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adminJanuary 6, 20211min4110

भारत में कोरोना वायरस की दो वैक्सीन को मंजूरी दी गई है. एक भारत बायोटेक (Bharat Biotech Vaccine) की कोवैक्सीन (COVAXIN) और दूसरी सीरम इंस्टिट्यूट (Serum Institute Vaccine) की कोविशील्ड (Covishield) है जो ऑक्सफोर्ड-एक्स्ट्राजेनेका की वैक्सीन का ही भारतीय संस्करण है. हालांकि, अब दोनों वैक्सीन बनाने वाली कंपनियों के मालिक आपस में ही भिड़ गए हैं. सीरम इंस्टीट्यूट के CEO अदार पूनावाला ने भारत बायोटेक की कोवैक्सीन को मंजूरी दिए जाने पर आपत्ति जताई थी. अब भारत बायोटेक के फाउंडर और चेयरमैन कृष्णा एल्ला ने भी सीरम इंस्टिट्यूट पर पलटवार किया है.

कृष्णा एल्ला ने अपने बयान में कहा, ‘हम इस तरह की प्रतिक्रिया की उम्मीद नहीं करते हैं.’ उन्होंने लोगों से वैक्सीन के मुद्दे पर राजनीति ना करने का आग्रह किया. अदार पूनावाला का नाम लिए बिना एल्ला ने कहा, ‘हम 200 फीसदी ईमानदार क्लिनिकल ट्रायल करते हैं और उसके बाद हमें ऐसी प्रतिक्रिया मिलती है. अगर मैं गलत हूं, तो मुझे बताएं. कुछ कंपनियां हमारी वैक्सीन को पानी की तरह बता रही हैं. मैं इससे इनकार करता हूं. हम वैज्ञानिक हैं.’

आपको बता दें कि रविवार को एक टीवी को दिए एक इंटव्यू में अदार पूनावाला ने कहा था कि अब तक सिर्फ फाइजर, मॉडर्ना और ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका की वैक्सीन की प्रभावकारिता साबित हुई है और बाकी सभी वैक्सीन सिर्फ पानी की तरह सुरक्षित हैं.

एल्ला ने कहा कि अमेरिका और यूरोप ने UK से एस्ट्राजेनेका-ऑक्सफोर्ड वैक्सीन (Astrazeneca Oxford Vaccine) का ट्रायल डेटा लेने से इनकार कर दिया था क्योंकि वो पारदर्शी नहीं था, लेकिन किसी ने भी ऑक्सफोर्ड डेटा पर सवाल नहीं उठाया. उन्होंने आरोप लगाया कि एस्ट्राजेनेका-ऑक्सफोर्ड के ट्रायल में वैक्सीन शॉट देने से पहले वॉलंटियर्स को पेरासिटामोल टैबलेट दी गई थी और अगर ये उनकी कंपनी ने किया होता तो भारत के रेगुलेटर्स उनके ट्रायल को बंद करा देते.

एल्ला ने कहा, ‘हमने वॉलंटियर्स को पेरासिटामोल नहीं दिया है, इसलिए अच्छा या बुरा जो भी रिएक्शन आया, उसे 100 फीसदी उसी तरह लिया गया. इन रिएक्शन को रियल टाइम में कैप्चर किया गया है.’

सीरम इंस्टीट्यूट को आड़े हाथों लेते हुए डॉक्टर एल्ला ने कहा, ‘मेरी भारतीय कंपनी ने 1200 लोगों का सेफ्टी डेटा दिया है लेकिन सीरम इंस्टीट्यूट का कोई इम्युनोजेनसिटी डेटा नहीं है फिर उन्हें लाइसेंस क्यों दिया गया? इन्हें सिर्फ UK के डेटा के आधार पर लाइसेंस दिया गयाहै. उनका भारतीय डेटा कहां है?’ एल्ला ने कहा कि कोवैक्सीन की तुलना में ऑक्सफोर्ड एस्ट्राजेनेका वैक्सीन के ज्यादा गंभीर साइड इफेक्ट सामने आए हैं.

सीरम इंस्टीट्यूट से सवाल करते हुए एल्ला ने कहा, ‘कार चलाते समय मैं किसी को मार दूं और कहूं कि ये अचानक हो गया. इसका मतलब है कि आपने ईमानदारी से गलती की है. आपने कहा कि आप ट्रायल में 6 mg वैक्सीन देंगे फिर ट्रायल सिर्फ 3 mg वैक्सीन क्यों दी गई? क्या कंपनी इसका जवाब देगी?’

एफीकेसी डेटा (Efficacy data) के बारे में पूछे जाने पर एल्ला ने कहा, ‘अभी हमने तीसरे चरण की एफीकेसी पूरी नहीं की है. जब तक वैक्सीन की दोनों डोज देने का काम पूरा नहीं हो जाता हम तब तक तीसरे चरण के ट्रायल के बारे में जानकारी नहीं दे सकते हैं. फरवरी और मार्च में हम तीसरे चरण के एफीकेसी डेटा के साथ आएंगे.’

एल्ला ने एम्स प्रमुख डॉक्टर रणदीप गुलेरिया के बयान को लेकर भी आपत्ति जताई. डॉक्टर गुलेरिया ने कोवैक्सीन का इस्तेमाल अन्य वैक्सीन के बैकअप की तरह करने का सुझाव दिया था. एल्ला ने कहा, ‘ये एक वैक्सीन है, बैकअप नहीं. इस तरह के बयान देने से पहले लोगों को अपनी जिम्मेदारी का एहसास होना चाहिए.’

एल्ला ने दावा किया कि कई अंतर्राष्ट्रीय समीक्षा पत्रिकाओं में फाइजर के बराबर और अन्य Covid-19 वैक्सीन कैंडिडेट से ज्यादा कोवैक्सीन के रिव्यू पब्लिश हुए हैं. उन्होंने कहा कि कोवैक्सीन के तीसरे चरण का ट्रायल अमेरिकी एमएनसी IQVIA द्वारा संभाला जा रहा था. इस चरण के ट्रायल में वैक्सीन की डोज देने के बाद 12 महीने तक वॉलंटियर्स की निगरानी की जाएगी.

एल्ला ने कहा, ‘एक भारतीय कंपनी के रूप में, भारत बायोटेक एस्ट्राजेनेका या फाइजर जैसी मल्टीनेशनल कंपनी की तुलना में बिना किसी भी बैकअप के अकेले संघर्ष कर रहा है. हम सभी डेटा को पारदर्शी तरीके से रखते हैं. हमने हर समिति के सामने अपना डेटा रखा जिसके बाद हमें मंजूरी मिली.’

एल्ला ने कहा, ‘लोग पूछते हैं कि हमारे पास सार्वजनिक डोमेन में कोई डेटा क्यों नहीं है. वास्तव में, हम एकमात्र कंपनी हैं जिसके पांच रिव्यू प्रकाशित हो चुके हैं. पूरी दुनिया में केवल हमारे पास बायो सेफ्टी लेवल 3 (BSL-3) प्रोडक्शन सुविधा है. हमें यह कहते हुए गर्व हो रहा है कि अमेरिका और यहां तक कि ब्रिटेन सरकार के पास भी ये सुविधा नहीं है.’

एल्ला ने कहा कि कोवैक्सीन के 15 फीसदी से भी कम एडवर्स इफेक्ट सामने आए हैं. उन्होंने कहा, ‘अब तक ट्रायल में 10 फीसदी से भी कम साइड इफेक्ट सामने आए हैं. हम 24,000 से ज्यादा लोगों को पहले ही वैक्सीन लगा चुके हैं.’


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adminDecember 29, 20201min4630

ICC यानी इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल ने विराट कोहली को दशक का सर्वश्रेष्ठ क्रिकेटर चुना है. वनडे क्रिकेट में दशक के बेस्ट मेल क्रिकेटर का खिताब भी कोहली के नाम रहा है. इसके अलावा, अफगानिस्तान के क्रिकेटर राशिद खान को दशक के सर्वश्रेष्ठ टी-20 क्रिकेटर का अवॉर्ड दिया गया है. ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी स्टीव स्मिथ को दशक का सबसे बेहतरीन टेस्ट क्रिकेटर चुना गया है.

राशिद खान ने अपना पहला टी-20 25 अक्टूबर 2015 को खेला था. पिछले पांच सालों में राशिद ने 48 मैच खेले. इस दौरान उन्होंने 1098 गेंदें फेंकीं, और 1124 रन खर्च किए. उन्होंने 12.62 के औसत के साथ 89 विकेट लिए. आईसीसी ने राशिद को सबसे अधिक विकेट लेने के कारण टी-20 क्रिकेटर ऑफ द डिकेड (दशक का क्रिकेटर) चुना. इस दौरान दो बार उन्होंने 5 विकेट लेने का भी कारनामा किया था. तीन बार उन्होंने चार-चार विकेट भी लिए.

 


बात बल्लेबाजी की करें तो राशिद ने 48 मैचों के दौरान 23 बार बल्लेबाजी की. उन्होंने इन 23 मैचों में 163 रन बनाए. उनका हाई स्कोर 33 रहा. उन्होंने 10 छक्के और 10 चौके भी लगाए. यानि बल्लेबाजी में तो उन्होंने कोई खास कमाल नहीं दिखाया, लेकिन गेंदबाजी में उनका प्रदर्शन अच्छा रहा. राशिद स्पिन गेंदबाज हैं, और अपनी टी-20 टीम के लिए बेहद अहमियत रखते हैं.

