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adminNovember 23, 202010min4200

एक साइकिल. कहीं डंडे वाली तो कहीं बिना डंडे वाली. एक घंटी, कैरियर और सुंदर सी टोकरी लगी साइकिल… हो सकता है आपका बचपन इसकी सवारी के साथ बीता हो.

और बहुत मुमकिन है कि अब आपने ख़ुद को मोटरगाड़ी या बाइक तक अपग्रेड कर लिया हो और साइकिल से आपका शायद ही वास्ता पड़ता हो.

पर लॉकडाउन के दौरान बिहार की 15 बरस की एक लड़की ज्योति साधारण-सी साइकिल चलाकर 1200 किलोमीटर, गुरुग्राम से बिहार के अपने पुश्तैनी गाँव पहुँची थी.

निर्देशक एम. गनी की नई फ़िल्म ‘मट्टो की साइकिल’ ऐसे ही एक मज़दूर मट्टो (प्रकाश झा) और उसकी साइकिल की कहानी है.

फ़िल्म का एक सीन है जहाँ टूटी साइकिल की वजह से मट्टो रोज़ मज़दूरी पर देरी से आता है तो ठेकेदार पूछता है- “क्यों भई मट्टो जे कोई टाइम है आने का?”

तो मट्टो बड़ी लाचारी से जवाब देता है- “मेरो साइकिल में रोज़ कुछु न कुछु टेंटो लग जाए ठेकेदार.”

मट्टो आज का वो मज़दूर है जो कोरोना वाले लॉकडाउन में नहीं बल्कि ज़िंदगी नाम के परमानेंट लॉकडाउन में फँसा है जहाँ उसकी ‘नीची’ जाति, उसकी ग़रीबी, सब जैसे वायरस बन उसे ज़हनी और जिस्मानी तौर पर बीमार कर रहे हैं.

दक्षिण कोरिया में हुए बुसान फ़िल्म फ़ेस्टिवल से चर्चा में आई फ़िल्म मट्टो की साइकिल में जाने-माने निर्देशक प्रकाश झा लीड रोल में हैं.

 

समाज पर प्रहार है फ़िल्म

कोरोना लॉकडाउन में इस साल मज़ूदरों की जो हालत हुई, फ़िल्म उससे पहले बननी शुरू हो चुकी थी. तो इस विषय पर एम. गनी ने फ़िल्म बनाने की क्यों सोची, इसका जवाब उनकी निजी ज़िंदगी में रचा बसा है.

बीबीसी से बातचीत में उन्होंने बताया, “मट्टो जो इस फ़िल्म का मुख्य किरदार है, एक तरह से मेरे पिता का अक्स उनमें है. उत्तर प्रदेश में मेरा अपना परिवार भी ऐसा ही था, मज़दूरी की तलाश में परिवार घूमता था. इस कहानी का एक-एक किरदार मेरा देखा और जिया हुआ है.”

“ये कहानी हमेशा मेरे इर्द-गिर्द थी, हमने तो कई असल किरदारों के नाम तक नहीं बदले हैं. ये बरसों पहले से तय था कि मैं इस पर कुछ करूँगा.”

फ़िल्म देखकर आप महसूस करेंगे कि कहानी भले ही मट्टो नाम के एक मज़ूदर की है पर इस बहाने ये फ़िल्म समाज पर तीखा प्रहार भी है जो मेहनत-मजूरी करने वाले इस तबके को या तो हिकारत की नज़र से देखता है या उससे भी बदतर. ये सारे लोग हमारे बीच होते हुए भी ओझल ही रहते हैं.

मट्टो का रोल करने वाले प्रकाश झा इसी बात को आगे बढ़ाते हुए कहते हैं, “हम विकास की राह पर चल तो पड़े हैं लेकिन हमारी सामाजिक मानसिकता नहीं बदल पा रही. वो (मज़दूर) हमारे आलीशान घर बनाते हैं, और ख़ुद बिना आशियाने के रहते हैं और पैदल सड़कों पर चलने को मजबूर हैं. एक पूरा तबका है जिसका कोई मोल नहीं है समाज में.”

 

मट्टो की साइकिल

 

“मुझे इस फ़िल्म की कहानी ने बहुत प्रभावित किया. एक मज़दूर और उसकी साइकिल की कहानी- वो साइकिल जिसकी उम्र उसकी बेटी की उम्र से बस एक साल ज़्यादा है.”

वहीं निर्देशक एम. गनी मानते हैं, “दरअसल हमने अपने आसपास के मट्टो को देखना कम कर दिया है. मैं ख़ुद भी सोचने लगा था कि अब लोगों ने साइकिल चलाना कम कर दिया है. मैं कई दिन तक शहरों के बाहरी इलाक़ों में गया और मज़दूरों को देखता था, मज़दूर तो आज भी साइकिल पर ही चलते हैं. इस साल तो हमने देखा ही कि मज़दूर कैसे साइकिल, या पैदल चलकर लॉकडाउन में घर पहुँचे.”

 

मट्टो की साइकिल

 

ज़रूरतें इंसान को पास लाती हैं

मट्टो और उसकी साइकिल की कहानी के ज़रिए ये फ़िल्म जात-पात, स्टेटस और महिलाओं से जुड़े मुद्दों को भी छूकर जाती है.

फ़िल्म में एक वकील है जो मट्टो को अक्सर उसके दोस्त कल्लू पंचरवाले की दुकान पर मिल जाता है. ये किरदार निर्देशक के भाई के दोस्त की निजी ज़िंदगी पर आधारित है.

फ़िल्म में वकील होते हुए भी उसे अक्सर केस नहीं मिलता. पूछने पर वो कहता है, “हमारी नेमप्लेट ही खोटी है. बस सुअरन के पीछे घूमते रहो, गटर में घुसते रहो तो ही दुनिया ख़ुश रहती है हमसे.”

 

मट्टो की साइकिल

 

या फिर वो कार वाला अनाम शख़्स जो ख़ुद ग़लत तरीक़े से गाड़ी लगाता है और जब मट्टो की साइकिल से उसकी टक्कर हो जाती है तो उसे बड़े रुआब से आधी अंग्रेज़ी में बोलता है कि ये टूट जाती तो इसका ख़र्च कौन ‘बियर’ करता?

निर्देशक एम. गनी कहते हैं, “फ़िल्म में उस कार वाले के ग़ुस्से की एक वजह है कि वो प्रिविलेज्ड है, हमें लगता है कि हम पैसे और पावर वाले हैं तो हम ऐसे ही बर्ताव कर सकते हैं.”

फ़िल्म की बात करें तो ग्रामीण परिवेश वाले एक देहाती मज़दूर के रोल में प्रकाश झा काफ़ी सहज लगते हैं- चाहे उनकी बोली हो, हावभाव या वेशभूषा.

निर्देशक गनी इसका श्रेय प्रकाश झा को ही देते हैं, “प्रकाश जी ने ख़ुद को रोल के लिए तैयार किया. वो मज़दूरों के बीच जाकर रहे और लेबर चौक पर जाकर बैठा करते थे. सर पर ईंटा लेकर चलने वाले सारे शॉट उनके ख़ुद के हैं. उन दिनों वो बिना एसी के रहते थे.”

