी दी गई है. एक भारत बायोटेक (Bharat Biotech Vaccine) की कोवैक्सीन (COVAXIN) और दूसरी सीरम इंस्टिट्यूट (Serum Institute Vaccine) की कोविशील्ड (Covishield) है जो ऑक्सफोर्ड-एक्स्ट्राजेनेका की वैक्सीन का ही भारतीय संस्करण है. हालांकि, अब दोनों वैक्सीन बनाने वाली कंपनियों के मालिक आपस में ही भिड़ गए हैं. सीरम इंस्टीट्यूट के CEO अदार पूनावाला ने भारत बायोटेक की कोवैक्सीन को मंजूरी दिए जाने पर आपत्ति जताई थी. अब भारत बायोटेक के फाउंडर और चेयरमैन कृष्णा एल्ला ने भी सीरम इंस्टिट्यूट पर पलटवार किया है.

कृष्णा एल्ला ने अपने बयान में कहा, ‘हम इस तरह की प्रतिक्रिया की उम्मीद नहीं करते हैं.’ उन्होंने लोगों से वैक्सीन के मुद्दे पर राजनीति ना करने का आग्रह किया. अदार पूनावाला का नाम लिए बिना एल्ला ने कहा, ‘हम 200 फीसदी ईमानदार क्लिनिकल ट्रायल करते हैं और उसके बाद हमें ऐसी प्रतिक्रिया मिलती है. अगर मैं गलत हूं, तो मुझे बताएं. कुछ कंपनियां हमारी वैक्सीन को पानी की तरह बता रही हैं. मैं इससे इनकार करता हूं. हम वैज्ञानिक हैं.’

आपको बता दें कि रविवार को एक टीवी को दिए एक इंटव्यू में अदार पूनावाला ने कहा था कि अब तक सिर्फ फाइजर, मॉडर्ना और ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका की वैक्सीन की प्रभावकारिता साबित हुई है और बाकी सभी वैक्सीन सिर्फ पानी की तरह सुरक्षित हैं.

एल्ला ने कहा कि अमेरिका और यूरोप ने UK से एस्ट्राजेनेका-ऑक्सफोर्ड वैक्सीन (Astrazeneca Oxford Vaccine) का ट्रायल डेटा लेने से इनकार कर दिया था क्योंकि वो पारदर्शी नहीं था, लेकिन किसी ने भी ऑक्सफोर्ड डेटा पर सवाल नहीं उठाया. उन्होंने आरोप लगाया कि एस्ट्राजेनेका-ऑक्सफोर्ड के ट्रायल में वैक्सीन शॉट देने से पहले वॉलंटियर्स को पेरासिटामोल टैबलेट दी गई थी और अगर ये उनकी कंपनी ने किया होता तो भारत के रेगुलेटर्स उनके ट्रायल को बंद करा देते.

एल्ला ने कहा, ‘हमने वॉलंटियर्स को पेरासिटामोल नहीं दिया है, इसलिए अच्छा या बुरा जो भी रिएक्शन आया, उसे 100 फीसदी उसी तरह लिया गया. इन रिएक्शन को रियल टाइम में कैप्चर किया गया है.’

सीरम इंस्टीट्यूट को आड़े हाथों लेते हुए डॉक्टर एल्ला ने कहा, ‘मेरी भारतीय कंपनी ने 1200 लोगों का सेफ्टी डेटा दिया है लेकिन सीरम इंस्टीट्यूट का कोई इम्युनोजेनसिटी डेटा नहीं है फिर उन्हें लाइसेंस क्यों दिया गया? इन्हें सिर्फ UK के डेटा के आधार पर लाइसेंस दिया गयाहै. उनका भारतीय डेटा कहां है?’ एल्ला ने कहा कि कोवैक्सीन की तुलना में ऑक्सफोर्ड एस्ट्राजेनेका वैक्सीन के ज्यादा गंभीर साइड इफेक्ट सामने आए हैं.

सीरम इंस्टीट्यूट से सवाल करते हुए एल्ला ने कहा, ‘कार चलाते समय मैं किसी को मार दूं और कहूं कि ये अचानक हो गया. इसका मतलब है कि आपने ईमानदारी से गलती की है. आपने कहा कि आप ट्रायल में 6 mg वैक्सीन देंगे फिर ट्रायल सिर्फ 3 mg वैक्सीन क्यों दी गई? क्या कंपनी इसका जवाब देगी?’

एफीकेसी डेटा (Efficacy data) के बारे में पूछे जाने पर एल्ला ने कहा, ‘अभी हमने तीसरे चरण की एफीकेसी पूरी नहीं की है. जब तक वैक्सीन की दोनों डोज देने का काम पूरा नहीं हो जाता हम तब तक तीसरे चरण के ट्रायल के बारे में जानकारी नहीं दे सकते हैं. फरवरी और मार्च में हम तीसरे चरण के एफीकेसी डेटा के साथ आएंगे.’

एल्ला ने एम्स प्रमुख डॉक्टर रणदीप गुलेरिया के बयान को लेकर भी आपत्ति जताई. डॉक्टर गुलेरिया ने कोवैक्सीन का इस्तेमाल अन्य वैक्सीन के बैकअप की तरह करने का सुझाव दिया था. एल्ला ने कहा, ‘ये एक वैक्सीन है, बैकअप नहीं. इस तरह के बयान देने से पहले लोगों को अपनी जिम्मेदारी का एहसास होना चाहिए.’

एल्ला ने दावा किया कि कई अंतर्राष्ट्रीय समीक्षा पत्रिकाओं में फाइजर के बराबर और अन्य Covid-19 वैक्सीन कैंडिडेट से ज्यादा कोवैक्सीन के रिव्यू पब्लिश हुए हैं. उन्होंने कहा कि कोवैक्सीन के तीसरे चरण का ट्रायल अमेरिकी एमएनसी IQVIA द्वारा संभाला जा रहा था. इस चरण के ट्रायल में वैक्सीन की डोज देने के बाद 12 महीने तक वॉलंटियर्स की निगरानी की जाएगी.

एल्ला ने कहा, ‘एक भारतीय कंपनी के रूप में, भारत बायोटेक एस्ट्राजेनेका या फाइजर जैसी मल्टीनेशनल कंपनी की तुलना में बिना किसी भी बैकअप के अकेले संघर्ष कर रहा है. हम सभी डेटा को पारदर्शी तरीके से रखते हैं. हमने हर समिति के सामने अपना डेटा रखा जिसके बाद हमें मंजूरी मिली.’

एल्ला ने कहा, ‘लोग पूछते हैं कि हमारे पास सार्वजनिक डोमेन में कोई डेटा क्यों नहीं है. वास्तव में, हम एकमात्र कंपनी हैं जिसके पांच रिव्यू प्रकाशित हो चुके हैं. पूरी दुनिया में केवल हमारे पास बायो सेफ्टी लेवल 3 (BSL-3) प्रोडक्शन सुविधा है. हमें यह कहते हुए गर्व हो रहा है कि अमेरिका और यहां तक कि ब्रिटेन सरकार के पास भी ये सुविधा नहीं है.’

