दिल से

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adminJune 27, 20201min3920

गौरतलब है कि एसयूवी बेंचने से पहले शहनवाज़ इसका उपयोग मरीजों को अस्पताल पहुंचाने के लिए कर रहे थे।

कोरोना वायरस ने देश की आर्थिक राजधानी कहे जाने वाले शहर मुंबई को बुरी तरह प्रभावित किया है। मुंबई में कोरोना वायरस संक्रमण के कुल 69 हज़ार से अधिक मामले पाये गए हैं, जबकि 37 हज़ार से अधिक लोग इससे रिकवर भी हो चुके हैं।

बढ़ते मामलों के साथ स्वास्थ्य सेवाओं पर इस समय सबसे अधिक दबाव है और कई मामलों में मरीजों को उचित स्वास्थ्य सेवाएँ मिलने में समस्या का भी सामना करना पड़ रहा है। मरीजों को ऑक्सिजन सिलेन्डर तक की व्यवस्था करना इस समय मुश्किल हो गया है, हालांकि इन सब के बीच मदद को बढ़ रहे हाथ हमें संतोष जरूर देते हैं।

ऐसा ही कुछ काम मुंबई के मालाड में रहने वाले शहनवाज़ शेख ने भी किया, जिन्होने कोरोना वायरस संक्रमित मरीजों को ऑक्सिजन सिलेन्डर की व्यवस्था करने के लिए अपनी एसयूवी कार बेंच दी।

शहनवाज़ इस समय अपने दोस्त अब्बास रिजवी के साथ मिलकर मरीजों की मदद के लिए आगे आए हैं। अब्बास यूनिटी एंड डिग्नटी फ़ाउंडेशन नाम का एनजीओ भी चलाते हैं, जो कोरोना संक्रमित मरीजों को फ्री में ऑक्सिजन सिलेन्डर उपलब्ध कराने की दिशा में काम कर रहा है।

यह तब शुरू हुआ जब रिजवी की एक रिश्तेदार ने ऑक्सिजन न मिल पाने के चलते अस्पताल के बाहर दम तोड़ दिया था। किसी और के साथ ऐसा ना हो इसके लिए दोनों दोस्तों ने खुद ही आगे आने का फैसला किया।

शहनवाज़ ने पैसे का इंतजाम करने के लिए अपनी एसयूवी बेंच दी, जिससे उन्हे 4 लाख रुपये मिले और दोनों ने मिलकर उस राशि से 60 ऑक्सिजन सिलेन्डर खरीदे। गौरतलब है कि शहनवाज़ अब तक 3 सौ से अधिक लोगों की मदद कर चुके हैं।

एसयूवी बेंचने से पहले शहनवाज़ इसका उपयोग मरीजों को अस्पताल पहुंचाने के लिए कर रहे थे। आज ये दोनों दोस्त जरूरतमंद लोगों को ऑक्सिजन सिलेन्डर उपलब्ध करा उनकी मदद की है।


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adminJune 17, 20201min3380

इरफान पठान. इंडियन क्रिकेट टीम के लिए खेल चुके क्रिकेटर. पठान भारत में कोरोना फैलने के बाद से ही लगातार लोगों की मदद कर रहे हैं. अब पठान की एक और दिल छू लेने वाली कहानी सामने आई है. ‘ESPN क्रिकइंफो’ में काम करने वाले रौनक कपूर ने एक ट्वीट के जरिए ये कहानी बताई.

रौनक ने ट्वीट किया,

‘6 जून को मेरे साथियों- सौरभ और शशांक की एक स्टोरी पढ़ने के बाद इरफान पठान ने मुझे फोन किया. उन्होंने चेन्नई स्थित जूतों का काम करने वाले आर भास्करन के बारे में क्रिकेट मंथली पर पढ़ा था. भास्करन IPL के दौरान होने वाली कमाई के न होने से काफी परेशान हैं, मुश्किल से गुजारा कर पा रहे हैं.

इरफान ने मुझसे भास्करन का नंबर मांगा. उन्होंने बताया नहीं कि क्यों चाहिए और मैंने पूछा भी नहीं. मैंने शशांक से नंबर लिया और तुरंत इरफान को फॉरवर्ड कर दिया. बाद में एक घंटे से ज्यादा बीतने के बाद उन्होंने मुझे मैसेज किया कि वो कोशिश कर रहे हैं, लेकिन भास्करन से बात नहीं हो पाई. मैंने अगले दिन वो मैसेज पढ़ा और रिप्लाई करना भूल गया.