वैसे फ़िल्म में तमाम नाउम्मीदियों के बीच उम्मीद की एक किरण भी दिखती है कैसे ग़रीब और शोषित एक-दूसरे के साथ खड़े हुए नज़र आते हैं.

ख़ुद हाशिए पर होते हुए भी मट्टो का साथ अगर कोई देता है तो उसका मुसलमान दोस्त कल्लू पंचरवाला और दलित वकील.

एम. गनी मानते हैं कि ज़रूरतें लोगों को क़रीब लाती हैं और अगर हमारी ज़रूरतें, हमारी दिक़्क़ते एक जैसी हों तो एक-दूसरे को समझना आसान होता है. दरअसल साम्यावादी होना इंसान के फ़ेवर में चला जाता है- मुस्कुराते हुए वो अपनी राय रखते हैं.

 

ज़िन्दगी जीने का नुस्खा देता दिलदार कल्लू

मथुरा के एक गाँव में बसी इस फ़िल्म की एक मज़बूत कड़ी है इसकी स्थानीय बोली. भाषा की ऐसी विविधिता मेनस्ट्रीम फ़िल्मों में कम देखने को मिलती है.

जब ज़िंदगी से निराश मट्टो अपने दोस्त कल्लू से कहता है कि देखते-देखते 20 साल निकल गए, कछु नहीं कर पाए यार… तो ज़िंदादिल कल्लू उसे दिलासा देता है- “का मातम मना रहे हो, हसबे-बोलबे में ही ज़िंदगी का सार है, और मेरो जैसा सेलिब्रिटी तेरो यार है.”

ये मीठी बोली और मीठा अंदाज़ सुनकर ज़रूर आपके चेहरे पर भी मुस्कान आ जाएगी.

फ़िल्म लॉकडाउन से पहले बनी है लेकिन इस साल मीलों पैदल चलते मज़दूरों की दुर्दशा के साए में ये कहीं ज़्यादा प्रासंगिक मालूम होती है और एम. गनी ने इसे काफ़ी संवेदनशीलता से बनाया भी है.

फ़िल्म मट्टो की साइकिल देखने के बाद पता नहीं क्यों मैंने सबसे पहले उस 15 साल की बच्ची ज्योति और उसके पिता को फ़ोन लगाया जो दिल्ली से बिहार साइकिल चलाकर आई थी.

बिहार के अपने गाँव से ज्योति के पिता मोहन पासवान ने बताया कि अभी उनके पास कुछ काम नहीं है और वो इंतज़ार कर रहे हैं कि चुनाव के बाद उनकी सुध लेने वाला कोई होगा.

बिल्कुल वैसी ही उम्मीद जैसी फ़िल्म में मट्टो को अपने इलाक़े से चुनाव लड़ने वाले नेता से थी. लगा जैसे फ़िल्मी कहानी का मट्टो और हक़ीक़त का मोहन आमने-सामने आकर खड़े हो गए हों.

या प्रकाश झा की नज़रों से देखें तो वो कहते हैं कि उनकी 1985 की फ़िल्म का बंधुआ मज़दूर संजीवन राम और आज का मट्टो जैसे अब भी एक ही मुहाने पर खड़े हैं.

और सरहदों को पार कर अगर आप दुनिया का सिनेमा देखेंगे तो मट्टो आपको वहाँ भी नज़र आएगा.

 

नाउम्मीदी में उम्मीद की किरण

1948 में इटली की फ़िल्म आई थी ‘बाइसिकल थीफ़्स’ जिसे दुनिया की सर्वश्रेष्ठ फ़िल्मों में गिना जाता है. फ़िल्म में मट्टो की ही तरह एंटोनियो नाम के ग़रीब मज़दूर को नौकरी पर जाने के लिए हर हाल में एक साइकिल की ज़रूरत है क्योंकि उसकी साइकिल चोरी हो गई है वरना वो भूखा मरेगा.

लेकिन ग़रीबी की वजह से उसे मट्टो की तरह हिकारत ही मिलती है जब तक कि वो मजबूरीवश एक साइकिल चोर नहीं बन जाता. तब भी उसे गुनहगार न समझने वाला उसका छोटा-सा बेटा ही है, जैसे मट्टो के पास कल्लूपंचर वाला था.

तो दुनिया के ऐसे असली मट्टो से फ़िल्म के निर्देशक क्या कहना चाहेंगे?

अपनी बात निर्देशक गनी कुछ यूँ ख़त्म करते हैं, “मैं मज़दूरों को कुछ कहना नहीं चाहता बल्कि उन लोगों की बात सुनना चाहता हूँ जिन्हें इस पर बोलना चाहिए था. अगर एक बच्ची साइकिल चलाकर बिहार पहुँची है तो ये कोई फ़ख़्र की बात नहीं है. पर एक उम्मीद की किरण मुझे दिखती है.”

“जब मज़ूदर दिक़्क़त में थे, कितने लोगों ने इनके दर्द को समझा. संवेदनशीलता मरी नहीं है अब तक. ये बात मुझे उम्मीद देती है.”

 


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adminNovember 23, 20201min4900

आयुर्वेद में पोस्टग्रेजुएट करने वाले डॉक्टर्स भी जनरल सर्जरी कर सकेंगे. इसमें ऑर्थोपेडिक सर्जरी के साथ आंख, कान, गले और दांतों से जुड़ी सर्जरी शामिल है. सरकार ने इंडियन मेडिकल सेंट्रल काउंसिल (पोस्ट ग्रेजुएट आयुर्वेद एजुकेशन) रेग्युलेशन 2016 में संशोधन किया है. इसका मकसद जनरल सर्जरी और आंख, नाक, कान गले से जुड़ी बीमारियों के बारे में पोस्ट ग्रेजुएट स्टूडेंट्स के लिए फॉर्मल ट्रेनिंग शुरू करना है.

 

क्या है नोटिफिकेशन में? 

आयुर्वेद के छात्र सर्जरी के बारे में पढ़ाई तो करते थे, लेकिन उनके सर्जरी करने के अधिकारों को सरकार की ओर से स्पष्ट नहीं किया गया था. 19 नवंबर को जारी किए गए गजट नोटिफिकेशन के मुताबिक, आयुर्वेद के सर्जरी में पीजी करने वाले छात्रों को आंख, नाक, कान, गले के साथ ही जनरल सर्जरी के लिए विशेष रूप से प्रशिक्षित किया जाएगा.

पारंपरिक दवाओं की सर्वोच्च नियामक संस्था सेंट्रल काउंसिल ऑफ इंडियन मेडिसिन (CCIM) का कहना है,

उसके डॉक्टर पिछले 25 सालों से आयुर्वेद संस्थानों और अस्पतालों में सर्जरी कर रहे हैं. यह नोटिफिकेशन सिर्फ इसकी वैधानिकता के सवालों को स्पष्ट करना है.