एल्ला ने कहा कि कोवैक्सीन के 15 फीसदी से भी कम एडवर्स इफेक्ट सामने आए हैं. उन्होंने कहा, ‘अब तक ट्रायल में 10 फीसदी से भी कम साइड इफेक्ट सामने आए हैं. हम 24,000 से ज्यादा लोगों को पहले ही वैक्सीन लगा चुके हैं.’


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adminJanuary 6, 20211min3850

कोरोना महामारी के बीच अब भारत के कई राज्यों में बर्ड फ्लू (Bird Flu) के मामले बढ़ते जा रहे हैं. राजस्थान, मध्य प्रदेश, झारखंड, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश में इस वायरस को लेकर अलर्ट (Bird flu outbreak) जारी कर दिया गया है. पोल्ट्री फार्म, जलाशयों और प्रवासी पक्षियों पर विशेष निगरानी रखने को कहा गया है. साथ ही संक्रमण फैलने वाली जगहों पर मांस बेचने पर भी प्रतिबंध लगाया जा रहा है.

दिसंबर 2020 में जापान, साउथ कोरिया, वियतनाम और चार यूरोपीय देशों में बर्ड फ्लू के मामले आने शुरू हुए थे और अब ये भारत के कई हिस्सों में फैल चुका है. आइए जानते हैं कि आखिर बर्ड फ्लू होता क्या है और ये कैसे फैलता है?

 

क्या होता है बर्ड फ्लू-

बर्ड फ्लू एक वायरल इंफेक्शन है जिसे एवियन इन्फ्लूएंजा (Avian Influenza) भी कहते हैं. ये एक पक्षी से दूसरे पक्षियों में फैलता है. बर्ड फ्लू का सबसे जानलेवा स्ट्रेन H5N1 होता है. H5N1 वायरस से संक्रमित पक्षियों की मौत भी हो सकती है. ये वायरस संक्रमित पक्षियों से अन्य जानवरों और इंसानों में भी फैल सकता है और इनमें भी ये वायरस इतना ही खतरनाक है.

इंसानों में बर्ड फ्लू का पहला मामला 1997 में हॉन्ग कॉन्ग में आया था. उस समय इसके प्रकोप की वजह पोल्ट्री फार्म में संक्रमित मुर्गियों को बताया गया था. 1997 में बर्ड फ्लू से संक्रमित लगभग 60 फीसदी लोगों की मौत हो गई थी. ये बीमारी संक्रमित पक्षी के मल, नाक के स्राव, मुंह की लार या आंखों से निकलने वाली पानी के संपर्क में आने से होती है.

H5N1 बर्ड फ्लू इंसानों में होने वाले आम फ्लू की तरह एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में आसानी से नहीं फैलता है. एक इंसान से दूसरे इंसान में तभी फैलता है जब दोनों के बीच बहुत करीबी संपर्क हो. जैसे कि संक्रमित बच्चे की देखभाल करने वाली मां या घर के किसी अन्य संक्रमित सदस्य का ख्याल रखने वाले लोग.

 

किन पक्षियों में होता है बर्ड फ्लू-

बर्ड फ्लू प्रवासी जलीय पक्षियों खासतौर से जंगली बतख से प्राकृतिक रूप से फैलता है. इन जंगली पक्षियों से ये वायरस घरेलू मुर्गियों में फैल जाता है. जंगली पक्षियों से ये बीमारी सूअरों और गधों तक भी फैल जाती है. साल 2011 तक ये बीमारी बांग्लादेश, चीन, मिस्र, भारत, इंडोनेशिया और वियतनाम में फैल चुकी थी.

 

इंसानों में कैसे फैलता है बर्ड फ्लू-

बर्ड फ्लू इंसानों में तभी फैलता है जब वो किसी संक्रमित पक्षी के संपर्क में आए हों. ये करीबी संपर्क कई मामलों में अलग-अलग हो सकता है. कुछ लोगों में ये संक्रमित पक्षियों की साफ-सफाई से फैल सकता है. कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक, चीन में ये पक्षियों के बाजार से फैला था.

संक्रमित पक्षियों से दूषित पानी में तैरने-नहाने या मुर्गों और पक्षियों की लड़ाई छुड़वाने वाले लोगों में भी बर्ड फ्लू का संक्रमण हो सकता है. इसके अलावा संक्रमित जगहों पर जाने वाले, कच्चा या अधपका मुर्गा-अंडा खाने वाले लोगों में भी बर्ड फ्लू फैलने का खतरा होता है. H5N1 में लंबे समय तक जीवित रहने की क्षमता होती है. संक्रमित पक्षियों के मल और लार में ये वायरस 10 दिनों तक जिंदा रहता है.

 

बर्ड फ्लू के लक्षण-

बर्ड फ्लू होने पर आपको कफ, डायरिया, बुखार, सांस से जुड़ी दिक्कत, सिर दर्द, मांसपेशियों में दर्द, गले में खराश, नाक बहना और बेचैनी जैसी समस्या हो सकती है. अगर आपको लगता है कि आप बर्ड फ्लू की चपेट में आ गए हैं तो किसी और के संपर्क में आने से पहले डॉक्टर को दिखाएं.

 

क्या है इलाज- 

अलग-अलग तरह के बर्ड फ्लू का अलग-अलग तरीकों से इलाज किया जाता है लेकिन ज्यादातर मामलों में एंटीवायरल दवाओं से इसका इलाज किया जाता है. लक्षण दिखने के 48 घंटों के भीतर इसकी दवाएं लेनी जरूरी होती हैं. बर्ड फ्लू से संक्रमित व्यक्ति के अलावा, उसके संपर्क में आए घर के अन्य सदस्यों को भी ये दवाएं ली जाने की सलाह दी जाती है, भले ही उन लोगों में बीमारी के लक्षण ना हों.