अब बात स्टीव स्मिथ की, जिनको दशक के बेस्ट टेस्ट क्रिकेटर का अवॉर्ड दिया गया है. स्टीव ने इस दौरान (ICC Awards period) 7040 रन बनाए. उनका औसत 65.79 का रहा, जो टॉप 50 में सर्वाधिक है. इस दौरान उन्होंने 26 बार शतक लगाए, और 28 बार अर्धशतक जड़े.

स्टीव ने अपना पहला टेस्ट 16 जुलाई 2010 को पाकिस्तान के खिलाफ खेला था. वो अभी तक 74 टेस्ट मैच खेल चुके हैं. इस दौरान उन्होंने 133 पारियां खेलीं. उनका हाई स्कोर 239 रहा. तीन बार उन्होंने 200 के पार स्कोर किया. 133 पारियों के दौरान उन्होंने 799 चौके और 42 छक्के भी लगाए.

 

विराट कोहली के नाम बड़ी उपलब्धि

दशक का सर्वश्रेष्ठ क्रिकेटर और वनडे क्रिकेट में दशक का बेस्ट क्रिकेटर घोषत करते हुए विराट कोहली को आईसीसी ने रन मशीन कहा है. आईसीसी ने बताया कि इस दौरान (ICC Awards period) 10 हजार से अधिक रन बनाने वाले विराट एकमात्र खिलाड़ी हैं. उन्होंने 112 मैच खेले. उनका औसत 61.83 रहा. इस दौरान उन्होंने 39 शतक और 48 अर्धशतक भी लगाए.

विराट कोहली ने 17 अगस्त 2008 को अपना पहला वनडे श्रीलंका के खिलाफ खेला था. तब से अब तक विराट 251 मैच खेल चुके हैं, और 242 बार बल्लेबाजी करते हुए 12,040 रन बना चुके हैं. उनका सर्वश्रेष्ठ स्कोर रहा है 183. उन्होंने अपनी 242 पारियों के दौरान 1130 चौके और 125 छक्के लगाए हैं.

 

कोहली ने 2010 में ही बता दिया था कि बहुत रन बनाएंगे

आपको यकीन नहीं होगा लेकिन विराट ने साल 2010 में ही इस बात को कह दिया था कि वो अपनी टीम के लिए बहुत रन बनाने वाले हैं. और ऐसा हुआ भी. टेस्ट क्रिकेट में विराट ने 7318 रन बनाए हैं, ODI में 12040 रन बनाए हैं, टी-20 में 2928 रन बनाए हैं और आईपीएल में 5878 रन बनाए हैं. यानी अगर कोहली को रन मशीन कहा जा रहा है तो ये बात सोलह आने सच ही है.

 

ये ट्वीट विराट ने साल 2010 में किया था.

 

# विराट कोहली को आईसीसी मेल क्रिकेटर ऑफ द डिकेड का खिताब मिला है
# इलैस पेरी को आईसीसी फीमेल क्रिकेटर ऑफ द डिकेड का खिताब मिला है
# स्टीव स्मिथ को आईसीसी मेन्स टेस्ट क्रिकेटर ऑफ द डिकेड चुना गया है
# विराट कोहली को आईसीसी मेन्स वनडे क्रिकेटर ऑफ द डिकेड चुना गया है
# इलैस पेरी को आईसीसी वुमन्स वनडे क्रिकेटर ऑफ द डिकेड घोषित किया गया है
# राशिद खान को आईसीसी मेन्स टी-20 क्रिकेटर ऑफ द डिकेड चुना गया है
# इलैस पेरी को आईसीसी वुमन्स टी-20 क्रिकेटर ऑफ द डिकेड घोषित किया गया है
# काएल कोएटज़र को आईसीसी मेन्स असोसिएट क्रिकेटर ऑफ द डिकेड चुना गया है
# कैथरीन ब्रैस को आईसीसी वुमन्स असोसिएट क्रिकेटर ऑफ द डिकेड चुना गया है
# एमएस धोनी को आईसीसी स्पिरिट ऑफ क्रिकेट अवार्ड से नवाजा गया है


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adminDecember 29, 20201min5770

टेस्ला (Tesla) की इलेक्ट्रिक कारें अगले साल यानी 2021 में ही भारत की सड़कों पर दौड़ती दिखाई देंगी. केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने इसकी पुष्टि की है. उन्होंने कहा कि टेस्ला अगले साल भारत में अपना कामकाज शुरू करेगी. इन कारों की बुकिंग कुछ ही हफ्तों में शुरू हो सकती है.

टेस्ला के सीईओ एलन मस्क (Elon Musk) ने अक्टूबर में एक ट्वीट में कहा था कि उनकी कंपनी 2021 में भारतीय बाजार में प्रवेश करेगी. केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने भी सोमवार को इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि टेस्ला अगले साल भारत में अपना कामकाज शुरू करेगी. कंपनी भारत में मांग के आधार पर मैन्युफैक्चरिंग यूनिट लगाने की संभावना तलाशेगी.

गौरतलब है कि भारत के करीब 8 लाख करोड़ रुपये के कच्चे तेल आयात के बजट में कमी लाने के लिए नितिन गडकरी लगातार ग्रीन फ्यूल और इलेक्ट्रिक वाहनों के इस्तेमाल को बढ़ावा देने की बात कर कर रहे हैं. सरकार हर पेट्रोल पंप पर एक इलेक्ट्रिक चार्जिंग कियोस्क लगाने की तैयारी कर रही है.

 

बुकिंग कुछ ही हफ्तों में

कंपनी जून 2021 में भारतीय बाजार में उतर सकती है. कंपनी भारत में मॉडल 3 को लॉन्च कर सकती है और उसके लिए बुकिंग कुछ ही हफ्तों में शुरू होने की उम्मीद है.

टेस्ला के सीईओ एलन मस्क ने अक्टूबर में एक ट्वीट में कहा था कि उनकी कंपनी 2021 में भारतीय बाजार में प्रवेश करेगी. मस्क ने एक ट्वीट के जवाब में कहा था कि निश्चित रूप से उनकी कंपनी अगले साल भारत में दस्तक देगी.

 

गडकरी ने कही ये बात 

एक न्यूज एजेंसी के मुताबिक केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा, ‘अमेरिका की वाहन क्षेत्र की दिग्गज कंपनी टेस्ला अगले साल से भारत में अपनी कारों के लिए वितरण केंद्र खोलेगी. मांग के आधार पर कंपनी यहां अपना मैन्युफैक्चरिंग कारखाना लगाने पर भी विचार करेगी. भारत में अगले पांच साल में दुनिया का सबसे बड़ा इलेक्ट्रिक वाहन उत्पादक बनने की क्षमता है.’

 

कितनी हो सकती है कीमत 

कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार टेस्ला अपनी कार के ‘Model 3’ को ही भारतीय बाज़ार में उतार सकती है. इसके अंदर 60Kwh की Lithium ion बैटरी पैक दिया गया है. वहीं गाड़ी की टॉप स्पीड 162mph है. यह कार 0-60km की रफ्तार 3.1 सेकेंड्स में पकड़ सकती है. इसकी कीमत करीब 55 लाख रुपये हो सकती है.


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adminDecember 25, 202020min6370

हममें से हर कोई जानता है कि जीसस या यीशु कैसे दिखते थे. पश्चिमी कला में सबसे ज़्यादा बनाई गई तस्वीरों में उनकी तस्वीर का शुमार है.

हर जगह उन्हें लंबे बाल और दाढ़ी के साथ दिखाया गया है. वह लंबी बांहों वाला चोगा पहने हुए हैं (अक्सर यह चोगा सफ़ेद रंग का दिखाया गया है). इस पर एक चादर (अक्सर नीले रंग की) होती है.

यीशु का चेहरा इतना जाना-पहचाना है कि आप इसे पैन केक से लेकर टोस्ट के टुकड़ों में भी पहचान सकते हैं. लेकिन जैसा इनमें दिखता है क्या यीशु वैसे ही दिखते थे? शायद नहीं.

दरअसल, यीशु की जो जानी-पहचानी छवि दिखती है वह यूनानी साम्राज्य की देन है. चौथी सदी और उसके बाद से ईसा मसीह की बाइजन्टाइन छवियां प्रतीकात्मक ही रही हैं. उससे आप अंदाज़ा लगा सकते थे कि यीशु ऐसे थे लेकिन इसमें इतिहास के नज़रिये से सटीकता का अभाव है.

यीशु की बनाई ये तस्वीरें गद्दी पर बैठे एक सम्राट की तस्वीर पर आधारित थीं. रोम में सांता प्यूडेनजाइना के चर्च की वेदी में की गई पच्चीकारी में यह छवि दिखती है.

जीसस सोने का टोगा (चोगा) पहने हैं. वह पूरी दुनिया के स्वर्गिक शासक के तौर पर दिखाए गए हैं. यह गद्दी पर बैठे लंबे बालों और दाढ़ी वाले जिउस की तरह दिखाए गए है.

