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adminNovember 19, 20202min5410

अभी 14 नवंबर को दिवाली थी. लोगों ने अपने पटाखे फोड़-फाड़ के खत्म कर लिए. लेकिन आसमान में एक लाइट शो अभी चल रहा है. इसके पीछे कोई व्यक्ति या संस्था नहीं है. इसकी वजह है टूटते तारे. एक नहीं बहुत सारे. हर साल नवंबर के महीने में ऐसा देखने को मिलता है. इसे लियोनिड मीटियोर शावर कहते हैं.

साइंसकारी के इस एपिसोड में लियोनिड मीटियोर शावर की बात करेंगे. आसमान में टूटते तारों की बौछार.

 

जिसे हम आम भाषा में टूटता तारा कहते हैं, असलियत में तब कोई तारा नहीं टूट रहा होता है. वो एक मीटियोर होता है. मीटियोर यानी उल्का पिंड. अंतरिक्ष में मौजूद छोटी-छोटी चट्टानें. जब ये उल्का पिंड बहुत तेज़ स्पीड से पृथ्वी के वायुमंडल में ऐंट्री मारते हैं, तो घर्षण होता है. इनकी स्पीड और वायुमंडल का घर्षण इतना भयंकर होता है कि ये जल उठते हैं. जब ऐसा होता है तो लोगों को लगता है कि कोई तारा टूट गया. और कुछ भोले लोग अपनी आंखें बंद करके विश मांगने लगते हैं.

ज़्यादातर मीटियोर वायुमंडल में ही जलकर भस्म हो जाते हैं. सिर्फ कुछ मीटियोर के अंश ज़मीन तक पहुंचते हैं. अभी बहुत सारे मीटियोर आसमान में दिख रहे हैं. ऐसी घटना को मीटियोर शावर कहते हैं. मीटियोर शावर का मतलब है उल्कापिंड की बौछार.

 

जब कोई मीटियोर का टुकड़ा धरती पर गिरता है, तो उसे मीटियोराइट कहते हैं. (विकिमीडिया)

 

ये घटना नवंबर के पहले हफ्ते से ही शुरू हो गई थी. मंगलवार और बुधवार (17-18 नवंबर) को ये अपने चरम पर पहुंची. और इसे नवंबर महीने के अंत तक देखा जा सकता है. 2020 में ये मीटियोर शावर 6 नवंबर से 30 नवंबर तक हरकत में रहेंगे. इनमें सबसे तेज़ मीटियोर की रफ्तार 71 किलोमीटर प्रति सेकेंड की होगी. जब मीटियोर शावर चरम पर होता है तो हर घंटे 10-15 मीटियोर देखे जा सकते हैं.

अब सवाल ये है कि अचानक आसमान में इतने सारे मीटियोर कहां से आ गए? और नवंबर महीने में ऐसा क्या है कि लियोनिड मीटियोर शावर इसी महीने में होता है?

अंतरिक्ष में बहुत सारा मलबा है. जब ये मलबा पृथ्वी के रास्ते में आ जाता है, तब मीटियोर शावर देखने को मिलता है. लियोनिड मीटियोर टेंपल-टर्टल से आए हैं.

टेंपल-टर्टल एक कॉमेट (धूमकेतू) का नाम है. ये कॉमेट भी पृथ्वी की तरह सूरज के चक्कर काटता है. टेंपल-टर्टल 33 साल में सूर्य की परिक्रमा पूरी करता है. इसका रास्ता और पृथ्वी का रास्ता क्रॉस करते हैं. अब होता ये है कि ये कॉमेट अपने रास्ते में कई जगह मलबा फैलाता जाता है. पत्थर के छोटे-छोटे टुकड़े. तो पृथ्वी के रास्ते में भी ये टुकड़े आ जाते हैं.

 

JPL, NASA 

 

हर साल पृथ्वी नवंबर के महीने में इसी मलबे वाले इलाके से होकर गुज़रती है. इस दौरान ये टुकड़े पृथ्वी में घुसे चले आते हैं. जब इस मलबे के टुकड़े हमारे वायुमंडल में दाखिल होते हैं, तो वो जल उठते हैं. इसलिए हर साल नवंबर में ये मीटियोर शावर दिखाई देता है. मलबे के इस ढेर में छोटे चट्टानी टुकड़े, धूल या बर्फ होती है. ये इतने छोटे होते हैं कि वायुमंडल के ऊपर इलाके में ही भस्म हो जाते हैं. और पृथ्वी की सतह पर कभी पहुंच नहीं पाते.

इस मीटियोर शावर का नाम लियोनिड क्यों रखा गया है? लियो कॉन्स्टेलेशन के ऊपर. लियो नाम का एक तारामंडल है. ये मीटियोर लियो कॉन्सेटेलेशन से निकलते प्रतीत होते हैं. इसलिए इसका नाम लियोनिड मीटियोर शावर रख दिया गया. हालांकि असलियत में ऐसा नहीं होता है. ऐसा सिर्फ प्रतीत होता है.