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adminDecember 29, 20201min4320

2008 में, इंफाल स्थित रागेश कीशम का परिवार कर्ज के पहाड़ के तले दब गया था और उन्हें अपनी गोद ली हुई बहन के इलाज के लिए लगभग सब कुछ बेचना पड़ा। हालांकि, वह अंततः ल्यूकेमिया से अपनी लड़ाई हार गई।

मणिपुरी परिवार के साथ रागेश को एक रास्ता खोजने की जरूरत थी। उन्होंने विभिन्न व्यवसायों में अपने हाथ आजमाए, जिसमें डेटा डिजिटलीकरण और उत्तराखंड में बांस के पौधे की आपूर्ति शामिल थी, लेकिन कोई सफलता नहीं मिली।

उन्हें एक ऐसे वेंचर की आवश्यकता थी जो महत्वपूर्ण आय उत्पन्न करे। लेकिन किसी भी व्यवसाय को बिजली की आवश्यकता होती है क्योंकि यह इस क्षेत्र में एक दिन में केवल तीन से चार घंटे ही उपलब्ध होती है।

रागेश ने देखा कि एकमात्र संभव आउटलेट कृषि था। यह इन विकट परिस्थितियों में था कि वह लेमनग्रास से चाय बनाने के लिए एक आउट-ऑफ-द-बॉक्स विचार के साथ आये थे।

2011 में, उन्होंने पेरेंट कंपनी SuiGeneris Agronomy, जिसे उन्होंने 2010 में स्थापित किया, के तहत CC Tea ब्रांड लॉन्च किया।

वह YourStory को दिए एक इंटरव्यू में, बात करते हुए कहते हैं, “मैंने खुद चाय के 200 पैकेट बनाए और CC Tea लॉन्च किया। पांच मिनट के भीतर, सभी 200 पैकेट स्थानीय रूप से बेचे गए। हमारा शुरुआती निवेश लगभग 5 लाख रुपये था। आज, हमारे लेमनग्रास चाय की लोकप्रियता के साथ, ब्रांड 2019-20 में बढ़ गया है और 8 करोड़ रुपये का कारोबार दर्ज किया है।“

 

लेमनग्रास क्यों?

जब रागेश एक कृषि उद्यम पर विचार कर रहे थे, तो उन्होंने एक एरोमेटिक वैज्ञानिक से संपर्क किया, जिसने लेमनग्रास उगाने का सुझाव दिया। वैज्ञानिक के अनुसार, उष्णकटिबंधीय पौधे से निकाले गए तेल के लिए एक संपन्न बाजार था।

इंडोनेशिया के एक दोस्त ने रागेश को लेमनग्रास के 10,000 पैकेट्स भेजे, और उन्होंने इम्फाल से लगभग 20 किमी दूर लीमाखोंग में एक एकड़ जमीन पर इसका प्रयोग करना शुरू कर दिया।

वे कहते हैं, “अगले एक-डेढ़ साल अनुसंधान, परीक्षण और त्रुटि में खर्च किए गए थे, और मैंने तेल निष्कर्षण के लिए उपकरण खरीदने के लिए किए गए लोन आवेदनों पर मंजूरी का इंतजार किया। यह हमारे घरेलू खर्चों पर चिंता और बढ़ती चिंताओं से भरा दौर था। कोई लोन नहीं मिलने के कारण, लेमनग्रास के वैकल्पिक उपयोग की तलाश मेरा एकमात्र विकल्प था।”

रागेश ने आगे के शोध के लिए इम्फाल में राज्य पुस्तकालय का दौरा किया और पढ़ा कि ब्राज़ील में बुखार को ठीक करने के लिए दक्षिण अमेरिकी राष्ट्र में उबला हुआ लेमनग्रास कांकोपेशन बनाया गया था, क्योंकि लेमनग्रास को ‘फीवर ग्रास’ कहा जाता था।

इसने रागेश में एक विचार रखा कि वह वास्तविक स्वास्थ्य लाभ के साथ लेमनग्रास से एक पेय बना सकता है। विचार का परीक्षण करने के लिए, उन्होंने कुछ ताजी पत्तियां लीं, उन्हें कुचला, और अपने लिए चाय बनाई।

वे कहते हैं, “हालांकि यह हरे रंग की एक सुंदर छाया थी, चाय ने भयानक स्वाद लिया। लेकिन, मुझे पता चला कि खराब स्वाद और सुगंध सही सुखाने के प्रोटोकॉल का पालन नहीं करने का परिणाम थे। मैंने पत्तियों को ठीक से सुखाने के लिए एक उपाय निकाला, और खराब स्वाद को ठीक किया।”

लेमनग्रास चाय से संतुष्ट होकर, रागेश ने इम्फाल भर के स्कूलों, कॉलेजों, चर्चों और क्लबों में इसके संभावित स्वास्थ्य लाभों पर विशेष जोर देने के साथ इसकी मार्केटिंग शुरू की। वे कहते हैं, “इस बीच, मेरी पत्नी ने चाय के लिए पैकेजिंग सामग्री खरीदने में मेरी मदद करने के लिए अपने सभी गहने बेच दिए।”

 

मैन्युफैक्चरिंग प्रोसेस

CC Tea स्थानीय खेतों से खरीदारी करती है, सैकड़ों वंचितों और बेरोजगारों को रोजगार देती है, और लेमनग्रास पैदा करती है। एक बार जब पत्तियों को काटा जाता है, तो उन्हें CC Tea कारखाने में भेजा जाता है, जहां बेहतरीन पत्तियों को बाकी हिस्सों से अलग किया जाता है।

फिर, तीन तरह से धोने की प्रक्रिया होती है, जिसके बाद पत्तियों को सुखाने के लिये शेड में भेजा जाता है। मौसम की स्थिति के आधार पर पत्तियों को 24 से 48 घंटों के लिए वहां छोड़ दिया जाता है।

रागेश कहते हैं, “इस प्रक्रिया के दौरान, नमी का स्तर 40 प्रतिशत पर आ जाता है। फिर, पत्तियों को गर्म हवा के धौंकनी पर भेजा जाता है, जहां उन्हें एक विशेष तापमान पर सुखाया जाता है जो पोषण मूल्य को नहीं मारता है।”

वे कहते हैं, “पत्ते कम तापमान पर सूख जाते हैं, हालांकि प्रक्रिया में थोड़ा समय लगता है क्योंकि पोषण मूल्य बरकरार रहता है। अधिकांश अन्य चाय उत्पादों में, पोषण मूल्य को जला दिया जाता है।”

एक बार जब पत्तियां ठीक से सूख जाती हैं, तो उन्हें काटने वाले विभाग में भेज दिया जाता है। अंतिम कट, एक और दो मिलीमीटर के बीच की माप, पैकेजिंग टीम को भेजे जाते हैं, जिसमें 100 ग्राम और 150 ग्राम ग्रेन्युल पैकेट होते हैं। पाउडर को टी बैग मशीन में भेजा जाता है, जहां हाथ से थैली बनाई जाती है।

CC Tea वर्तमान में 52 फुल-टाइम कर्मचारियों और 1500 पार्ट-टाइम कर्मचारियों के साथ काम करती है।

रागेश कहते हैं, “हम इस प्रक्रिया में बहुत कम ऑटोमेशन का उपयोग करते हैं क्योंकि हम स्थानीय लोगों के लिए रोजगार पैदा करने में विश्वास करते हैं। जैसा कि हम कहते हैं, हम अधिक से अधिक रोजगार पैदा करना जारी रखना चाहते हैं, लेकिन कुछ पॉइंट्स पर, हम एक सीमित सीमा तक ऑटोमेशन शुरू करने के इच्छुक हैं।”

