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adminFebruary 8, 20212min6240

PayPal के जरिए भुगतान और पैसे ट्रांसफ़र करने जैसे काम आप 1 अप्रैल, 2021 से नहीं कर पाएंगे. PayPal अपनी सर्विसेज़ क्यूं बंद करने जा रहा है, PayPal है क्या और क्या PayPal इंडिया से अपना पूरा कारोबार समेट रहा है? आइए इन सभी सवालों के जवाब जानते हैं.\

अगर आप ऑनलाइन पेमेंट करते हैं, तो PayPal के बारे में जानते ही होंगे. नहीं जानते तो बता देते हैं. PayPal एक अमेरिकी कंपनी है, जो अधिकांश देशों में ऑनलाइन पेमेंट सिस्टम चलाती है. मतलब कुछ-कुछ पेटीएम या गूगल पे सरीखी. आसान भाषा में कहें तो PayPal दो लोगों या संस्थाओं के बीच के पैसों के लेन-देन को आसान और सुरक्षित बनाने का शुल्क लेती है.

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# PayPal माफिया?

क्या आपने ‘PayPal माफिया’ के बारे में सुना है? तो जान लीजिए, ये ऐसे लोगों का ग्रुप है जो कभी PayPal के कर्मचारी या फ़ाउंडर रह चुके हैं. ‘PayPal माफिया’ ग्रुप फ़ेमस भी है. इसका एक विकिपीडिया पेज भी है. फ़ॉर्चून मैगज़ीन दो बार इसके बारे में लिख चुकी है. क्यूंकि ‘PayPal माफिया’ ग्रुप के सदस्य PayPal के अलावा भी कई बड़ी-बड़ी कंपनियों को चला चुके हैं या चला रहे हैं. जैसे इलॉन मस्क, जो एक्स डॉट कॉम (x.com) के संस्थापक रहे हैं. x.com ने PayPal बनाने वाली कंपनी ‘कॉनफ़िनिटी ’ को ख़रीदा था.

 

लेकिन इलॉन मस्क ने बाद में x.com के बाकी सारे कारोबार को बंद कर दिया, और अपना पूरा फ़ोकस PayPal पर ही लगा दिया. क्यूंकि उनका मानना था कि भविष्य डिजिटल पेमेंट का है.

 

# PayPal की हिस्ट्री

PayPal को बाद में eBay ने ख़रीद लिया. eBay के ज़्यादातर डिजिटल पेमेंट PayPal के माध्यम से होने लगे. 2005 में VeriSign को ख़रीदने और 2007 में मास्टरकार्ड के साथ करार करने के बाद PayPal बड़ी से विशाल होती चली गई.

 

2007 में PayPal की एंट्री भारत में हुई. इसने चेन्नई में अपना एक सॉफ़्टवेयर डिवेलपमेंट सेंटर खोला. फ़रवरी 2010 में PayPal ने भारत में पर्सनल पेमेंट सर्विस बंद कर दी थी. मतलब PayPal के माध्यम से सिर्फ़ बिल वग़ैरह का ही भुगतान किया जा सकता था, किसी दोस्त-रिश्तेदार को पैसे ट्रांसफ़र नहीं हो सकते थे. जिस दिन ये सर्विस बंद हुई, उस दिन खूब कोहराम मचा. लोगों के भेजे गए पैसे वापस आने लगे. उसके बाद PayPal ने अपने सभी यूज़र्स को मेसेज भेजे-

हमने आपके पेमेंट को इसलिए रिवर्स कर दिया है, क्यूंकि अब हमने भारत में या भारत से किए गए पर्सनल पेमेंट स्वीकार करने बंद कर दिए हैं.

8 नवंबर, 2017 को ‘PayPal पेमेंट्स प्राइवेट लिमिटेड’ के नाम से भारत में घरेलू पेमेंट सर्विस शुरू की गई. कंपनी व्यापारियों और ग्राहकों के लिए डिजिटल भुगतान की सुविधाएं देने लगी.

अब कोविड-19 का दौर आया. इस वक्त कुछ ही ऐसे सेक्टर्स थे, जो घटने के बजाय बढ़ रहे थे. डिजिटल पेमेंट वाली कंपनियां उनमें से एक थीं. यूं इस दौरान PayPal दिन दूनी रात चौगुनी तरक्की करता रहा. इस वक्त PayPal को दुनिया की सबसे बड़ी डिजिटल पेमेंट सर्विस कहा जाता है.

 

# विदेश से पैसे लेना, भेजना नहीं रुकेगा

PayPal इसी साल 1 अप्रैल से भारत में डॉमेस्टिक पेमेंट सर्विस और पेमेंट गेटवे को बंद कर रहा है. मतलब अब ये सिर्फ़ ऑनलाइन माध्यम से भारत में बाहर से आने वाले और भारत से बाहर जाने वाले पैसों की ही डीलिंग करेगा. PayPal ने कहा कि अब कंपनी क्रॉस बॉर्डर बिजनेस पर ध्यान केंद्रित करेगी.

मतलब ये हुआ कि भारत से बाहर रहने वाले PayPal के ग्लोबल कस्टमर्स अब भी इसके जरिए भारतीय व्यापारियों को पेमेंट करने और उनसे पैसे लेने का काम करते रहेंगे. PayPal विवाद समाधान, रिटर्न और पेमेंट रिवर्सल को लेकर अपना संचालन और सपोर्ट भी चालू रखेगी. लेकिन अप्रैल से PayPal की पेमेंट गेटवे और एग्रीगेटर सेवाएं खत्म हो जाएंगी.

 

ये ख़बर बड़ी इसलिए है क्यूंकि भारत में ऑनलाइन सर्विस प्रोवाइडर पोर्टल्स, ऐप्स और वेबसाइट्स पर PayPal के जरिए ढेरों पेमेंट्स होते हैं. इनमें ‘यात्रा’, ‘मेक माइ ट्रिप’, ‘बुक माइ शो’ और ‘स्विगी’ जैसे ऐप्स और ऑनलाइन सर्विस प्रोवाइडर्स भी शामिल हैं. वैसे PayPal के लिए भी ‘क्रॉस बॉर्डर’ वाली राह आसान नहीं है, क्यूंकि वहां पर पहले से ही ‘वेस्टर्न यूनियन’ जैसे दिग्गज बैठे हैं.


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adminFebruary 3, 20211min24580

‘स्वदेस’ फिल्म देखी है आपने? शाहरुख़ खान का किरदार मोहन भार्गव उसमें नासा में काम करता है. अमेरिका में. नासा यानी नेशनल एरोनॉटिक्स एंड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन. मतलब अमेरिका का स्पेस सेंटर. फिल्म देखने वालों को याद ही होगा कि वो जगह कितनी भौकाली थी.

भारतीय मूल की अमेरिकी महिला भव्या लाल को इसी भौकाली जगह का कार्यकारी प्रमुख नियुक्त किया गया है. नासा ने एक प्रेस रिलीज़ में इस बात की जानकारी दी है. भव्या राष्ट्रपति जो बाइडेन प्रशासन के अंतर्गत नासा में परिवर्तन संबंधी कामकाज देख रही हैं. और बाइडन द्वारा नासा में बदलाव संबंधी समीक्षा दल की सदस्य भी हैं. भव्या नासा में बजट और फाइनेंस डिपार्टमेंट में वरिष्ठ सलाहकार का भी कामकाज देखेंगी. कुल  मिलाकर, जिम्मेदारी खूब है.

 

अब उनके बारे में कुछ और बातें जान लीजिए.

– भव्या अमेरिका के इंस्टीट्यूट फॉर डिफेंस एनालिसिस साइंस एंड टेक्नोलॉजी पॉलिसी इंस्टीट्यूट (STPI) में रिसर्च स्टाफ रही हैं. इंजीनियरिंग और स्पेस टेक्नोलॉजी में उनका काफ़ी अनुभव है.

– उन्होंने वाइट हाउस की साइंस एंड टेकनॉलजी पॉलिसी एंड नेशनल स्पेस काउंसिल के साथ ही अमेरिकी स्पेस से जुड़े कई कार्यक्रमों की अगुआई की.

– भव्या स्पेस टेक्नोलॉजी एंड पॉलिसी कम्युनिटी की सक्रिय सदस्य हैं. वह कई सरकारी स्पेस और साइंस समितियों में भी रह चुकी हैं.

– भव्या 10 सालों तक ‘एबीटी एसोसिएट्स’ की सेंटर फॉर साइंस एंड टेक्नोलॉजी पॉलिसी स्टडीज़ की डायरेक्टर रह चुकी हैं.