 

लियो कॉन्स्टेलेशन का नाम शेर जैसी आकृति होने के कारण आया है. (विकिमीडिया)

 

सबसे बढ़िया बात ये है कि ये मीटियोर शावर हम अपनी आंखों से देख सकते हैं. किसी दूरबीन या टेलिस्कोप की ज़रूरत नहीं है. ये उत्तरी गोलार्ध के ज़्यादातर हिस्सों से दिखाई देगा. भारत उत्तरी गोलार्ध में ही है. इसलिए इसे पूरे भारत में इसे कहीं से भी देखा जा सकता है. लेकिन ढंग से दर्शन पाने के लिए कुछ शर्तें हैं.

मीटियोर शावर तब ज़्यादा अच्छे से दिखाई देते हैं जब आसमान में बादल न हों, आपके इलाके में प्रदूषण कम हो और चांद की रोशनी बहुत अधिक न हो. अभी बहुत बढ़िया मौका है. कुछ दिन पहले ही अमावस्या थी. दीवाली के दिन. इस हफ्ते चांद का 5% से कम हिस्सा चमक रहा है. इसलिए मीटियोर शावर दिखने के चांस ज़्यादा हैं.

 

ये नवंबर 1868 की एक पेंटिंग है. (विकिमीडिया)

 

शहरी इलाकों से देखने में थोड़ी दिक्कत आ सकती है. शहरों में सिर्फ वायु प्रदूषण नहीं होता, यहां रोशनी का प्रदूषण भी बहुत होता है. आपके आसपास जितनी ज़्यादा आर्टिफिशियल लाइट होगी, आसमान उतना कम साफ दिखेगा. इसे लाइट पॉल्यूशन कहते हैं. अगर आप शहर के रोशनी भरे इलाके से दूर कहीं ऊंचाई पर जाकर देखेंगे तो मामला थोड़ा क्लियर दिखाई देगा.

आप पूछेंगे आसमान में कब और कहां देखना है? ऐसा कोई फिक्स मुहूर्त और लोकेशन नहीं है. 17-18 नवंबर को ये अपने चरम पर था. लेकिन ये पूरे नवंबर महीने में चलने वाला है. इसे देखने के लिए रात में बारह बजे के बाद और सुबह होने के पहले का समय सबसे सही है. इसे देखने के लिए आपको आसमान में लियो तारामंडल खोजने की ज़रूरत नहीं है. ये पूरे आसमान में कहीं भी दिख सकते हैं.

 

अंतरिक्ष से ऐसा दिखता है मीटियोर शावर. (नासा)

 

ये साल का इकलौता मीटियोर शावर नहीं है. सालभर कई मीटियोर की बौछार होती रहती है. दिसंबर के महीने में जेमिनिड और उर्सिड मीटियोर शावर दिखाई देगा.


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adminNovember 19, 202010min3790

फेमस होने की तलब इंसान को या तो टैलेंटेड बनाती है या अजीबो-गरीब हरकतें करने पर मजबूर करती है. इन दोनों ही कैटेगरी में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वालों का नाम गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज होता है. इस किताब में वैसे तो हजारों लोगों के नाम हैं, लेकिन कुछ बहुत ज्यादा लोकप्रिय और खास हैं. ‘गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड डे’ के मौके पर हैरतंगेज कारनामा करने वाले ऐसे ही कुछ लोगों से आपका परिचय कराते हैं.

 

नीलांशी पटेल

 

नीलांशी पटेल- साल 2019 में गुजरात की नीलांशी पटेल ने टीनेजर कैटेगरी में सबसे लंबे बाल रखने का गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया था. उन्होंने 190 सेंटीमीटर लंबे बालों के साथ ये कीर्तिमान स्थापित किया था.

 

पीटर ग्लेजब्रुक

 

पीटर ग्लेजब्रुक- खाने में प्याज का जायका लेने वाले तो आपने बहुत देखे होंगे, लेकिन प्याज को सीने से लगाकर रखने वाला नहीं देखा होगा. इंग्लैंड के पीटर ग्लेजब्रुक दुनिया की सबसे बड़ी प्याज के मालिक हैं. जिस प्याज के साथ उन्होंने ये वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया है, उसका वजन 8 किलोग्राम से भी ज्यादा है.

 

राम सिंह चौहान

 

राम सिंह चौहान- राजस्थान के राम सिंह चौहान भी अपनी लंबी मूछों के दम पर इस रिकॉर्ड बुक में अपना नाम दर्ज करा चुके हैं. राम सिंह ने अपनी 14 फीट लंबी मूछों को 39 साल से नहीं काटा है.

 

ज्योति अमागे

 

ज्योति अमागे- नागपुर की रहने वाली ज्योति अमागे के नाम दुनिया की सबसे छोटी महिला का गिनीज रिकॉर्ड है. ज्योति का कद सिर्फ 24.7 इंच है. उन्होंने अपने 18वें जन्मदिन पर साल 2011 में ये रिकॉर्ड बनाया था.