आज मुझे ‘इंडियन एक्सप्रेस’ में वेंकट कृष्णा के आर्टिकल से पता चला कि इरफान पठान ने भास्करन को 25 हजार रुपये भेज दिए थे. IPL के दौरान भास्करन लगभग 25 हजार रुपये कमा लेते थे. इरफान ने इस बात का शोर नहीं मचाया, न क्रेडिट की इच्छा जताई. शुरुआत में उन तक पहुंचने में मिली नाकामी के बाद भी उन्होंने कोशिश जारी रखी. ये वही आदमी है, जिसे राइट विंग के लोग और आईटी सेल लगातार गालियां देते हैं, ट्रोल करते हैं.’

 

# मामला क्या था?

दरअसल क्रिकेट मंथली ने 5 जून को एक स्टोरी छापी थी. इसमें IPL से जुड़े उन लोगों से बात की गई थी, जिन पर अभी लोगों का ध्यान कम है. इसमें चियरलीडर्स, युवा क्रिकेटर्स के साथ भास्करन भी थे. खुद को चेपॉक का ऑफिशल Cobbler कहने वाले भास्करन कई साल से स्टेडियम के बाहर बैठते हैं. वे प्लेयर्स के जूतों, पैड, ग्लव्स इत्यादि की मरम्मत कर अपना जीवन-यापन करते हैं.

1993 से आज तक भास्करन ने चेपॉक में हुआ एक भी इंटरनेशनल मैच मिस नहीं किया है. पिछले 12 साल से वे चेन्नई सुपरकिंग्स प्लेयर्स के जूते, पैड, ग्लव्स, हेलमेट इत्यादि रिपेयर करने वाले ऑफिशल बंदे हैं. आम दिनों में वे चिदंबरम स्टेडियम के ठीक बाहर बैठते हैं.

 


मैच और ट्रेनिंग वाले दिनों में वह ड्रेसिंग रूम के पास अपने साजो-सामान के साथ बैठते हैं. भास्करन बताते हैं कि एक दिन के काम के लिए तमिलनाडु क्रिकेट असोसिएशन (TNCA) उन्हें 1000 रुपये देता है. इसके अलावा प्लेयर्स उन्हें अलग से पैसे देते हैं. बाकी दिनों में भास्करन 300 से 500 रुपये रोज कमा लेते हैं. भास्करन ने बताया था कि पिछले IPL से उन्होंने 25,000 रुपये कमाए थे. यही आर्टिकल पढ़ने के बाद इरफान ने बिना किसी को बताए भास्करन को 25,000 रुपये भेज दिए.

 

# ट्रोल्स का मामला

रौनक ने जिन ट्रोल्स का ज़िक्र किया, वो आए दिन इरफान की टाइमलाइन पर देखने को मिल जाते हैं. हाल ही में उन्होंने रेसिज्म के बारे में ट्वीट किया था. इरफान ने लिखा था,

‘रेसिज्म चमड़ी के रंग तक ही सीमित नहीं है. दूसरे मज़हब के लोगों को किसी सोसाइटी में घर न खरीदने देना भी रेसिज्म है.’

इस ट्वीट को लेकर उन्हें खूब ट्रोल किया गया था. लेकिन इरफान ट्रोल्स से डरे नहीं. उन्होंने साफ किया कि वो एक भारतीय हैं और अपने मन की बात करने से पीछे नहीं हटेंगे.


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adminJune 12, 20202min3710

मौक़ा कोई भी हो. सिख समुदाय ने हमेशा मदद का हाथ आगे बढ़ा कर इंसानियत का परिचय दिया है. George Floyd की हत्या के बाद दुनियाभर में नस्लवाद को लेकर विरोध हो रहा है. वहीं अमेरिका में चल रहे विरोध के बीच सिख समुदाय ने प्रदर्शनकारियों के लिये लंगर आयोजित किया है.

Queens गांव स्थित गुरुद्वारे में 30 रसोइयों द्वारा 10 हफ़्तों में 145,000 से ज़्यादा Meals बना कर खिलाए चुके हैं. इसके साथ ही लोगों को हज़ारो पानी और सोडा की बोतल भी मुहैया कराई जा चुकी हैं. प्रदर्शनकारियों को दिये जा रहे Meal Box में मटर-पनीर, राजमा-चावल और थोड़ी सी खीर शामिल है.

 

Sikh

 

खाना वितरित करते समय सिख समुदाय द्वारा साफ़-सफ़ाई और सामाजिक दूरी का पूरा ध्यान रखा गया है. इसके अलावा खाना मॉस्क लगा कर दिया जा रहा था. सिख समुदाय का ये प्रयास उन लोगों के लिये जो महामारी के दौरान संघर्ष कर रहे हैं. इस बारे में World Sikh Parliament के कॉ-आर्डिनेटर हिम्मत सिंह का कहना है कि सुमदाय शांतिपूर्ण तरीके से किये जा रहे प्रदर्शन का समर्थन करता है. इसलिये जहां भी शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन हो रहा है, वो वहां जा रहे हैं. वो इसका समर्थन करते हैं. इसके साथ ही उन्हें न्याय की तलाश है.

