बच्चे की जिम्मेदारी उठाने के लिए पुरुष भी ले सकते हैं लंबी छुट्टी, इसके नियम-कायदे क्या हैं

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मार्च, 2020 में सिंगल पैरेंट आदित्य तिवारी (पुरुष) को इंटरनेशनल वुमेंस डे के मौके पर ‘बेस्ट मदर ऑफ द वर्ल्ड’ का अवॉर्ड दिया गया. आदित्य ने जब 2016 में डाउन सिंड्रोम से पीड़ित एक बच्चे को गोद लिया, तब पुरुषों और चाइल्ड केयर को लेकर एक बहस तेज हुई. कहा गया कि क्या बच्चों की केयर सिर्फ महिलाओं की जिम्मेदारी है? भारत सरकार ने भी इस बात को समझा और सिंगल पैरेंट पुरुषों के लिए अच्छी खबर आई. केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने सोमवार, 26 अक्टूबर को कहा कि सभी सरकारी पुरुष कर्मचारी भी ‘चाइल्ड केयर लीव’ (CCL) के हकदार होंगे. मतलब अगर कोई पुरुष अकेले बच्चे का पालन-पोषण कर रहा है, तो उसे भी इसके लिए छुट्टी दिए जाने का प्रावधान है. आइए जानते हैं ‘चाइल्ड केयर लीव’ के बारे में तफ्सील से.

 

पहले बात पुरुषों को मिलने वाली चाइल्ड केयर लीव के बारे में

मोदी सरकार ने 2018 में ही सिंगल पैरेंट पुरुष कर्मचारियों के लिए चाइल्ड केयर लीव का खाका बना लिया था. यह बदलाव चाइल्ड केयर लीव के नियम 43 सी में बदलाव करके लाया गया था. इस बात पर ही केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने सोमवार को यह कहकर जोर दिया कि इसे लेकर जागरूकता की कमी है.

 

क्या हैं इसके नियम

# सिंगल पुरुष पैरेंट की परिभाषा में विधुर, तलाकशुदा और अविवाहित पुरुष आएंगे.

# किसी भी सिंगल पुरुष पैरेंट को बच्चा पालने के लिए 730 दिनों की छुट्टी दी जाएगी. इसे बच्चे के 18 साल होने तक लिया जा सकता है. अगर बच्चा विकलांग है, तो यह आयु-सीमा 22 साल की होगी.

# इन 730 दिनों में से पहले 365 दिन की छुट्टी में पूरी सैलरी मिलेगी. अगले 365 दिनों की छुट्टी में कुल सैलरी की 80 फीसदी रकम ही मिलेगी.

# यह छुट्टियां कमाई गई छुट्टियों (EL) के कोटे से मिलेंगी.

# लेकिन ये साल में तीन बार से ज्यादा नहीं ली जा सकतीं. मतलब 365 दिन की छुट्टी एक साल में तीन बार टुकड़े-टुकड़े में ली जा सकती हैं.

# सक्षम अधिकारी से अप्रूवल लेकर कोई भी सिंगल पुरुष पैरेंट चाइल्ड केयर लीव का लाभ उठा सकता है.

# इस दौरान लीव ट्रेवल कॉन्सेशन (LTC) का फायदा भी छुट्टी लेने वाले कर्मचारी को मिलेगा.

# इसके अलावा पुरुष 15 दिन की पैटरनिटी लीव भी ले सकते हैं.

 

अब तक क्या था कानून

भारत सरकार का डिपार्टमेंट ऑफ पर्सनेल एंड ट्रेनिंग केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए सेवा शर्तें तय करता है. इन सेवा शर्तों में ही छुट्टियों का प्रावधान होता है. इनमें ही चाइल्ड केयर लीव का प्रावधान है. अब तक इस तरह का चाइल्ड केयर लीव का प्रावधान महिलाओं के लिए ही था. यह प्रावधान सिंगल मदर और सामान्य महिलाओं, दोनों के लिए रहे हैं. साल 2018 में मोदी सरकार ने सीसीएस रूल, 1972 में बदलाव किया. चाइल्ड केयर को महिलाओं के अलावा पुरुषों की भी जिम्मेदारी समझा गया. सिंगल पुरुषों के लिए भी बच्चों के लिए चाइल्ड केयर लीव का प्रावधान जोड़ा गया.

 

महिलाओं के लिए क्या हैं नियम

# महिला कर्मचारियों को उनके नाबालिग बच्चों (18 साल तक के सामान्य और 22 साल तक के विकलांग) की देखभाल के लिए उनकी पूरी सेवा के दौरान अधिकतम दो साल (अर्थात 730 दिन) की छुट्टी दी जाती है.

# अगर महिला सिंगल पैरेंट है, तो उसे साल में छह बार छुट्टियों का फायदा मिलेगा, जबकि बाकी महिलाओं को यह फायदा साल में अधिकतम तीन बार ही मिल सकेगा.

# इसके अलावा महिलाएं अपनी 180 दिन की मैटरनिटी लीव भी चाइल्ड केयर लीव के साथ ही ले सकती हैं. ये छुट्टी बच्चे को गोद लेने पर भी ली जा सकती है.




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