जिउस प्राचीन यूनानी धर्म के सर्वोच्च देवता हैं और ओलंपिया में उनका प्रसिद्ध मंदिर है. इसमें उनकी जो मूर्ति है, उसी के आधार पर यीशु की भी तस्वीरें मिलती हैं. यह मूर्ति इतनी प्रसिद्ध है कि रोमन सम्राट ऑगस्टस के पास भी इसी शैली में बनाई गई इसकी प्रतिकृति थी. ( हालांकि इसमें दाढ़ी और लंबे बाल नहीं थे).

यीशू

बाइजन्टाइन कलाकारों ने ईसा मसीह को स्वर्गिक शासन करते ब्राह्रांड के शासक के रूप में दिखाया. वे उन्हें जिउस के युवा रूप में दिखा रहे थे.

लेकिन समय के साथ स्वर्गिक यीशु की इस छवि के विजुअलाइज़ेशन में परिवर्तन हुआ है. बाद में इसमें हिप्पी लाइन के आधार पर परिवर्तन किए गए और अब तो इस पर बनी यीशु की शुरुआती तस्वीरें ही स्टैंडर्ड बन गई हैं.

इसा मसीह

सवाल यह है आख़िर यीशु वास्तव में कैसे दिखते थे? चलिए समझने की कोशिश करते हैं कि सिर से लेकर पाँव तक वह कैसे थे?

बाल और दाढ़ी

शुरुआती ईसाई लोग, ईसा मसीह को एक स्वर्गिक देवता के तरह नहीं दिखा रहे थे. उन्होंने उन्हें एक वास्तविक व्यक्ति की तरह ही दिखाया. उसमें उनकी न तो दाढ़ी थी और न लंबे बाल.

ईसा मसीह

लेकिन एक यायावर साधु की तरह जीसस की छवि एक दाढ़ी वाले व्यक्ति के रूप में बनाई जाती रही होगी. शायद यायावरी की वजह से वे दाढ़ी नहीं कटाते होंगे. इसीलिए यीशु की तस्वीरों में उन्हें दाढ़ी वाले शख्स के तौर पर दिखाया गया.

बिखरे बालों और दाढ़ी एक दार्शनिक की निशानी मानी गई होगी. ऐसा व्यक्ति (वैसा संत जो दुनियावी चीज़ों से ऊपर की चीज़ों के बारे में सोचता हो) जो औरों से थोड़ा हट कर हो.

वीतरागी दार्शनिक एपिकटेटस ने उनकी इस छवि को बिल्कुल उनके स्वभाव के अनुकूल माना, वरना पहली सदी की ग्रीको-रोमन दुनिया में सफाचट दाढ़ी और छोटे बाल रखना अनिवार्य माना जाता था. गर्दन पर लहराते बाल और दाढ़ी ईश्वरत्व की ही छवि पेश करती थी. ऐसी वेश-भूषा पुरुषों के बीच चलन में नहीं थी. यहां तक कि दार्शनिक तक काफ़ी छोटे बाल रखते थे.

प्राचीन काल में यहूदी दाढ़ी रखते थे. यह कोई अजूबा नहीं था. यहां तक कि यहूदियों का दाढ़ी रखना समय-समय पर उनके उत्पीड़कों के लिए समस्या बनता रहा क्योंकि उन्हें पहचानने में मुश्किल में होती थी.

सब एक ही जैसे दिखते थे. (मैकाबिस की किताब में इसका जिक्र किया गया है) . हालांकि 70वीं सदी में यरुशलम पर कब्जे के बाद रोमनों की ओर से जुडिया कैप्टा सिक्कों के तहत जो सिक्के जारी किए थे, उनमें अंकित छवियों से संकेत मिलते हैं कि बंदी बनाए लोगों की दाढ़ी थी.

ईसा मसीह

तो यीशु एक ऐसे दार्शनिक थे, जो स्वाभाविक दिखते थे. उनकी छोटी दाढ़ी रही होगी, जैसा कि जुडिया कैप्टा के सिक्कों में दिखाया गया है लेकिन संभवत: उनके बाल बहुत बड़े नहीं हों.

अगर उनके थोड़े भी लंबे बाल रहे होते तो हमें शायद कोई प्रतिक्रिया मिलती. यहूदी पुरुष जिनकी अस्त-व्यस्त दाढ़ी और लंबे बाल थे, वे तुरंत पहचान लिए जा सकते थे. ये वे लोग थे जिन्होंने नाजिराइट शपथ ली थी.

इस शपथ के मुताबिक उन्हें कुछ समय तक ईश्वर की भक्ति में लीन रहना होता था. उस दौरान उन्हें शराब पीने और बाल कटाने की मनाही होती थी. शपथ अवधि के बाद वह यरुशलम के एक मंदिर में समारोह आयोजित कर बाल-दाढ़ी कटाते थे. (अध्याय 21 आयत 24)

लेकिन यीशु ने नाजिराइट शपथ नहीं ली थी. वह अक्सर शराब पीते पाए गए. उनके आलोचक उन पर बहुत ज्यादा शराब पीने का आरोप लगाते रहे थे ( मैथ्यू अध्याय 11 आयत 19). अगर वे लंबे बाल रखे और नाजिराइट शपथ लेने वाले होते तो हमें उनके चेहरे-मोहरे में इस बदलाव को लेकर कुछ प्रतिक्रिया ज़रूर मिली होती.

वह कैसे दिखते थे और वे क्या करते थे, इसमें भी अगर कोई अंतर दिखता तो इसका भी ज़िक्र होता. चूंकि वह शराब पीते थे इसलिए भी अंतर करना मुश्किल था.

कपड़े

ईसा मसीह जिस दौर के थे उस वक़्त अमीर लोग ख़ास मौक़ों पर एक लंबा चोगा पहनते थे. वह उनके सार्वजनिक जीवन में संभ्रात दिखने की निशानी थी.

ईसा मसीह के उपदेश में कहा गया गया है, ऐसे नेताओं से बचो, जो लंबे चोगे पहन कर निकलते हैं और बाज़ारों में सलामी पाते हैं. उनसे बचो जिन्हें सेनेगॉग में अहम जगह मिलती है और भोज में सम्मानित जगह पर बिठाया जाता है. ( मार्क अध्यायन 12, आयत 38-39)

ईसा मसीह के इन कथनों को ग़ॉस्पेल का सबसे प्रामाणिक हिस्सा माना गया है इसलिए हम मान सकते हैं कि वह ऐसे चोगे नहीं पहनते होंगे. जिस दौर में ईसा मसीह हुए थे उस समय पुरुष घुटनों तक लंबा ट्यूनिक पहनते थे जिन्हें चिटॉन कहा जाता था, महिलाएं एड़ियों तक लंबा वस्त्र पहनती थीं.

इस तरह एक्ट्स ऑफ शेकला में, महिला पात्र शेकला पुरुषों की ओर से इस्तेमाल किया जाने वाला ट्यूनिक पहनती हैं और इस पर लोगों को काफ़ी अचरज होता है. इन ट्यूनिक में कंधों से लेकर घुटनों की घेर तक रंगीन पट्टियां होती थीं. ये एक ही टुकड़े में बुने जा सकते थे.

ट्यूनिक के ऊपर कोई चादर ओढ़ सकता था. इसे हिमेशन कहते थे और हमें पता है कि जीसस ने यह पहना था. जब एक महिला ने ठीक होने के लिए उनका आशीर्वाद मांगा था तो उसने उनकी चादर को छुआ था. इससे पता चलता है कि यीशु इस तरह की चादर ओढ़ते थे. (मार्क अध्याय 5 आयत 27 )

चादर या मेंटल एक बड़ा ऊनी कपड़ा होता था. यह बहुत मोटा नहीं होता था लेकिन गर्मी के लिए इस तरह के दो कपड़ों का भी इस्तेमाल होता था. एक दूसरी चादर जैसा वस्त्र जिसे हिमेशन कहते थे, को भी कई तरह से पहना जा सकता था.

इसे शरीर पर लपेटा जा सकता था. इसे लटकाया भी जा सकता था और यह घुटनों से नीचे तक चला जाता था. यह इतना लंबा होता था कि छोटे ट्यूनिक तक को ढक सकता था. ( कुछ संत दार्शनिक इस तरह का एक लंबा कपड़ा पहनते थे. वह बगैर ट्यूनिक के इसे पहनते थे. ऐसे कपड़ों की वजह से उनकी छाती या शरीर का ऊपरी भाग खुला होता था. लेकिन यह एक अलग कहानी है) .

ईसा मसीह

लोगों की ताक़त और प्रतिष्ठा उनकी चादरों (मेंटल) की क्वालिटी, साइज और रंग से तय होती थी. बैंगनी और कुछ किस्म के नीले रंग संभ्रांत प्रतिष्ठित होने के संकेत थे. ये राजसी नीले रंग थे क्योंकि उस दौरान इस तरह के रंग काफ़ी कम मिलते थे. ये महंगे होते थे.

लेकिन रंग कुछ और भी बताते थे. इतिहासकार जोसफ ने जिलॉट्स (एक यहूदी समूह जो जूडिया से रोमन को निकाल बाहर करना चाहता था) को हत्यारा करार दिया है, जो विपरीत लिंगी कपड़े पहनता था.

