बजट 2021: आ सकती है सबके लिए वाहन स्क्रैप पॉलिसी, जानें यह क्यों है जरूरी?

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केंद्र सरकार ने मई 2016 में पुराने वाहनों को सड़क से हटाने के लिए  Voluntary Vehicle Fleet Modernisation Programme का मसौदा रखा था. सरकार का अनुमान हैकि इस नीति के सबके लिए आने से सड़कों से 15 साल पुराने करीब 2.8 करोड़ वाहन हटाने में मदद मिलेगी.

हाल में सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने सरकारी वाहनों के लिए 15 साल पुराने वाहनों को कबाड़ (स्क्रैप करने) में भेजने की नीति को मंजूर कर दिया. मंत्रालय के इस फैसले से केंद्र, राज्य सरकारों और पब्लिक सेक्टर की कंपनियों में इस्तेमाल होने वाले 15 साल पुराने वाहनों को हटाना होगा. हालांकि इस नीति का पालन अप्रैल 2022 से होना है. लेकिन वाहन क्षेत्र इसे लेकर काफी उत्साहित है, ऐसे में संभावना है कि बजट में इस नीति पर बात हो और जल्द इसे सबके लिए लागू करने को लेकर कोई घोषणा हो.

कोरोना काल के बाद भारत सरकार का जोर ‘आत्मनिर्भर भारत’ बनाने पर है. इसलिए सरकार मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर पर ध्यान दे रही है. वाहन, इलेक्ट्रिक समेत कई क्षेत्रों में विनिर्माण बढ़ावा देने के लिए सरकार ने हाल में PLI योजना शुरू की है. ऐसे में यदि पुराने वाहनों को कबाड़ में भेजने की नीति सबके लिए लाई जाती है, तो नए वाहनों की मांग बढ़ेगी और कंपनियों का उत्पादन भी बढ़ेगा.

सरकार ने 2030 तक देश को पूरी तरह से ई-मोबिलिटी पर शिफ्ट करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है. इसका मकसद देश के कच्चा तेल आयात बिल को कम करना है. आयात बिल घटने से सरकार की राजकोषीय हालत भी बेहतर होगी और सरकार अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए ई-मोबिलिटी इन्फ्रास्ट्रक्चर बढ़ाने पर जोर दे सकेगी. (फाइल फोटो)

सर्दियों में दिल्ली समेत उत्तर भारत के कई शहर भीषण प्रदूषण की चपेट में रहते हैं. बच्चों के स्कूल तक बंद करने पड़ते हैं. कई लोगों को दमा और अन्य सांस की बीमारियों का सामना करना पड़ता है. आईआईटी बॉम्बे के एक अध्ययन के मुताबिक कुल वायु प्रदूषण में लगभग 70 प्रतिशत हिस्सेदारी वाहनों से होने वाले प्रदूषण की है. ऐसे में पुराने वाहनों को कबाड़ में भेजने पर वायु प्रदूषण को कम करने में मदद मिलेगी.

पुराने वाहन को स्क्रैप करने की नीति से अन्य सेक्टर को भी फायदा होगा, क्योंकि नए वाहनों की मांग और उत्पादन बढ़ने के लिए कच्चे माल की जरूरत होगी. ऐसे में स्टील, एल्युमीनियम और रबर सेक्टर को लाभ होगा. इस क्षेत्र में भी नए रोजगार का विकास होगा और अंतत: अर्थव्यवस्था का चक्का तेजी से घूमने लगेगा.

कोरोना काल से पहले भी देश की अर्थव्यवस्था में नरमी का रुख देखा जा रहा था. कोरोना महामारी के दौरान अप्रैल-जून अवधि में देश की जीडीपी लगभग 24 प्रतिशत तक गिर गई. ऐसे में सरकार के ऊपर अर्थव्यवस्था गति देने, राजकोषीय, रोजगार की स्थिति को बेहतर करने का दबाव है. साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आने वाले पांच वर्षों को देश की अर्थव्यवस्था को 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य रखा है. ऐसे में वाहन क्षेत्र ज्यादा लोगों को रोजगार, विनिर्माण में योगदान और सरकार के लिए एकजुट राजस्व जुटाने का माध्यम है. पुराने वाहनों को हटाने से जो नए वाहनों की मांग बढ़ेगी, उससे रोजगार और लोगों की आय बेहतर होगी साथ ही कंपनियों का उत्पादन बढ़ने से सरकार का जीएसटी संग्रह भी बढ़ेगा.




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