CC Tea की पेरेंट कंपनी SuiGeneris इम्फाल में 350 एकड़ लेमनग्रास खेतों की मालिक हैं और उन्हें मैनेज करती है। इसने खेती के लिए अतिरिक्त 500 एकड़ का अधिग्रहण किया है, और वर्तमान में, CC Tea की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए उत्पादन का विस्तार कर रही है।

 

बाजार की रणनीति

रागेश कहते हैं, “हमारे ग्राहकों द्वारा विभिन्न स्वास्थ्य दावों के बाद, हमने आईआईटी गुवाहाटी के साथ दीर्घकालिक अनुसंधान सहयोग में प्रवेश किया। हमने पाया कि CC Tea छह मानव कोशिका लाइनों पर किए गए एक अध्ययन में जन्मजात प्रतिरक्षा को बढ़ाता है। इसलिए, हमने दो वेरिएंट्स यानी ग्रैन्यूल्स और टी बैग्स में CC Tea की केवल एक प्रोडक्ट लाइन के साथ आगे बढ़ने का फैसला किया।”

100 चाय की थैलियों वाले CC Tea के एक पैकेट की कीमत 399 रुपये है, जबकि 40 चाय की थैलियों की कीमत 200 रुपये है। CC Tea के दानों के 100 ग्राम के पैकेट की कीमत 200 रुपये है, जबकि 150 ग्राम के पैकेट की कीमत 240 रुपये है।

वर्तमान में, CC Tea का बाजार पूर्वोत्तर भारत में केंद्रित है, विशेष रूप से मणिपुर में। प्रोडक्ट CC Tea की वेबसाइट पर ऑनलाइन बेचे जाते हैं और 25,000 से अधिक पिन कोड्स में डिलिवर किये जाते हैं, फाउंडर ने दावा किया हैं। एक स्लोवेनियाई साझेदार Rozle Tea के माध्यम से चाय को यूरोप में भी एक्सपोर्ट किया जाता है, और जापान, अमेरिका और मध्य पूर्व के देशों में भी छोटी मात्रा में एक्सपोर्ट किया जाता है।

ब्रांड भारत भर में प्रमुख और मिनी महानगरों में विशेष वितरकों की तलाश में है। यह दक्षिण और पश्चिम भारत में वितरण को बढ़ावा देने के लिए भी बातचीत कर रहा है।

रागेश बताते हैं, “हम अपने प्रोडक्ट को बेचने के लिए अप्रत्यक्ष रूप से ग्रामीण समुदायों के लोगों को नियुक्त करते हैं। विश्वास के एक निश्चित स्तर के आधार पर, उन्हें क्रेडिट पर चाय की थैलियों और दानों के पैकेट दिए जाते हैं।”

उदाहरण के लिए, अगर वे 1,000 पैकेट बेचते हैं, तो उनका कमीशन 20 प्रतिशत होता है, जो एमआरपी पर लगभग 40,000 रुपये होता है। कमीशन के अलावा, हम उन्हें इन 1,000 पैकेटों को बेचने के लिए 25,000 रुपये का वेतन भी देते हैं। 500 पैकेट के लिए, कंपनी उन्हें 10,000 के वेतन का भुगतान करती है, जबकि कमीशन प्रतिशत समान रहता है।”

 

फंडिंग और ग्रोथ चैलेंज

2017 में, बिजनेस ने नीदरलैंड स्थित फंड C4D Partners से लगभग 550,000 डॉलर का निवेश प्राप्त किया। अब, यह नोंगपोक सेमकई गांव, जो इंफाल से लगभग 30 किलोमीटर दूर है, में दूसरी फैक्ट्री शुरू करने के लिए दूसरे दौर की फंडिंग जुटाने की योजना बना रहा है।

CC Tea भारत में चाय के लिए एक बढ़ते बाजार में खेल रहा है। एक्सपर्ट मार्केट रिसर्च के आंकड़ों के अनुसार, 2020 में, भारत में लगभग 1.1 मिलियन टन चाय की खपत हुई थी, और यह 2026 तक 1.4 प्रतिशत बढ़कर 1.4 मिलियन टन तक पहुंच जाएगी।

हालांकि Teabox और Vadham Teas जैसे ब्रांड विभिन्न प्रकार की हर्बल चाय पेश करते हैं और उन्हें प्रतिस्पर्धा माना जा सकता है, लेकिन रागेश मानते हैं कि लेमनग्रास चाय के लिए कोई प्रत्यक्ष प्रतियोगी नहीं हैं।

इसके बावजूद, रागेश और उनकी आला लेमनग्रास चाय के लिए दूसरे दौर की फंडिंग को जमीन पर उतारना आसान नहीं रहा। उनका मानना ​​है कि CC Tea निवेशकों के इंटरेस्ट से वंचित है क्योंकि यह नॉर्थ ईस्ट में स्थित है।

रागेश कहते हैं, “यह स्पष्ट है कि भारत में निवेश का प्रभाव उन जगहों को छोड़ देता है जहां गहरी गरीबी है, जहां लोग भूखे हैं, जहां बच्चे युवा मरते हैं और ऐसे स्थान जहां बाजार कुशल नहीं है। जब भी हम निवेशकों तक पहुंचते हैं, तो सौदा बहुत बड़ा होता है, बहुत छोटा, बहुत जल्दी, बहुत देर से या उनके लिए बहुत जोखिम भरा होता है। ”

अगर CC Tea जैसे इनोवेटिव प्रोडक्ट्स को मौका दिया जाए, तो निवेशकों को अलग-अलग कार्य करना चाहिए और इस तरह के व्यवसायों को बढ़ने में मदद करनी चाहिए।

रागेश यह भी बताते हैं कि COVID-19 महामारी के दौरान CC Tea कितनी लचीली थी। उन्होंने दावा किया कि छह महीने तक अपनी फैक्ट्री बंद रखने के बावजूद, कारोबार में कोई कमी नहीं आई। वे कहते हैं, “कंपनी के कर्मचारियों ने कई महीनों के लिए कम वेतन कमाकर अपनी वफादारी साबित की और हमें बचाए रखा।”

 


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adminDecember 29, 20201min4160

कावेरी राणा भारद्वाज ने अपने पालतू कुत्ते को खोने के बाद इससे उबरते हुए ग्रेटर नोएडा में एक पशु आश्रय खोला। वह सोफी मेमोरियल एनिमल रिलीफ ट्रस्ट चलाती है, जो विकलांग जानवरों, विशेष रूप से कुत्तों को बचाता है और उनका इलाज करता है।

वे कहते हैं कि कुत्ते एक आदमी के सबसे अच्छे दोस्त हैं, लेकिन ‘सोफी’ कावेरी राणा भारद्वाज के लिए सिर्फ एक दोस्त से कई अधिक थी; वह लाइफ लाइन थी।