 

 

 

धन्य है सिख समुदाय जिसे किसी महज़ब नहीं, बल्कि इंसानियत का दर्द दिखाई देता है. वो लोगों की मदद के लिये कहीं भी पहुंच जाते हैं और हमेशा अपनी दरियादिली का सबूत देते हैं. बता दें कि बीते 25 मई को George Floyd की मिनियापोलिस में पुलिस कस्टडी में मौत हो गई थी. इसके बाद Floyd का एक वीडियो भी सामने आया था, जिसमें पुलिस ने उनकी गर्दन पर पैर रखा हुआ था. जिस कारण सांस रुकने की वजह उनकी मौत हो गई और दुनियाभर में नस्ल भेदभाव को लेकर विरोध शुरू हो गया.

 


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adminJune 9, 20201min3080

सुनील दत्त, नरगिस जी दोनों जाने-माने एक्टर्स रहे. आज के जमाने में जब प्रेम करने वालों के खिलाफ पूरा ज़माना हो रहा है और प्रेम की राह मुश्किल होती जा रही है, नरगिस और सुनील दत्त की ये कहानी प्रेरित करती है.

ये कहानी वहां से शुरू होती है जब सुनील दत्त सीलोन रेडियो में बतौर रेडियो जॉकी काम किया करते थे. तब एक्टिंग से उनका कोई लेना-देना नहीं था. लेकिन यहीं पर उनका नरगिस से पहली बार मिलना हुआ. उन्हें रेडियो के लिए नरगिस का इंटरव्यू लेने का काम सौंपा गया. तब वे भारत की बहुत बड़ी एक्ट्रेस हो चुकी थीं. राज कपूर के साथ उनकी जोड़ी फिल्मों में बहुत हिट थी. इंटरव्यू के दौरान अपने सामने नरगिस को देखकर सुनील दत्त इतने नर्वस हो गए कि उनसे एक भी सवाल नहीं पूछ पाए. हालत ये हुई कि सुनील दत्त की नौकरी जाते-जाते बची.

दूसरी बार नरगिस और सुनील दत्त की मुलाकात बिमल रॉय की फिल्म ‘दो बीघा ज़मीन’ के सेट पर हुई. नरगिस वहां बिमल रॉय से मिलने आई थीं और सुनील दत्त वहां काम की तलाश में पहुंचे थे. सुनील को देखते ही नरगिस को पिछला वाकया याद आ गया. वो उन्हें देखकर मुस्कुराते हुए आगे बढ़ गईं. इसके बाद महबूब खान की फिल्म ‘मदर इंडिया’ में सुनील दत्त को नरगिस के बेटे का रोल मिला.

शूटिंग के दौरान सुनील बार-बार नरगिस के सामने नर्वस हो जाते थे और एक्टिंग नहीं कर पाते थे. लेकिन नरगिस ने इस दौरान उनकी काफी मदद की जिससे वो सहज होकर एक्टिंग कर सके. नरगिस की इस दरियादिली की वजह से सुनील दत्त को उनसे बहुत लगाव सा हो गया.

कहा जाता है कि इसमें जो रोल सुनील दत्त को मिला था वो इससे पहले दिलीप कुमार को ऑफर किया गया था. लेकिन दिलीप कुमार ने इस रोल को करने से मना कर दिया क्योंकि वो नरगिस के बेटे का रोल नहीं करना चाहते थे. दिलीप ने कहा कि नरगिस तो मेरी हीरोइन है, मैं उसके बेटे का रोल कैसे कर सकता हूं. हालांकि डायरेक्टर महबूब खान ने दिलीप कुमार को डबल रोल ऑफर किया. उन्होंने कहा था कि बाप और बेटे दोनों का रोल आप कर लीजिए लेकिन दिलीप कुमार नहीं माने.

फिर एक घटना घटी जिसने हमेशा के लिए सुनील दत्त और नरगिस को करीब ला दिया. ये हुआ था गुजरात के बिलिमोर गांव में. ‘मदर इंडिया’ का सेट था. वहां एक सीन को फिल्माए जाने के लिए चारों ओर पुआल बिछाए गए थे. सीन को फिल्माने के लिए पुआलों में आग लगाई गई. देखते-देखते आग चारों ओर फैल गयी. नरगिस सीन करने के दौरान आग में फंस गईं. सुनील दत्त अपनी जान पर खेलकर नरगिस को बचाने के लिए आग में कूद पड़े. उन्होंने नरगिस को बचा लिया लेकिन खुद काफी जल गए. वो इतने ज़्यादा जल गए थे कि बार-बार बेहोश होने लगे. अस्पताल में भर्ती कराया गया.