– 15 सालों तक STPI की रिसर्च स्टाफ मेंबर रही हैं. STPI जॉइन करने से पहले भव्या C-STPS LLC की अध्यक्ष रह चुकी हैं. यह कंपनी साइंस, टेक्नोलॉजी संबंधी नीतियां और रिसर्च को लेकर काम करती है.

– भव्या ने अमेरिकन न्यूक्लियर सोसाइटी के सालाना न्यूक्लियर एंड इमर्जिंग टेक्नोलॉजीज़ इन स्पेस सम्मेलन की सह-स्थापना की थी. ये सोसाइटी अंतरिक्ष इतिहास और पॉलिसी पर सेमिनारों का आयोजन करती है.

– अंतरिक्ष के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए उन्हें कई सम्मान से सम्मानित किया जा चुका है. भव्या के दुनिया के टॉप जर्नल्स में 50 से अधिक पेपर्स प्रकाशित हैं.

 

इसके लिए कितनी पढ़ाई की?

भव्या ने मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से न्यूक्लियर इंजीनियरिंग में बैचलर्स किया हुआ है. इसी इंस्टिट्यूट से उन्होंने डबल मास्टर्स किया हुआ है. न्यूक्लियर इंजीनियरिंग और टेक्नोलॉजी और पॉलिसी स्ट्रीम से. भव्या ने द जॉर्ज वाशिंगटन यूनिवर्सिटी से पब्लिक पॉलिसी और पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन में पीएचडी की हुई है.


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adminFebruary 3, 20219min4500

रिहाना. अमेरिकी पॉप स्टार हैं. गाने गाती हैं. ‘डायमंड’ और ‘लव द वे यू लाई’ जैसे तमाम हिट गाने गए हैं. शायद आपने भी सुने हों. यूथ में बेहिसाब पॉपुलर हैं. अचानक से भारत में चर्चा में आ गई हैं. क्यों? क्योंकि उन्होंने किसान आंदोलन को लेकर एक ट्ववीट कर दिया है. पहले ट्वीट पर नजर डालते हैं, बाकी बातें बाद में-

रिहाना ने अपने ट्वीट में CNN की एक खबर शेयर की है. इस खबर की हेडलाइन है- किसानों और पुलिस की भिड़ंत के बीच भारत में नई दिल्ली के आसपास इंटरनेट पर रोक लगाई गई. इस पर रिहाना ने ट्वीट में सवाल किया-

“आखिर हम इस बारे में बात क्यों नहीं कर रहे हैं?”

रिहाना ने ये ट्वीट किया ही था कि पूरे ट्विटर पर भसड़ मच गई. यूजर्स तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं देने लगे. आइए नजर डालते हैं इनमें से कुछ पर-

सुशील नाम के यूजर ने लिखा कि रिहाना को दूसरे देश के मामलों में दखल देने की जरूरत नहीं है.

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किसी ने मजाकिया अंदाज में लिखा, ‘रिहाना जाग गईं और Harihanna को चुन लिया’

 

 

अज़ीम खान नाम के यूजर ने तो कह दिया, बॉलीवुड सितारों को शर्म आनी चाहिए.

 

रिहाना ने पूछा था कि आखिर हम (किसान आंदोलन पर बात क्यों नहीं कर रहे हैं) इसके जवाब में अर्घ्यदीप नाम के यूजर ने लिखा कि बात इसलिए नहीं हो रही क्योंकि हम भी अमेरिका के मामलों में दखल नहीं देते. क्योंकि हम अपनी लोकतांत्रिक सरकार में भरोसा रखते हैं, जो मामलों को हैंडल करने के काबिल है.

 

 

अंतरिक्ष नाम से ट्विटर हैंडल से भी इसके जवाब में लिखा गया- क्योंकि किसानों के भेष में गुंडे मौजूद हैं और असली किसान खेतों में पसीना बहा रहा है. किसान शांतिपूर्ण प्रदर्शन के नाम पर पुलिसवालों पर हमला नहीं करते.

 

 

शिव तिवारी नाम के यूजर ने रिहाना को उत्तरी आयरलैंड में हुई घटना की याद दिलाई. 2011 में रिहाना उत्तरी आयरलैंड के एक खेत में सेमी न्यूड फोटो शूट करा रही थीं और एक किसान ने उन्हें अपने खेत से निकाल दिया था.

 

 

कई लोगों ने किसान आंदोलन के मुद्दे को उठाने के लिए रिहाना के धन्यवाद दिया. मीनाक्षी चौधरी नाम की यूजर ने लिखा- रिहाना, आप एक बहादुर इंसान हैं. आप इंसानियत के लिए जीती हैं. एक अच्छे उद्देश्य के लिए आवाज उठाने के लिए शुक्रिया.

 

 

रमनजीत नाम की यूजर ने लिखा- जो कुछ हो रहा है, उस पर ध्यान दिलाने के लिए शुक्रिया. जागरूकता फैलाने के लिए हम आपके शुक्रगुजार हैं.

 

 

शरण नाम के यूजर ने लिखा- मुझे नहीं पता कि रिहाना के इस ट्वीट के बाद मोदी भक्तों को नींद कैसे आएगी.

 

 

एक यूजर करुण रेड्डी ने लिखा- क्योंकि हम इस मामले के एक्सपर्ट नहीं है. कम से कम आप तो बिल्कुल भी नहीं हैं.

 

 

विवेक नाम के यूजर ने लिखा कि प्रोटेस्ट करने वाले किसान वामपंथी खालिस्तानी और कांग्रेसी हैं. ये दिल्ली में दंगा कराना चाहते हैं.

 

 

एक यूजर ने मजाकिया लहजे में ये मीम शेयर किया-

 

 

देसी छोरा नाम के यूजर ने लिखा- रिहाना मैप पर इंडिया को खोज भी नहीं पाएगी, लेकिन हां, वो ‘बुद्धिजीवी’ है.

 

 

 

एक यूजर ने तो प्रधानमंत्री मोदी और रिहाना के ट्विटर पर फॉलोवर भी गिना दिए.

 

 

 

एक यूजर ने ट्वीट किया- इंटरनेट बंद कर देना, रात में प्रोटेस्टर्स को पीटना, पत्रकारों को जेल में डाल देना, भारत सरकार अपने नागरिकों के मानवाधिकारों का हनन कर रही है.

 

चलते चलते रिहाना के बारे में थोड़ा और जान लीजिए

रिहाना अमेरिका के ब्लैक समुदाय से हैं. व्हाइट लोगों के बीच में उन्होंने अपनी पहचान बनाई है. आज लोग उनसे इंस्पायर होते हैं. लेकिन उनकी सक्सेस स्टोरी इतनी आसान नहीं रही. उनका बचपन बहुत डिस्टर्ब रहा. उनके पिता ड्रग एडिक्ट थे. आर्थिक हालात भी बहुत खराब थे. उनके पिता उन्हें बहुत मारते-पीटते थे. स्कूल में भी उन्हें बुलिंग सहनी पड़ी थी. बड़े होने पर क्रिस ब्राउन के साथ उनकी रिलेशनशिप भी सही नहीं रही. इस दौरान भी वे हिंसा का शिकार हुईं. लेकिन इन सबके बावजूद वे अपने टैलेंट को निखारती रहीं. देखते ही देखते सिंगिंग की दुनिया में बड़ी हस्ती बन गईं.

किसान प्रोटेस्ट को लेकर किए गए रिहाना के ट्वीट पर अब तक साढ़े तीन लाख से अधिक लाइक आ चुके हैं. लगभग डेढ़ लाख लोगों ने उनके ट्वीट को रीट्वीट किया है. यह अपने आप में बताता है कि रिहाना का सिर्फ एक सवाल भारत में किसान आंदोलन को लेकर लोगों पर क्या असर डाल रहा है.


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adminFebruary 3, 20211min4200

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड यानी CBSE की 10वीं और 12वीं की परीक्षा की डेटशीट जारी हो गई हैं. केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल ने भी ये डेटशीट जारी की हैं. CBSE द्वारा तय किए गए प्रोग्राम के मुताबिक, ये एग्जाम 4 मई से 10 जून के बीच होंगे. 12वीं की परीक्षाएं दो शिफ्टों में ली जाएंगी. पहली शिफ्ट का समय सुबह 10:30 से दोपहर 1:30 बजे तक का है. दूसरी शिफ्ट का समय दोपहर 2:30 से शाम 5:30 बजे तक का तय किया गया है. छात्र-छात्राएं cbse.nic.in पर जाकर अपने एग्जाम की डेटशीट डाउनलोड कर सकते हैं.