CCIM ने नोटिफिकेशन जारी कर कहा है,

आयुर्वेद के डॉक्टर कुल 58 तरह की सर्जरी करेंगे. उन्हें जनरल सर्जरी (सामान्य चीर-फाड़), ईएनटी (नाक, कान, गला), ऑप्थेलमॉलजी (आंख), ऑर्थो (हड्डी) और डेंटल (दांत) से संबंधी बीमारियों के इलाज के लिए जरूरी सर्जरी कर पाएंगे.

 

विशेषज्ञों का क्या कहना है?

केंद्र सरकार के आयुर्वेद के पूर्व सलाहकार डॉ. एस.के. शर्मा ने एक मीडिया हाउस से बातचीत में कहा,

यह पहल मील का पत्थर साबित होगा. इससे देश में कुशल सर्जनों की कमी दूर होगी. देश के दूरदराज इलाकों के मरीजों को भी उच्च स्तर का इलाज मिल सकेगा. आयुर्वेद के विद्यार्थियों को प्रसव, गर्भपात, गर्भाशय की सर्जरी का भी अधिकार दिया जाना चाहिए.

IMA ने विरोध जताया

इंडियन मेडिकल असोसिएशन ने CCIM के इस फैसले को एकतरफा बताया है. आयुर्वेदिक डॉक्टरों को सर्जरी के अयोग्य बताते हुए कड़ी आलोचना की है. संस्था की तरफ से जारी बयान में कहा गया है,

आईएमए ने लक्ष्मण रेखा खींच रखी है जिसे लांघने पर घातक परिणाम सामने आएंगे. आईएमए काउंसिल को सलाह देता है कि वो प्राचीन ज्ञान के आधार पर सर्जरी का अपना तरीका इजाद करे और उसमें आधुनिक चिकित्सा शास्त्र पर आधारित प्रक्रिया से बिल्कुल दूर रहे.

इंडियन मेडिकल असोसिएशन ने फैसले को मेडिकल संस्थानों में चोर दरवाजे से एंट्री का प्रयास बताते हुए कहा कि ऐसे में NEET जैसी परीक्षा का कोई महत्व नहीं रह जाएगा. संस्था ने इस नोटिफिकेशन को वापस लेने की मांग की है.

 

 

इंडियन मेडिकल असोसिएशन ने आरोप लगाए हैं कि CCIM की पॉलिसी में छात्रों के लिए मॉर्डन मेडिसिन से जुड़ी किताबें मुहैया कराने को लेकर भेद है. संस्था दोनों सिस्टम को मिलाने की कोशिश का विरोध करेगी.

असोसिएशन ऑफ सर्जन्स ऑफ इंडिया के अध्यक्ष रघुराम का कहना है,

जनरल सर्जरी आधुनिक मेडिकल साइंस का हिस्सा है. इसे आयुर्वेद के साथ मुख्य धारा में नहीं लाया जा सकता. आयुर्वेद की पढ़ाई में पोस्टग्रेजुएट सिलेबस में इस तरह की ट्रेनिंग मॉड्यूल के जरिए डॉक्टरों को एमएस (आयुर्वेद) की उपाधी देना मरीजों की सुरक्षा के बुनियादी मानकों से खिलवाड़ करने जैसा होगा.


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adminNovember 23, 20203min3330

भारतीय बाजार में धीरे-धीरे स्कूटर (स्कूटी) की मांग बढ़ती जा रही है. अब ग्रामीण इलाकों में भी स्कूटर के खरीदार बढ़ रहे हैं. पहले कहा जाता था कि जहां सड़कें अच्छी होती हैं वहीं स्कूटर की डिमांड ज्यादा होती है. लेकिन अब देश के कोने-कोने में स्कूटर को लेकर क्रेज बढ़ रहा है.

भारत में दर्जनों स्कूटर बनाने वाली कंपनियां हैं. लेकिन बाजार पर चुनिंदा टू-व्हीलर कंपनियां ही राज करती हैं. जिसने ग्राहकों का भरोसा जीता है. आज हम आपको पिछले महीने यानी अक्टूबर में भारत में सबसे ज्यादा बिकने वाले ऐसे 5 स्कूटर्स के बारे में बताने जा रहे हैं, जो आपके बजट में फिट हो जाते हैं.

 

Honda Activa

 

Honda Activa: भारतीय स्कूटर बाजार में होंडा एक्टिवा का नंबर 1 पर कब्जा है. अक्टूबर में एक्टिवा के कुल 2,39,570 यूनिट्स की बिक्री हुई. हालांकि अक्टूबर 2019 के मुकाबले सेल में गिरावट दर्ज की गई है. दिल्ली में इसकी (एक्स-शोरूम) कीमत 65,892 रुपये है.

 

TVS Jupiter:

 

TVS Jupiter: शानदार लुक की वजह से टीवीएस जुपिटर की भारतीय बाजार में खास पकड़ है. अक्टूबर महीने में जुपिटर के कुल 74,159 यूनिट्स की बिक्री हुई. अक्टूबर में दूसरा सबसे ज्यादा बिकने वाला स्कूटर जूपिटर रहा है. इस स्कूटर की (एक्स-शोरूम) कीमत 63,852 रुपये है.

 

Suzuki Access

 

Suzuki Access: सुजुकी एक्सेस की अच्छी डिमांड है. पिछले महीने  कुल 52,441 यूनिट Suzuki Access स्कूटर बिके. इस आंकड़े के साथ Suzuki Access तीसरा सबसे ज्यादा बिकने वाला स्कूटर बन गया है. Suzuki Access की एक्स-शोरूम कीमत 70,500 रुपये है.

 

Honda Dio

 

Honda Dio: अक्टूबर महीने में बिक्री के मामले में Honda Dio स्कूटर चौथे नंबर रहा. अक्टूबर में Honda Dio के कुल 44,046 यूनिट्स बिके. भारतीय बाजार में Honda Dio की एक्स-शोरूम कीमत 61,970 रुपये है.

 

TVS Ntorq

 

TVS Ntorq: टीवीएस के एक और स्कूटर ने पिछले महीने बिक्री के मामले में अपनी अच्छी बढ़त हासिल की. अक्टूबर महीने में TVS Ntorq के कुल 31,524 यूनिट्स बिके. भारत में मौजूद यह एक बेहद ही हाईटेक स्कूटर है. बिक्री के मामले में ये पांचवें नंबर है. इस स्कूटर की एक्स-शोरूम कीमत 68,885 रुपये है.


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adminNovember 19, 20202min5410

अभी 14 नवंबर को दिवाली थी. लोगों ने अपने पटाखे फोड़-फाड़ के खत्म कर लिए. लेकिन आसमान में एक लाइट शो अभी चल रहा है. इसके पीछे कोई व्यक्ति या संस्था नहीं है. इसकी वजह है टूटते तारे. एक नहीं बहुत सारे. हर साल नवंबर के महीने में ऐसा देखने को मिलता है. इसे लियोनिड मीटियोर शावर कहते हैं.

साइंसकारी के इस एपिसोड में लियोनिड मीटियोर शावर की बात करेंगे. आसमान में टूटते तारों की बौछार.