 

अस्पताल में सुनील दत्त की खबर लेते हुए नरगिस.

 

नरगिस रोज़ अस्पताल जाकर उनकी देखभाल करतीं. आग वाले हादसे के बाद नरगिस का नज़रिया सुनील दत्त की ओर से पूरी तरह बदल गया था.

इसी बीच सुनील दत्त की बहन बीमार पड़ गईं. वे बंबई में किसी डॉक्टर को नहीं जानते थे. बिना सुनील दत्त को बताए नरगिस उनकी बहन को लेकर अस्पताल चली गईं और इलाज करवाया. सुनील दत्त पहले से ही नरगिस को चाहते थे लेकिन इस घटना के बाद उन्होंने तय कर लिया कि जिंदगी बितानी है तो उन्हीं के साथ. फिर वो नरगिस को प्रपोज़ करने से खुद को रोक नहीं पाए. नरगिस को उन्होंने प्रपोज़ किया और नरगिस ने उसे स्वीकार भी कर लिया. उसके बाद दोनों ने शादी कर ली.

 

नरगिस की लाइफ के कुछ और किस्से भी जानते हैंः

 

1. अपने बेटे संजय की डेब्यू फिल्म नहीं देख पाईं:

संजय दत्त की पहली फिल्म ‘रॉकी’ 1981 में अप्रैल-मई में रिलीज़ होने वाली थी. नरगिस तब बीमार चल रही थीं. उन्हें कैंसर था. वो संजू की फिल्म देखने को बेचैन थीं. बेटे संजू से उन्होंने कहा था कि उनकी तबीयत खराब रही और स्ट्रेचर पर भी ले जाना पड़ा, तब भी वो फिल्म ज़रूर देखेंगी. फिल्म 8 मई को रिलीज़ होनी थी लेकिन 3 मई को ही नरगिस की मौत हो गई. जिस दिन फिल्म का शो था उस दिन एक सीट नरगिस के लिए खाली रखी गई थी.

 

2. डॉक्टर्स ने सुनील दत्त को दी नरगिस को मारने की सलाह:

नरगिस को कैंसर की बीमारी थी. उनकी पूरी बॉडी में बहुत दर्द रहता था. डॉक्टर्स ने इसीलिए सुनील दत्त को सलाह भी दी कि वो नरगिस का लाइफ सपोर्ट सिस्टम हटा दें. लेकिन सुनील दत्त ने ऐसा करने से मना कर दिया. वे आखिरी पल तक उनके साथ रहे.

 

3. जब नाराज होकर मास्को टूर छोड़कर भारत आ गईं:

अपनी लोकप्रिय फिल्मों से राजकपूर और नरगिस की जोड़ी काफी मशहूर हो चुकी थीं. रूस में भी इनकी फिल्में काफी मशहूर थीं. एक बार नरगिस, राजकपूर के साथ मास्को गईं. लेकिन लोगों ने उन्हें स्वतन्त्र रूप से महत्व न देकर राजकपूर की हीरोइन जितनी ही तवज्जो दी. पूरा सम्मान न पाकर नरगिस को बुरा लगा और वो बीच में ही मास्को से इंडिया लौट आईं.

 

4. राजकपूर से 20 साल बाद जब मुलाकात हुई:

सुनील दत्त से शादी होने के बाद नरगिस अपनी ज़िन्दगी में पूरी तरह व्यस्त हो गईं. पहले उन्होंने राज कपूर के साथ ‘आवारा’, ‘श्री 420’ और ‘बरसात’ जैसी करीब 16 फिल्में की थीं. लेकिन बाद में वे राज कपूर से नहीं मिलीं. फिर करीब 20 साल बाद जब राज कपूर ने बेटे ऋषि कपूर की सगाई के बाद बंबई के देवनार बंगले पर पार्टी दी तो उसमें नरगिस को भी बुलाया. इस तरह 20 साल बाद दोनों की मुलाकात हुई. सुनील दत्त और संजय दत्त भी इस पार्टी में मौजूद थे.


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adminJune 1, 20201min580

कोरोना वायरस और लॉकडाउन की वजह से कई लोगों को खाने-पीने की कमी हो गई. ऐसे में उन्हें जहां और जैसे खाना मिल रहा है, वैसे वे भूख मिटा रहे हैं. भूख मिटाने के लिए चोरी की घटनाएं भी सामने आई हैं. ऐसा ही एक मामला महाराष्ट्र के यवतमाल जिले का है. यहां एक व्यक्ति चोरी से खाने की दुकान में घुस गया. वहां उसने भूख मिटाई और फिर चला गया. दुकान मालिक को चोरी का पता लगा. लेकिन उसने पुलिस में शिकायत नहीं की.