पहला कुत्ता जिसे उन्होंने बचाया, सोफी ने कावेरी के दिल में एक विशेष स्थान रखा। और जब 12 साल की उम्र में उनके पालतू कुत्ते का निधन हो गया, तो वह हतप्रभ थी।

कावेरी ने YourStory के साथ बात करते हुए बताया, “वह मेरी पहली पालतू बेटी थी और हमने उसे खो दिया, ज्यादा उम्र नहीं थी, लेकिन एक बीमारी के लिए के कारण उसकी मौत हो गयी, जब वह सिर्फ 12 साल की थी। मैं उसके नुकसान का सामना नहीं कर सकी, और केवल एक चीज जो उसकी कमी को पूरा कर सकती थी, वह थी कुछ सार्थक करना। मैंने पाया कि असहाय और विकलांग कुत्तों को बचाने में इसका मतलब है।“

भले ही बचाव कावेरी की अनुसूची का एक हिस्सा थे, लेकिन सोफी के 2017 में गुजर जाने तक यह पूर्णकालिक नौकरी नहीं थी।

उसके बाद, उन्होंने अपने पति यशराज भारद्वाज के साथ सोफी मेमोरियल एनिमल रिलीफ ट्रस्ट की सह-स्थापना की। ग्रेटर नोएडा में कोई पशु आश्रय नहीं थे, जब दंपति ने शहर में पहला पशु आश्रय, स्मार्ट अभयारण्य (SMART Sanctuary) खोला।

उन्हें अक्सर नोएडा के ‘डॉग मदर’ के रूप में जाना जाता है। कावेरी कुत्तों के साथ एक बहुत ही विशेष बंधन साझा करती है, और अक्सर उन्हें अपने “बच्चों” के रूप में संदर्भित करती है। वह अब अपने समय का एक बड़ा हिस्सा बचाती है।

जब उनसे पूछा गया कि वह अपने समय की योजना कैसे बना रही हैं, तो वे कहती हैं, “मैं नहीं करती। मैं जो काम करती हूं वह काफी अप्रत्याशित है और आपको नहीं पता होता कि किस बच्चे को मदद की जरूरत हो।” वास्तव में, कावेरी अपने रहने वाले कमरे में 12 पिल्लों के साथ रहती है, इसलिए नियमित नींद चक्र उनके पति और उनके लिए सवाल से बाहर हैं।

इसलिए, एक मोटे, गर्भवती कुत्ते को बचाने के तुरंत बाद, जो जन्म देने के लिए बहुत अस्वस्थ था, कावेरी ने YourStory से बात की, जो अब तक विश्वास और रोमांच के साथ उनकी यात्रा के बारे में बता रही थी।

 

विकलांग कुत्तों की मदद करना

जानवरों को अपना समय समर्पित करने का विकल्प चुनने के बाद, कावेरी कहती है कि वह अपने पति के समर्थन के कारण मजबूत है। एक फ्रीलांस डिजिटल मार्केटिंग प्रोफेशनल, वह खुद अपने ट्रस्ट की एम्बुलेंस चलाती है। वास्तव में, वह इसे स्वयं करने के लिए एक पॉइंट बनाती है क्योंकि वह यह नहीं सोचती कि अन्य स्वयंसेवक समझते हैं कि घायल कुत्ते को विशेष देखभाल की आवश्यकता होती है।

वह कहती हैं, “अक्सर, जिन कुत्तों की रीढ़ क्षतिग्रस्त हो गई है, उन्हें सोने के लिए रखा जाता है। हालांकि यह कुछ के लिए ‘मानवीय’ तरीका लग सकता है, मैं पूरी तरह से असहमत हूं; मेरा मानना ​​है कि वे जीवन में उचित अवसर के हकदार हैं।”

“भले ही उनमें से कुछ के माध्यम से इसे बनाने के लिए नहीं है, यह वास्तव में उन्हें पुनर्प्राप्त करने और अपने सामान्य जीवन में वापस पाने के लिए बहुत दिल से है।”

कुत्ते की स्थिति के आधार पर, कावेरी और यशराज इस बात का आह्वान करते हैं कि उन्हें अस्पताल में इलाज या प्रवेश की आवश्यकता है या नहीं। अगर कुत्ते का इलाज मौके पर किया जा सकता है, तो वे गाजियाबाद के एक अस्पताल, Canine and Feline Critical Care Unit के सहयोग से करते हैं। अस्पताल उन्हें सर्जरी, उपचार, पोस्ट-ऑप्स, चिकित्सा और अन्य जरूरतों में सहायता करता है।

जबकि उपचार के लिए कुछ पैसा अपनी खुद की जेब से जाता है, दोनों डोनर्स पर भरोसा करते हैं ताकि सर्जरी में मदद की जा सके जिसमें उच्च लागत शामिल है।

“उनके कुछ उपचारों में टाइटेनियम प्लेटों और अन्य महंगे उपकरणों की आवश्यकता होती है, जो अन्यथा प्रबंधित करना कठिन होता है।”

मिलाप में इस तरह के एक सफल अभियान के माध्यम से, कावेरी और यशराज पैसे जुटाने में कामयाब रहे और ग्रेटर नोएडा में 120 कुत्तों के लिए घर बनाने में सक्षम थे, और 500 कुत्तों तक जाने की क्षमता थी। आश्रय गृह, SMART Sanctuary में एक कैनाइन पक्षाघात और पुनर्वास इकाई भी है।

 

SMART Sanctuary

दोनों के पास किराए पर जमीन का एक टुकड़ा था, जब उन्होंने धन जुटाना शुरू किया। उन्हें जमीन के इस टुकड़े के विकास के लिए बहुत प्रयास करने पड़े, लेकिन तब मिलाप अभियान हुआ।

“अभयारण्य में विभिन्न प्रकार की बीमारियों और जानवरों के लिए अलग-अलग बाड़े हैं।”

भूमि, लगभग एक एकड़, topsoil से भरी थी। क्वार्टर को शीर्ष गुणवत्ता वाली टाइलों के साथ बनाया गया है क्योंकि “अधिकांश कुत्तों को चोट लगने पर उनमें अंगों को खींचने की प्रवृत्ति होती है। ये टाइलें सुनिश्चित करती हैं कि उन्हें इन अंगों पर घाव न हों ”।

इसके अलावा, अभयारण्य जानवरों को ’पक्के’ और ’कच्चे’ क्षेत्रों तक पहुँच प्रदान करने के लिए बनाया गया है, जो उनकी चिकित्सा में मदद करते हैं।

अभयारण्य के भीतर एक शेड, कुत्तों से दूर, बछड़े, गधे, नीलगाय, और ऊंट जिन्हें एक छापे में जब्त किया गया था। कई विकलांग जानवर, जिनमें बिल्लियाँ और बछड़े शामिल हैं, जो लॉकडाउन के दौरान घायल हो गए थे, उन्हें भी अभयारण्य में रखा गया है।