 

जिसे हम आम भाषा में टूटता तारा कहते हैं, असलियत में तब कोई तारा नहीं टूट रहा होता है. वो एक मीटियोर होता है. मीटियोर यानी उल्का पिंड. अंतरिक्ष में मौजूद छोटी-छोटी चट्टानें. जब ये उल्का पिंड बहुत तेज़ स्पीड से पृथ्वी के वायुमंडल में ऐंट्री मारते हैं, तो घर्षण होता है. इनकी स्पीड और वायुमंडल का घर्षण इतना भयंकर होता है कि ये जल उठते हैं. जब ऐसा होता है तो लोगों को लगता है कि कोई तारा टूट गया. और कुछ भोले लोग अपनी आंखें बंद करके विश मांगने लगते हैं.

ज़्यादातर मीटियोर वायुमंडल में ही जलकर भस्म हो जाते हैं. सिर्फ कुछ मीटियोर के अंश ज़मीन तक पहुंचते हैं. अभी बहुत सारे मीटियोर आसमान में दिख रहे हैं. ऐसी घटना को मीटियोर शावर कहते हैं. मीटियोर शावर का मतलब है उल्कापिंड की बौछार.

 

जब कोई मीटियोर का टुकड़ा धरती पर गिरता है, तो उसे मीटियोराइट कहते हैं. (विकिमीडिया)

 

ये घटना नवंबर के पहले हफ्ते से ही शुरू हो गई थी. मंगलवार और बुधवार (17-18 नवंबर) को ये अपने चरम पर पहुंची. और इसे नवंबर महीने के अंत तक देखा जा सकता है. 2020 में ये मीटियोर शावर 6 नवंबर से 30 नवंबर तक हरकत में रहेंगे. इनमें सबसे तेज़ मीटियोर की रफ्तार 71 किलोमीटर प्रति सेकेंड की होगी. जब मीटियोर शावर चरम पर होता है तो हर घंटे 10-15 मीटियोर देखे जा सकते हैं.

अब सवाल ये है कि अचानक आसमान में इतने सारे मीटियोर कहां से आ गए? और नवंबर महीने में ऐसा क्या है कि लियोनिड मीटियोर शावर इसी महीने में होता है?

अंतरिक्ष में बहुत सारा मलबा है. जब ये मलबा पृथ्वी के रास्ते में आ जाता है, तब मीटियोर शावर देखने को मिलता है. लियोनिड मीटियोर टेंपल-टर्टल से आए हैं.

टेंपल-टर्टल एक कॉमेट (धूमकेतू) का नाम है. ये कॉमेट भी पृथ्वी की तरह सूरज के चक्कर काटता है. टेंपल-टर्टल 33 साल में सूर्य की परिक्रमा पूरी करता है. इसका रास्ता और पृथ्वी का रास्ता क्रॉस करते हैं. अब होता ये है कि ये कॉमेट अपने रास्ते में कई जगह मलबा फैलाता जाता है. पत्थर के छोटे-छोटे टुकड़े. तो पृथ्वी के रास्ते में भी ये टुकड़े आ जाते हैं.

 

JPL, NASA 

 

हर साल पृथ्वी नवंबर के महीने में इसी मलबे वाले इलाके से होकर गुज़रती है. इस दौरान ये टुकड़े पृथ्वी में घुसे चले आते हैं. जब इस मलबे के टुकड़े हमारे वायुमंडल में दाखिल होते हैं, तो वो जल उठते हैं. इसलिए हर साल नवंबर में ये मीटियोर शावर दिखाई देता है. मलबे के इस ढेर में छोटे चट्टानी टुकड़े, धूल या बर्फ होती है. ये इतने छोटे होते हैं कि वायुमंडल के ऊपर इलाके में ही भस्म हो जाते हैं. और पृथ्वी की सतह पर कभी पहुंच नहीं पाते.

इस मीटियोर शावर का नाम लियोनिड क्यों रखा गया है? लियो कॉन्स्टेलेशन के ऊपर. लियो नाम का एक तारामंडल है. ये मीटियोर लियो कॉन्सेटेलेशन से निकलते प्रतीत होते हैं. इसलिए इसका नाम लियोनिड मीटियोर शावर रख दिया गया. हालांकि असलियत में ऐसा नहीं होता है. ऐसा सिर्फ प्रतीत होता है.

 

लियो कॉन्स्टेलेशन का नाम शेर जैसी आकृति होने के कारण आया है. (विकिमीडिया)

 

सबसे बढ़िया बात ये है कि ये मीटियोर शावर हम अपनी आंखों से देख सकते हैं. किसी दूरबीन या टेलिस्कोप की ज़रूरत नहीं है. ये उत्तरी गोलार्ध के ज़्यादातर हिस्सों से दिखाई देगा. भारत उत्तरी गोलार्ध में ही है. इसलिए इसे पूरे भारत में इसे कहीं से भी देखा जा सकता है. लेकिन ढंग से दर्शन पाने के लिए कुछ शर्तें हैं.

मीटियोर शावर तब ज़्यादा अच्छे से दिखाई देते हैं जब आसमान में बादल न हों, आपके इलाके में प्रदूषण कम हो और चांद की रोशनी बहुत अधिक न हो. अभी बहुत बढ़िया मौका है. कुछ दिन पहले ही अमावस्या थी. दीवाली के दिन. इस हफ्ते चांद का 5% से कम हिस्सा चमक रहा है. इसलिए मीटियोर शावर दिखने के चांस ज़्यादा हैं.

 

ये नवंबर 1868 की एक पेंटिंग है. (विकिमीडिया)

 

शहरी इलाकों से देखने में थोड़ी दिक्कत आ सकती है. शहरों में सिर्फ वायु प्रदूषण नहीं होता, यहां रोशनी का प्रदूषण भी बहुत होता है. आपके आसपास जितनी ज़्यादा आर्टिफिशियल लाइट होगी, आसमान उतना कम साफ दिखेगा. इसे लाइट पॉल्यूशन कहते हैं. अगर आप शहर के रोशनी भरे इलाके से दूर कहीं ऊंचाई पर जाकर देखेंगे तो मामला थोड़ा क्लियर दिखाई देगा.

आप पूछेंगे आसमान में कब और कहां देखना है? ऐसा कोई फिक्स मुहूर्त और लोकेशन नहीं है. 17-18 नवंबर को ये अपने चरम पर था. लेकिन ये पूरे नवंबर महीने में चलने वाला है. इसे देखने के लिए रात में बारह बजे के बाद और सुबह होने के पहले का समय सबसे सही है. इसे देखने के लिए आपको आसमान में लियो तारामंडल खोजने की ज़रूरत नहीं है. ये पूरे आसमान में कहीं भी दिख सकते हैं.

 

अंतरिक्ष से ऐसा दिखता है मीटियोर शावर. (नासा)

 

ये साल का इकलौता मीटियोर शावर नहीं है. सालभर कई मीटियोर की बौछार होती रहती है. दिसंबर के महीने में जेमिनिड और उर्सिड मीटियोर शावर दिखाई देगा.