शिक्षा मंत्री ने बताया कि परीक्षाएं ऑफलाइन मोड के तहत कराई जाएंगी. यानी बच्चों को स्कूल जाकर पेपर देना होगा. इस जानकारी के साथ रमेश पोखरियाल ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से छात्रों को गुड लक कहा और उनकी हौसला अफजाई की. साथ ही कोरोना काल में शिक्षकों के कार्य की भी सराहना की.

 

 

मार्च में होंगे प्रैक्टिकल

सीबीएसई के 10वीं और 12वीं कक्षा के प्रैक्टिकल एग्ज़ाम 1 मार्च से होने हैं. ये भी छात्रों को स्कूल जाकर देने होंगे. जानकारी के मुताबिक, अगर कोरोना के कारण स्कूल उस समय तक नहीं खुलते, तो ये प्रैक्टिकल थ्योरी एग्ज़ाम के बाद होंगे. सब तय शेड्यूल के हिसाब चला तो प्रैक्टिकल और थ्योरी एग्ज़ाम दोनों का रिजल्ट 15 जुलाई तक घोषित कर दिया जाएगा. इससे छात्र आगे की पढ़ाई के लिए तैयारी कर सकेंगे.

बता दें कि कोरोना महामारी के दौरान 2020 में 10वीं और 12वीं की परिक्षाओं को बीच में रोक दिया गया था.और उम्मीद की जा रही थी कि जब हालात सामान्य होंगे, तब बाकी के एग्ज़ाम लिए जाएंगे. पर मामला कोर्ट पहुंचा और ये परिक्षाएं रद्द कर दी गईं थीं. और  वैकल्पिक मूल्यांकन कार्यक्रम के आधार पर परिणाम की घोषणा की गयी. इस बार भी परीक्षाएं देर से आयोजित की गई हैं. क्योंकि अमूमन प्रैक्टिकल्स जनवरी में और एग्जाम्स फरवरी-मार्च में खत्म हो जाते थे. पर कोरोना के कारण इस बार एहतियात बरती गई है.


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adminFebruary 1, 20211min4800

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आज वित्तीय वर्ष 2021-22 के लिए बजट का ऐलान किया. इसमें किसानों के लिए कुछ नई योजनाओं की घोषणा की गई है. हालांकि बजट पेश करने के दौरान जब वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने जैसे ही खेती और किसानों पर बात शुरू की तो विपक्ष हूटिंग करने लगा. वित्त मंत्री ने अपनी बात शुरू करते हुए कहा कि सरकार किसानों के हित के लिए प्रतिबद्ध है. उनके ऐसा बोलते ही विपक्ष की तरफ से नारेबाजी होने लगी. हंगामे के दौरान निर्मला सीतारमण ने केंद्र सरकार की तरफ से किसानों के लिए घोषणाएं कीं और उनके लिए किए गए कामों का जिक्र किया.

वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार ये सुनिश्चित कर रही है कि खेती से जुड़ी सभी कमोडिटीज पर लागत का डेढ़ गुना न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी MSP दिलाया जा सके. उन्होंने बताया कि सरकार गावों में संपत्ति के दस्तावेज और किसानों को आसानी से ऋण दिलाने पर भी काम कर रही है. आइए जानते हैं कृषि और किसानों पर वित्त मंत्री ने और क्या-क्या कहा:

# ‘स्वामित्व स्कीम’ के तहत गांवों में संपत्ति मालिकों को संपत्ति अधिकार से जुड़े दस्तावेज दिए जा रहे हैं. अब तक 1,241 गांवों के 1.80 लाख संपत्ति मालिकों को ये दस्तावेज दिए गए हैं.

# किसानों को लोन आसानी से उपलब्ध हो सके, इसके लिए कृषि ऋण के लक्ष्य को बढ़ाकर 16.5 लाख करोड़ रुपये किया गया है. पहले ये 12 लाख करोड़ रुपये तक था. पशुपालन, डेयरी और मछली पालन के क्षेत्र में अधिक लोन देने पर जोर.

ग्रामीण विकास कोष के लिए आवंटन को 30 हजार करोड़ रुपये से बढ़ाकर 40 हजार करोड़ रुपये किया गया है.

राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) के अंतर्गत बने सिंचाई फंड को दोगुना कर 5 हजार करोड़ रुपये से 10 हजार करोड़ रुपये किया गया.

कृषि उत्पादों की कीमत का निर्धारण और आयात की व्यवस्था बेहतर रहे, इसके लिए ऑपरेशन ‘ग्रीन स्कीम’ के दायरे को बढ़ाकर इसमें 22 अन्य उत्पादों को शामिल किया जा रहा है. अब तक ये टमाटर, आलू और प्याज पर लागू है.

5 फिशिंग हार्बर (वे इलाके जहां मछलियां पकड़ी जाती हैं) को आर्थिक गतिविधियों के केंद्र के तौर पर विकसित किया जाएगा. इनमें कोच्चि, चेन्नई, विशाखापट्टनम, पारदीप और पेटुआघाट जैसे इलाके शामिल हैं. इससे मत्स्य पालन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है.

# घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कृषि उत्पादों का आयात बढ़ाने के लिए कृषि उड़ान स्कीम. ये काम PPP मॉडल पर होगा.

# किसान क्रेडिट कार्ड योजना को 2021 तक के लिए बढ़ाया जाएगा. इसके लिए सीमा को 12 लाख करोड़ रुपये से बढ़ाकर 15 लाख करोड़ रुपये किया जाएगा.

# खेती और सिंचाई के लिए इस वित्तीय वर्ष में 2.83 लाख करोड़ रुपये का आवंटन. ग्रामीण विकास और पंचायती राज के लिए 1.23 लाख करोड़ रुपये.

# देश में मौजूद वेयरहाउस, कोल्ड स्टोरेज को नाबार्ड अपने अंडर में लेगा. इन्हें नए तरीके से डेवलेप किया जाएगा. नए वेयरहाउस, कोल्ड स्टोरेज भी खोले जाएंगे. इसके लिए PPP मॉडल अपनाया जाएगा.

# 2022-23 तक मछली उत्पादन को बढ़ाकर 200 लाख टन तक पहुंचाने का लक्ष्य. फिश प्रोसेसिंग को बढ़ावा दिया जाएगा.

# 2025 तक दूध उत्पादन को दोगुना करके 108 मीट्रिक टन तक पहुंचाने का लक्ष्य.

# प्रधानमंत्री कुसुम योजना के जरिये किसानों के पंप को सोलर पंप से जोड़ा जाएगा. इससे 20 लाख किसान लाभान्वित होंगे. इसके अलावा, 15 लाख किसानों के ग्रिड पंप को भी सोलर से जोड़ा जाएगा.

# महिला किसानों के लिए ‘धन्य लक्ष्मी योजना’ का ऐलान किया गया, जिसके तहत बीज से जुड़ी योजनाओं में महिलाओं को मुख्य रूप से जोड़ा जाएगा.

# उर्वरता बढ़ाने पर फोकस रखा जाएगा. रासायनिक खाद के इस्तेमाल को कम किया जाएगा और इसका संतुलित इस्तेमाल कैसे किया जाए, इस बारे में जानकारी दी जाएगी.

# दूध, मांस, मछली समेत जल्दी खराब होने वाली चीजों को बचाने के लिए वातानुकूलित ‘किसान रेल’ कोच चलाए जाएंगे.

# बागवानी से जुड़े किसानों के लिए जिला स्तर पर योजना लाई जाएगी. उत्पादन बढ़ाने पर जोर. बागवानी के लिए एक जिला-एक उत्पाद की तर्ज पर आगे बढ़ा जाएगा.


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adminFebruary 1, 20211min5930

केंद्रीय वित्तमंत्री ने अपने बजट भाषण में कहा कि अब देश में डिजिटल जनगणना होगी, जो ऐतिहासिक कदम होगा. इसके लिए वित्तमंत्री ने बाकायदा 3750 करोड़ रुपए के बजट का आवंटन भी किया. देश में पहली बार जनगणना के लिए पांरपरिक कागज और कलम के बजाय इस बार की जनगणना इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस (मोबाइल एप) के जरिए की जाएगी.

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आम बजट पेश किया. इस दौरान उन्होंने देश में होने वाली जनगणना को लेकर बड़ा ऐलान किया. वित्त मंत्री ने अपने बजट भाषण में कहा कि अब देश में डिजिटल जनगणना होगी, जो ऐतिहासिक कदम होगा. इसके लिए वित्तमंत्री ने बाकायदा 3750 करोड़ रुपए का आवंटन भी किया. देश में पहली बार जनगणना के लिए पांरपरिक कागज और कलम के बजाय इस बार की जनगणना इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस (मोबाइल एप) के जरिए की जाएगी.