 

थ्री डी पेंटिंग

 

थ्री डी पेंटिंग- ब्रिटेन के आर्टिस्ट जो हिल्स के नाम दुनिया की सबसे बड़ी थ्रीडी पेंटिंग बनाने का रिकॉर्ड दर्ज है. करीब 12,000 स्क्वेयर फीट की ये थ्रीडी पेंटिंग उन्होंने लंदन के कैनरी वॉर्फ में बनाई थी. इस पेंटिंग का दृष्य ऊंचाई से देखकर आप हैरान रह जाएंगे.

 

स्वेलाना पैंक्रातोवा

 

स्वेलाना पैंक्रातोवा- रशिया की 49 वर्षीय स्वेलाना पैंक्रातोवा दुनिया में सबसे लंबी टांगों की मालिक हैं. 51.9 इंच लंबी टांगों के साथ पैंक्रातोवा का नाम गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज है.

 

ईजोबेल वैर्ली

 

ईजोबेल वैर्ली- ईजोबेल वैर्ली के नाम शरीर पर सबसे ज्यादा टैटू गुदवाने का रिकॉर्ड दर्ज है. गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड के मुताबिक, उन्होंने 49 साल की उम्र में अपने जिस्म पर पहला टैटू बनवाया था. उनके शरीर का करीब 93% हिस्सा टैटू से ढका हुआ था. साल 2015 में 77 साल की उम्र में उनका निधन हो गया.

 

क्रिस वॉल्टन

 

क्रिस वॉल्टन- क्रिस वॉल्टन के नाम दुनिया में सबसे लंबे नाखून रखने का रिकॉर्ड है. उनके बाएं हाथ के नाखून 10 फीट 2 इंच लंबे हैं, जबकि दाएं हाथ में 9 फीट 7 इंच के नाखून हैं. वो 18 साल से अपने नाखून बढ़ा रही हैं.

 

थानेश्वर गुरागई

 

थानेश्वर गुरागई- नेपाल के थानेश्वर गुरागई टूथब्रश पर सबसे ज्यादा देर तक फुटबॉल घुमाने वाले इंसान हैं. उन्होंने 22.41 सेकेंड तक ऐसा करके ब्रिटेन के थॉमस कॉनर्स का रिकॉर्ड तोड़ा था.

 

कजुहिरो वतानबे

 

कजुहिरो वतानबे- जापानी फैशन डिजाइनर कजुहिरो वतानबे सिर पर सबसे लंबी चोटी रखने वाले इंसान हैं. गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड के मुताबिक, वतानबे ने अपने सिर पर 3 फीट 8.6 इंच की लंबी चोटी रखकर ये कीर्तिमान स्थापित किया था.

 

रॉल्फ बुचोल्ज

 

रॉल्फ बुचोल्ज- जर्मनी के रॉल्फ बुचोल्ज के नाम चेहरे पर सबसे ज्यादा पियरसिंग करने का रिकॉर्ड है. उन्होंने अपने चेहरे पर 453 पियरसिंग कराई है.

 

शी पिंग

 

शी पिंग- चीन के शी पिंग ने शरीर पर करीब 3 लाख 31 हजार मधुमक्खियां चिपकाकर एक अनोखा वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया था. इन मधुमख्यियों का वजन करीब 33 किलोग्राम था. ये कारनाम कर उन्होंने साल 2008 में रुआन लियांगमिंग का बनाया रिकॉर्ड तोड़ा था.

 

थानेश्वर गुरागई

 

थानेश्वर गुरागई- नेपाल के थानेश्वर गुरागई टूथब्रश पर सबसे ज्यादा देर तक फुटबॉल घुमाने वाले इंसान हैं. उन्होंने 22.41 सेकेंड तक ऐसा करके ब्रिटेन के थॉमस कॉनर्स का रिकॉर्ड तोड़ा था.

 

कजुहिरो वतानबे

 

कजुहिरो वतानबे- जापानी फैशन डिजाइनर कजुहिरो वतानबे सिर पर सबसे लंबी चोटी रखने वाले इंसान हैं. गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड के मुताबिक, वतानबे ने अपने सिर पर 3 फीट 8.6 इंच की लंबी चोटी रखकर ये कीर्तिमान स्थापित किया था.

 

रॉल्फ बुचोल्ज

 

रॉल्फ बुचोल्ज- जर्मनी के रॉल्फ बुचोल्ज के नाम चेहरे पर सबसे ज्यादा पियरसिंग करने का रिकॉर्ड है. उन्होंने अपने चेहरे पर 453 पियरसिंग कराई है.

 

शी पिंग

 

शी पिंग- चीन के शी पिंग ने शरीर पर करीब 3 लाख 31 हजार मधुमक्खियां चिपकाकर एक अनोखा वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया था. इन मधुमख्यियों का वजन करीब 33 किलोग्राम था. ये कारनाम कर उन्होंने साल 2008 में रुआन लियांगमिंग का बनाया रिकॉर्ड तोड़ा था.