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adminNovember 19, 202010min3790

फेमस होने की तलब इंसान को या तो टैलेंटेड बनाती है या अजीबो-गरीब हरकतें करने पर मजबूर करती है. इन दोनों ही कैटेगरी में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वालों का नाम गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज होता है. इस किताब में वैसे तो हजारों लोगों के नाम हैं, लेकिन कुछ बहुत ज्यादा लोकप्रिय और खास हैं. ‘गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड डे’ के मौके पर हैरतंगेज कारनामा करने वाले ऐसे ही कुछ लोगों से आपका परिचय कराते हैं.

 

नीलांशी पटेल

 

नीलांशी पटेल- साल 2019 में गुजरात की नीलांशी पटेल ने टीनेजर कैटेगरी में सबसे लंबे बाल रखने का गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया था. उन्होंने 190 सेंटीमीटर लंबे बालों के साथ ये कीर्तिमान स्थापित किया था.

 

पीटर ग्लेजब्रुक

 

पीटर ग्लेजब्रुक- खाने में प्याज का जायका लेने वाले तो आपने बहुत देखे होंगे, लेकिन प्याज को सीने से लगाकर रखने वाला नहीं देखा होगा. इंग्लैंड के पीटर ग्लेजब्रुक दुनिया की सबसे बड़ी प्याज के मालिक हैं. जिस प्याज के साथ उन्होंने ये वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया है, उसका वजन 8 किलोग्राम से भी ज्यादा है.

 

राम सिंह चौहान

 

राम सिंह चौहान- राजस्थान के राम सिंह चौहान भी अपनी लंबी मूछों के दम पर इस रिकॉर्ड बुक में अपना नाम दर्ज करा चुके हैं. राम सिंह ने अपनी 14 फीट लंबी मूछों को 39 साल से नहीं काटा है.

 

ज्योति अमागे

 

ज्योति अमागे- नागपुर की रहने वाली ज्योति अमागे के नाम दुनिया की सबसे छोटी महिला का गिनीज रिकॉर्ड है. ज्योति का कद सिर्फ 24.7 इंच है. उन्होंने अपने 18वें जन्मदिन पर साल 2011 में ये रिकॉर्ड बनाया था.

 

थ्री डी पेंटिंग

 

थ्री डी पेंटिंग- ब्रिटेन के आर्टिस्ट जो हिल्स के नाम दुनिया की सबसे बड़ी थ्रीडी पेंटिंग बनाने का रिकॉर्ड दर्ज है. करीब 12,000 स्क्वेयर फीट की ये थ्रीडी पेंटिंग उन्होंने लंदन के कैनरी वॉर्फ में बनाई थी. इस पेंटिंग का दृष्य ऊंचाई से देखकर आप हैरान रह जाएंगे.

 

स्वेलाना पैंक्रातोवा

 

स्वेलाना पैंक्रातोवा- रशिया की 49 वर्षीय स्वेलाना पैंक्रातोवा दुनिया में सबसे लंबी टांगों की मालिक हैं. 51.9 इंच लंबी टांगों के साथ पैंक्रातोवा का नाम गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज है.

 

ईजोबेल वैर्ली

 

ईजोबेल वैर्ली- ईजोबेल वैर्ली के नाम शरीर पर सबसे ज्यादा टैटू गुदवाने का रिकॉर्ड दर्ज है. गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड के मुताबिक, उन्होंने 49 साल की उम्र में अपने जिस्म पर पहला टैटू बनवाया था. उनके शरीर का करीब 93% हिस्सा टैटू से ढका हुआ था. साल 2015 में 77 साल की उम्र में उनका निधन हो गया.

 

क्रिस वॉल्टन

 

क्रिस वॉल्टन- क्रिस वॉल्टन के नाम दुनिया में सबसे लंबे नाखून रखने का रिकॉर्ड है. उनके बाएं हाथ के नाखून 10 फीट 2 इंच लंबे हैं, जबकि दाएं हाथ में 9 फीट 7 इंच के नाखून हैं. वो 18 साल से अपने नाखून बढ़ा रही हैं.

 

थानेश्वर गुरागई

 

थानेश्वर गुरागई- नेपाल के थानेश्वर गुरागई टूथब्रश पर सबसे ज्यादा देर तक फुटबॉल घुमाने वाले इंसान हैं. उन्होंने 22.41 सेकेंड तक ऐसा करके ब्रिटेन के थॉमस कॉनर्स का रिकॉर्ड तोड़ा था.

 

कजुहिरो वतानबे

 

कजुहिरो वतानबे- जापानी फैशन डिजाइनर कजुहिरो वतानबे सिर पर सबसे लंबी चोटी रखने वाले इंसान हैं. गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड के मुताबिक, वतानबे ने अपने सिर पर 3 फीट 8.6 इंच की लंबी चोटी रखकर ये कीर्तिमान स्थापित किया था.

 

रॉल्फ बुचोल्ज

 

रॉल्फ बुचोल्ज- जर्मनी के रॉल्फ बुचोल्ज के नाम चेहरे पर सबसे ज्यादा पियरसिंग करने का रिकॉर्ड है. उन्होंने अपने चेहरे पर 453 पियरसिंग कराई है.

 

शी पिंग

 

शी पिंग- चीन के शी पिंग ने शरीर पर करीब 3 लाख 31 हजार मधुमक्खियां चिपकाकर एक अनोखा वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया था. इन मधुमख्यियों का वजन करीब 33 किलोग्राम था. ये कारनाम कर उन्होंने साल 2008 में रुआन लियांगमिंग का बनाया रिकॉर्ड तोड़ा था.

 

थानेश्वर गुरागई

 

थानेश्वर गुरागई- नेपाल के थानेश्वर गुरागई टूथब्रश पर सबसे ज्यादा देर तक फुटबॉल घुमाने वाले इंसान हैं. उन्होंने 22.41 सेकेंड तक ऐसा करके ब्रिटेन के थॉमस कॉनर्स का रिकॉर्ड तोड़ा था.

 

कजुहिरो वतानबे

 

कजुहिरो वतानबे- जापानी फैशन डिजाइनर कजुहिरो वतानबे सिर पर सबसे लंबी चोटी रखने वाले इंसान हैं. गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड के मुताबिक, वतानबे ने अपने सिर पर 3 फीट 8.6 इंच की लंबी चोटी रखकर ये कीर्तिमान स्थापित किया था.

 

रॉल्फ बुचोल्ज

 

रॉल्फ बुचोल्ज- जर्मनी के रॉल्फ बुचोल्ज के नाम चेहरे पर सबसे ज्यादा पियरसिंग करने का रिकॉर्ड है. उन्होंने अपने चेहरे पर 453 पियरसिंग कराई है.

 

शी पिंग

 

शी पिंग- चीन के शी पिंग ने शरीर पर करीब 3 लाख 31 हजार मधुमक्खियां चिपकाकर एक अनोखा वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया था. इन मधुमख्यियों का वजन करीब 33 किलोग्राम था. ये कारनाम कर उन्होंने साल 2008 में रुआन लियांगमिंग का बनाया रिकॉर्ड तोड़ा था.