उनका कहना था के वे ‘रंगी हुई चादरें’ यानी चालंडिया पहनते थे. इससे ऐसा लगता है कि वे महिलाओं के कपड़े हैं. इसका मतलब यह कि असल मर्दों को जब तक कि वे संभ्रांत वर्ग के न हों, बिना रंगे हुए कपड़े ही पहनने चाहिए. हालांकि ईसा मसीह ने सफेद कपड़ा नहीं पहना था.

बिना रंगा हुआ कपड़ा भी एक खास तरह का कपड़ा होता था. जिसे ब्लीच करने और खड़िया से पोतने की ज़रूरत होती थी. जूडिया में यह एक खास पंथ के लोगों से जुड़ा था जिन्हें एसेनेस कहा जाता था. ये लोग यहूदी क़ानून की कड़ी व्याख्या के अनुयायी थे.

जीसस के कपड़े और चमकदार सफ़ेद रंग के कपड़ों का अंतर मार्क के अध्याय 9 में बताया गया है, जब तीन देवदूत उनके साथ पहाड़ पर जाते हैं. वहां यीशु के शरीर से प्रकाश फूटने लगता है.

मार्क बताते हैं कि जीसस का हिमाशिया (इसका मतलब कपड़ा या वस्त्र से है, चादरों से नहीं) चमक रहा था. यह पूरी तरह चमकदार सफ़ेद था. कपड़े में ऐसी सफ़ेदी थी, जैसा धरती पर कोई धोबी नहीं ला सकता. यीशु के रुपांतरण से पहले मार्क उन्हें एक साधारण व्यक्ति के तौर पर पेश करते हैं. जिसमें वह बिना रंगे ऊन का कपड़ा पहनते हैं, जिन्हें साफ़ करने के लिए धोबी को देना पड़ता है.

उन्हें जब सूली पर चढ़ाया जाता है तो उनके कपड़ों का ज्यादा वर्णन मिलता है. जब रोमन सिपाही उनके हिमाशिया ( इस मामले में शायद इसका जिक्र चादरों (मेंटल) के रूप में हुआ है. ) को चार हिस्सों बाँटते हैं तो (देखें जॉन अध्याय आयत 19-23) तो उनमें से एक टलिथ होता है. इसे यहूदी प्रार्थना के दौरान शॉल के तौर पर इस्तेमाल किया जाता था.

मैथ्यू अध्याय की आयत 5 में टेसल्स के साथ इस चादर का ज़िक्र है. यह एक हल्का कपड़ा है, जो पारंपरिक तौर पर बिना रंगे क्रीम कलर के ऊनी मटीरियल से तैयार होता था. इसमें शायद नीली पट्टी या धागों से थ्रेडिंग की जाती थी.

पाँव

जहां तक ईसा मसीह के पाँव का मामला है तो शायद वो सैंडिल पहनते थे. उस दौरान हर कोई सैंडिल पहनता था. रेगिस्तान में डेड सी और मसादा के नज़दीक, ईसा मसीह के समय में इस्तेमाल किए जाने वाले सैंडिल पाए गए थे.

इसलिए हमें पता है कि वे कैसे दिखते थे. वे काफ़ी साधारण थे. सैंडिल के तले चमड़ों की मोटी तहों से बनाए गए थे. इन्हें चमड़ों को जोड़ कर बनाया गया था. इनकी सिलाई की गई थी. ऊपरी हिस्से में चमड़े के धागे थे, जो अंगूठों से पार कर बांधे जाते थे.

ईसा मसीह

चेहरा

यीशु का चेहरा-मोहरा कैसा था. क्या चेहरों की ख़ासियतें यहूदियों के चेहरों की तरह थीं. यीशू यहूदी (या जुडियन) थे. पॉल के पत्रों समेत अलग-अलग साहित्यों में इसका बार-बार ज़िक्र हुआ है. हिब्रू राज्यों को लिखे पत्र में लिखा है , ” यह साफ़ है कि हमारे ईश्वर जुडाह से आए हैं”. तो हम कैसे कल्पना करें कि उस दौर में यहूदी पुरुष कैसे हुआ करते थे. उस दौरान एक 30 साल के व्यक्ति का चेहरा-मोहरा कैसा रहा होगा ( ल्यूक अध्याय 3)

2001 में फोरेंसिक एंथ्रॉपोलोजिस्ट रिचर्ड नेवम ने गैलिलियन मैन का एक मॉडल बनाया. यह मॉडल बीबीसी की एक डॉक्युमेंटरी के लिए बनाया गया था. यह उस इलाक़े में मिली एक मानव खोपड़ी के आधार पर बनाया गया था, जहां माना जाता है कि ईसा मसीह कभी मौजूद रहे थे.

लेकिन उन्होंने यह दावा नहीं किया था ईसा मसीह का चेहरा ऐसा ही था. यह ईसा मसीह के चेहरे के प्रति लोगों की कल्पना को प्रेरित करने के लिए बनाया गया था. लोगों को यह बताना था कि वह यीशु को अपने समय और स्थान के एक व्यक्ति के रूप में ही देखें. क्योंकि हमने कभी यह नहीं कहा था कि वे कुछ अलग दिखते थे.

ईसा मसीह

पुरानी हड्डियों के आधार पर चाहे कितने भी मॉडल बनाए गए हों लेकिन मेरा मानना है कि जीसस के चेहरे की सबसे ज्यादा संगति ड्यूरा-यूरोपोस के तीसरी सदी के सेनेगॉग में मौजूद मोजेज की दीवारों में बनाए गए चित्रों से बैठती है. इसमें दिखाया गया है कि ग्रीको-रोमन दुनिया में कोई यहूदी संत कैसा दिखता था.

ईसा मसीह

मोजेज की कल्पना बगैर रंगे हुए कपड़े पहने व्यक्ति के रूप में की जाती है. उनकी एक चादर टलिथ है क्योंकि ड्यूरा में बनी मोजेज की तस्वीर में उनके कपड़ों के किनारे में फुंदने दिखते हैं.

जीसस कैसे दिखते थे?

अगर तमाम कल्पनाओं पर विचार करें तो बाइजन्टाइन में जिस जीसस के चेहरे-मोहरे की कल्पना की गई है उसकी तुलना में यह तस्वीर कहीं ज़्यादा सही लगती है जबकि बाइजन्टाइन यीशु की तस्वीर ही मानक बन गई है :

यीशु की छोटी दाढ़ी है और बाल छोटे. वह छोटी ट्यूनिक पहने हुए हैं. ऊपर पहने के हुए कपड़े की बांहें छोटी है और उन्होंने कपड़े के ऊपर छोटी चादर ओढ़ रखी है


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adminDecember 25, 20204min5180

सचिन तेंडुलकर ने जब डेब्यू किया तो साल था 1989, राहुल द्रविड़ और सौरव गांगुली आए तो वो साल था 1996, ऐसे ही जब 2004 आया तो भारतीय क्रिकेट के सबसे सफल कप्तान महेन्द्र सिंह धोनी ने पहली बार ब्लू जर्सी पहनी.

इसी तरह से हर साल क्रिकेट को कुछ नए खिलाड़ी मिलते हैं. कुछ गुम हो जाते हैं और कुछ अपनी खास पहचान बनाते हैं. ऐसा ही साल है 2020. भले ही इस साल बहुत ज़्यादा क्रिकेट नहीं खेला गया. लेकिन फिर भी दुनियाभर के कई ऐसे युवा खिलाड़ी हैं, जिन्होंने अपने टैलेंट से अपने आने का इशारा दे दिया है.

आज हम आपको दुनियाभर के उभरते हुए आठ ऐसे खिलाड़ियों के बारे में बताएंगे, जो आने वाले समय में गूगल पर खूब सर्च किए जाएंगे. यानि आने वाले सालों में वो इंटरनेशनल क्रिकेट की एक पहचान बन सकते हैं.

इस लिस्ट में भारत, ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड, न्यूज़ीलैंड, श्रीलंका, वेस्टइंडीज़, अफगानिस्तान और साउथ अफ्रीका जैसे हर देश से एक खिलाड़ी मौजूद है.

 

चलिए फिर शुरुआत करते हैं:

 

1. यशस्वी जायसवाल

18 साल के यशस्वी जायसवाल का नाम जब पहली बार क्रिकेट फैंस की नज़रों में आया. तब से ही ढेर सारी कहानियां आनी शुरू हो गईं. मुंबई जाकर बसे, और अपना करियर बनाने वाले इस स्टार ने अंडर 19 विश्वकप में ऐसा प्रदर्शन किया कि दुनिया उनकी दीवानी हो गई.

2019 में विजय हज़ारे ट्रॉफी में यशस्वी ने सिर्फ नौ दिन में तीन शतक बनाकर धमाका कर दिया. इसमें एक तो दोहरा शतक भी था. इस दोहरे शतक के साथ वो लिस्ट ए में सबसे कम उम्र में दोहरा शतक बनाने वाले बल्लेबाज़ बन गए. विजय हज़ारे ट्रॉफी में इस शानदार प्रदर्शन के बाद उन्होंने अंडर 19 वर्ल्डकप में इंडिया के लिए ओपन किया और धमाका कर दिया.

 

यशस्वी जायसवाल.

 

वो इस टूर्नामेंट में छह मैचों में 400 रनों के साथ सबसे ज़्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज़ रहे. वो इस टूर्नामेंट के मैन ऑफ दि टूर्नामेंट भी रहे. हालांकि आईपीएल में राजस्थान के लिए वो उतना कमाल नहीं कर पाए.

