विदेश की नौकरी छोड़कर भारत में लावारिस जानवरों का इलाज कर रहे ये लोग

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हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला के पास एक कुत्ते को किसी कार ने जोरदार टक्कर मार दी थी। उसका बायां पैरा बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया था। वह कुत्ता वहीं पर तड़पता रहा, लेकिन किसी ने उसकी चीख नहीं सुनी। लेकिन ‘पीपल फार्म’ की नजर उस पर पड़ी और फार्म के वॉलंटीयर्स ने उसे उठाकर अस्पताल पहुंचाया गया। उस कुत्ते का नाम रखा गया ओरियन।

पीपल फार्म की स्थापना जोएलेन एंडर्सन ने की थी। वे कहती हैं, ‘ओरियन की सर्जरी होने के बाद हम उसे फार्म में लेकर आए। हमने उसके घावों पर पट्टी बांधी और हर रोज उसका ख्याल रखा। इतना ख्याल रखने की वजह से चमत्कारिक ढंग से, वह सिर्फ एक महीने में ठीक हो गया। अब वह पूरी तरह से ठीक हो चुका है। उसके ठीक होने की खुशी में ही मेरी खुशी है।’

पीपल फार्म एक पशु देखभाल केंद्र है जहां पर ऑर्गैनिक फार्मिंग भी की जाती है। यह हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले के धनोटू गांव के पास स्थित है। इस फार्म में हर प्रकार के घायल जानवरों का इलाज किया जाता है, जिसमें बिल्लियां, खच्चर, सुअर, आवारा कुत्तों से लेकर गाय तक शामिल रहती हैं। इसे 2014 में रॉबिन सिंह, जोएलिन और शिवानी भल्ला ने शुरू किया था। इसका उद्देश्य घायल जानवरों की देखभाल करना था।

इस फार्म में एक पशु चिकित्सालय है, एक गौशाला और एक कुत्तों का आसरा घर भी है। ये सब फिर से उपयोग की जाने वाली सामग्री से बना है। पीपल फार्म ने अब तक 590 से भी ज्यादा जानवरों को बचाया है और 128 जानवरों की नसबंदी की है। वहीं 100 जानवरों को गोद लेकर उन्हें नई जिंदगी दी है। इसमें 89 जानवर तो ऐसे थे जिन्हें सड़क पर तड़पड़ता छोड़ दिया गया था।

रॉबिन ने योरस्टोरी से बात करते हुए कहा, ‘भारत में आवारा पशुओं के प्रति क्रूरता बेहद आम है। पीपल फार्म का लक्ष्य जानवरों को मिलने वाले दुख और उनके साथ होने वाले अमानवीय व्यवहार को खत्म करना है।’ पीपल फार्म में एक 8 साल के कुत्ते को किसी ने पत्थर फेंक कर मार दिया था जिससे उसकी आंख खराब हो गयी थी। एक बैल पर किसी ने खौलता हुआ पानी डाल दिया था। एक गाय जिसका नाम लक्ष्मी रखा गया उसके पैर पर किसी ने मार दिया था। इन सब जानवरों को पीपल फार्म में आसरा मिला। पीपल फार्म के वॉलंटीयर इन सब जानवरों की देखभाल करते हैं।

 

पीपल फार्म में वॉलंटीयर के तौर पर काम करने वाली रवीना सीकरी कहती हैं, ‘हमने इन सभी जानवरों की अच्छे से देखभालकी और पशु चिकित्सकों की मददद से उचित दवाएं भी दीं।। हमने उन्हें हर दिन प्यार और स्नेह दिया। हमारे फार्म में 23 वॉलंटीयर हैं जो कि आवारा जानवरों की सेवा में हमेशा तत्पर रहते हैं।’