 


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adminNovember 10, 20201min5050

भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (आईएआरआई) के इंदौर स्थित क्षेत्रीय केंद्र ने देश के अलग-अलग भूभागों के लिये गेहूं की दो नयी प्रजातियां विकसित की हैं।

आईएआरआई के क्षेत्रीय केंद्र के प्रधान वैज्ञानिक (कृषि विस्तार) डॉ. अनिल कुमार सिंह ने बताया कि इस केंद्र की विकसित नयी गेहूं प्रजाति ‘पूसा उजाला’ की पहचान ऐसे प्रायद्वीपीय क्षेत्रों के लिये की गयी है जहां सिंचाई की सीमित सुविधाएं उपलब्ध होती हैं। इस प्रजाति से एक-दो सिंचाई में 30 से 44 क्विंटल प्रति हेक्टेयर की पैदावार ली जा सकती है।

उन्होंने बताया, कि “पूसा उजाला चपाती और ब्रेड बनाने के लिये अति उत्तम है। इस गेहूं प्रजाति में प्रोटीन, आयरन और जिंक की अच्छी मात्रा होती है।” सिंह ने बताया कि उनके केंद्र की विकसित एक और नयी गेहूं किस्म ‘पूसा तेजस’ को मध्य भारत के लिये चिन्हित किया गया है। यह प्रजाति तीन-चार सिंचाई में 55 से 75 क्विंटल प्रति हेक्टेयर उत्पादन देने में सक्षम है।

उन्होंने कहा, ‘पूसा तेजस से चपाती के साथ पास्ता, नूडल्स और मैकरॉनी जैसे खाद्य पदार्थ भी बनाये जा सकते हैं। यह प्रजाति प्रोटीन, विटामिन-ए, आयरन और जिंक जैसे पोषक तत्वों से समृद्ध है।’ सिंह ने बताया कि उनके केंद्र की विकसित दोनों नयी किस्मों को केंद्रीय कृषि मंत्रालय की सेंट्रल वैराइटी रिलीज कमेटी की मंजूरी के बाद किसानों तक पहुंचाया जायेगा।

उन्होंने यह बताया, कि बताया कि इंदौर में आईएआरआई के क्षेत्रीय केंद्र की स्थापना वर्ष 1951 में हुई थी। यह केंद्र अब तक गेहूं की 27 प्रजातियां विकसित कर चुका है, जिनमें ‘पूसा उजाला’ और ‘पूसा तेजस’ शामिल हैं।


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adminNovember 10, 20202min4150

IPL2020 खत्म होने वाला है. हर बार की तरह इस बार भी इस टूर्नामेंट ने कई कमाल की यादें दी. कई प्लेयर्स धूमकेतु की तरह आए और छा गए. अपने प्रदर्शन से तमाम उम्मीदें जगा दीं. तो वहीं कुछ फ्लॉप भी रहे.

फ्लॉप और हिट दोनों लिस्ट कई ऐसे नाम रहे जिन्हें खुद से जोड़ने के लिए टीमों ने खूब रकम खर्च की थी. इस आर्टिकल में हम बात करेंगे IPL2020 के सबसे महंगे फ्लॉप प्लेयर्स की.

 

# आरोन फिंच

लिस्ट का पहला नाम आरोन फिंच, ऑस्ट्रेलिया के कप्तान. डीविलियर्स और कोहली पर लोड कम करने के लिए बैंगलोर ने इस बार आरोन फिंच पर दांव लगाया. टीम ने सोचा होगा कि अनुभवी फिंच के आने से टीम का टॉप ऑर्डर और मजबूत हो जाएगा. कोहली तीसरे नंबर पर बैटिंग करेंगे तो चौथे नंबर पर डीविलियर्स आएंगे और ये दोनों साथ मिलकर कमाल करेंगे.

लेकिन इसके लिए जरूरी था कि फिंच अच्छी बैटिंग करें. फिंच से यह हो ना पाया. 4.40 करोड़ में खरीदे गए फिंच इस सीजन कुल 268 रन ही बना पाए. अब हम वो गणित नहीं बताएंगे कि उनका एक रन कितने लाख का बना, वो आप लोग देखें.

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हम ये जरूर बताएंगे कि फिंच ने इस सीजन 12 पारियां खेली. इन पारियों में उनका हाईएस्ट स्कोर रहा, 52 रन. फिंच ने इस सीजन 22.33 की ऐवरेज और 111.20 की स्ट्राइक रेट से रन बनाए. हालांकि आंकड़े देखेंगे तो वह इस सीजन RCB के लिए रन बनाने वालों की लिस्ट में चौथे नंबर पर दिखेंगे.

उनसे ज्यादा रन सिर्फ देवदत्त पडिकल, विराट कोहली और एबी डीविलियर्स ने बनाए. इन तीनों ने 450+ रन बनाए हैं. और जाहिर है कि टीम का बड़ा स्टार होने के नाते फिंच को इन चारों से इतना पीछे नहीं होना चाहिए था.

# पीयूष चावला

चावला सालों से IPL खेल रहे हैं. कई टीमों के लिए खेल चुके पीयूष ने IPL में कई दफ़ा मैच विनिंग परफॉर्मेंस की है. उनके पिछले प्रदर्शन को देखते हुए ही चेन्नई सुपर किंग्स ने उन्हें 6.75 करोड़ रुपये में खरीदा. हालांकि उन्हें खरीदने के पीछे एक वजह यह भी थी कि चेन्नई ने पूरी टीम चेपॉक को ध्यान में रखकर बनाई थी. ऐसे में उन्हें पीयूष से काफी उम्मीदें थीं. लेकिन कोरोना के चलते टूर्नामेंट UAE में शिफ्ट हो गया.

चावला नई कंडीशंस में ढलने में नाकाम रहे. इस सीजन उन्हें सिर्फ सात मैच ही खेलने को मिले. इन मैचों में कई बार वह अपने कोटे के पूरे चार ओवर भी नहीं फेंक पाए. IPL2020 के सात मैचों में चावला ने 21 ओवर फेंके और उन्हें सिर्फ छह विकेट ही मिले. इस सीजन चावला का बेस्ट रहा 33 रन देकर दो विकेट. इस सीजन उनका ऐवरेज 31.83 और स्ट्राइक रेट 21 का रहा. चावला ने इस बार IPL में नौ से ज्यादा की इकॉनमी से रन लुटाए.

 

# शेल्डन कॉट्रेल

IPL2020 ऑक्शन से ठीक पहले शेल्डन कॉट्रेल और विराट कोहली के सेलिब्रेशन ने खूब सुर्खियां बटोरी थीं. कोहली को बोल्ड कर कॉट्रेल ने अपना सेलिब्रेशन किया तो कोहली भी बदला लेने में पीछे नहीं रहे. इसके बाद हुई नीलामी. 50 लाख की बेस प्राइज वाले कॉट्रेल के लिए खूब बोलियां लगीं. अंत में वह 8.5 करोड़ में किंग्स इलेवन पंजाब से जुड़े.