यशस्वी जायसवाल सचिन तेंडुलकर और वसीम जाफर को अपना आइडल मानते हैं.

राजस्थान रॉयल्स में यशस्वी के साथी रॉबिन उथप्पा ने उन पर कहा था,

”यशस्वी भविष्य के एक शानदार खिलाड़ी हैं. मुझे लगता है उन्होंने पिछले डॉमेस्टिक क्रिकेट में शानदार प्रदर्शन किया है. वो भविष्य में भारत के लिए खेल सकते हैं.”

 

2. टॉम बैंटन:

इस लड़के का नाम बहुत सारे इंडियंस ने 19 दिसंबर 2019 के दिन सुना. जब कोलकाता में हो रहे आईपीएल 2020 ऑक्शन में इस खिलाड़ी को केकेआर ने एक करोड़ में खरीदा.

2019 इंग्लिश समर में जब बैंटन ने बैटिंग की तो उनके शॉट्स की तुलना केविन पीटरसन से की जाने लगी. बचपन में हॉकी को पहला प्यार मानने वाले टॉम बैंटन ने बाद में अपने शॉट्स से सबको फैन बना लिया.

 

टॉम बैंटन.

 

बैंटन क्रिकेट में एबी डीविलियर्स को अपना रोल मॉडन मानते हैं.

एक बार मार्कस ट्रेस्कॉथिक ने कहा भी था कि

‘वो एक बढ़िया लड़का है जो कि कड़ी मेहनत में विश्वास करता है.’

 

3. नूर अहमद:

15 साल की उम्र में हममें से कितने होते हैं, जिन्हें ज़िन्दगी में क्या करना है, ये सब नहीं पता होता. लेकिन अफगानिस्तान के इस 15 साल के गेंदबाज़ ने 14 साल की उम्र में ही अफगानिस्तान की अंडर-19 टीम में जगह बना ली. उनके हाई आर्म ऐक्शन की वजह से उन्हें विकेट पर सफलता भी मिलने लगी.

अपने दूसरे ही यूथ वनडे में उन्होंने इंडिया के खिलाफ 30 रन देकर चार विकेट लिए, तो दुनियाभर में नूर का नाम हो गया. नूर को नबी, राशिद, मुजीब के बाद भविष्य का अफगानी स्टार भी कहा जा सकता है.

 

नूर अहमद. अफगानिस्तान. फोटो: Getty Images

 

नूर क्रिकेट में राशिद खान को अपना रोल मॉडल मानते हैं.

अफगानिस्तान क्रिकेट के डायरेक्टर ने उन्हें लेकर कहा है कि

‘अगर वो अपनी स्टॉक बॉल इस्तेमाल ज़्यादा बेहतर करते हैं तो उनकी गुगली और ज़्यादा खतरनाक हो जाएगी.’

 

4. जोश फिलिपे:

रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर ने बतौर विकेटकीपर इस ऑस्ट्रेलियन स्टार को टीम रखा. खैर, ये बात और है कि पहले सीज़न में टीम उनका भरपूर इस्तेमाल नहीं कर पाई.

ऑस्ट्रेलिया से आने वाले इस युवा खिलाड़ी के खून में ही क्रिकेट है. पिता स्टेट की सेकेंड इलेवन के लिए खेले जबकि मां वेस्टन ऑस्ट्र्लिया के लिए खेलीं.

जोश फिलिपे को पहचान दिलाई स्टीव स्मिथ ने. स्मिथ ने फिलिपे को 2019 के बिग बैश में मौका दिया. सिडनी सिक्सर्स के लिए फाइनल मैच में उन्होंने 29 गेंदों में 52 रनों की पारी खेल टीम को खिताब जिता दिया और रातोंरात हीरो बन गए.

विराट कोहली ने भी इस खिलाड़ी के टैलेंट को परखा और आरसीबी के कैम्प में शामिल कर लिया.

 

जोश फिलिपे. फोटो: Getty Images

 

जोश फिलिप माइकल हसी और स्टीवन स्मिथ को अपना आइडल मानते हैं.

बिश बैश लीग के दौरान स्टीव स्मिथ ने एक बार फिलिपे पर कहा था,

”मैंने कई बार कहा है कि इस बच्चे में एक खास टैलेंट है. उसके बल्ले में गज़ब का स्विंग है. वो अपने शॉट्स में जिस तरह की ताकत लाता है, वो कमाल की है.”

 

5. रचिन रविन्द्र:

20 साल के ऑल-राउंडर रचिन रविन्द्र का नाम न्यूज़ीलैंड क्रिकेट में अब जाना पहचाना है. शानदार तकनीक के साथ तेज़ी से रन बनाना और स्पिन बोलिंग इनकी खासियत है. रचिन साल 2019 से न्यूज़ीलैंड की ए टीम का हिस्सा हैं. जबकि नेशनल टीम में वो लगातार दस्तक दे रहे हैं.

रचिन इंडियन लीजेंड सचिन तेंडुलकर को अपना क्रिकेटिंग आइडल मानते हैं. रचिन के पिता ने उन्हें सचिन की बहुत सारी कहानियां सुनाई हैं. रचिन ने बचपन में सचिन के बहुत सारे वीडियोज़ भी देखे हैं, जिन्हें देखकर वो बहुत ज़्यादा प्रभावित हुए.

 

रचिन रविन्द्र. फोटो: Getty Images

 

21 साल की उम्र में ही उन्होंने 1800 रन और 37 विकेट अपने नाम कर लिए हैं.

वेलिंगटन टीम के हेड कोच ग्लेन पॉकनाल ने उनके बारे में बताया था,

”उनका (रचिन का)  लगातार बेहतर होने का सफर कमाल है. वो रोज़ सुबह अपने पिता के साथ ट्रेनिंग करते हैं, जिम में जाते हैं. शाम में वो फिर से ट्रेनिंग करते हैं. पिछले कुछ समय में उन्होंने अपने खेल में अलग ही लेवल पर सुधार किया है.”

 

6. अकबर अली:

साल 2020 में अंडर 19 क्रिकेट को एक नया वर्ल्ड चैम्पियन मिला. बांग्लादेश ने पहली बार विश्वकप खिताब जीता. बांग्लादेश को इस हारे हुए मुकाबले में जिताने वाले प्लेयर रहे अकबर अली. मुश्किल हालात में अकबर ने नॉट-आउट 43 रन बनाए और टीम को जीत दिलाकर अपने लाखों फैंस बना लिए.

सॉलिड बल्लेबाज़ी तकनीक वाले इस प्लेयर ने बांग्लादेश को एक नया स्टार मिलने की झलक दी है.

अकबर अपने पिता और मोहम्मद मुस्तफा को अपना आइडल मानते हैं.

 

अकबर अली. फोटो: Getty Images

 

बांग्लादेश के अंडर 19 कोच नवीद नवाज़ का अकबर में कितना भरोसा है. ये बताता है उनका ये बयान,

”उसने पिछले दो साल में अविश्वसनीय खेल दिखाया है. नंबर सात पर बैटिंग करते हुए उसने सबसे मुश्किल काम किया है. वो जब तक मैदान पर रहता है, तब तक टीम का विश्वास बना रहता है.”

 

7. गेराल्ड कोइटज़िया:

19 साल की उम्र में 145 kph की गेंद. ये कमाल है सिर्फ 19 साल के साउथ अफ्रीकन युवा गेंदबाज़ का. गेराल्ड ने साउथ अफ्रीका के लिए एक नहीं बल्कि दो-दो T20 विश्वकप खेले हैं. मज़ांसी सुपर लीग में भी गेराल्ड का नाम अब जाना पहचाना है.

साल 2000 में जन्मे गेराल्ड ने 42 से ज़्यादा विकेट अपने नाम किए हैं. गेराल्ड की प्रतिभा की वजह से उन्हें भविष्य का साउथ अफ्रीकी सुपरस्टार भी कहा जाने लगा है.

 

गेराल्ड कोइटज़ी. फोटो: Getty Images

 

गेराल्ड, साउथ अफ्रीकन ग्रेट डेल स्टेन को अपना क्रिकेटिंग आइडल मानते हैं.

साउथ अफ्रीकन लीजेंड एलन डोनाल्ड ने एक बार गैराल्ड के बारे में कहा था,

”मुझे इसमें कोई भी शक नहीं है कि गेराल्ड जल्द ही साउथ अफ्रीकन टीम में आ जाएंगे. वो बहुत तेज़ हैं, उनमें गेंदों को स्विंग कराने की नैचुरल एबिलिटी है.

 

8. जेडन सील्स:

वेस्टइंडीज़ की धरती से कितने ही पेस बॉलर निकले. कर्टली एम्ब्रॉस, कर्टनी वॉल्श या फिर मैल्कम मार्शल. इन तेज़ गेंदबाज़ों की लिस्ट लंबी है. लेकिन इस लिस्ट में अब एक नया नाम जुड़ सकता है. नाम है, जेडन सील्स.

2020 अंडर 19 विश्वकप में जिस तेज़ गेंदबाज़ ने अपनी स्पीड और सेलिब्रेशन से सबको अपनी ओर खींचा. वो हैं, जेडन सील्स. लगातार 140 Kph या उससे ऊपर की गेंद और वो भी दोनों तरफ स्विंग के साथ.