बता दें कि भारत में होने वाली जनगणना दुनिया में सबसे ज्यादा डाटा एक्सरसाइज वाली होगी. जनगणना में न सिर्फ लोगों की आबादी गिनी जाएगी, बल्कि लोगों के सामाजिक आर्थिक डाटा भी इकट्ठा किए जाएंगे. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पिछले साल ही राजधानी दिल्ली में जनगणना भवन की आधारशिला रखने के दौरान ही कहा था कि डिजिटल इंडिया को बढ़ावा देने के लिए 2021 की जनगणना मोबाइल ऐप के जरिए की जाएगी. इस मोबाइल ऐप में डिजिटल तरीके से आंकड़े उपलब्ध होंगे.

डिजिटल जनगणना के लिए 31 लाख से अधिक प्रशिक्षित कर्मचारी लगाए जाएंगे. इस दौरान देश भर में लोगों के डाटा कलेक्शन एंड्राइड बेस्ड स्मार्टफोन्स के द्वारा एकत्रित किया जाएगा. जनगणना में जनसंख्या, उसमें महिला-पुरुष का अनुपात, जाति, शिक्षा का स्तर, उम्र, जन्म-मृत्यु, लोगों के घरों के स्थिति (कच्चा-पक्का), पलायन, व्यवसाय, आदि का ब्योरा होगा. जनगणना से संबंधित डाटा साल 2024-25 तक देश को उपलब्ध हो सकेगा.

बता दें कि देश की आजादी के बाद पहली बार 1951 में जनगणना हुई थी, जिसके बाद हर दस साल के अंतराल पर देश में जनगणना होती है. 2011 की जनगणना के बाद अब मौका डिजिटल जनगणना का होगा. जनगणना में सिर्फ लोगों की गिनती नहीं होती है बल्कि, सारा ब्योरा होता है.  गुणवत्तापूर्ण आंकड़ों के लिए इस बार बजट में डिजिटल जनगणना का ऐलान किया गया है, जिसके लिए वित्तमंत्री ने 3750 रुपये का ऐलान किया है.


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adminJanuary 29, 20212min6370

चुटकियों में क़र्ज़ बाँटने वाले एप्स कुकरमुत्तों की तरह पनप रहे हैं, लेकिन कुछ को छोड़कर बाक़ियों की गतिविधियाँ काफ़ी ख़तरनाक हैं.

हैदराबाद की वी कविता ने कोरोना महामारी के समय एक एप के ज़रिए लोन लिया था. वे इस लोन को तय वक़्त पर नहीं चुका पाईं.

इस एप के कर्मचारियों ने उन्हें लोन चुकाने की आख़िरी तारीख़ के दिन सुबह सात बजे फ़ोन किया. चूंकि, वे दूसरे कामों में व्यस्त थीं, ऐसे में वे फ़ोन चेक नहीं कर पाईं.

अगली कॉल कविता के छोटे भाई की पत्नी की रिश्तेदार को गई. यहाँ तक कि कविता की भी उनके साथ कोई नज़दीकी बातचीत नहीं थी.

जब एप के कर्मचारियों ने उनसे पूछा कि क्या वे कविता को जानती हैं तो उन्होंने बताया कि ‘हाँ, वे उनकी रिश्तेदार हैं.’

इस पर कर्मचारियों ने उनसे कहा कि कविता ने उनकी कंपनी से एक लोन लिया है और उन्होंने ही उनका नंबर उन्हें दिया था. ऐसे में अब उन्हें ही यह लोन चुकाना चाहिए.

लेकिन इस तरह की माँग से वे घबरा गईं और उन्होंने यह पूरा वाक़या अपने परिवार में बता दिया. पूरे परिवार ने कविता से दूरी बना ली.

इसी तरह सिद्दीपेट की कीर्णी मोनिका, जो एक सरकारी कर्मचारी थीं और कृषि विभाग में काम करती थीं. उन्होंने भी अपनी निजी ज़रूरतों के लिए इन एप्स में से एक से लोन ले लिया.

जब वे बक़ाया रक़म का भुगतान करने से चूक गईं, तो लोन एप वालों ने उनकी फ़ोटो को व्हाट्सएप पर उनके सभी कॉन्टैक्ट्स को भेज दिया और उसमें लिखा कि मोनिका ने उनसे एक लोन लिया है और अगर वे उन्हें कहीं दिखाई देती हैं, तो उनसे लोन का भुगतान करने के लिए कहें.

मोनिका के परिवार के अनुसार, वे इस बेइज़्ज़ती को सह नहीं पायीं और उन्होंने ज़हर खाकर आत्महत्या कर ली.

उनके गुज़रने के बाद एप के कर्मचारियों ने उनके घर फ़ोन किया और जब उन्हें बताया गया कि मोनिका ने आत्महत्या कर ली है तो उन्होंने इस पर कोई ग़ौर नहीं किया.

एप के कर्मचारियों ने मोनिका और उनके परिवार को भद्दी-भद्दी गालियाँ दीं और लोन ना चुकाने के लिए ज़िम्मेदार ठहराया.

रामगुंडम में काम करने वाले संतोष ने भी इन्हीं एप्स की प्रताड़ना और अपमान से तंग आकर आत्महत्या कर ली.

एक वीडियो में उन्होंने अपनी इस व्यथा का ज़िक्र किया. उन्होंने कीड़े मारने की दवाई खाकर जान दे दी.

इससे पहले राजेंद्र नगर में एक और शख़्स ने इन्हीं लोन एप्स की कारगुज़ारियों से परेशान होकर आत्महत्या कर ली थी.

 

लोन एप्स

 

लोगों की ज़िंदगी छीन रहे मोबाइल एप्स

इन लोन एप्स के ज़रिए भारी-भरकम ब्याज पर पैसा उधार लेने वालों से अगर क़र्ज़ चुकाने में ज़रा भी देरी हो जाती है तो उन्हें अक्सर धमकियों और भद्दी-भद्दी गालियों का सामना करना पड़ता है.

यह पूरी परिस्थिति इस तरह के क़र्ज़दारों के लिए एक प्रताड़ना बन गई है.

ये लोन कंपनियाँ बिना किसी अंडरराइटिंग के आकस्मिक परिस्थितियों में काम चलाने के लिए तुरत-फुरत पैसा देती हैं. बाद में ये उधार लेने वाले से मोटा पैसा वसूलती हैं.

ऊपर दिये गए मामले इन कंपनियों द्वारा अपनायी जा रही अनियंत्रित ग़लत गतिविधियों के चंद वाक़ये भर हैं.

आमतौर पर लोग बैंकों से या अपने परिचितों से पैसे उधार लेना पसंद करते हैं. मोबाइल फ़ोन आने के बाद कुछ लोगों ने इनके ज़रिए ब्याज पर पैसे उठाना शुरू कर दिया है.

अगर आप अपना ब्यौरा मोबाइल एप में डालते हैं तो वे आपको लोन देते हैं. इस क़र्ज़ को आपको बाद में वापस करना होता है. जब तक आप तय वक़्त पर पैसे चुकाते हैं, तब तक सब कुछ अच्छा रहता है. चीजें तब बिगड़ती हैं जब आप लोन की रक़म चुकाने में देरी करते हैं.

दूसरी बात, ये लोन लेना जितना आसान है इन्हें चुकाना उतना ही मुश्किल होता है. कई लोगों के लिए ये लोन एक मानसिक प्रताड़ना के दौर के रूप में सामने आते हैं.

सिर्फ़ ऊपर दिये गए मामले ही इन एप आधारित लोन के चलते मुसीबत में पड़ने वाले लोगों के उदाहरण नहीं हैं. ऐसे तमाम लोग हैं जिन्हें इन लोन्स के चलते गंभीर प्रताड़ना का सामना करना पड़ा है.

जो लोग थोड़े बहुत पढ़े लिखे हैं और फ़ोन का इस्तेमाल करना जानते हैं, वे कई दफ़ा अपनी ज़रूरतों के लिए इन एप्स से लोन ले लेते हैं, लेकिन जब इन्हें चुकाने में देरी होती है तो उन्हें भयंकर मुश्किलों और तनाव से जूझना पड़ता है.

 

एप से क़र्ज़ लेने में दिक़्क़त क्या है?