पंजाब को उम्मीद थी कि कॉट्रेल और शमी की जोड़ी कमाल कर देगी. लेकिन ऐसा हो नहीं पाया. कॉट्रेल को बल्लेबाजों ने मनचाहे अंदाज में धुना. हालात ऐसे हो गए कि वह इस सीजन सिर्फ छह मैच ही खेल पाए. इन छह मैचों में भी कई बार वह अपने कोटे के पूरे ओवर नहीं फेंक पाए.

 

 

कॉट्रेल ने 6 मैचों में कुल 20 ओवर बोलिंग की. इन ओवर्स में सिर्फ छह विकेट लेने वाले कॉट्रेल की इकॉनमी 8.80 की रही. जबकि उनका ऐवरेज 29.33 और स्ट्राइक रेट 20 का रहा. अगर आपको ना याद हो तो जान लें- राहुल तेवतिया ने एक ही ओवर में पांच छक्के कॉट्रेल को ही मारे थे.

 

# ग्लेन मैक्सवेल

मैक्सवेल इस सीजन के सबसे बड़े फ्लॉप कहे जा सकते हैं. पंजाब ने उन्हें 14 में से 13 मैचों में मौका दिया. 11 बार उन्हें बैटिंग भी मिली. लेकिन मैक्सी का बल्ला नहीं चला तो नहीं चला. इस सीजन मैक्सवेल एक भी छक्का नहीं मार सके.

11 पारियों में सिर्फ 108 रन बना पाए मैक्सवेल का स्ट्राइक रेट 101.88 का रहा. पंजाब की टीम ने हरसंभव कोशिश कर ली लेकिन मैक्सवेल इस सीजन पूरी तरह से फ्लॉप रहे. 10.75 करोड़ की बड़ी रकम में खरीदे गए मैक्सवेल से पंजाब ने बोलिंग भी कराई. सोचा गया कि बल्ले से ना सही, गेंद से ही कुछ हो जाए. लेकिन… नहीं हो पाया.

 

 

मैक्सवेल ने सात पारियों में कुल 21 ओवर बोलिंग की. इन ओवर्स में उन्होंने 8.04 की इकॉनमी से रन देकर तीन विकेट लिए.

 

# पैट कमिंस

अब बात बीते ऑक्शन की सबसे महंगी खरीद की. नाम होता है पैट कमिंस और खेलते हैं ऑस्ट्रेलिया से. कमिंस के लिए ऑक्शन में ऐसी मार मची कि देखते ही देखते वह IPL2020 के सबसे महंगे प्लेयर बन गए. कोलकाता नाइट राइडर्स ने उन्हें15.50 करोड़ में खरीदा. अब पैसा प्रधान समाज में इत्ती मुद्रा मिलेगी तो स्क्रुटनी भी तगड़ी होगी.

वही हो रही है. कमिंस ने पूरे 14 मैच खेले. 52 ओवर फेंके, लेकिन विकेट मिले सिर्फ 12. उन्होंने 2-4 मैचों में जरूर वर्ल्ड क्लास खेल दिखाया लेकिन ओवरऑल संतुष्ट नहीं कर पाए. कमिंस की इस सीजन की इकॉनमी 7.86 रही. ये अलग बात है कि पहले 10 मैचों में सिर्फ तीन विकेट लेने के बाद उन्होंने बेहतरीन वापसी की. आखिरी चार मैचों में उनके नाम नौ विकेट रहे.

 

 

हालांकि बल्ले से उन्होंने अपनी टीम की हेल्प करने की कोशिश जरूर की. कोलकाता के लिए सबसे ज्यादा रन बनाने वालों की लिस्ट में वह सुनील नरेन और आंद्रे रसल, दोनों से ऊपर रहे. कमिंस ने इस सीजन की 11 पारियों में 146 रन बनाए. इसमें एक हाफ सेंचुरी भी शामिल थी.


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adminNovember 10, 20201min4650

दीपावली का त्योहार इस साल शनिवार, 14 नवंबर को मनाया जाएगा. दिवाली (Diwali 2020) के शुभ मौके पर इस साल ग्रहों का अद्भुत संयोग बन रहा है. दिवाली पर धन और ज्ञान का कारक बृहस्पति ग्रह अपनी स्वराशि धनु और शनि (Shani) अपनी स्वराशि मकर में रहेगा. जबकि शुक्र ग्रह कन्या राशि में रहेगा. ज्योतिषविदों का कहना है कि दिवाली पर ऐसा संयोग 499 साल बाद बन रहा है. इससे पहले ग्रहों की ऐसी स्थिति 1521 में देखी गई थी.

इस वर्ष एक बड़ा संयोग ये भी बन रहा है कि दिवाली और नरक चतुदर्शी एक ही दिन होगी. नरक चतुर्दशी को छोटी दिवाली भी कहते हैं. इस दिन सुबह स्नान करके यम तर्पण और शाम के वक्त आंगन में दीप जलाने और दान करने का बड़ा महत्व होता है.

नरक चतुर्दशी पर स्नान का शुभ मुहूर्त सुबह 5:23 से सुबह 6:43 बजे तक रहेगा. इस तिथि को नरक चतुर्दशी के साथ दिवाली भी मनाई जाएगी. हालांकि चतुर्दशी तिथि दोपहर 1 बजकर 16 मिनट तक ही रहेगी. इसके बाद अमावस्या तिथि आरंभ हो जाएगी जो 15 नवंबर की सुबह 10.00 बजे तक रहेगी. इस अवधि में दिवाली मनाई जाएगी.

 

ग्रहों की स्थिति से किसे लाभ

 

बृहस्पति ज्ञान और शनि धन-संपत्ति के कारक माने जाते हैं. दीपावली पर गुरु-शनि के स्वराशि में रहने से कई लोगों का भाग्य चमक सकता है. यह दीपावली आपके लिए कई शुभ संकेत लेकर आएगी. ज्योतिषियों के मुताबिक वृषभ, कर्क, तुला और कुंभ राशि के जातकों के लिए समय काफी शुभ रहने वाला है. जबकि मिथुन, सिंह और कन्या राशि के जातकों को थोड़ा संभलकर रहना होगा.

ज्योतिषविदों का कहना है कि 11 नवंबर से 14 नवंबर तक सर्वार्थ सिद्धि योग भी बन रहा है. दिवाली, धनतेरस और सर्वार्थ सिद्धि योग के बीच खरीदारी करना बड़ा शुभ होगा. खासतौर से कोई वाहन खरीदने या व्यापार के शुभारंभ के लिए यह समय बड़ी ही खास रहने वाला है.

दिवाली के दिन हनुमानजी, यमराज, चित्रगुप्त, कुबेर, भैरव, कुलदेवता और पितरों का पूजन करना ना भूलें. मां लक्ष्मी के साथ भगवान विष्णु का भी पूजन करें. पूजा के वक्त श्री सूक्त का पाठ करें. चाहें तो विष्णुसहस्रनाम, गोपाल सहस्रनाम का पाठ भी कर सकते हैं.