अंडर 19 विश्वकप के पहले ही मैच में उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ चार विकेट चटकाकर सबका ध्यान अपनी तरफ खींचा.

 

जेडन सील्स. फोटो: Getty Images

 

जेडन तेज़ गेंदबाज़ कर्टली एम्ब्रॉस को अपना हीरो मानते हैं. उन्हें एम्ब्रॉस का पेशन और स्किल बहुत ज़्यादा पसंद है.

सील्स पर टॉम मूडी का कहना है कि

”वो विकेट से पेस प्राप्त करते हैं, वो पेट कमिंस की तरह ही अपनी रिस्ट का इस्तेमाल करते हैं.”

ये आठ साल 2020 के वो उभरते हुए सितारे हैं, जो भविष्य में अपनी पहचान बना सकते हैं.


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adminDecember 19, 20202min6710

UAE की कंपनी फ़िनाबर्ल (Finablr) अपना कारोबार बेच रही है. सिर्फ़ 1 डॉलर, यानी क़रीब 74 रुपये में. इज़राइल-यूएई के कंसोर्टियम, ‘ग्लोबल फ़िनटेक इन्वेस्टमेंट होल्डिंग (GFIH)’ को. कंसोर्टियम बोले तो संघ. और फ़िनाबर्ल जिनके हाथों में जा रही है उस संघ में है इज़राइल की ‘प्रिज्म ग्रुप एजी’ और अबू धाबी की ‘रॉयल स्ट्रेटेजिक पार्टनर्स’. फ़िनाबर्ल, UAE में रहने वाले पूर्व-अरबपति NRI, बीआर शेट्टी की कई कंपनियों में से एक थी. आइए ज़रा फ़िनाबर्ल और बीआर शेट्टी के बारे में जान लें.

 

# बीआर शेट्टी की ‘धीरूभाई’ सरीखी सक्सेस

एक वक्त ‘महाभारत’ मूवी के निर्माण के लिए 1,000 करोड़ रूपये देने की घोषणा करने वाले बीआर, (चोपड़ा नहीं शेट्टी) जब भारत से दुबई गए, तो उनके जेब में 500 रुपये भी नहीं थे. अगर ये 500 रुपये वाली बात, आपको अपने पिताजी की स्टोरी की शुरुआत सरीखी लग रही हो तो ज़रा आगे पढ़िए.

 

UAE की सक्सेस स्टोरी में NMC और NMC में UAE का कितना हाथ था, ये अनुमान आज भी लोग लगा रहे हैं. (तस्वीर: NMC का ट्विटर अकाउंट)

 

1973 में दुबई पहुंचे बीआर शेट्टी की शुरुआत बहुत छोटे से हुई. मेडिकल रिप्रेज़ेंटेटिव के रूप में. 1974 में हेल्थकेयर कंपनी न्यू मेडिकल हेल्थकेयर (NMC) की स्थापना की. इसके बाद वो सफलता की सीढ़ियां चढ़ते चले गए. ऐसे कि एक वक़्त बीआर शेट्टी पास क्या-क्या न था. बुर्ज़ ख़लीफ़ा में दो फ़्लोर. 7 रोल्स-रॉयस कारें. कई और विंटेज गाड़ियां. एक गल्फ़स्ट्रीम G450 प्राइवेट जेट, जिसकी क़ीमत तीन सौ करोड़ रुपये के क़रीब होगी. वग़ैरह-वग़ैरह…

जब 2012 में अपनी दुबई बेस्ड कंपनी NMC हेल्थ का लंदन स्टॉक एक्सचेंज (LSE) में IPO लेकर आए तो धमाल मच गया. इससे पहले LSE में किसी विदेशी कंपनी के IPO को ऐसी धमाल ओपनिंग कम ही नसीब हुई थी.

 

#NMC और शेट्टी की अर्श से फ़र्श तक की कहानी

16 दिसंबर, 2019 को ‘मडी वॉटर्स’ ने NMC हेल्थकेयर की ख़राब फाइनेंशियल हेल्थ की ख़बर डाली. रिपोर्ट में NMC से जुड़ी कई अनियमितताओं और फ़्रॉड का ज़िक्र था.

 

कार्सन ब्लॉक, जिनको अपनी ट्रेडिंग स्ट्रेटेजी और रिपोर्ट के चलते अतीत में कई डेथ थ्रेट मिल चुके हैं.

 

हालांकि ‘मडी वॉटर्स’ का मालिक कार्सन ब्लॉक भी अतीत में यही करता था. मतलब वो किसी कंपनी में शॉर्ट पोजिशन बनाता, फिर उसकी वित्तीय स्थिति के बारे में बुरी ख़बर डालकर पैसे कमाता. वो खुद कहता भी था कि इन रिपोर्ट्स में उसके वेस्टेड इंट्रेस्ट (निजी हित) हैं. उसकी ख़बर सही और ब्रेकिंग होती. ज़्यादातर मामलों में चीन और चीनी कंपनियों से जुड़ी हुई.

बहरहाल ‘मडी वॉटर्स’ की इस रिपोर्ट के चलते NMC डूबना शुरू हो गई. 2,585 पेंस (पाउंड का सौंवा हिस्सा) का ये स्टॉक सिर्फ़ एक दिन में 837.5 पेंस गिरकर 1747.50 पेंस पर पहुंच गया. 27 फ़रवरी, 2020 को जब लंदन स्टॉक एक्सचेंज ने NMC हेल्थ की ट्रेडिंग रोकी, तब इसके एक शेयर का मूल्य मात्र 938 पेंस रह गया था.

 

# फ़िनाबर्ल की सक्सेस और फिर उसका दिवालिया होना

फ़िनाबर्ल (Finabrl) की बात करें तो, इसे शेट्टी ने अप्रैल 2018 में स्थापित किया. एक साल बीतते-बीतते LSE में इसका IPO भी निकाल डाला. ये बात मई 2019 की थी. कंपनी की एक-डेढ़ साल में ही 45 से ज़्यादा देशों में प्रत्यक्ष और डेढ़ सौ से ज़्यादा देशों में अप्रत्यक्ष उपस्थिति दर्ज हो गई. और मार्केट वैल्यूएशन हो गया, 140 अरब से ज़्यादा का. अगले साल, यानी 2020 की फ़रवरी-मार्च में इसके शेयर भी औंधे मुंह गिरना शुरू हो गए. कितने? 90% के क़रीब. कई कारणों के अलावा इसके शेयर गिरने के पीछे का कारण ‘NMC हेल्थ’ का कोलेट्रल डैमेज भी रहा.

 

लंदन स्थित Finablr का आलीशान ऑफ़िस. (तस्वीर: officesnapshots.com)

 

# कहां हैं इन दिनों मिस्टर शेट्टी

रही बात मिस्टर शेट्टी की, तो वो इन दिनों भारत में हैं. 14 नवंबर, 2020 को वो UAE जा रहे थे, लेकिन उन्हें एयरपोर्ट पर रोक दिया गया. कारण, शेट्टी भारत में भी कानूनी दिक़्क़तों में फ़ंसे हुए हैं. बैंक ऑफ बड़ौदा ने उन पर मुक़दमा कर रखा है. बैंक का कहना है कि शेट्टी ने लोन लेने के लिए 16 संपत्तियों को गिरवी रखने का करार किया था, जिससे अब वो पीछे हट गए हैं. UAE में तो ख़ैर उन पर दसियों केस चल ही रहे हैं.

यूं अगर शेट्टी के अर्श तक पहुंचने की कहानी धीरूभाई से मिलती थी, तो फ़र्श वाली एनोलॉज़ी अनिल अंबानी की स्टोरी से जोड़ी जा सकती है.


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adminDecember 15, 20201min5350

अंतरिक्ष के क्षेत्र में भारत लगातार अपनी क्षमता बढ़ा रहा है. पहले जो क्रायोजनिक इंजन विदेशों से आता था अब भारत में ही उसका निर्माण भी शुरू हो गया है. रांची स्थित मेकॉन कंपनी ने सेमी क्रायोजनिक इंजन टेस्टिंग फैसिलिटी तैयार की है. देसी इंजन टेस्टिंग फैसिलिटी से अंतरिक्ष में राकेट द्वारा सामान ले जाने की क्षमता में बढ़ोतरी होगी. (इनपुट – मृत्युंजय श्रीवास्तव)

इस मुश्किल काम को सच कर दिखाया है रांची स्थित भारत सरकार के उपक्रम मेकॉन के इंजीनियरों ने जिसकी बदौलत अब क्रायोजनिक इंजन की टेस्टिंग भारत में ही हो सकेगी. भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन( इसरो) ने मेकॉन को क्रायोजनिक इंजन टेस्टिंग डिज़ाइन तैयार करने की जिम्मेदारी सौंपी थी.

महेन्द्रगिरि स्थित इसरो के सेंटर के लिए डिज़ाइन तैयार किया गया है. अब क्रायोजनिक इंजन के टेस्टिंग के लिए दूसरे देशों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा जिससे पैसों की भी बचत होगी. देसी इंजन का जो डिज़ाइन तैयार किया गया है उससे अंतरिक्ष में जाने वाले रॉकेट की सामान ले जाने की क्षमता भी बढ़ जाएगी.