हालांकि, सबसे आम जानवर जो इस सुरक्षित ठिकाने के लिए अपना रास्ता ढूंढते हैं, वे कुत्ते हैं। वास्तव में, जबकि उन्होंने सैकड़ों कुत्तों का इलाज और मदद की है, उनमें से लगभग 130 अभयारण्य में रहते हैं।

कावेरी कहती हैं, “हम रोज़ाना कई जानवरों को देखते हैं – बिना अंगों वाले कुत्ते, अंधे कुत्ते, बहरे कुत्ते।”

संगठन आस-पास के गाँवों में नसबंदी शिविर और सामूहिक टीकाकरण अभियान भी चलाता है जहाँ कोई पशु चिकित्सालय नहीं हैं। टीम ने सांपों को भी बचाया और उन्हें ग्रेटर नोएडा के जंगलों में छोड़ दिया।

कावेरी कहती है, “सांपों को न मारने के लिए लोगों को समझाने में बहुत काम आया। इसलिए जब हमें फोन आता है, हम आगे बढ़ते हैं और इन सांपों को छुड़ाते हैं। वास्तव में, ‘सपेरे’ (सांप पकड़ने वाले) मुझसे मुफ्त में ऐसा करने के लिए नफरत करते हैं।”

कावेरी मेनका गांधी और पीपल फॉर एनिमल्स (पीएफए) के साथ भी काम करती हैं और गौतम बौद्ध नगर शाखा की प्रमुख हैं।

हालांकि, भले ही चीजें सुचारू रूप से चल रही हों और टीम जानवरों के लिए काम करती हो, लेकिन सड़क हमेशा से ही खस्ताहाल रही है। अपर्याप्त पशु चिकित्सा देखभाल, धन, नफरत – ये कावेरी की यात्रा में कुछ सबसे बड़ी बाधाएं थीं।

वह कहती हैं, “जबकि कुछ लोग आप जो करते हैं, इसकी सराहना करते हैं, कई आपसे नफरत करते हैं। उनके लिए, आप सिर्फ एक कुत्तेवाली (डॉग लेडी) हैं। जब हम उन कुत्तों को बचाते हैं जो घायल हो जाते हैं, तो उनके लिए यह स्वाभाविक है कि वे अपनी पीड़ा के कारण कोड़े मारते और भौंकते रहें, अक्सर हंगामा खड़ा हो जाता है। यह अक्सर बहुत से पड़ोसियों और RWA को ट्रिगर करता है, जो अक्सर हमारे साथ लड़ाई करते हैं।”

“लेकिन जब लोग आपके द्वारा किए जा रहे अच्छे काम को देखते हैं, तो चुनौतियां दूर हो जाती हैं। यह हर दिन हमारे सामने आने वाली चुनौतियों से कहीं अधिक फायदेमंद है। ”

 

महामारी का प्रभाव

अभयारण्य में, टीम जानवरों के लिए एक संतुलित आहार, सूखा और पकाया हुआ भोजन प्रदान करती है। लेकिन जब लॉकडाउन हुआ, दान कम हो गया, प्रसव हुआ, और सूखा भोजन स्टॉक से बाहर हो गया।

टीम में 10 स्थायी सदस्य और स्वयंसेवक हैं जो समय-समय पर मदद करते हैं। हालांकि, महामारी के कारण स्वयंसेवकों की कमी हो गई। कुत्तों के नॉवेल कोरोनावायरस रोग के वाहक होने के बारे में अफवाहों ने भी गोद लेने की दर को प्रभावित किया।

लेकिन चीजें तब बदल गईं जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने मन की बात कार्यक्रम में प्रगति को अपनाने की बात कही।

कावेरी कहती हैं, “लॉकडाउन के दौरान एक अच्छी बात यह रही कि विकलांगों की संख्या में भारी गिरावट आई। लेकिन लॉकडाउन हटने के बाद यह बदल गया।”

 

आगे का रास्ता

चूंकि पिल्लों को बड़े कुत्तों के साथ समायोजित नहीं किया जा सकता है, कावेरी और टीम सोफी मेमोरियल 2021 से पहले पिल्लों के लिए एक पुनर्वास इकाई खोल रहे हैं। “रीढ़ और मस्तिष्क की चोटों के साथ पिल्ले को पुनर्वास और चिकित्सा के लिए भर्ती कराया जा सकता है,” वह कहती हैं।

मिलाप पर क्राउडफंडिंग अभियान अभी भी जारी है; यह विचार है कि सभी पशुओं के लिए मुफ्त उपचार प्रदान करने के लिए एक नि: शुल्क पशु चिकित्सालय स्थापित किया जाए।

अपने जीवन के मिशन के बारे में बात करते हुए, कावेरी कहती है: “मुझसे ज्यादा निस्वार्थ होने के कारण, इन बच्चों ने सोफी के गुजर जाने के बाद मुझे वापस जीवन में ला दिया। जब आप उन्हें बचाते हैं, तो वे बदले में आपको बचाते हैं।”


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adminDecember 29, 20201min8810

साल 2020 ने सिर्फ लोगों के ज़हन पर ही नहीं बल्कि वैश्विक राजनीति पर भी गहरी छाप छोड़ी है.

कोरोना वायरस महामारी ने ना सिर्फ बड़े पैमाने पर आर्थिक संकट पैदा किया बल्कि वैश्विक मतभेदों और प्रतिस्पर्धाओं को भी और गहरा किया. इसका अमेरिका और चीन के रिश्तों पर भी गहरा असर रहा है.

साल 2020 में नागार्नो-काराबाख जैसे कुछ प्राचीन विवाद भी फिर उभर आए.

भारत और चीन की सीमा पर पैंतालीस सालों में सबसे भीषण तनाव भी हुआ.

लेकिन ऐसा नहीं है कि सिर्फ टकराव ही हुए हों. कुछ देश करीब भी आए और लंबे समय तक असर रखने वाले ऐतिहासिक समझौते भी हुए.

 

1. अमेरिका का तालिबान के साथ समझौता

अफ़ग़ानिस्तान पर अमेरिका के आक्रमण के 18 साल बाद राष्ट्रपति ट्रंप उसी तालिबान से समझौता करने में कामयाब रहे जिसकी सरकार को अमेरिका ने उखाड़ दिया था. अफ़ग़ानिस्तान से अमेरीकी सैनिकों को वापस लाना ट्रंप के साल 2016 के चुनावी वादों में शामिल था.

अफ़ग़ानिस्तान-अमेरिका युद्ध की मानवीय क़ीमत भी बहुत भारी रही है. अनुमान के मुताबिक 157000 से अधिक लोग मारे गए हैं जिनमें 43 हज़ार से अधिक आम नागरिक हैं. अब 25 लाख अफ़ग़ान नागरिक शरणार्थी भी बन गए हैं.

