कहानी उस इंडियन खिलाड़ी की, जिसे इंग्लैंड वाले सफेद रंग से रंगकर ऑस्ट्रेलिया ले जाने वाले थे

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नाम विजय मर्चेंट, पूरा नाम विजय माधवजी मर्चेंट. आजादी के पहले का सबसे बेहतरीन बल्लेबाज. एकदम सलीके का खेल खेलने वाला. आराम से एक पांव निकालकर ड्राइव करने वाला. लेट कट और प्यारे हुक्स का महारथी. जिसने उसका एक अलग स्टाइल बनाया. दूसरों से एकदम अलहदा. विजय मर्चेंट जिसे अपने वक्त में डॉन ब्रैडमैन और कॉम्पटन जैसे खिलाड़ियों में गिना जाता था. जिनका बर्थडे होता है 12 अक्टूबर को  और बरसी होती है 27 अक्टूबर को. पढ़िए उनके ये किस्से, जो बताते हैं कि उनका करियर कितना शानदार रहा है.

विजय मर्चेंट मुंबई के क्रिकेटर थे. भरे-पूरे परिवार के थे. घर वाले व्यापारी थे. उनकी फैक्ट्रियां भी थीं. ये बात जरूर है कि विजय मर्चेंट को खेलने को ज्यादा मैच नहीं मिले. मर्चेंट अपने इंटरनेशनल करियर में बस 10 मैच ही खेल पाए. उसमें भी बस 18 ओवर. पर उनकी डोमेस्टिक क्रिकेट की बैटिंग शानदार है. और उन्होंने जम के डोमेस्टिक क्रिकेट खेला भी.

 

विजय मर्चेंट

इंग्लिश टीचर के चलते नाम बदल गया

विजय मर्चेंट का नाम विजय ठाकरसे हुआ करता था. एक बार उनकी इंग्लिश टीचर ने उनसे उनके नाम और पापा के प्रोफेशन के बारे में पूछा. विजय ने अपना नाम बताया. फिर पापा का प्रोफेशन ‘मर्चेंट’ बताया. पर टीचर नाम और प्रोफेशन में कंफ्यूज कर गई और विजय का नाम विजय ठाकरसे से विजय मर्चेंट हो गया.

डॉन ब्रैडमैन के अलावा आज तक कोई आस-पास भी नहीं फटका

मर्चेंट का फर्स्ट क्लास क्रिकेट में एवरेज 71.64 का है. इससे आगे आज तक बस डॉन ब्रैडमैन ही रहे हैं. पर मर्चेंट इतना बेहतरीन खेल रहे थे तो उन्हें खेलने का मौका क्यों नहीं मिला? ये एक वाजिब और बहुत ही जरूरी सवाल है. इसकी वजह थी सेकेंड वर्ल्ड वॉर. जिसके चलते मर्चेंट के कई साल बर्बाद हुए. फर्स्ट क्लास क्रिकेट के 6 सीजन ही मर्चेंट ने खेले. जिसमें से पांच में उनका एवरेज 114, 123, 223, 285 और 117 रहा. मर्चेंट को बचपन से ही बड़े-बड़े स्कोर करने का शौक था.

रणजी में भी मर्चेंट ने 47 इनिंग्स खेलीं और 3639 रन बनाए. दिल थाम के बैठिए दोस्तों. ऐवरेज अविश्वसनीय रूप से 98.75 था.

 

महान बल्लेबाज सर डॉन ब्रैडमैन

गांधी गिरफ्तार थे तो क्रिकेट खेलने से मना कर दिया

विजय मर्चेंट को पहला इंटरनेशनल खेलने का मौका मिला था इंग्लैंड के खिलाफ. इंग्लैंड की टीम पहली बार इंडिया आई थी सीरिज खेलने के लिए.

विजय एक देशभक्त भारतीय थे. उन्होंने पहला टेस्ट खेला, जो कि उद्घाटन मैच था. पर उन्होंने इंग्लैंड के खिलाफ एक सीरिज में खेलने से मना कर दिया था क्योंकि महात्मा गांधी और कई बड़े नेताओं को गिरफ्तार कर लिया गया था. चार साल बाद वो इंग्लैंड टूर पर जाने को तब तैयार हुए जब सारे नेशनल लीडर जेल से बाहर आ गए थे. इसलिए उनका टेस्ट डेब्यू 1933 में इंग्लैंड टूर पर हो पाया.