आमतौर पर जब बैंक या किसी दूसरी वित्तीय संस्था से लोन लिया जाता है तो ब्याज दर एक से डेढ़ फ़ीसद प्रतिमाह होती है. लेकिन, इन एप आधारित क़र्ज़ों में ब्याज की कोई ऊपरी सीमा नहीं है. इनमें कोई काग़ज़ नहीं होता है.

इन क़र्ज़ों में ब्याज पर ब्याज चढ़ता है. दिनों के आधार पर ब्याज तय होता है. हफ्ते के आधार पर ब्याज तय किया जाता है.

लोन चुकाने में देरी होने पर मूलधन पर पेनाल्टी लगती है. साथ ही ब्याज पर भी पेनाल्टी वसूली जाती है.

आमतौर पर कहीं भी महीने के आधार पर ब्याज का आकलन नहीं किया जाता, लेकिन इन एप्स में यह आकलन दिन, हफ्ते और महीने के आधार पर किया जाता है.

 

प्रोसेसिंग फ़ीस

बैंक और दूसरे ग़ैर-बैंकिंग वित्तीय संस्थान (एनबीएफ़सी) किसी को लोन देते हैं तो वो उसके लिए एक प्रोसेसिंग फ़ीस लेते हैं.

यह फ़ीस लोन की मात्रा पर आधारित होती है. यह प्रोसेसिंग फ़ीस आमतौर पर लोन की रक़म के एक फ़ीसद से भी कम होती है. इसका मतलब है कि अगर आप पाँच लाख रुपये का लोन लेते हैं, तो प्रोसेसिंग फ़ीस के तौर पर आपको 5,000 रुपये से भी कम देने होते हैं.

लेकिन, एप आधारित लोन ऐसे नहीं चलते. ये महज़ पाँच हज़ार रुपये के लोन के लिए चार हज़ार रुपये प्रोसेसिंग फ़ीस के लेते हैं.

ऐसे में सवाल उठता है कि लोग आख़िर ये लोन लेते क्यों हैं?
इसकी वजह ये है कि ये एप्स आपसे आपकी आमदनी का कोई प्रमाण नहीं माँगते. ये आपका सिबिल स्कोर नहीं देखते. जबकि कोई भी बैंकिंग संस्थान या एनबीएफ़सी आपका सिबिल स्कोर चेक किए बग़ैर आपको लोन नहीं देता.

सिबिल एक ऐसा स्कोर होता है जिससे आपकी किसी लोन को चुकाने की हैसियत का पता चलता है.

इससे यह भी पता चलता है कि आपने कहीं अपने पिछले लोन चुकाने में कोई देरी या डिफ़ॉल्ट तो नहीं किया.

इन्हीं के आधार पर आपका स्कोर तय किया जाता है और बैंक लोन देते वक़्त इस स्कोर का इस्तेमाल आपकी लोन चुकाने की क़ाबिलियत का अंदाज़ा लगाने में करते हैं. जितना ऊंचा सिबिल स्कोर होता है आपकी लोन चुकाने की संभावना उतनी ही मज़बूत होती है.

कुछ एप्स आमदनी के प्रमाण और सिबिल स्कोर को वेरिफ़ाई करते हैं और अपने दिये गए क़र्ज़ों को एक प्रक्रिया के तहत वसूलते हैं. लेकिन, ऐसे एप्स चुनिंदा ही हैं.

जबकि ऐसे एप्स की भारी तादाद है जो लोन देने के नाम पर लूट मचा रहे हैं. इस तरह के एप्स लोगों की पैसों की आकस्मिक ज़रूरतों और तुरत-फुरत लोन मिल जाने की सहूलियत का फ़ायदा उठा रहे हैं.

 

जीएसटी के नाम पर

आमतौर पर हम हर तरह की सर्विस के लिए सरकार को जीएसटी का भुगतान करते हैं. लेकिन, ये एप्स जीएसटी के तहत रजिस्टर्ड नहीं हैं. ये एप्स उनसे क़र्ज़ लेने वालों से जीएसटी वसूलते हैं, लेकिन यह पैसा सरकार को नहीं चुकाया जाता है.

इसका मतलब यह है कि जीएसटी के दायरे में आये बग़ैर ये जीएसटी का पैसा भी अपने ग्राहकों से वसूलते हैं.

अगर जीएसटी लिया जाता है तो उस संस्थान का जीएसटी नंबर भी दिया जाना चाहिए. लेकिन, ये एप्स ऐसा कोई ख़ुलासा नहीं करते हैं.

 

फ़र्ज़ी क़ानूनी नोटिस

अगर रीपेमेंट में देरी होती है तो फ़र्ज़ी क़ानूनी नोटिस फ़ोन पर भेजे जाते हैं. इनमें लिखा होता है कि चूंकि आप अपने लिए गए लोन को चुकाने में डिफॉल्ट कर गए हैं ऐसे में हम आप आपके ख़िलाफ़ एक्शन ले रहे हैं या एक्शन लेने जा रहे हैं. इनमें कहा जाता कि आप कोर्ट में उपस्थित रहने के लिए तैयार रहें.

लेकिन, ये नोटिस फ़र्ज़ी होते हैं. ये एप्स इसी तरह के नोटिस क़र्ज़दार के रिश्तेदारों और दोस्तों को भी भेजते हैं. जिन लोगों को इस सब के बारे में जानकारी नहीं होती है वे इस नोटिस को देखकर डर जाते हैं.

 

लोन वसूली के लिए बेइज़्ज़ती करना

इन एप्स से लोन लेने के बाद हमें इन्हें तय समयसीमा के भीतर चुकाना होता है. ऐसा नहीं होने पर लोन चुकाने की डेडलाइन के दिन सुबह सात बजे ही ये एप्स आपको लगातार फ़ोन कॉल्स करने लगते हैं. ये दर्जनों बार आपको फ़ोन करते हैं. और इनकी भाषा धमकाने वाली होती है.

अगर किसी भी वजह से आप डेडलाइन से एक दिन भी चूक गए तो बस आपकी मुसीबत शुरू हो जाती है.

एप्स के कर्मचारी इस तरह के आदेश से शुरुआत करते हैं, “भीख मांगो, लेकिन पैसे वापस करो.”

यह इनकी पहले चरण की कार्रवाई होती है.

अगले चरण में ये आपके रिश्तेदारों को फ़ोन करना शुरू कर देते हैं. ये उन्हें कहते हैं कि आपने उनका रेफ़रेंस दिया है. ये आपके रिश्तेदारों से कहते हैं कि अब आपको यह लोन चुकाना होगा.

इसके साथ ही लोन लेने वाले और उसके रिश्तेदारों के बीच संबंध या तो ख़त्म हो जाते हैं या फिर ख़राब हो जाते हैं. ये एप्स आपके कई रिश्तेदारों को इस तरह से फ़ोन करते हैं.

अंतिम चरण में ये लोन लेते वक़्त आपकी दी गई तस्वीरों का इस्तेमाल करने लगते हैं. ये व्हॉट्सएप ग्रुप्स पर आपकी तस्वीरें डालने लगते हैं.

ये उधार लेने वाले के दोस्तों और रिश्तेदारों का एक ग्रुप बनाते हैं और उसमें उधार लेने वाले की फ़ोटो डालते हैं और उसका कैप्शन देते हैं, “फ़लां शख्स धोखेबाज़ है.” या “ये शख्स पैसे चुकाने से बच रहा है.”

यह प्रताड़ना यहीं ख़त्म नहीं होती है. इनमें कहा जाता है कि आप सब सौ-सौ रुपये इकट्ठे कीजिए और इनका लोन चुकाइए. ये सब बेहद बुरे अंदाज में कहा जाता है.

कविता कहती हैं, “हम ये नहीं कह रहे कि हम लोन नहीं चुकाएंगे. मैं एक छोटा कारोबार चलाती हूं. मुझे कोरोना के वक़्त पर पैसे उधार लेने पड़ गए. लेकिन, वे किसी भी बात को नहीं सुनना चाहते. यहां कि मैं ये भी कहूं कि मुझे बैंक जाने के लिए कम से कम एक घंटे का वक़्त दे दीजिए.”

वे चीख़ने लगते हैं, “आप एक महिला नहीं हैं? आपके बच्चे नहीं हैं? ऐसा कोई नहीं है जो बैंक में पैसे जमा कर सके?”

कविता कहती हैं, “वे बेहद गंदी गालियां देने लगते हैं.”

 

इन्हें नंबर कहां से मिलते हैं?