 


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adminNovember 10, 20204min4580

जब 1982 ख़त्म होते-होते पंजाब के हालात बेक़ाबू होने लगे तो रॉ के पूर्व प्रमुख रामनाथ काव ने भिंडरावाले को हेलीकॉप्टर ऑपरेशन के ज़रिए पहले चौक मेहता गुरुद्वारे और फिर बाद में स्वर्ण मंदिर से उठवा लेने के बारे में सोचना शुरू कर दिया था.

इस बीच काव ने ब्रिटिश उच्चायोग में काम कर रहे ब्रिटिश ख़ुफ़िया एजेंसी एमआई-6 के दो जासूसों से अकेले में मुलाक़ात की थी. रॉ के पूर्व अतिरिक्त सचिव बी रमण ‘काव ब्वाएज़ ऑफ़ रॉ’ में लिखते हैं, “दिसंबर, 1983 में एमआई-6 के दो जासूसों ने स्वर्ण मंदिर का मुआयना किया था. इनमें से कम से कम एक वही शख़्स था जिससे काव ने मुलाक़ात की थी.”

 

भिंडरावाले की एक सभा में मौजूद वरिष्ठ पत्रकार खुशवंत सिंह

 

इस मुआयने की असली वजह तब स्पष्ट हुई जब एक ब्रिटिश शोधकर्ता और पत्रकार फ़िल मिलर ने क्यू में ब्रिटिश आर्काइव्स से ब्रिटेन की कमाँडो फ़ोर्स एसएएस की श्रीलंका में भूमिका के बारे में जानकारी लेने की कोशिश की. तभी उन्हें वहाँ कुछ पत्र मिले जिससे ये पता चलता था कि भारत के कमाँडो ऑपरेशन की योजना में ब्रिटेन की सहायता ली गई थी.

30 वर्षों के बाद इन पत्रों के डिक्लासिफ़ाई होने के बाद पता चला कि प्रधानमंत्री मार्ग्रेट थैचर एमआई-6 के प्रमुख के ज़रिए काव के भेजे गए अनुरोध को मान गई थीं जिसके तहत ब्रिटेन की एलीट कमाँडो फ़ोर्स के एक अफ़सर को दिल्ली भेजा गया था.

 

ब्रिटिश सरकार की जाँच में आए तथ्य सामने

उस ब्रिटिश अफ़सर से भारत ने सलाह ली थी कि किस तरह स्वर्ण मंदिर से सिख चरमपंथियों को बाहर निकाला जाए.

फ़िल मिलर ने 13 जनवरी, 2014 को प्रकाशित ब्लॉग ‘रिवील्ड एसएएस एडवाइज़्ड अमृतसर रेड’ में इसकी जानकारी देते हुए इंदिरा गांधी की आलोचना की थी कि एक तरफ़ तो वो श्रीलंका में ब्रिटिश खुफ़िया एजेंसी के हस्तक्षेप के सख़्त ख़िलाफ़ थीं. वहीं, दूसरी ओर स्वर्ण मंदिर के ऑपरेशन में उन्हें उनकी मदद लेने से कोई गुरेज़ नहीं था.

ब्रिटिश संसद में बवाल होने पर जनवरी 2014 में प्रधानमंत्री कैमरन ने इसकी जाँच के आदेश दिए थे. जाँच के बाद ब्रिटेन के विदेश मंत्री विलियम हेग ने स्वीकार किया था के एक एसएएस अधिकारी ने 8 फ़रवरी से 14 फ़रवरी 1984 के बीच भारत की यात्रा की थी और भारत की स्पेशल फ़्रंटियर फ़ोर्स के कुछ अधिकारियों के साथ स्वर्ण मंदिर का दौरा भी किया था.

तब बीबीसी ने ही ये समाचार देते हुए कहा था कि ‘ब्रिटिश ख़ुफ़िया अधिकारी की सलाह थी कि सैनिक ऑपरेशन को आख़िरी विकल्प के तौर पर ही रखा जाए. उसकी ये भी सलाह थी कि चरमपंथियों को बाहर लाने के लिए हेलीकॉप्टर से बलों को मंदिर परिसर में भेजा जाए ताकि कम से कम लोग हताहत हों.’

अग़वा करने में होना था हेलीकॉप्टर का इस्तेमाल

ब्रिटिश संसद में इस विषय पर हुई चर्चा का संज्ञान लेते हुए इंडिया टुडे के वरिष्ठ पत्रकार संदीप उन्नीथन ने पत्रिका के 31 जनवरी, 2014 के अंक में ‘स्नैच एंड ग्रैब’ शीर्षक से एक लेख लिखा था जिसमें उन्होंने बताया था कि इस ख़ुफ़िया ऑपरेशन को ‘ऑपरेशन सनडाउन’ का नाम दिया गया था.