इंग्लिश खिलाड़ियों को अपने खेल से कर रखा था दीवाना

अंग्रेज खिलाड़ी विजय मर्चेंट के खेल से बहुत इंप्रेस हुए थे. एक इंग्लिश खिलाड़ी सीबी फ्रे ने कहा था, चलो इसको सफेद रंग से रंग देते हैं और इसे अपने साथ ऑस्ट्रेलिया ओपनर बनाकर ले चलते हैं. आप इससे समझ सकते हैं कि वो बढ़ा-चढ़ाकर नहीं बोल रहे थे क्योंकि विजय ने अपने दो इंग्लैंड टूर पर मिडिल ऑर्डर में खेलते हुए 800 रन जड़ दिए थे.

 

विजय मर्चेंट

डॉन ब्रैडमैन हुए थे बहुत निराश

एक दफे अपनी खराब हेल्थ के चलते मर्चेंट ने अपना ऑस्ट्रेलिया टूर कैंसिल कर दिया था. जिसके बाद ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी बड़े निराश हो गए थे. डॉन ब्रैडमैन ने इसके बाद कहा था: बहुत बुरा. हमें विजय मर्चेंट की झलक भी देखने को नहीं मिली. जिसे पक्का सारे इंडियन खिलाड़ियों में सबसे महान माना जाता है.

अपने करियर के टॉप पर होने के बावजूद भी विजय सेकेंड वर्ल्ड वॉर के चलते दस साल तक इंटरनेशनल टेस्ट क्रिकेट नहीं खेल सके. वो भी उस वक्त जब वो अपने करियर के टॉप पर थे.

आज भी सबसे ज्यादा उम्र में सेंचुरी मारने का रिकॉर्ड इन्हीं के नाम

दिल्ली के कोटला में अपने आखिरी क्रिकेट मैच के दौरान 154 रन बनाए थे. ये भारत की ओर से सबसे ज्यादा उम्र में सेंचुरी मारने वाले खिलाड़ी बन गए. इसी सीरीज़ में उनके कंधे में चोट आई जिसके चलते उनका करियर खत्म हो गया.

1936 के इंग्लैंड टूर में इन्होंने 51 की औसत से 1475 रन बनाए और इसके चलते उनको 1937 का विजडन क्रिकेटर ऑफ द इयर भी चुना गया था.

बैटिंग करते समय विजय

विजय हजारे और विजय मर्चेंट की राइवलरी

बांबे (अब मुंबई) में एक पेंटागुलर टूर्नामेंट हुआ करता था. इसमें मर्चेंट ने 250 रन नॉटआउट बनाकर सीरिज में हजारे का चला आ रहा रिकॉर्ड तोड़ दिया.

हजारे ने भी अगली ही इनिंग्स में 309 रन बनाकर फिर से रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया. पर मर्चेंट भी कम नहीं थे और रणजी में महाराष्ट्र के अगेंस्ट खेलते हुए 359 रन बनाकर फिर से रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया. इन दोनों का ही 30 के दशक से लेकर 50 के दशक तक भारतीय क्रिकेट पर दबदबा रहा. और इसको हमेशा लोगों ने बहुत बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया था. पर इससे विजय हजारे और विजय मर्चेंट के आपसी रिश्तों पर कोई असर नहीं पड़ा.

 

विजय हजारे

विजय डायनेस्टी नाम कैसे पड़ा?

विजय मर्चेंट के साथ विजय हजारे और विजय मांजरेकर ने फेमस विजय डायनेस्टी नाम के एक इंडियन क्रिकेट के जुमले की शुरुआत की जिसका 30 के दशक से 60 के दशक तक भारतीय क्रिकेट पर दबदबा रहा.

बाद में सेलेक्टर भी रहे. 1960 में चीफ सेलेक्टर रहे. वही सुनील गावस्कर, एकनाथ सोलकर और गुंडप्पा विश्वनाथ जैसे टैलेंट को क्रिकेट में लाने वाले के रूप में जाने जाते हैं. विविध भारती पर उनका एक शो क्रिकेट विद विजय मर्चेंट भी आया करता था.

27 अक्टूबर, 1987 में विजय मर्चेंट की 76 की उम्र में हार्ट अटैक से मौत हो गई.




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