अमेरिका और उसके सहयोगी देशों ने भी भारी क़ीमत चुकाई है. अमेरिका के 2400 से अधिक सैनिक मारे गए जबकि नेटो सहयोगियों के 1100 से अधिक सैनिकों ने अफ़ग़ानिस्तान में जान गंवाई. अनुमान के मुताबिक अमेरिका ने अफ़ग़ानिस्तान युद्ध पर दो अरब डॉलर से अधिक ख़र्च किए हैं.

साल 2020 में अफ़ग़ानिस्तान से अमेरिकी सेना को वापस बुलाने के लिए अमेरिका और तालिबान के बीच अहम समझौता हुआ. अमेरिकी सैनिकों की वापसी के अलावा इस समझौते के तहत तालिबान और अफ़ग़ान सरकार के बीच भी वार्ता होनी है.

विश्लेषकों के मुताबिक तालिबान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप की ओर से दिए जा रहे संकेतों को पढ़ने में कामयाब रहा और मौके को भुना लिया.

साल 2016 से 2018 तक पेंटागन में अफ़ग़ानिस्तान मामलों को निदेशक रहे जेसन कैंपबेल को इस समझौते की कामयाबी पर शक है हालांकि वो मानते हैं कि आज का तालिबान पहले के मुकाबले अधिक व्यवहारिक है.

कैंपबेल के मुताबिक आज का तालिबान पश्चिमी देशों और अमेरिका के साथ अच्छे रिश्ते चाहता है ख़ासकर व्यापार और विकास के मामलों में. वो कहते हैं, ‘वो 1990 के दौर में वापस नहीं लौटना चाहते हैं जब वो एक नाकाम राष्ट्र थे.’

 

2. इसराइल का बहरीन और संयुक्त अरब अमीरात के साथ रिश्ते बनाना

अगस्त और सितंबर 2020 के बीच संयुक्त अरब अमीरात और बहरीन ने इसराइल के साथ रिश्ते सामान्य करने की घोषणा की. ये पहले अरब देश हैं जिन्होंने पिछले 25 सालों में यहूदी देश इसराइल के साथ रिश्तों को मान्यता दी है.

इससे पहले मिस्र ने 1979 में और जोर्डन ने 1994 में इसराइल को मान्यता दी थी. इन समझौतों को मध्य पूर्व में इसराइल की बदलती भूमिका के तौर पर भी देखा जा रहा है. अब इसराइल पहले से अधिक सुरक्षित स्थिति में है.

इसराइल और मध्य पूर्व के दो देशों के बीच हुए समझौतों का डोनल्ड ट्रंप ने खुला समर्थन किया. लेकिन इनके पीछे कुछ और भी कारण थे. इनमें से एक है ईरान के प्रति इन देशों का डर.

अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकार रियान बोह्ल के मुताबिक अरब देश इसराइल के साथ मिलकर ईरान के खिलाफ़ अनौपचारिक ब्लॉक बना रहे हैं. अगर अमेरिका मध्य पूर्व से बाहर निकलकर एशिया की तरफ़ बढ़ता है तो मध्य पूर्व में इसराइल के अमेरिका की जगह लेने की संभावना है

 

3. यूरोपीय संघ ने तोड़ी धारणाएं

कोरोना वायरस संक्रमण यूरोपीय संघ के लिए गंभीर परीक्षा रहा है. हालांकि अब ये संकट यूरोपीय संघ को और मज़बूत करने में भी अहम साबित हो सकता है.

जुलाई में चार दिन चली बैठक के बाद यूरोपीय संघ के देश कोरोना संकट से निबटने के लिए 860000 मिलियन डॉलर का फंड बनाने पर तैयार हो गए थे. ये उन सदस्य देशों की मदद के लिए है जिन पर कोरोना संकट का गहरा असर हुआ है.

इसमें से 445000 मिलियन डॉलर मदद के तौर पर बाकी 41000 मिलियन डॉलर कम ब्याज़ दर पर क़र्ज़ के तौर पर दिए जाएंगे. ये पहला कार्यक्रम होगा जिसके तहत यूरोपीय संघ के देश साझा तौर पर क़र्ज़ ले पाएंगे.

विश्लेषकों का मानना है कि ये रिकवरी फंड यूरोपीय संघ के भीतर सहयोग को और मजबूत करेगा.

 

4. आरसीईपी यानी दुनिया का सबसे बड़ा मुक्त व्यापार समझौता

नवंबर में एशिया-प्रशांत क्षेत्र के 15 देशों ने दुनिया के सबसे बड़े मुक्त व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर किए. इसे रीजनल कंप्रीहेंसिव इकोनॉमिक पार्टनरशिप यानी आरसीईपी कहा गया है. इस समझौते में शामिल देशों में दुनिया की एक तिहाई आबादी रहती है.

इसमें दक्षिण एशिया के दस देशों के अलावा चीन, जापान, दक्षिण कोरिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड भी शामिल हैं. भारत इस आर्थिक समझौते का हिस्सा नहीं है. इस समझौते के यूरोपीय संघ और मेक्सिको-अमेरिका के बीच व्यापार समझौते से भी बड़ा माना जा रहा है.

आरसीईपी को सबसे पहले चीन ने साल 2012 में बढ़ावा दिया था लेकिन इसमें अहम प्रगति पिछले तीन सालों में ही हुई. माना ये भी जा रहा है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप की परोक्ष मदद से ही ये समझौता अंजाम तक पहुंचा है.

साल 2017 में ट्रंप ने अमेरिका को ट्रांस-पेसिफिक पार्टनर्शिप (टीपीपी) से अलग कर लिया था. इस समझौते में शामिल कुछ देश अब आरसीईपी का हिस्सा हैं. माना जा रहा है कि इस आर्थिक समझौते से सबसे ज़्यादा फ़ायदा चीन को ही होगा.

 

5. ब्रेग्जिट

31 जनवरी 2020 को इतिहास में ब्रिटेन के यूरोपीय संघ से अलग होने के दिन के तौर पर याद किया जाएगा. जून 2016 में हुए जनमत संग्रह में यूरोपीय संघ से अलग होने के फैसले को अंजाम तक पहुंचाते हुए ब्रिटेन की सरकार ने ब्रेग्जिट को मंज़ूरी दे दी थी.

इस दिन ब्रिटेन और यूरोपीय संघ एक दूसरे को अलग होने के लिए 11 महीने का समय देने के लिए तैयार हुए थे. इस दौरान दोनों पक्षों ने भविष्य में रिश्तों की शर्तों को लेकर वार्ताएं की. ब्रेग्जिट ने 1973 में बनी साझेदारी को तोड़ दिया. तब ब्रिटेन ने यूरोपीय आर्थिक कम्युनिटी से हाथ मिलाया था.