इस लेख में लिखा था, “योजना थी कि भिंडरावाले को उनके गुरु नानक निवास ठिकाने से पकड़ कर हेलीकॉप्टर के ज़रिए बाहर ले जाया जाता. इस योजना को इंदिरा गाँधी के वरिष्ठ सलाहकार रामनाथ काव की उपस्थिति में उनके 1 अकबर रोड निवास पर उनके सामने रखा गया था. लेकिन, इंदिरा गाँधी ने इस प्लान को ये कहकर अस्वीकार कर दिया था कि इसमें कई लोग मारे जा सकते हैं.”

ये पहला मौक़ा नहीं था जब भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने भिंडरावाले को उनके ठिकाने से पकड़ने की योजना बनाई थी. काव उस समय से भिंडरावाले को पकड़वाने की योजना बना रहे थे जब वो चौक मेहता में रहा करते थे और बाद में 19 जुलाई, 1982 को गुरु नानक निवास में शिफ़्ट हो गए थे.

 

काव ने नागरानी को भिंडरावाले को पकड़वाने की ज़िम्मेदारी सौंपी

रॉ में विशेष सचिव के पद पर काम कर चुके और पूर्व विदेश मंत्री स्वर्ण सिंह के दामाद जी.बी.एस सिद्धू की एक किताब ‘द ख़ालिस्तान कॉन्सपिरेसी’ हाल ही में प्रकाशित हुई है जिसमें उन्होंने भिंडरावाले को पकड़वाने की उस योजना पर और रोशनी डाली है.

उस ज़माने में 1951 बैच के आँध्र प्रदेश काडर के राम टेकचंद नागरानी डीजीएस यानि डायरेक्टर जनरल सिक्योरिटी हुआ करते थे. रॉ की एक कमाँडो यूनिट होती थी एसएफ़एफ़ जिसमें सेना, सीमा सुरक्षा बल और केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल से लिए गए 150 चुनिंदा जवान हुआ करते थे. इस यूनिट के पास अपने दो एमआई हैलिकॉप्टर थे. इसके अलावा वो ज़रूरत पड़ने पर एविएशन रिसर्च सेंटर के विमानों का भी इस्तेमाल कर सकते थे.

1928 में जन्में राम नागरानी अभी भी दिल्ली में रहते हैं. ख़राब स्वास्थ्य के कारण अब वो बात करने की स्थिति में नहीं हैं. सिद्धू ने दो वर्ष पूर्व अपनी किताब के सिलसिले में उनसे कई बार बात की थी.

जीबीएस सिद्धू बताते हैं, ”नागरानी ने मुझे बताया था कि दिसंबर, 1983 के अंत में काव ने मुझे अपने दफ़्तर में बुला कर भिंडरावाले का अपहरण करने के लिए एसएफ़एफ़ के हेलीकॉप्टर ऑपरेशन की ज़िम्मेदारी सौंपी थी. भिंडरावाले का ये अपहरण स्वर्ण मंदिर की लंगर की छत से किया जाना था जहाँ वो रोज़ शाम को अपना संदेश दिया करते थे. इसके लिए दो एमआई हेलीकॉप्टरों और कुछ बुलेटप्रूफ़ वाहनों की व्यवस्था की जानी थी ताकि भिंडरावाले को वहाँ से निकाल कर बगल की सड़क तक पहुंचाया जा सके. इसके लिए नागरानी ने सीआरपीएफ़ जवानों द्वारा क्षेत्र में तीन पर्तों का घेरा बनाने की योजना बनाई थी.”

 

स्वर्ण मंदिर के अंदर जासूसी

सिद्धू आगे बताते हैं, ”ऑपरेशन की योजना बनाने से पहले नागरानी ने एसएफ़एफ़ के एक कर्मचारी को स्वर्ण मंदिर के अंदर भेजा था. उसने वहाँ कुछ दिन रह कर उस इलाक़े का विस्तृत नक्शा बनाया था. इस नक्शे में मंदिर परिसर में अंदर घुसने और बाहर निकलने की सबसे अच्छी जगहें चिन्हित की गईं थीं. उसे भिंडरावाले और उनके साथियों की अकाल तख़्त पर उनके निवास से लेकर लंगर की छत तक सभी गतिविधियों पर भी नज़र रखने के लिए कहा गया था.”

”इस शख़्स से ये भी कहा गया था कि वो हेलीकॉप्टर कमांडोज़ द्वारा भिंडरावाले का अपहरण करने के सही समय के बारे में भी सलाह दे. तीन या चार दिन में ये सभी सूचनाएं जमा कर ली गई थीं. इसके बाद स्वर्ण मंदिर परिसर के लंगर इलाक़े और बच निकलने के रास्तों का एक मॉडल सहारनपुर के निकट सरसवा में तैयार किया गया था.”

 

रस्सों के ज़रिए उतारे जाने थे कमाँडो

नागरानी ने सिद्धू को बताया था कि हेलीकॉप्टर ऑपरेशन से तुरंत पहले सशस्त्र सीआरपीएफ़ के जवानों द्वारा मंदिर परिसर के बाहर एक घेरा बनाया जाना था ताकि ऑपरेशन की समाप्ति तक आम लोग परिसर के अंदर या बाहर न जा सकें.