पीपल फार्म अपने आठ किलोमीटर के दायरे में बचाव अभियान चलाता है। रॉबिन बताते हैं, “जैसे ही किसी भी पड़ोसी क्षेत्र के निवासी घायल जानवर को पाते हैं तो वे हमें फोन करते हैं या एक ईमेल भेजते हैं। इसके बाद हमारा बचाव दल तुरंत स्थान पर पहुंच जाता है और घाव की गंभीरता के आधार पर, वे जानवर को आगे के उपचार के लिए फार्म में लाते हैं। अगर चोट मामूली होती है तो इसका मौके पर ही इलाज कर दिया जाता है। पीपल फार्म में हमीरपुर और डलहौजी जैसी जगहों से भी फोन आते हैं जो कि सौ किलोमीटर की दूरी पर स्थित हैं। ऐसी स्थिति में फोन करने वाले को जानवर को पीपल फार्म तक छोड़ने के लिए कहा जाता है।

अगर किसी जानवर को जॉइंट रिप्लेसमेंट, फ्रैक्चर रिपेयर, स्किन ट्रांसप्लांट जैसी सर्जरी की आवश्यकता होती है तो उसे फार्म के डॉक्टर ही अंजाम देते हैं। बेल्जियम के जस्टिन केउलिन और स्टेला मिनोए अभी यहां वेटरनरी सर्जन के तौर पर काम कर रहे हैं। अगर जानवर की हालत ज्यादा खराब होती है तो उसे नजदीकी पशु चिकित्सक के पास ले जाया जाता है। रॉबिन कहते हैं, ‘सर्जरी हो जाने के बाद जानवरों को फार्म में तब तक देखभाल के लिए रखा जाता है जब तक कि वे पूरी तरह से ठीक नहीं हो जाते। बाद में उन्हें या तो उस स्थान पर वापस ले जाया जाता है जहाँ वे रहते हैं या उन्हें किसी को गोद में दे दिया जाता है।

भारत में जानवरों और उनके कल्याण के प्रति उदासीनता कोई नई बात नहीं है। ऐसी कई घटनाएं हमारे सामने आई हैं जब लोगों ने अपने पालतू जावरों पर अत्याचार किया। पीपल फार्म को इसी उद्देश्य के लिए शुरू किया गया था ताकि ऐसे जानवरों की देखरेख की जा सके। इसे शुरू करने वाले रॉबिन अमेरिका में प्रोग्रामर के तौर पर काम कर रहे थे। बाद में उन्होंने डिजिटल डाउनलोड्स और गुड्स को बेचने के लिए अपने ऑनलाइन मार्केटप्लेस ई-जंकी की स्थापना की।

एक वॉलंटीयर

 

रॉबिन कहते हैं, ‘मैंने पुडुचेरी के ऑरोविल का सफर किया तो मुझे अहसास हुआ कि हमें भी समाज को कुछ वापस देना चाहिए। मैं वहां एक ऐसे व्यक्ति से मिला जो लावारिस छोड़ दिए गए कुत्तों की देखभाल करता था। तब से मैं लगातार इस काम में लगा हुआ हूं।’ रॉबिन ने दिल्ली में जानवरों की नसबंदी का कार्यक्रम शुरू किया। ठीक उसी वक्त वे किसी ऐसे ठिकाने की तलाश में थे जहां पर घायल जानवरों के इलाज की व्यवस्था की जा सके। शिवानी ई-जंकी में रॉबिन की सहकर्मी थीं और जॉएलेन एक बिजनेस मीटिंग के सिलसिले में अमेरिका में रॉबिन से मिली थीं। उन्होंने मिलकर एक टीम बनाई और पीपल फार्म की स्थापना की।

पीपल फार्म में जानवरों की देखरेख के अलावा ऑर्गैनिक फार्मिंग को भी बढ़ावा दिया जाता है। यहां वॉलंटीयर प्रोग्राम भी संचालित किए जाते हैं जिसमें सप्ताह में छह दिन पूरे दिन में चार घंटे काम करना शामिल होता है। वॉलंटीयर्स से उम्मीद की जाती है कि वे जानवरों के बचाव और देखभाल में मदद करें और साथ ही खेतों में काम करने में मदद करें। पीपल फार्म से जानवरों को गोद भी लिया जा सकता है। इसकी जानकारी वेबसाइट से ली जा सकती है।


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