समाचार एजेंसी पीटीआई की खबर के अनुसार, मामला 27 मई की रात का है. यवतमाल के गांधी चौक में झुनका भाकर के नाम से खाने की दुकान है.

 

सीसीटीवी में कैद हुआ मामला

30 मई को एक अधिकारी ने पीटीआई को बताया कि एक आदमी दरवाजा तोड़कर दुकान में घुसा. फिर वह किचन में गया. यहां उसने झुनका भाकरी और सेव भाजी खाई. खाने के बाद वह कैश काउंटर के पास गया. इसमें 200 रखे थे. इन्हें वह ले गया. दुकान में लगे सीसीटीवी कैमरे में पूरा मामला दर्ज हो गया.

 

दुकानदार ने क्या कहा

दुकान के मालिक का नाम राजेश मोर है. उन्होंने पीटीआई से कहा कि वह आदमी भूखा था. साथ ही जितने पैसे वह लेकर गया वह ज्यादा नहीं थे. इसलिए उन्होंने पुलिस में शिकायत नहीं की.

बता दें कि इस तरह का मामला पिछले दिनों गुजरात में भी हुआ था. यहां पर जूनागढ़ के एक होटल में 12-13 मई की रात कुछ लोग घुसे. उन्होंने किचन का ताला तोड़ा और अपने लिए खाना बनाया, खाया और बिना कुछ लिए चले गए. यहां पर भी मालिक ने पुलिस में मामला दर्ज नहीं कराया.


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adminMay 23, 20202min2570

‘सोनू सूद सर प्लीज़ हेल्प. ईस्ट यूपी में कहीं भी भेज दो सर. वहां से पैदल अपने गांव चले जाएंगे.’

‘पैदल क्यों जाओगे दोस्त? नबंर भेजो.’

पिछले कई दिनों से बॉलीवुड अभिनेता सोनू सूद लॉकडाउन की वजह से फँसे मज़दूरों को घर पहुंचाने में उनकी हरसंभव मदद कर रहे हैं. वो उनके लिए बसों से लेकर खाने-पीने की चीज़ों तक का इंतज़ाम कर रहे हैं.

 

 

सोनू सूद

 

सोनू सूद के इस कदम की वजह से हर ओर उनकी तारीफ़ें हो रही हैं और ट्विटर पर #SonuSood सबसे ऊपर ट्रेंड कर रहा है. लोग उन्हें ‘लॉकडाउन का हीरो’ बता रहे हैं.

समाचार एजेंसी पीटीआई को कुछ दिनों पहले दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा था कि उनसे मज़दूरों का दुख देखा नहीं जा रहा है और वो उन्हें घर पहुंचाने के लिए पूरी कोशिश करेंगे.

कोरोना संकट के बीच जारी लॉकडाउन की वजह से हज़ारों प्रवासी मज़दूर देश के अलग-अलग हिस्सों में फंसे हुए हैं.

लॉकडाउन के पहले चरण के ऐलान के बाद से ही अंतरराज्यीय और रेल सेवाएं बंद कर दी गई थीं. इसकी वजह से बड़ी संख्या में मज़दूर पैदल ही अपने घरों को जाने से के लिए मजबूर हो गए थे.

ऐसी संकट की घड़ी में सोनू सूद मज़दूरों के लिए बड़ी राहत बनकर उभरे हैं.उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार से ख़ास अनुमति लेकर प्रवासी मज़दूरों को घर पहुंचाने के लिए कई बसों का इंतज़ाम करवाया. इससे पहले उन्होंने कर्नाटक के कई मज़दूरों को घर पहुंचाने के लिए बसों का इंतज़ाम कराया था.

उन्होंने कहा, “ये मेरे लिए एक बेहद भावुक सफ़र रहा है. सड़कों पर पैदल चलकर अपने घर जाते मज़दूरों को देखकर मुझे बहुत कष्ट होता है. मैं तब तक उन्हें घर पहुंचाने में मदद करता रहूंगा जब तक आख़िरी मज़दूर अपने परिवार से न मिल जाए.”