एसएफ़एफ़ कमाँडोज़ के दो दलों को बहुत नीचे उड़ते हुए हेलीकॉप्टरों से रस्सों के ज़रिए उस स्थान पर उतारा जाना था जहाँ भिंडरावाले अपना भाषण दिया करते थे. इसके लिए वो समय चुना गया था जब भिंडरावाले अपने भाषण का अंत कर रहे हों क्योंकि उस समय भिंडरावाले के आसपास सुरक्षा व्यवस्था थोड़ी ढीली पड़ जाती थी.

योजना थी कि कुछ कमाँडो भिंडरावाले को पकड़ने के लिए दौड़ेंगे और कुछ उनके सुरक्षा गार्डों को काबू में करेंगे. ऐसा अनुमान लगाया गया था कि भिंडरावाले के गार्ड कमाँडोज़ को देखते ही गोलियाँ चलाने लगेंगे. ये भी अनुमान लगा लिया गया था कि संभवत: कमाँडोज़ के नीचे उतरने से पहले ही गोलियाँ चलनी शुरू हो जाएं.

इस संभावना से निपटने के लिए एसएफ़एफ़ कमाँडोज़ को दो दलों में बाँटा जाना था. एक दल स्वर्ण मंदिर परिसर में ऐसी जगह रहता जहाँ से वो भिंडरावाले के गर्भ गृह में भाग जाने के रास्ते को बंद कर देता और दूसरा दल लंगर परिसर और गुरु नानक निवास के बीच की सड़क पर बुलेटप्रूफ़ वाहनों के साथ तैयार रहता ताकि कमाँडोज़ द्वारा पकड़े गए भिंडरावाले को अपने क़ब्ज़े में लेकर पूर्व निर्धारित जगह पर पहुंचाया जा सके.

हेलीकॉप्टर के अंदर और ज़मीन पर मौजूद सभी कमाँडोज़ को ख़ास निर्देश थे कि भिंडरावाले को किसी भी हालत में हरमंदिर साहब के गर्भ गृह में शरण लेने न दी जाए क्योंकि अगर वो वहाँ पहुंच गए तो भवन को नुक़सान पहुंचाए बिना भिंडरावाले को क़ब्ज़े में लेना असंभव होगा.

नागरानी के अनुसार स्वर्ण मंदिर के मॉडल को मार्च 1984 में एसएफ़एफ़ कमांडोज़ के साथ दिल्ली शिफ़्ट कर दिया गया था ताकि सीआरपीएफ़ के साथ उनका बेहतर सामंजस्य बैठाया जा सके. तब तक ये तय था कि इस ऑपरेशन में सिर्फ़ एसएफ़एफ़ के जवान ही भाग लेंगे. सेना द्वारा बाद में किए गए ऑपरेशन ब्लूस्टार की तो योजना तक नहीं बनी थी.

 

काव और नागरानी ने इंदिरा गांधी को योजना समझाई

अप्रैल, 1984 में काव ने नागरानी से कहा कि इंदिरा गाँधी इस हेलीकॉप्टर ऑपरेशन के बारे में पूरी ब्रीफ़िंग चाहती हैं. नागरानी शुरू में इंदिरा गाँधी को ब्रीफ़ करने में हिचक रहे थे. उन्होंने काव से ही ये काम करने के लिए कहा क्योंकि काव को इस योजना के एक-एक पक्ष की जानकारी थी. बाद में काव के ज़ोर देने पर नागरानी काव की उपस्थिति में इंदिरा गाँधी को ब्रीफ़ करने के लिए तैयार हो गए.

उस ब्रीफ़िंग का ब्योरा देते हुए नागरानी ने जीबीएस सिद्धू को बताया था, “सब कुछ सुन लेने के बाद इंदिरा गाँधी ने पहला सवाल पूछा कि इस ऑपरेशन में कितने लोगों के हताहत होने की संभावना है? मेरा जवाब था कि हो सकता है कि हम अपने दोनों हेलीकॉप्टर खो दें. कुल भेजे गए कमाँडोज़ में से 20 फ़ीसदी के मारे जाने की संभावना है.

 

इंदिरा ने ऑपरेशन को मंज़ूरी नहीं दी

नागरानी ने सिद्धू को बताया कि इंदिरा गाँधी का अगला सवाल था कि इस अभियान में कितने आम लोगों की जान जा सकती है. मेरे पास इसका कोई जवाब नहीं था. ये ऑपरेशन बैसाखी के आसपास 13 अप्रैल को किया जाना था. मेरे लिए ये अनुमान लगाना मुश्किल था कि उस दिन स्वर्ण मंदिर में कितने लोग मौजूद रहेंगे. आख़िर में मुझे ये कहना पड़ा कि इस ऑपरेशन के दौरान हमारे सामने आए आम लोगों में 20 फ़ीसदी हताहत हो सकते हैं.