हर स्मार्टफ़ोन में अगर हम कोई नया एप इंस्टॉल करते हैं तो हमसे कुछ मंज़ूरियां मांगी जाती हैं. आमतौर पर एप इंस्टॉल करते वक़्त हम इन मंज़ूरियों का ब्योरा पढ़े बग़ैर ओके पर क्लिक कर देते हैं और सभी तरह की मंज़ूरियों के लिए हामी भर देते हैं.

इन मंज़ूरियों को देने का मतलब यह है कि एप आपकी सभी फ़ोटोज़ और कॉन्टैक्ट नंबरों तक पहुँच सकता है और उनका मनचाहा इस्तेमाल कर सकता है.

इन एप्स से लोन वाले एक बटन को दबाते हैं और इसके साथ ही एप को उनके सभी कॉन्टैक्ट नंबर निकालने की ताक़त मिल जाती है.

ओके बटन के दबने के साथ ही उधार लेने वाले के सभी कॉन्टैक्ट्स एप्स चलाने वालों के पास पहुँच जाते हैं.

उधार लेने वाले को यह पता भी नहीं चलता है कि लोन लेने पर उसके फ़ोन के सभी संपर्क एप्स वालों के हाथ चले जाएंगे.

कविता बताती हैं, “जब मेरे रिश्तेदारों को फ़ोन गए तो मैं हैरान रह गई. लेकिन, जब मैंने इस पर विचार किया तो मुझे पता चला कि एप को इंस्टॉल करते वक़्त उन्होंने ये सारे नंबर ले लिए थे. अब पूरे परिवार ने मुझसे दूरी बना ली है.”

यहां तक कि अब पुलिस भी इस बात की जाँच कर रही है कि इन एप्स के पास लोगों को बांटने के लिए इतना पैसा कहां से आता है.

लेकिन, अभी तक पुलिस केवल ऐसे लोगों का पता कर पाई है जो कि कॉल सेंटरों से लोगों को फ़ोन करते हैं और धमकाते हैं. इस मामले में आगे की जाँच जारी है.

क्या क़र्ज़ चुकाना ग़लत है?

जब हम कोई क़र्ज़ लेते हैं तो हमें वह पैसा चुकाना पड़ता है. लेकिन, इस भुगतान का एक तरीक़ा होता है, इसमें सरकार के तय किए गए नियमों को मानना होता है. इस तरह के क़र्ज़ों में ब्याज की दरें तार्किक होनी चाहिए.

इन क़र्ज़ देने वालों को बताना होता है कि वे किस चीज़ के लिए कितना चार्ज ले रहे हैं. ये चार्ज एक दायरे में होने चाहिए.

इन संस्थानों को लोगों को पैसे चुकाने के लिए वक़्त देना चाहिए. लेकिन, ये संस्थान इस तरह के किसी रेगुलेशन को नहीं मानते हैं. यही असली समस्या है.

इन एप्स का एक दूसरा पहलू भी है. गुज़रे वक़्त में ऐसा हुआ है कि कुछ लोगों ने इन एप्स से पैसे उधार लिए और क्रेडिट कार्ड की ब्याज दर के मुताबिक़ पैसे लौटा दिए.

इन एप्स से पैसे उधार ले चुके एक शख्स ने बताया कि उन्होंने इतने बुरे तरीक़े से बर्ताव नहीं किया था.

सैकड़ों की संख्या में मौजूद क़र्ज़ देने वाली एजेंसियों में ऐसी चुनिंदा ही हैं जो कि रेगुलेशंस के मुताबिक़ चल रही हैं. एक पुलिस अधिकारी ने बीबीसी को बताया कि बाक़ी की एजेंसियां लोगों को प्रताड़ित करती हैं और उनका मक़सद लोगों को लूटना होता है.

क़ानून क्या कहता है?
भारत में बैंकों को रेगुलेट करने वाले रिज़र्व बैंक (आरबीआई) ने भी इन एप्स के लिए कोई रेगुलेशंस नहीं बनाए हैं.

ऐसे में पुलिस पहले से मौजूद क़ानूनों के आधार पर इन एप्स के ख़िलाफ़ कार्रवाई करने की कोशिश कर रही है. इन क़ानूनों में बैंकिंग रेगुलेशंस, आईपीसी, आईटी क़ानून शामिल हैं.

तेलंगाना की साइबराबाद पुलिस इसकी जाँच कर रही है. अब तक वे दर्जनों लोगों की पूछताछ कर चुके हैं.

पुलिस ने आंध्र प्रदेश में भी मामले दर्ज किए हैं. आंध्र प्रदेश की पुलिस ने एक स्पेशल एनओसी भी जारी की है.

चीन की भूमिका
इस बारे में चीज़ें स्पष्ट होना अभी बाक़ी है कि इन एप्स में चीनी संस्थानों की क्या भूमिका है.

कुछ लोगों का कहना है कि लोग चीन में मौजूद सर्वर्स का इस्तेमाल कर रहे हैं, लेकिन कुछ लोगों का यहां तक कहना है कि इन एप्स में पैसा भी चीनी वित्तीय संस्थान लगा रहे हैं.

पुलिस इसकी जाँच कर रही है. 25 दिसंबर को साइबराबाद पुलिस ने एक चीनी नागरिक समेत चार लोगों को लोन देने वाले एप्स के ख़िलाफ़ मामले में गिरफ़्तार किया है.

साइबराबाद पुलिस ने जानकारी दी है कि उन्होंने क्यूबवो टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड के हेड को अरेस्ट किया है जो कि एक चीनी नागरिक है. इसके अलावा तीन अन्य लोगों को भी अरेस्ट किया गया है.

इस ऑर्गनाइजेशन को दिल्ली में हेड ऑफ़िस के तौर पर रजिस्टर्ड किया गया है और इसका नाम स्काईलाइन इनोवेशंस टेक्नोलॉजीज रखा गया था.

इस कंपनी में जिक्सिया झेंग, उमापति (अजय) डायरेक्टर के तौर पर काम कर रहे थे.

इस कंपनी ने 11 लोन एप्स डिवेलप किए हैं. यह कंपनी बड़े पैमाने पर पैसे वसूल रही है और इसके काम करने के तरीक़ों में धमकियां देना शामिल रहा है. मौजूदा वक़्त में कंपनी के प्रतिनिधि पुलिस कस्टडी में हैं.


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adminJanuary 27, 20216min5860

26 जनवरी 2021 को देश 72वां गणतंत्र दिवस मना रहा है. इससे एक दिन पहले यानी 25 जनवरी को इस बार के पद्म पुरस्कारों का ऐलान किया गया. कुल 119 लोगों को इस बार पद्म सम्मान मिल रहा है. सात लोगों को पद्म विभूषण, 10 लोगों को पद्म भूषण और 102 लोगों को पद्मश्री. इनके बारे में जानते हैं.

 

पद्म विभूषण

 

#1 कौन हैं – शिंजो आबे

कहां से हैं – जापान

किस क्षेत्र में काम – पब्लिक सर्विस

जापान के पूर्व प्रधानमंत्री हैं. तबीयत नासाज़ रहने की वजह से पिछले साल पद से इस्तीफा दे दिया था. उनके कार्यकाल में भारत-जापान के संबंध बेहतर हुए. आबे जापान के सबसे लंबे कार्यकाल वाले पीएम रहे.

शिंजो आबे (फाइल फोटो- PTI)

 

#2 कौन हैं – एसपी बालासुब्रमण्यम (मरणोपरांत)

कहां से हैं – तमिलनाडु

किस क्षेत्र में काम – कला

मशहूर सिंगर-कंपोज़र. हिंदी, तमिल, तेलुगू, कन्नड़, मलयालय भाषाओं में करीब 40 हज़ार गाने गाए. 40 से ज़्यादा फिल्मों में म्यूज़िक कंपोज़र रहे. 2001 में पद्मश्री और 2011 में पद्मभूषण भी प्राप्त कर चुके हैं.

बालासुब्रमण्यम. (फाइल फोटो- PTI)

 

#3 कौन हैं – डॉ. बेल्ले मोनप्पा हेगड़े

कहां से हैं – तमिलनाडु

किस क्षेत्र में काम – हेल्थ

हृदय रोग विशेषज्ञ, शिक्षाविद, मोटिवेशनल स्पीकर और लेखक. डॉ. बेल्ले मोनप्पा हेगड़े ने मेडिकल प्रैक्टिस पर कई किताबें भी लिखी हैं. 2010 में वे पद्म भूषण पुरस्कार से भी नवाज़े जा चुके हैं.

2010 में तत्कालीन राष्ट्रपति से पद्म पुरस्कार लेते बेल्ले मोनप्पा.