अबतक अंतरिक्ष में जाने वाले रॉकेट सिर्फ चार टन ही सामान ले जा सकता था. अब देसी इंजन बनने से सामान ले जाने की क्षमता छह टन हो जायेगी. इस रॉकेट को अगस्त 2021 में लांच करने की तैयारी हो रही है. मेकॉन के सीएमडी अतुल भट्ट ने कहा इसरो ने मेकॉन को क्रायोजनिक इंजन टेस्टिंग डिज़ाइन तैयार करने की जिम्मेदारी सौंपी थी. महेन्द्रगिरि स्थित इसरो के सेंटर के लिए डिज़ाइन तैयार किया गया है. अब क्रायोजनिक इंजन के टेस्टिंग के लिए दूसरे देशों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा.

मेकॉन देश की नामी सरकारी डिजाइनिंग उपक्रम है. इसका मुख्यालय झारखण्ड की राजधानी रांची में ही है. मेकॉन ने ही चंद्रयान 2 की लॉन्चिंग पैड का डिज़ाइन तैयार किया था. कुछ साल पहले तक घाटे में रहने वाली मेकॉन कंपनी अब मुनाफा देने वाली केंद्र सरकार की उपक्रम बन गयी है. कोरोना काल में मेकॉन को 1600 करोड़ का वर्कआर्डर मिला है.

मेकॉन के सीएमडी अतुल भट्ट ने बताया कि केंद्र सरकार ने 2030 तक स्टील के क्षेत्र में 300 मीट्रिक टन उत्पादन का जो लक्ष्य निर्धारित किया है उसमें विदेशों से साज़ो सामानों को मंगवाने में 25 बिलियन डॉलर विदेशी मुद्रा खर्च होगी, लेकिन मेकॉन रांची में ही साज़ो सामानों को बनवाने की क्षमता रखती है जिससे 25 बिलियन डॉलर की इकोनॉमी विदेश जाने से बच जायेगी.

मेकॉन में उन सामानों का डिज़ाइन तैयार होगा और केंद्र की रांची स्थित उपक्रम एचईसी में उत्पादन किया जायेगा. इससे कई MSME का भी उद्धार होगा. इससे देश का तो विकास होगा ही झारखंड का भी चौतरफा विकास होगा. मेकॉन को कई रक्षा उत्पाद बनाने का भी आर्डर जल्द ही मिल सकता है.


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adminDecember 12, 20202min6030

राजनीति के कुछ फिक्स जुमले हैं. मिसाल के तौर पर ‘यहां कोई परमानेंट दोस्त या विरोधी नहीं होता’, ‘विरोधी का विरोधी अपना दोस्त होता है’ और ‘राजनीति में सबकुछ मुमकिन है’. ऐसे ही जुमलों का साकार रूप राजस्थान के पंचायत इलेक्शन के दौरान नजर आया. कुछ ऐसा हुआ कि ट्विटर पर #BJPकोंग्रेस_एक_है ट्रेंड करने लगा. जिन लोगों को माजरा समझ में आया उन्होंने मीम पोस्ट करने शुरू कर दिए. पहले कुछ मजेदार मीम्स पर नजर डालिए.

 

 

अब जानते हैं कि मामला क्या है

राजस्थान में हाल ही में जिला परिषद के चुनाव हुए हैं. अब परिषद के सदस्यों को मिलकर परिषद का प्रमुख चुनना था. डूंगरपुर जिले में बीजेपी और कांग्रेस का मुकाबला था भारतीय ट्राइबल पार्टी (BTP) के समर्थन वाले उम्मीदवार का. ये उम्मीदवार दोनों ही पार्टियों के उम्मीदवारों से मजबूत था. लिहाज़ा, उसे रोकने के लिए बीजेपी-कांग्रेस ने हाथ मिला लिया.

नतीजा यह रहा कि 27 में से 13 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनी BTP अपने उम्मीदवार को जिला प्रमुख नहीं बना पाई. जबकि आठ सीटों वाली भाजपा ने कांग्रेस के छह सदस्यों के समर्थन से सूर्या अहारी को जिला प्रमुख का ताज पहना दिया. यहीं खेल सीमलवाड़ा, सागवाड़ा और गलियाकोट में हुआ.

राजस्थान पंचायत चुनाव में बीजेपी ने राज्य में सत्तारूढ कांग्रेस को पछाड़ दिया है.

 

भाजपा की कार में बैठकर आए कांग्रेस के सदस्य

सुबह 11 बजे भाजपा प्रत्याशी सूर्या देवी ने निर्दलीय आवेदन किया गया. कांग्रेस की ओर से किसी के आवेदन नहीं किया. दोपहर साढ़े तीन बजे दो कारों में सवार होकर कांग्रेस के सदस्य वोट देने आए. उन्हें कार से लाने-ले जाने का काम बीजेपी के युवा मोर्चा के कार्यकर्ताओं ने किया. दो कारों में बैठाकर लाने, उन्हें कलेक्टरी गेट तक छोड़ने और वापस कलेक्टरी गेट से सीधे कार में बैठाने की भूमिका भाजपा युवा मोर्चा के सदस्यों ने निभाई. उसी समय भाजपा के उम्मीदवार सूर्या अहारी को समर्थन देने पर मोहर लग गई.

 

इन जगहों पर भी दिखी गजब की जुगलबंदी

 

सांगवाड़ा में कांग्रेस के चार वोट भाजपा को

सागवाड़ा में पर भाजपा की 12, बीटीपी की 13, कांग्रेस की 4 सीटें थीं. प्रधान के चुनाव में भाजपा को 16, बीटीपी को 13 वोट मिले. कांग्रेस के 4 वोट भाजपा को मिलने से यहां पर भी भाजपा ने प्रधान बना लिया.

 

बिछीवाड़ा में भाजपा ने कांग्रेस को दिया वोट

बिछीवाड़ा में बीटीपी को 9, कांग्रेस को 14, वहीं भाजपा को 2 सीटें मिली थीं. प्रधान के चुनाव में कांग्रेस को 17 सीटें मिलीं. यहां भाजपा के 2 और एक बीटीपी उम्मीदवार ने कांग्रेस को वोट किया. इस तरह से यहां पर कांग्रेस का प्रधान बन गया

 

गलियाकोट में लॉटरी से मिला प्रधान पद

गलियाकोट में बीटीपी की 9, भाजपा की 7, कांग्रेस के पास 1 सीटें थीं. प्रधान के लिए भाजपा को कांग्रेस का वोट मिलाकर आठ वोट मिले. एक निर्दलीय ने वोट नहीं किया. इससे बीटीपी को भी आठ वोट मिले. इसके बाद लॉटरी से प्रधान पद भाजपा को मिला. अगर कांग्रेस बीजेपी को वोट न देती तो लॉटरी की नौबत न आती.

 

आसपुर में कांग्रेस के तीन वोट भाजपा को

आसपुर में बीटीपी की 4, कांग्रेस की 3 वहीं भाजपा 10 सीटें थीं. प्रधान चुनाव में भाजपा को 13 सीट मिलीं. यहां कांग्रेस के 3 उम्मीदवारों ने भाजपा को वोट किया.

पंचायत चुनाव में 1833 सीटों पर बीजेपी ने जीत हासिल की थी, जबकि कांग्रेस को 1713 सीटों पर जीत मिली है. इसके अलावा जिला प्रमुख के चुनावों में भी बीजेपी का प्रदर्शन कांग्रेस से काफी बेहतर था.

 

नाराज भारतीय ट्राइबल पार्टी (BTP) ने गहलोत सरकार से समर्थन वापस लिया

पंचायत चुनाव में कांग्रेस के बीजेपी से हाथ मिलाने से बीटीपी काफी नाराज़ है. पार्टी राजस्थान की गहलोत सरकार को समर्थन दे रही है. विधानसभा में उसके दो विधायक हैं. भारतीय ट्राइबल पार्टी (BTP) ने राजस्थान की कांग्रेस सरकार से समर्थन वापस ले लिया है. हालांकि, इस समर्थन वापसी से गहलोत सरकार पर कोई खतरा नहीं है.


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adminDecember 10, 20201min6170

बदलते वक़्त के साथ ऑनलाइन खरीदारी का तरीका भी बदल रहा है. ई-कॉमर्स वेबसाइट से निकलकर रिटेल बिज़नेस अब फेसबुक और इंस्टाग्राम जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर फल-फूल रहे हैं. इसी कड़ी में वॉट्सऐप भी शामिल है, जहां इस शॉपिंग को आसान बनाने के लिए फीचर तेज़ी से बढ़ते जा रहे हैं. वॉट्सऐप से खरीदारी करना अब बड़ा आसान हो गया है. तो आज हम जानेंगे कि वॉट्सऐप पर बिकने वाला कोई भी सामान कैसे खरीदना है. और साथ ही ये भी कि वॉट्सऐप पर अपनी दुकान कैसे लगानी है.

 

वॉट्सऐप पर खरीदारी कैसे करनी है?

*सबसे पहले आपको वॉट्सऐप बिज़नेस अकाउंट खोलना होगा, जिससे खरीदारी करनी है. आपके अड़ोस-पड़ोस के या दूसरे दुकानदारों के बिज़नेस अकाउंट नॉर्मल वॉट्सऐप अकाउंट जैसे ही मालूम पड़ते हैं, मगर जो नामी-गिरामी बिज़नेस हैं, उनके सामने एक वेरीफिकेशन वाला टिक लगा हुआ मिलेगा.