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adminDecember 29, 20201min4930

एक मोहतरमा हैं, बेंगलुरु में रहती हैं. इन्होंने मिंत्रा से शॉपिंग की. ऑर्डर रिसीव होने के कुछ दिनों बाद इनके अड्रेस पर इंडिया पोस्ट से एक चिठ्ठी आई. बताया गया कि मिंत्रा की तरफ़ से इनको लकी ड्रॉ कूपन मिला है, जो सिर्फ कंपनी के कुछ चुनिंदा कस्टमर को मिलता है. इनाम की रकम 15 लाख है और लकी ड्रॉ में हिस्सा लेने के लिए इन्हें अपने बैंक अकाउंट की डिटेल वग़ैरह पोस्ट या वॉट्सऐप के ज़रिए भेजनी होगी.

ये लकी ड्रॉ वाला फ्रॉड बहुत पुराना हो गया है. अपनी डिटेल भेजने का मतलब है “आ बैल मुझे मार”. मोहतरमा को भी अच्छे से ये बात पता थी. इन्होंने सोशल मीडिया पर पूरे मामले के बारे में लिखा, लोगों को इस तरह के फ्रॉड से सावधान किया. इसी पोस्ट में इन्होंने मिंत्रा को टैग किया और पूछा कि भैया मिंत्रा ये बताओ कि इन फ्रॉडियों के पास मेरा रजिस्टर्ड अड्रेस और ऑर्डर की डिटेल कैसे पहुंची.

इस पर कंपनी के सोशल मीडिया हैन्डल से लिखा-लिखाया जवाब आया:

“हम बताना चाहेंगे कि मिंत्रा इस तरह का कोई प्राइज़ ऑफर या कॉन्टेस्ट नहीं चला रहा है. हम सलाह देते हैं कि ऐसे मैसेज और कॉल को नज़र-अंदाज करिए और अपनी किसी भी तरह की पर्सनल डिटेल मत शेयर करिए. मिंत्रा में हम कस्टमर के अकाउंट की सिक्योरिटी को बहुत अहमियत देते हैं और ऐसी गतिविधियों को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाता है. हम आपकी समझदारी की सराहना करते हैं.”

इससे पहले हम मिंत्रा के जवाब पार गौर करें, पहले आप नीचे लगे हुए स्क्रीनशॉट में लकी ड्रॉ वाला कागज़ देखिए.

 

 

इसकी पूरी रूप रेखा ऐसी है कि पहली नज़र में देख कर लगेगा कि ये मिंत्रा की ही तरफ़ से आया है. ऊपर से ये उसी नाम और अड्रेस पर आया है जिसपर मिंत्रा ऑर्डर आया था. तो सवाल तो बनता ही है कि मिंत्रा कस्टमर की डिटेल लीक होकर फ्रॉडियों के हाथ में कैसे पहुंची.

अब मिंत्रा का जवाब देखिए. इन्होंने पहले तो ये कहा है कि मिंत्रा इस तरह का कोई भी कॉन्टेस्ट वग़ैरह नहीं चलाता है इसलिए इसको इग्नोर करिए. क्यों इग्नोर कर दें भाई? मान लीजिए कोई मिंत्रा कस्टमर इतना भोला हो कि इसे सच्ची-मुच्ची का कॉन्टेस्ट समझ ले और अपनी सारी जानकारी शेयर कर दे. तब? ऊपर से कॉन्टेस्ट वाले कागज़ पर ये भी लिखा है:

“कॉन्टेस्ट के बारे में इनके दिए हुए टोल फ़्री नंबर पर कॉल करिए, कस्टमर केयर वाले पर नहीं, क्योंकि वो सिर्फ ऑर्डर से रिलेटेड चीज़ें हैन्डल करते हैं, कॉन्टेस्ट के बारे में उनको कुछ पता नहीं होता.”

दूसरी बात मिंत्रा ने ये कही है कि कस्टमर के अकाउंट की सिक्योरिटी को बहुत अहमियत देते हैं और ऐसी “कथित” गतिविधियों के लिए इनके पास “ज़ीरो टोलेरैंस” है. अगर ऐसा ही है तो फ़िर कस्टमर का अड्रेस फ्रॉडिए के पास कैसे पहुंचा.

मोहतरमा ने जो सवाल पूछा, उसका तो इन्होंने जवाब ही नहीं दिया. कस्टमर की डिटेल मिंत्रा के डेटाबेस से लीक कैसे हुई? लीक कैसे हुई इसका जवाब तो मिंत्रा से तब आता जब ये मानते कि डिटेल लीक हुई है. ये तो “alleged” और “कथित” वाले शब्दों से खेल रहे हैं.

हमारे एक मित्र हैं, ज्ञानेन्द्र सिंह. नोएडा-स्थित एक ई-कॉमर्स वेबसाइट के साथ सालों से बतौर सप्लाई मैनेजर काम कर रहे हैं. ये कहते हैं:

“कस्टमर की डिटेल लीक होने की दो जगह हैं. एक तो खुद कंपनी का डेटाबेस और दूसरा कुरियर कंपनी जो समान डिलिवर करती है. कंपनी अपने ही कस्टमर का डेटा लीक करे ऐसा होने के चांस बहुत कम हैं. मगर कुरियर कंपनी इसे आराम से अंजाम दे सकती है. मिंत्रा के केस में भी शक की सुई इनके कुरियर पार्टनर से जुड़ी हो सकती है.” 

हमने इस सिलसिले में मिंत्रा को भी सवाल भेजे हैं. उनकी तरफ से फिलहाल कोई जवाब नहीं आया है. जवाब आने पर हम इस स्टोरी को जवाब के साथ अपडेट कर देंगे.

कस्टमर के ऑर्डर की डिटेल लीक होना कोई नई चीज़ नहीं है. इस मामले में होम शॉप 18 का नाम बड़ा खराब हुआ पड़ा है. ऑर्डर रिसीव होने के बाद फ्रॉडिए कॉल और मैसेज कर करके जीना दूभर कर देते हैं. और इनको आपके ऑर्डर की पूरी जानकारी होती है इसलिए इस बात की उम्मीद बढ़ जाती है कि कोई भोला भाला कस्टमर इनके चंगुल में फंस जाए.

कन्मस्यूर फ़ोरम पर हमें मिंत्रा कस्टमर की डिटेल लीक होने के और भी मामले मिले. एक केस तो बिल्कुल इसी जैसा है बस वहां पोस्ट की जगह फ्रॉडियों ने कॉल की. अंकित तिवारी नाम के शख्स ने 2018 में इस बात को उजागर किया जहां लकी ड्रॉ के नाम पर इनको ठगा गया. इनका कहना है कि चूंकि कॉल करने वाले के पास इनका नाम, इनके मिंत्रा ऑर्डर की पूरी डिटेल, एड्रेस और आइटम के प्रोडक्ट कोड तक थे इसलिए इन्हें इस बात पर भरोसा हो गया कि कॉल मिंत्रा की तरफ़ से ही थी.



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