46 वर्षीय सोनू सूद ने उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और कर्नाटक जैसे राज्यों के मज़दूरों को उनके घर पहुंचाने में मदद की है.

http://iamfeedy.com/special-train-chal-rahi-fir-bhi-pedal-hi-kyo-ja-rahe-hai-lakho/

 

सोनू सूद

 

इससे पहले उन्होंने पंजाब के डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों के लिए 1,500 पीपीई किट भी दान किया था. इतना ही नहीं उन्होंने मुंबई का अपना होटल स्वास्थ्यकर्मियों को रहने के लिए भी दिया है.

सोनू सूद रमज़ान के महीने में भिवंडी इलाके में हज़ारों ग़रीबों और प्रवासी मज़दूरों को खाना भी खिला रहे हैं.

उनकी एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है जिसमें वो नारियल फोड़कर मज़दूरों को बस से विदा करते नज़र आ रहे हैं.

उनकी यह दरियादिली पूरे ट्विटर और सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म्स पर छाई हुई है. लोग उनकी तारीफ़ में पोस्ट कर रहे हैं, मीम्स और तस्वीरें शेयर कर रहे हैं.

लोग कह रहे हैं कि कोरोना वायरस की वैक्सीन का तो पता नहीं मगर सोनू सूद ने हज़ारों प्रवासी मज़दूरों के लिए वैक्सीन का काम किया है!

घर जाना है? ई-पास  आवेदन के लिए लिंक पर क्लीक करे –http://iamfeedy.com/घर-जाना-है-ई-पास-के-लिये-ऐसे/

 

सोनू सूद

 

ट्विटर यूज़र्स ये भी कह रहे हैं कि फ़िल्मों में अमूमन खलनायक की भूमिका निभाने वाले सूद असल ज़िंदगी में हीरो हैं.

मनीष ने लिखा है, “इस वक़्त सोनू सूद सबसे अच्छे केंद्र और राज्य सरकार हैं.”

इतना ही नहीं, लोग उन्हें ‘भगवान’ तक बता रहे हैं और महाराष्ट्र का अगला मुख्यमंत्री बनाने की मांग भी कर रहे हैं.

 

सोनू सूद

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adminMay 16, 20201min3300

लाखों प्रवासी मजदूर पैदल ही हजारों किलोमीटर की दूरी तय कर रहे हैं, ताकि घर पहुंच सकें. हर दिन सोशल मीडिया और मीडिया में ऐसी तस्वीरें और वीडियो आ रहे हैं, जो रुला देने वाले हैं. हालांकि केंद्र सरकार और राज्य सरकारों का दावा है कि मजदूरों के घर लौटने के लिए ट्रेन और बसें चलाई जा रही हैं. लेकिन सबको ये सुविधा नसीब नहीं हो रही है.

आंध्र प्रदेश में फंसे प्रवासी मजदूर भी ट्रेन और बस नहीं मिलने के कारण पैदल ही अपने घर की ओर निकल पड़े हैं. 15 मई को कुछ मजदूर पैदल ही हजारों किलोमीटर दूर घर जा रहे थे. चेन्नई-कोलकाता हाइवे पर इनकी मुलाकात आंध्र प्रदेश की चीफ सेक्रेटरी नीलम साहनी से हुई. उन्होंने इन मजदूरों के घर जाने और खाने-पीने का इंतजाम किया.

 

सीएम से मुलाकात के बाद वापस लौट रही चीफ सेक्रेटरी ने हाइवे पर मजूदरों को देखा तो अपनी कार रोक दी. 

 

क्या है मामला?

हर दिन की तरह आंध्र प्रदेश की चीफ सेक्रेटरी नीलम साहनी सीएम जगनमोहन रेड्डी से मीटिंग के लिए उनके घर गई थीं. मीटिंग खत्म करने के बाद वो लौट रही थीं. रास्ते में उन्होंने देखा कि प्रवासी मजदूरों का एक ग्रुप चेन्नई को कोलकाता से जोड़ने वाले हाइवे पर पैदल ही चला जा रहा है. उन्होंने अपनी सिक्योरिटी को काफिला रोकने को कहा. कार से उतरीं और बिना अपनी पहचान उजागर किए उन्होंने मजदूरों से बात की. उनकी समस्या सुनी.

 

चेन्नई को कोलकाता से जोड़ने हाइवे पर चीफ सेक्रेटरी की मुलाकात मजदूरों से हुई थी.

 

मजदूरों ने बताया कि पैसा खत्म हो गया है, इसलिए वो पैदल ही चेन्नई से बिहार जा रहे हैं. ये जानने के बाद उन्होंने तुरंत गुंटूर जिले के संयुक्त कलेक्टर और कृष्णा जिले के कलेक्टर को श्रमिकों के घर जाने और उनके खाने-पीने की व्यवस्था करने को कहा. उन्होंने ये भी आदेश दिया कि अगली ट्रेन से इन मजदूरों को बिहार भेजा जाए.