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adminNovember 6, 20201min6260

व्हाट्सऐप में जल्द ही आपको “डिसैपीयरिंग मैसेज” का नया विकल्प मिलेगा, जो मैसेज भेजने वाले और मैसेज प्राप्त करने वाले के बीच हुई चैट को सात दिन बाद ख़ुद-ब-ख़ुद ही ग़ायब कर देगा.

मतलब अगर आपने इस विकल्प को एनेबल किया तो सात दिन पुराने मैसेज अपने आप हटते जाएंगे.

फ़ेसबुक के स्वामित्व वाले इस ऐप के दुनिया भर में दो अरब यूज़र हैं. व्हाट्सऐप का कहना है कि इस नई सेटिंग से चैट को प्राइवेट रखने में मदद मिलेगी.

हालाँकि व्हाट्सऐप ने ये भी कहा कि अगर मैसेज प्राप्त करने वाला किसी मैसेज, फ़ोटो या वीडियो को सात दिन बाद भी अपने पास रखना चाहता है तो वो पहले ही उसका स्क्रीनशॉट लेकर रख सकता है या उसे फ़ॉरवर्ड कर सकता है.

यानी आपने तो डिसैपीयरिंग मैसेज का विकल्प चुन लिया, लेकिन सामने वाला फिर भी मैसेज को कहीं और सेव करके रख सकता है.

“डिसैपीयरिंग मैसेज” का विकल्प इस साल नवंबर के अंत तक दिखने लगेगा.

एक ब्लॉग में कंपनी ने कहा कि मैसेज सात दिन में एक्सपायर होने का विकल्प मिलने से “दिमाग़ की शांति मिलेगी कि आपकी कोई बातचीत परमानेंट नहीं है. साथ ही आप प्रैक्टिकल भी रहेंगे ताकि आप ये भूल ना जाएं कि आप किस बारे में चैट कर रहे थे.”

फ़ेसबुक के संस्थापक मार्क ज़करबर्ग ने अप्रैल 2019 में यूज़र्स को अधिक गोपनीयता प्रदान करने के लिए सोशल नेटवर्क में कई बदलाव करने का वादा किया.

उनके प्रस्तावित बदलावों में ऐसे ऑप्शन पेश करना शामिल था जिसके ज़रिए सामग्री बहुत कम वक़्त तक सोशल नेटवर्क पर रहे. डिसैपीयरिंग मैसेज का विकल्प इसी का हिस्सा है.

कंपनी अपने मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स व्हाट्सऐप, इंस्टाग्राम और फ़ेसबुक मैसेंजर को साथ जोड़ने की कोशिश कर रही है ताकि इनमें से किसी भी एक प्लेटफॉर्म से दूसरे पर सामग्री साझा की जा सके. यानी आप अपने व्हाट्सऐप से किसी को उसके फ़ेसबुक या इंस्टाग्राम पर भी मैसेज कर पाएंगे.

व्हाट्सऐप के प्रतिद्वंद्वी मैसेजिंग ऐप स्नैपचैट में “डिसैपीयरिंग मैसेज” का विकल्प पहले से मौजूद है.

 


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adminNovember 6, 20201min4510

सर्दियों की सुगबुगाहट के साथ ही हवा में प्रदूषण का स्तर खतरनाक रूप से बढ़ गया है. दिवाली से पहले पटाखों को लेकर एक बार फिर से बहस शुरू हो गयी है कि इन्हें बैन करना चाहिए या नहीं. इसी मामले में गुरुवार, 5 नवंबर को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT ) में पटाखों को 30 नवंबर तक पूरी तरह बैन करने को लेकर सुनवाई हुई. इस दौरान NGT ने कई अहम बातें कहीं.

 

सुनवाई में क्या हुआ

सुनवाई के दौरान बैन न करने के पक्ष में पटाखा बनाने से जुड़े एसोसिएशन ने कोर्ट में कहा कि ये सीधे 10 लाख लोगों के रोजगार से जुड़ा मामला है. खासकर ऐसे वक़्त में, जब कोविड के चलते कई लोग बेरोज़गार हो गए हैं, पटाखे बनाने से जुड़े लोगों के रोजगार को भी नज़रअंदाज़ नहीं किया जाना चाहिए. एसोसिएशन ने ग्रीन पटाखों का भी ज़िक्र किया और कहा कि इससे 30 प्रतिशत से भी कम प्रदूषण होता है.

इस पर NGT कोर्ट ने कहा कि हम ग्रीन पटाखों को चलाने के खिलाफ नहीं है. हम सिर्फ़ कुछ वक़्त के लिए इसको बैन करके को लेकर बात कर रहे है, जिससे प्रदूषण को और बढ़ने से रोका जा सके. रोज़गार वाली बात पर NGT ने कहा-

“हमारे आदर्श महात्मा गांधी हैं, जिन्होंने कहा था- ‘वैष्णव जन तो तेने कहिए जो पीर पराई जाने रे.’ हमें पटाखों को बनाने वालों से सहानभूति है. लेकिन क्या आप लोगों को आम लोगों के स्वास्थ्य या उनकी जान से सहानुभूति है. अगर किसी एक व्यक्ति की भी मौत प्रदूषण के चलते होती है, तो हम इसे नजरअंदाज नहीं कर सकते.”

 

वकील को लगाई फटकार

पर्यावरण मंत्रालय के वक़ील ने कहा कि अभी तक ऐसी कोई स्टडी नहीं है, जिससे ये साफ़ हो सके कि पटाखे चलाने से कोविड के मामले बढ़ेंगे. NGT कोर्ट ने वकील को फटकार लगाते हुए कहा कि अगर आपको पर्यावरण कानूनों की जानकारी है, तो आपको इतना तो पता ही होगा कि किसी भी चीज़ को लागू करने के लिए स्टडी करने की जरूरत होती है, किसी भी चीज़ पर बैन लगाने के लिए नहीं.

 

दिल्ली सरकार ने क्या कहा

इसी बीच दिल्ली सरकार ने कहा कि अगर हम पटाखों पर बैन लगाते हैं, तो इसकी रिपोर्ट कल (6 नवंबर) तक कोर्ट में दाखिल कर देंगे.

वहीं दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने वीडियो के ज़रिये दिल्लीवासियों से पटाखे न जलाने की अपील की और कहा-

“आप लोगों से मेरी अपील है कि किसी भी हाल में पटाखे न जलाएं. पटाखे फोड़कर आप अपने परिवार की ज़िन्दगी से खेल रहे हैं. 14 नवंबर की शाम को 7 बजकर 49 मिनट से हम सभी दो करोड़ दिल्लीवासी एकसाथ लक्ष्मी पूजा मनाएंगे. मैं टीवी पर लाइव टेलीकास्ट के ज़रिये पूजा की शुरुआत करूंगा.”

इधर असम सरकार ने कहा कि उनके राज्य में पराली जलाने की समस्या नहीं है, हवा साफ है, इस आधार पर पटाखे जलाने की इजाजत दी जाए. इस पर कोर्ट ने कहा कि जिन राज्यों में हवा मोडरेट स्तर पर है, वहां पटाखे जलाए जा सकते हैं.

 



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