इंदिरा गाँधी ने कुछ सेकेंड सोच कर कहा कि वो इतनी अधिक तादाद में आम लोगों के मारे जाने का जोख़िम नहीं ले सकतीं. ‘ऑपरेशन सनडाउन’ को उसी समय तिलाँजलि दे दी गई.

‘ऑपरेशन सनडाउन’ को इस आधार पर अस्वीकार करने के बाद कि इसमें बहुत से लोग मारे जाएंगे, सरकार ने सिर्फ़ तीन महीने बाद ही ऑपरेशन ब्लूस्टार को अंजाम दिया जिसमें कहीं ज़्यादा सैनिकों और आमलोगों की जान गई और इंदिरा गाँधी को इसकी बहुत बड़ी राजनीतिक क़ीमत चुकानी पड़ी.


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adminNovember 10, 20201min5090

भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (आईएआरआई) के इंदौर स्थित क्षेत्रीय केंद्र ने देश के अलग-अलग भूभागों के लिये गेहूं की दो नयी प्रजातियां विकसित की हैं।

आईएआरआई के क्षेत्रीय केंद्र के प्रधान वैज्ञानिक (कृषि विस्तार) डॉ. अनिल कुमार सिंह ने बताया कि इस केंद्र की विकसित नयी गेहूं प्रजाति ‘पूसा उजाला’ की पहचान ऐसे प्रायद्वीपीय क्षेत्रों के लिये की गयी है जहां सिंचाई की सीमित सुविधाएं उपलब्ध होती हैं। इस प्रजाति से एक-दो सिंचाई में 30 से 44 क्विंटल प्रति हेक्टेयर की पैदावार ली जा सकती है।

उन्होंने बताया, कि “पूसा उजाला चपाती और ब्रेड बनाने के लिये अति उत्तम है। इस गेहूं प्रजाति में प्रोटीन, आयरन और जिंक की अच्छी मात्रा होती है।” सिंह ने बताया कि उनके केंद्र की विकसित एक और नयी गेहूं किस्म ‘पूसा तेजस’ को मध्य भारत के लिये चिन्हित किया गया है। यह प्रजाति तीन-चार सिंचाई में 55 से 75 क्विंटल प्रति हेक्टेयर उत्पादन देने में सक्षम है।

उन्होंने कहा, ‘पूसा तेजस से चपाती के साथ पास्ता, नूडल्स और मैकरॉनी जैसे खाद्य पदार्थ भी बनाये जा सकते हैं। यह प्रजाति प्रोटीन, विटामिन-ए, आयरन और जिंक जैसे पोषक तत्वों से समृद्ध है।’ सिंह ने बताया कि उनके केंद्र की विकसित दोनों नयी किस्मों को केंद्रीय कृषि मंत्रालय की सेंट्रल वैराइटी रिलीज कमेटी की मंजूरी के बाद किसानों तक पहुंचाया जायेगा।

उन्होंने यह बताया, कि बताया कि इंदौर में आईएआरआई के क्षेत्रीय केंद्र की स्थापना वर्ष 1951 में हुई थी। यह केंद्र अब तक गेहूं की 27 प्रजातियां विकसित कर चुका है, जिनमें ‘पूसा उजाला’ और ‘पूसा तेजस’ शामिल हैं।


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adminNovember 10, 20201min4780

वर्जिन हाइपरलूप. अरबपति रिचर्ड ब्रैनसन की कंपनी. इसने हाई-स्पीड पाॅड सिस्टम की यात्रियों के साथ पहली टेस्टिंग सफलतापूर्वक कर ली है. वर्जिन हाइपरलूप इस टेक्नोलाॅजी की टेस्टिंग करने वाली दुनिया की पहली कंपनी बन गई है. यह टेस्टिंग अमेरिका के नेवाडा राज्य के लाॅस वेगास में की गई. इसकी अधिकतम स्पीड 172 किमी प्रति घंटे थी.

इसमें जिन दो लोगों ने यात्रा की, वो हैं- वर्जिन हाइपरलूप के चीफ टेक्नोलाॅजी ऑफिसर जोश गेगल और पैसेंजर एक्सपीरियंस डायरेक्टर सारा लुचियान. कंपनी के मुताबिक, अगली सवारी पुणे यूनिवर्सिटी से इंजीनियरिंग कर चुके और वर्जिन हाइपरलूप कंपनी के कर्मचारी तनय मांजरेकर करेंगे.

बता दें कि यह कंपनी काफी समय से टेस्टिंग कर रही है. बिना यात्री के लगभग 400 बार टेस्टिंग कर चुकी है. इस बार यात्रियों के साथ पहली बार टेस्टिंग की गई है. पहली यात्रा सफल होने पर वर्जिन हाइपरलूप के चेयरमैन सुल्तान अहमद बिन सुलेयम ने कहा कि उनके लिए यह सौभाग्य की बात है कि उन्होंने अपनी आंखों के सामने इतिहास बनता देखा.