 

#4 कौन हैं – नरिंदर सिंह कपानी

कहां से हैं – अमेरिका

किस क्षेत्र में काम – साइंस एंड आईटी

नरिंदर सिंह कपानी भौतिक विज्ञान के क्षेत्र से जुड़े हैं. भारतीय मूल के अमेरिकी वैज्ञानिक हैं. फोर्ब्स मैग्ज़ीन ने उन्हें बिज़नेसमैन ऑफ द सेंचुरी एडिशन में नॉमिनेट किया था. ‘फाइबर ऑप्टिक्स’ शब्द ईजाद किया था.

नरिंदर कपानी. (फाइल फोटो- sikhfoundation.org)

 

#5 कौन हैं – बीबी लाल

कहां से हैं – दिल्ली

किस क्षेत्र में काम – पुरातत्व

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के महानिदेशक रह चुके हैं. ‘राम, उनकी ऐतिहासिकता, मंदिर और सेतु: साहित्य, पुरातत्व और अन्य विज्ञान’ नाम की किताब भी लिखी है. इसी किताब में अयोध्या के विवादित ढांचे के नीचे मंदिर होने की बात कही गई थी. पद्म भूषण भी दिया जा चुका है.

बीबी लाल (दाएं) (फाइल फोटो- PIB)

 

#6 कौन हैं – मौलाना वहीदुद्दीन खान

कहां से हैं – दिल्ली

किस क्षेत्र में काम – आध्यात्मिकता

प्रसिद्ध इस्लामिक विद्वान और पीस एक्टिविस्ट. विघटन से पहले रशिया जब सोवियत संघ हुआ करता था, उस दौर में वहां के राष्ट्रपति मिखाइल गोर्बाचेव ने मौलाना खान को डेमिर्गुस पीस इंटरनेशनल अवॉर्ड से सम्मानित किया था. 2000 में उन्हें पद्म भूषण सम्मान भी मिल चुका है.

 

#7 कौन हैं – सुदर्शन साहू

कहां से हैं –ओडिशा

किस क्षेत्र में काम – आर्ट

ओडिशा के प्रसिद्ध मूर्तिकार. सुदर्शन साहू पौराणिक कथाओं को, किरदारों को रेत की मदद से खूबसूरत मूर्तियों की शक्ल में ढालने में माहिर हैं. पद्म श्री से भी सम्मानित किए जा चुके हैं.

सुदर्शन साहू. (फाइल फोटो- odishabulletin.com)

पद्म भूषण

#1 कौन हैं – कृष्णन नायर शांताकुमारी

कहां से हैं – केरल

किस क्षेत्र में काम – आर्ट्स

कृष्णन नायर शांताकुमारी मशहूर गायिका और म्यूज़ीशियन हैं. उन्होंने करीब 25 हज़ार गाने रिकॉर्ड किए हैं. वो भी 10 से ज़्यादा भारतीय भाषाओं में और पांच से ज़्यादा विदेशी भाषाओं में. छह बार नेशनल फिल्म अवॉर्ड, आठ बार फिल्मफेयर-साउथ मिल चुका है.

 

 

#2 कौन हैं – तरुण गोगोई (मरणोपरांत)

कहां से हैं – असम

किस क्षेत्र में काम – पब्लिक अफेयर

तीन बार असम के मुख्यमंत्री रहे, छह बार सांसद रहे कांग्रेस नेता तरुण गोगोई का नवंबर-2020 में निधन हो गया. मुख्यमंत्री के रूप में उनके कार्यकाल को राज्य की राजकोषीय स्थिति सुधारने, उग्रवाद को कम करने के लिए याद किया जाता है.

 

तरुण गोगोई. (फाइल फोटो)

 

 

कौन हैं – चंद्रशेखर कंबारा

कहां से हैं – कर्नाटक

किस क्षेत्र में काम –शिक्षा

प्रसिद्ध कन्नड़ लेखक हैं. साहित्य अकादमी के अध्यक्ष रहे चंद्रशेखर कंबारा ने शिक्षा और साहित्य के क्षेत्र में काफी काम किया है. ज्ञानपीठ पुरस्कार भी जीत चुके हैं.

 

 

कौन हैं – सुमित्रा महाजन

कहां से हैं – मध्य प्रदेश

किस क्षेत्र में काम –पब्लिक अफेयर

लोकसभा स्पीकर की कुर्सी पर बैठने वाली देश की दूसरी महिला. पहली मीरा कुमार थीं. सुमित्रा महाजन को लोग ‘ताई’ कहकर सम्मानित करते हैं. 2014 से 2019 तक लोकसभा स्पीकर रहीं. इंदौर से लगातार आठ बार सांसद भी रही हैं.

सुमित्रा महाजन. (फोटो- PTI)

 

 

कौन हैं – नृपेंद्र मिश्रा

कहां से हैं – उत्तर प्रदेश

किस क्षेत्र में काम – सिविल सर्विसेज़

नृपेंद्र मिश्रा 1967 बैच के रिटायर्ड आईएएस अधिकारी (उत्तर प्रदेश कैडर) हैं. मोदी सरकार के पहले कार्यकाल के दौरान नृपेंद्र मिश्रा को पीएम मोदी के प्रिंसिपल सेक्रेटरी नियुक्त किया गया था. तब इस पर काफी बवाल हुआ था. 2019 में उन्हें फिर ये ज़िम्मेदारी दी गई.

PM मोदी के साथ नृपेंद्र मिश्रा. (फाइल फोटो)

 

कौन हैं – रामविलास पासवान (मरणोपरांत)

कहां से हैं – बिहार

किस क्षेत्र में काम – पब्लिक सर्विस

बिहार के बड़े नेताओं में शुमार, लोक जनशक्ति पार्टी के संस्थापक राम विलास पासवान नौ बार लोकसभा और दो बार राज्य सभा सांसद रहे. पासवान के नाम एक अनूठा रिकॉर्ड भी है- छह प्रधानमंत्रियों के साथ काम करने का. मोदी सरकार में भी मंत्री रहे.

राम विलास पासवान. (फाइल फोटो)

 

कौन हैं – केशुभाई पटेल (मरणोपरांत)

कहां से हैं – गुजरात

किस क्षेत्र में काम – पब्लिक सर्विस

मार्च 1995 से अक्टूबर 1995 तक गुजरात के मुख्यमंत्री रहे. प्रदेश में भाजपा के बड़े नेताओं में शुमार रहे. 2012 में भाजपा से इस्तीफा देकर अपनी नई पार्टी गुजरात परिवर्तन पार्टी बनाई. हालांकि बाद में पार्टी का भाजपा में विलय कर दिया. इमरजेंसी के वक्त जेल भी गए थे.

 

केशुभाई पटेल. (फाइल फोटो)

 

कौन हैं –कल्बे सादिक

कहां से हैं – उत्तर प्रदेश

किस क्षेत्र में काम – धर्म

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) के उपाध्यक्ष रहे कल्बे सादिक का नवंबर-2020 में निधन हो गया था. अपनी प्रोग्रेसिव सोच और शांति के लिए किए गए कामों के लिए कल्बे सादिक को याद किया जाता है. मुस्लिम आरक्षण तक का उन्होंने विरोध कर दिया था.

 

कल्बे सादिक. (फाइल फोटो)

 

 

कौन हैं – रजनीकांत देवीदास

कहां से हैं –महाराष्ट्र

किस क्षेत्र में काम – ट्रेड एंड इंडस्ट्री

1969 में गुजरात के वापी शहर में यूनाइटेड फॉस्फोरस लिमिटेड (UPL) नाम की कंपनी स्थापित की थी. रजनीकांत ने यहां न सिर्फ फैक्ट्री लगाई, बल्कि शहर की बसाहट में भी योगदान दिया. वापी की गिनती अब गुजरात के अच्छे शहरों में होती है.

 

कौन हैं – तरलोचन सिंह

कहां से हैं – हरियाणा

किस क्षेत्र में काम – पब्लिक सर्विस

2004 से 2010 तक हरियाणा से राज्‍यसभा सदस्‍य रहे. राजनीति से इतर सिख धर्म की शिक्षाओं को फैलाने के लिए भी काम किया. 1983 से 1987 तक तत्कालीन राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह के प्रेस सचिव भी रहे. 2003 से 2006 तक राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के चेयरमैन रहे.

 

तरलोचन सिंह. (फाइल फोटो)

इसके अलावा जिन 102 लोगों को पद्मश्री सम्मान मिला है, उनमें ये नाम शामिल हैं – स्पेन में लिट्रेचर-एजुकेशन के लिए काम करने वाले फादर वॉल्स (मरणोपरांत), इसी क्षेत्र में मध्य प्रदेश में काम करने वाले कपिल तिवारी, बिहार से मृदुला सिन्हा, असम से इमरान शाह, मेडिसिन के क्षेत्र में अशोक कुमार साहू, धनंजय दिवाकर, कला के क्षेत्र में पूर्णमासी जानी.