 

चीफ सेक्रेटरी के दखल के बाद मजदूर ट्रेनों से अपने घर जा सकेंगे.

 

आईएएस अधिकारी नीलम साहनी नवंबर में आंध्र प्रदेश की मुख्य सचिव बनी थीं.  वह विभाजित आंध्र प्रदेश की पहली महिला मुख्य सचिव हैं. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सीएम ने उनके कार्यकाल को बढ़ाने की मांग केंद्र से की है. 1984 बैच की आईएएस अधिकारी नीलम इससे पहले सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग के सचिव पद पर तैनात थीं. नीलम के पति अजय साहनी भी आईएएस अधिकारी हैं.


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adminMay 9, 20201min540

केरल के अलाप्पुझा के एक गाँव के लोगों ने छतरियों की मदद से सोशल डिस्टेन्सिंग का सटीक विकल्प खोज निकाला है।

कोरोनावायरस महामारी ने भारत में 53 हज़ार से अधिक सकारात्मक मामलों के साथ 1,600 से अधिक लोगों की जान ली है। वैश्विक स्तर पर यह संख्या 3.7 मिलियन सकारात्मक मामलों को पार करने के साथ अब हाइजीनिक प्रैक्टिस और सोशल डिस्टेन्सिंग आज जरूरत बन गए हैं।

हालांकि लोग रोकथाम की इन आवश्यकताओं को पूरा करने में विफल रहे हैं। कई स्थानों पर जहां किराने की दुकानों के आसपास भीड़ है, दो व्यक्तियों के बीच एक सुरक्षित दूरी बनाए रखने के लिए निशान भी बनये गए हैं।

इसे सुनिश्चित करने के लिए, केरल के अलाप्पुझा के एक गाँव के लोग अब मानसून के साथ-साथ एक छाता के साथ सामाजिक दूरी का अभ्यास कर रहे हैं। स्थानीय नागरिक निकाय सुनिश्चित कर रहे हैं कि छातों को क्षेत्र के लोगों के लिए उपलब्ध कराया जाए।

पंचायत के एक अधिकारी रेमा मदानन ने NDTV को बताया, “लोगों के बीच दो खुले हुए छतरियों का अंतर प्रत्येक व्यक्ति के बीच कम से कम एक मीटर की दूरी है। इस तरह दो लोगों के बीच एक मीटर की दूरी सुनिश्चित की जाती है।”

 


केरल के वित्त मंत्री थॉमस इसाक ने शुरुआत में इस विचार का संकेत दिया था। अलप्पुझा में गांव की यात्रा के दौरान, उन्होंने एक बैठक के दौरान “श्रृंखला को तोड़ने” के समाधान के रूप में इस विचार का उल्लेख किया था।

स्थानीय नागरिक निकाय निवासियों को रियायती दर पर कम से कम 10,000 छतरियों का वितरण करेगा। मान्यता प्राप्त सामाजिक स्वास्थ्य कार्यकर्ता (आशा) कार्यकर्ता और आंगनवाड़ी कार्यकर्ता भी मुफ्त छतरियां प्राप्त करेंगे।

पंचायत के अध्यक्ष पीएस ज्योति ने बताया,

“दो खुले छाते जो एक दूसरे को नहीं छू रहे हैं, एक मीटर की न्यूनतम दूरी सुनिश्चित करेंगे। यही कारण है कि एक छाता सामाजिक दूरी के लिए एक प्रभावी उपकरण है। अभी हमारे पास स्टॉक तीन गुना वाले हैं- सामान्य और अतिरिक्त-बड़े छतरियां। हम अतिरिक्त बड़ी छतरियों को बेचने की कोशिश कर रहे हैं, क्योंकि यह उपयोगकर्ताओं के बीच अधिक दूरी बनाएगी।”

अलापुझा में जिले में अब तक लगभग पांच सकारात्मक मामले हैं, जिनमें से सभी को ठीक कर लिया गया है। केरल में लगभग 500 मामले हुए हैं, जिनमें से लगभग पांच मौतें हुई हैं, लेकिन पिछले कुछ दिनों में कोई नया मामला सामने नहीं आया है।

 


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adminMay 6, 20201min590

देश COVID-19 से जूझ रहा है. लोग अपनी तरह से इस लड़ाई में सहयोग कर रहे हैं. सेलिब्रिटीज, एथलीट्स, सभी ने अपने हिसाब से दान किया. कुछ ने PM Cares में पैसे दिए. कुछ ने NGO की मदद की, तो कई ने खुद से चीजें खरीदकर बांटी या बंटवाई. लेकिन इस बीच भारतीय महिला हॉकी टीम ने सबसे अलग तरीके से दान किया. टीम ने ट्विटर के जरिए इस महामारी के खिलाफ जंग के लिए 20 लाख रुपये बटोरे.