*अगर कोई यहां सामान बेच रहा है तो उसके नाम के आगे एक शॉपिंग बटन मिलेगा. ये बटन दबाने पर इनका catalogue (कैटलॉग) खुल जाएगा, यानी कि इनके सारे प्रोडक्ट सामने आ जाएंगे. आप बिज़नेस के नाम पर टैप करके भी कैटलॉग को ढूंढकर खोल सकते हैं.

 

वॉट्सऐप पर सामान कुछ ऐसे नजर आएगा.

 

*अब आपको जो भी चीजें खरीदनी हैं, उन पर टैप करना है. इन्हें cart (कार्ट) में ऐड कर लेना है. सारे आइटम ऐड होने के बाद आप इस पूरी लिस्ट को एक मैसेज की तरह बिज़नेस को भेज सकते हैं.

*आपको और दुकानदार दोनों को ही पता चल जाएगा कि टोटल सामान कितने रुपए का हुआ. इसके बाद तो वॉट्सऐप पर UPI पेमेंट का भी सिस्टम है, तो पेमेंट भी इधर ही हो सकता है.

 

और इस तरह आप सामान का ऑर्डर दे सकते हैं.

 

शॉपिंग के लिए कौन से फीचर जोड़े वॉट्सऐप ने?

वॉट्सऐप काफ़ी टाइम से अपने आपको एक शॉपिंग प्लेटफॉर्म में ट्रांसफ़ॉर्म कर रहा है. इसके लिए ये धीरे-धीरे नए फीचर जोड़ता जा रहा है. सबसे पहले आया “वॉट्सऐप बिजनेस” ऐप, जहां बिज़नेस कस्टमर सर्विस के लिए अकाउंट बनाए गए. फ़िर इसमें कैटलॉग का फीचर जोड़ा गया, ताकि सामान बेचने वाले अपने प्रोडक्ट्स को लिस्ट कर सकें.

फ़िर इस कैटलॉग तक आसानी से पहुंचने के लिए वॉट्सऐप ने बिज़नेस अकाउंट के नाम के आगे एक शॉपिंग बटन दे दिया. अभी इसने नया कार्ट फीचर जोड़ा है. इसकी मदद से अब कस्टमर एक-एक आइटम गिनाने के बजाय बिल्कुल एक वेबसाइट की तरह एकसाथ सारे प्रोडक्ट्स एक झोले में भरकर दुकानदार को बता सकते हैं.

 

वॉट्सऐप पर अपनी दुकान कैसे खोलें?

अगर आपकी भी कोई दुकान है, और आप वॉट्सऐप पर सामान बेचना चाहते हैं तो आपको वॉट्सऐप बिजनेस ऐप पर अकाउंट बनाना होगा. ये सलेक्ट करना होगा कि आप किस टाइप की दुकान चलाते हैं. उसके बाद अपनी दुकान का नाम और पिक्चर डालने के बाद आपको कैटलॉग भी बनाना होगा.

 

वॉट्सऐप बिज़नेस ऐप पर इस तरह से सामान ऐड किया जाता है.

 

इसके बाद एक-एक करके अपने सामान की फ़ोटो और रेट डाल देने हैं. बस. अगर आप चाहें तो अपने बनाए हुए कैटलॉग का लिंक  दोस्तों और रिश्तेदारों के साथ भी शेयर कर सकते हैं. और बस, कमाई शुरू.


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adminDecember 10, 20203min4750

2020 खत्म हो रहा है. इस साल कुछ अच्छा हुआ हो या न हुआ हो, ऐपल का कहना है कि इसके ऐप स्टोर पर बहुत कुछ बढ़िया हुआ है. इसने “Best of 2020” यानी 2020 के सबसे बढ़िया ऐप्स और गेम्स की लिस्ट जारी की है. मगर ये ध्यान रहे कि बढ़िया का मतलब ये नहीं कि कौन सा ऐप कितनी बार डाउनलोड किया गया है. ऐपल स्टोर के एडिटरों ने ऐप की क्वालिटी, क्रिएटिव डिजाइन, इस्तेमाल करने में आसानी, और ऐसी ही दूसरी चीजों के आधार पर विनर चुने हैं.

ऐपल के अलग-अलग प्लैट्फॉर्म पर जितने भी विनर चुने गए हैं उनमें एक चीज़ कॉमन है. और वो है कोरोना काल में उम्मीद का दामन पकड़ाने का काम. आप इस लिस्ट में उन ऐप्स को पाएंगे जिन्होंने ‘वर्क फ्रॉम होम’ में मदद की है, बाहर न घूम पाने पर घर पर हमारा मनोरंजन किया, हमें दोस्तों और परिवार वालों से डिजिटली जोड़े रखा या हेल्थ पर फोकस दिलाया. तो चलिए अब आईफोन, आईपैड वग़ैरह के बेस्ट ऐप्स और गेम्स देख लेते हैं.

 

ऐपल स्टोर ऐप्स

साल का बेहतरीन आईफोन ऐप– Wakeout (वेकआउट): जिम तो बंद थे. ऐसे में वेकआउट ऐप ने घर पर ही एक्सर्साइज़ करने का जुगाड़ बता दिया. मतलब कि कहीं भी बैठे हो या खड़े हो, ये ऐप छोटे मोटे रूटीन बता देता है जिससे आप थोड़ा ऐक्टिव रहें, स्ट्रेस दूर करें या फ़िर काम से थोड़ा सा ब्रेक ले लें.

 

Wakeout ऐप. (फ़ोटो: ऐपल)

 

साल का बेहतरीन आईपैड ऐप– Zoom (ज़ूम): इस साल घर से ही ऑफिस का काम निपटाने वाले लोगों को तो ज़ूम अपने चाचा के बेटे जैसा लगने लगा होगा. मीटिंग और इंटरव्यू से लेकर स्टैन्डअप कॉमेडी ऐक्ट तक ज़ूम पर निपट गईं. इस ऐप ने न सिर्फ़ इस साल ज़िंदगी आसान बनाई बल्कि कई लोगों को बेरोजगार होने से बचाया है.

ज़ूम ऐप (फ़ोटो: ऐपल)

 

साल का बेहतरीन मैक ऐप– Fantastical (फैनटास्टिकल): ऑफिस में काम करो तो सब चीज़ फ़्लो-फ़्लो में होती रहती हैं. घर पर अगर काम के लिए भी ट्विटर खोल लो तो काम भूलकर फ़ीड ही स्क्रॉल करते रह जाओ. ऐसे में डे-प्लैनर या शेड्यूलर बड़ा ही काम आया. और सबसे बढ़िया मैक ऐप का अवॉर्ड भी ऐसे ही एक ऐप को गया. नाम है फैनटास्टिकल. ये एक कैलंडर ऐप है. ये आपको शेड्यूल वग़ैरह लगाने और दिन का प्लान सेट करने में मदद करता है.

 

 

साल का बेहतरीन ऐपल TV ऐप– Disney+ (डिज़्नी प्लस): घर पर बैठे-बैठे वीकेंड पर क्या ही किया इस साल? वीडियो स्ट्रीमिंग प्लैट्फॉर्म्स पर एक के बाद एक बढ़िया फिल्में देख डालीं. ऐपल TV पर यही सब ऐप तो वैसे भी चलती हैं, और इन्हीं में से साल का सबसे बढ़िया ऐपल TV ऐप का अवॉर्ड मिल गया डिज़्नी प्लस को.

 

 

साल का बेहतरीन ऐपल वॉच ऐप– Endel (एंडेल): ये वाला अवॉर्ड पर्सनल केयर वाले ऐप को गया है. नाम है एंडेल. ये साउन्ड की मदद से यूजर को फोकस करने में, रीलैक्स करने में या सोने में मदद करता है.

 

 

इनके अलावा ऐपल ने ट्रेंड ऑफ द इयर के नाम से भी छह ऐप्स को अवॉर्ड दिए हैं. इनमें शामिल हैं:

*सेल्फ़ केयर वाला ऐप Shine
*फैमिली को आपस में कनेक्ट करने वाला ऐप Caribu
*सबका जाना पहचाना गेमिंग ऐप Pokémon GO
*डोनेशन से जुड़ा हुआ ऐप ShareTheMeal
*ऑनलाइन पढ़ाई में मदद करने वाला ऐप Explain Everything Whiteboard

 

ऐपल स्टोर गेम्स

Genshin Impact गेम का स्क्रीनशॉट.

 

रही बात गेम्स की तो साल का सबसे बढ़िया आईफोन गेम का अवॉर्ड तो Genshin Impact (गेनशिन इम्पैक्ट) को मिला है. अपनी स्टोरी लाइन, कैरेक्टर, और ग्राफिक की वजह से ये गेम काफ़ी चर्चा में बना हुआ है. ऐसे ही साल का सबसे बढ़िया आईपैड गेम Legends of Runeterra रहा, सबसे बढ़िया मैक गेम Disco Elysium बना, सबसे बढ़िया ऐपल TV गेम Dandara Trials of Fear और साल का सबसे बढ़िया ऐपल आर्केड गेम का अवॉर्ड मिला Sneaky Sasquatch को.



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