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adminJanuary 27, 20211min4240

केंद्र सरकार ने मई 2016 में पुराने वाहनों को सड़क से हटाने के लिए  Voluntary Vehicle Fleet Modernisation Programme का मसौदा रखा था. सरकार का अनुमान हैकि इस नीति के सबके लिए आने से सड़कों से 15 साल पुराने करीब 2.8 करोड़ वाहन हटाने में मदद मिलेगी.

हाल में सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने सरकारी वाहनों के लिए 15 साल पुराने वाहनों को कबाड़ (स्क्रैप करने) में भेजने की नीति को मंजूर कर दिया. मंत्रालय के इस फैसले से केंद्र, राज्य सरकारों और पब्लिक सेक्टर की कंपनियों में इस्तेमाल होने वाले 15 साल पुराने वाहनों को हटाना होगा. हालांकि इस नीति का पालन अप्रैल 2022 से होना है. लेकिन वाहन क्षेत्र इसे लेकर काफी उत्साहित है, ऐसे में संभावना है कि बजट में इस नीति पर बात हो और जल्द इसे सबके लिए लागू करने को लेकर कोई घोषणा हो.

कोरोना काल के बाद भारत सरकार का जोर ‘आत्मनिर्भर भारत’ बनाने पर है. इसलिए सरकार मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर पर ध्यान दे रही है. वाहन, इलेक्ट्रिक समेत कई क्षेत्रों में विनिर्माण बढ़ावा देने के लिए सरकार ने हाल में PLI योजना शुरू की है. ऐसे में यदि पुराने वाहनों को कबाड़ में भेजने की नीति सबके लिए लाई जाती है, तो नए वाहनों की मांग बढ़ेगी और कंपनियों का उत्पादन भी बढ़ेगा.

सरकार ने 2030 तक देश को पूरी तरह से ई-मोबिलिटी पर शिफ्ट करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है. इसका मकसद देश के कच्चा तेल आयात बिल को कम करना है. आयात बिल घटने से सरकार की राजकोषीय हालत भी बेहतर होगी और सरकार अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए ई-मोबिलिटी इन्फ्रास्ट्रक्चर बढ़ाने पर जोर दे सकेगी. (फाइल फोटो)

सर्दियों में दिल्ली समेत उत्तर भारत के कई शहर भीषण प्रदूषण की चपेट में रहते हैं. बच्चों के स्कूल तक बंद करने पड़ते हैं. कई लोगों को दमा और अन्य सांस की बीमारियों का सामना करना पड़ता है. आईआईटी बॉम्बे के एक अध्ययन के मुताबिक कुल वायु प्रदूषण में लगभग 70 प्रतिशत हिस्सेदारी वाहनों से होने वाले प्रदूषण की है. ऐसे में पुराने वाहनों को कबाड़ में भेजने पर वायु प्रदूषण को कम करने में मदद मिलेगी.

पुराने वाहन को स्क्रैप करने की नीति से अन्य सेक्टर को भी फायदा होगा, क्योंकि नए वाहनों की मांग और उत्पादन बढ़ने के लिए कच्चे माल की जरूरत होगी. ऐसे में स्टील, एल्युमीनियम और रबर सेक्टर को लाभ होगा. इस क्षेत्र में भी नए रोजगार का विकास होगा और अंतत: अर्थव्यवस्था का चक्का तेजी से घूमने लगेगा.

कोरोना काल से पहले भी देश की अर्थव्यवस्था में नरमी का रुख देखा जा रहा था. कोरोना महामारी के दौरान अप्रैल-जून अवधि में देश की जीडीपी लगभग 24 प्रतिशत तक गिर गई. ऐसे में सरकार के ऊपर अर्थव्यवस्था गति देने, राजकोषीय, रोजगार की स्थिति को बेहतर करने का दबाव है. साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आने वाले पांच वर्षों को देश की अर्थव्यवस्था को 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य रखा है. ऐसे में वाहन क्षेत्र ज्यादा लोगों को रोजगार, विनिर्माण में योगदान और सरकार के लिए एकजुट राजस्व जुटाने का माध्यम है. पुराने वाहनों को हटाने से जो नए वाहनों की मांग बढ़ेगी, उससे रोजगार और लोगों की आय बेहतर होगी साथ ही कंपनियों का उत्पादन बढ़ने से सरकार का जीएसटी संग्रह भी बढ़ेगा.


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adminJanuary 6, 20211min4900

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने अपना भारत दौरा रद्द कर दिया है. इस साल गणतंत्र दिवस के अवसर पर बोरिस जॉनसन मुख्य अतिथि थे. बोरिस ने कोरोना के नए स्ट्रेन के चलते भारत दौरा रद्द किया है. बोरिस के इस फैसले के बाद जानकारी मिली है कि इस बार के गणतंत्र दिवस समारोह में किसी भी मुख्य अतिथि को नहीं बुलाया जाएगा.

यह चौथा ऐसा मौका होगा जब भारतीय गणतंत्र दिवस समारोह में कोई भी चीफ गेस्ट नहीं होगा. इससे पहले 1952, 1953 और 1966 में ऐसा हो चुका है. वहीं, कई बार ऐसे मौके भी आए जब देश के गणतंत्र दिवस समारोह में दो-दो अतिथि भी शामिल हुए. साल 1956, 1968 और 1974 में दो-दो मुख्य अतिथि शामिल हुए.

 

जब 10 देश हुए शामिल

साल 2018 में 10 एशियाई देशों के प्रमुख गेस्ट के रूप में भारतीय गणतंत्र दिवस समारोह में शामिल हुए थे. यह पहला मौका था जब इतने देशों के मुखिया 26 जनवरी के परेड में शामिल हुए थे.

बोरिस ने अपने फैसले पर खेद भी जताया है. उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी से बात की और भारत नहीं आ पाने के लिए खेद व्यक्त किया. पीएम से बात करते हुए जॉनसन ने कहा कि जिस गति से ब्रिटेन में नया कोरोना वायरस फैल रहा है, उनके लिए ब्रिटेन में रहना महत्वपूर्ण है, ताकि वह वायरस की घरेलू प्रतिक्रिया पर ध्यान केंद्रित कर सकें.

 

हालात सुधरने पर करेंगे भारत का दौरा

26 जनवरी को भारत के गणतंत्र दिवस समारोह में ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन को बतौर मुख्य अतिथि शामिल होना था, लेकिन उनका कार्यक्रम अब रद्द हो गया है. दरअसल कोरोना के नए स्ट्रेन के कहर के चलते ब्रिटेन में फिर से टोटल लॉकडाउन लगा दिया गया है. बोरिस जॉनसन ने उम्मीद जताई है कि हालात सुधरने पर वो इसी साल भारत का दौरा करेंगे.

ब्रिटिश पीएम बोरिस जॉनसन को भारत सरकार ने 26 जनवरी के मौके पर बतौर मुख्य अतिथि शामिल होने का न्यौता दिया था. इस पर ब्रिटेन के विदेश मंत्रालय ने अपनी सहमति भी जता दी थी, लेकिन अचानक बदले हालात के मद्देनजर उन्हें अपना भारत दौरा रद्द करना पड़ा है. पीएम मोदी ने भी ब्रिटेन में कोरोना संक्रमण के हालात पर चिंता जताते हुए उम्मीद जताई है कि स्थिति जल्द सुधरेगी.

 

सादगी और कोरोना प्रोटोकॉल के साथ होगा समारोह

आजतक को सूत्रों से जानकारी मिली है कि बदली हुई परिस्थितियों में गणतंत्र दिवस के मौके पर कोई विदेशी चीफ गेस्ट नहीं बुलाया जाएगा. कोरोना संक्रमण को देखते हुए 26 जनवरी का कार्यक्रम भी सादगी और कोरोना प्रोटोकॉल के साथ ही मनाया जाएगा.

कोरोना का नया स्ट्रेन भारत में भी चिंता बढ़ा रहा है. लेकिन ब्रिटेन में स्थिति बहुत गंभीर हो चली है. रोजाना संक्रमण के आंकड़े और मौत की संख्या पिछले रिकॉर्ड से काफी ऊपर निकल चुकी है. यही वजह है वैक्सीनेशन शुरू होने के बावजूद ब्रिटेन में तीसरी बार लॉकडाउन लगाना पड़ा है.



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