इंडियन टीम ने यह पैसे 18 दिन तक चले फिटनेस चैलेंज के जरिए इकट्ठा किए. 17 अप्रैल से लेकर 3 मई तक चले इस चैलेंज के जरिए कुल 20 लाख, 1 हजार, 130 रुपये इकट्ठा हुए. यह पैसे दिल्ली स्थित उदय फाउंडेशन नाम के NGO को गए. इन पैसों से अलग-अलग जगहों के मरीजों, विस्थापित मजदूरों और स्लम में रहने वालों की मदद की जाएगी.

 

#100 दान करें COVID-19 से लड़ने को

इंडियन हॉकी टीम की कैप्टन रानी रामपाल ने PTI से कहा,

‘हमें जो रेस्पॉन्स मिला, वह सच में कमाल का था. लोग, खासतौर से पूरी दुनिया में फैले इंडियन हॉकी के फैंस ने चैलेंज में हिस्सा लिया और दान किया. इंडियन विमिंस हॉकी टीम की तरफ से मैं इस मुहिम में भाग लेने वाले सभी लोगों का शुक्रिया अदा करना चाहूंगी.’

 


इस चैलेंज में इंडियन विमिंस हॉकी टीम की प्लेयर्स शामिल थीं. इसके बारे में रानी ने 17 अप्रैल को अपने ट्विटर हैंडल पर एक वीडियो शेयर किया था. इस वीडियो में टीम की मेंबर्स ने इस पूरी मुहिम के बारे में बताया था. लोगों से ज्यादा से ज्यादा संख्या में इससे जुड़ने की अपील की थी.

‘आओ 100 दान करें, COVID-19 से लड़ने को’ नाम की इस मुहिम के अंतर्गत प्लेयर्स हर दिन एक फिटनेस चैलेंज पोस्ट कर रही थीं. लोगों को इसे स्वीकार करना था और अपने 10 फ्रेंड्स को नॉमिनेट करना था. और फिर इन सब लोगों को 100-100 रुपये डोनेट करने थे. ये चैलेंज लॉकडाउन 2.0 के साथ खत्म होना था. 3 मई को चैलेंज खत्म होने के बाद पैसे उदय फाउंडेशन को ट्रांसफर कर दिए गए.


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adminApril 29, 20201min1130

मुंबई की मेयर किशोरी पेडनेकर इस वक़्त ख़बरों में हैं. कोरोनावायरस से चल रही लड़ाई में शहर की प्रथम नागरिक ने अपनी नर्स वाली पुरानी यूनिफार्म पहनी. ताकि हेल्थकेयर वर्कर्स का मनोबल बढ़ा सकें. पॉलिटिक्स में आने से पहले किशोरी नर्स हुआ करती थीं. अब उनके इस कदम की तारीफ़ हो रही है.

 


महाराष्ट्र सरकार ने कुछ समय पहले सभी रिटायर हो चुके हेल्थ केयर स्टाफ से गुजारिश की थी कि वो कोरोना से लड़ने में मदद करने के लिए आगे आएं. इसी के बाद किशोरी BYL नायर हॉस्पिटल में विजिट पर गईं. NDTV में छपी रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने वहां की नर्सेज से बातचीत की.

किशोरी ने बताया

हमारे डॉक्टर, नर्स और स्टाफ कोरोना से लड़ने में लगे हुए हैं. पेशेंट्स का ध्यान रख रहे हैं, और मैं उनके साथ खड़ी होना चाहती हूं ताकि उन्हें मोटिवेट कर सकूं.

उन्होंने ये भी कहा कि वो चाहें तो घर पर बैठ सकती हैं, लेकिन उनका पद शो ऑफ के लिए नहीं है. उन्हें अपनी जिम्मेदारियां पूरी करनी हैं. मुंबई में जो हालात हैं वो गंभीर हैं. इस बाबात उन्होंने BYL नायर हॉस्पिटल के नर्सिंग स्टूडेंट्स से भी बात की. उनसे आग्रह किया कि वो लोग भी कोरोना के खिलाफ चल रही इस लड़ाई में साथ दें. ये जानकारी दी गई कि जो स्टूडेंट्स सबसे बेहतर काम करेंगे, उन्हें मेयर कप भी दिया जाएगा.

किशोरी पेडनेकर नवंबर 2019 में मुंबई में मेयर बनी थीं. शिव सेना से हैं. तीन बार कॉरपोरेटर रह चुकी हैं. मेयर पद के लिए उन्हें NCP और कांग्रेस का समर्थन मिला था.



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