आइए जानते हैं कि हाइपरलूप क्या होता है और क्या है इसकी खासियत.

 

क्या होता है हाइपरलूप

हाइपरलूप ट्रांसपोर्टेशन का एक ऐसा नया तरीका है, जिसकी मदद से दुनिया में कहीं भी लोगों को या वस्तुओं को तेजी के साथ सुरक्षित एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाया जा सकता है. हाइपरलूप एक कैप्सूल रूपी मैग्नेटिक ट्रेन है, जो 1000-1300 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से दौड़ सकती है. इस तकनीक को हाइपरलूप इसलिए कहा जाता है, क्योंकि इसमें परिवहन एक लूप के जरिए से होता है, जिसकी स्पीड बहुत अधिक होती है. इसकी सबसे खास बात यह है कि पर्यावरण पर इसका खास प्रभाव भी नहीं पड़ता है.

हाइपरलूप तकनीक का आइडिया टेस्ला मोटर्स कंपनी के सीईओ और सह-संस्थापक इलाॅन मस्क को 2013 में आया था. इलाॅन मस्क ने इसे पांचवा ट्रांसपोर्टेशन मोड बताया था. वहीं ‘वर्जिन हाइपरलूप’ को साल 2014 में पहली बार शुरू किया गया था.

 

हाइपरलूप कैसे काम करता है

# इस तकनीक में विशेष प्रकार से डिजाइन किए गए कैप्सूल या पाॅड्स का इस्तेमाल किया जाता है. सबसे पहले इन पाॅड्स में यात्रियों को बिठाया जाता है या कार्गो लोड किया जाता है. इसके बाद इन पाॅड्स को बड़े-बड़े पाइपों में इलेक्ट्रिकल चुंबक पर चलाया जाता है. चुंबकीय प्रभाव से ये पाॅड्स ट्रैक के कुछ ऊपर उठ जाते हैं. इससे घर्षण कम हो जाता है, जिससे इसकी स्पीड तेज हो जाती है.

# ट्रांसपोर्टेशन की इस तकनीक में बड़े-बड़े पाइपों के अंदर वैक्यूम जैसा वातावरण तैयार किया जाता है. यानी उनमें से हवा को पूरी तरह से निकाल दिया जाता है, ताकि भीतर घर्षण न हो.

# इन वाहनों में पहिए नहीं होते है. वे खाली स्थान में तैरते हुए आगे बढ़ते हैं.

 

क्या है इसकी खासियत

# पायलट की त्रुटि और मौसम संबंधी खतरों से बचने के लिए हाइपरलूप को स्वचालित वाहन के रूप में विकसित किया गया है. यह एक स्वच्छ प्रणाली है, क्योंकि इसमें से कार्बन का उत्सर्जन नहीं होता है. इसके साथ ही इसमें बिजली भी कम खर्च होती है.

# खतरनाक ग्रेड क्राॅसिंग से बचने और वन्यजीवों को हानि से बचाने के लिए इसका निर्माण भूमिगत सुरंगों या जमीन के ऊपर स्तंभों पर किया जाता है.

# अमेरिका में सबसे पहले न्यूयॉर्क और वॉशिंगटन के बीच हाइपरलूप ट्रेन सिस्टम चलाया जाना है. इस ट्रेन सिस्टम के चल जाने के बाद वॉशिंगटन से न्यूयॉर्क का सफर मात्र 30 मिनट में किया जा सकेगा. यह पॉड सिस्टम कमर्शियल जेट फ्लाइट से दोगुना और हाई-स्पीड ट्रेन से 4 गुना तेज है. इसकी स्पीड जापान की बुलट ट्रेन से भी दोगुनी है.

# भारत के लिहाज से बात करें, तो पुणे और मुंबई के बीच अभी 3 से 4 घंटे सफर में लगते हैं. हाइपरलूप ट्रेन से तो ये यात्रा 20-25 मिनट में ही हो जाए.

 

भारत के लिए क्या हैं इसके मायने

सफर को सुगम और जल्द पूरा करने के लिए वर्जिन हाइपरलूप भारत में भी कई रूट पर ऐसी ट्रेन चलाने की योजना बना रही है. इसमें मुंबई-पुणे, बेंगलुरु सिटी-बेंगलुरु एयरपोर्ट, अमृतसर-लुधियाना-चंडीगढ़, भोपाल-इंदौर-जबलपुर रूट शामिल हैं. साल 2019 के अगस्त महीने में महाराष्ट्र सरकार ने वर्जिन हाइपरलूप को मुंबई-पुणे हाइपरलूप  प्रोजेक्ट को मंजूरी दे दी थी. उस वक्त महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस थे. मुंबई-पुणे प्रोजेक्ट के पहले फेज में 11.8 किलोमीटर लंबा ट्रैक बनना था, जिसकी लागत 10 अरब डॉलर थी. इसे बनने में लगभग ढाई साल लगना था. लेकिन महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे की अगुवाई वाली गठबंधन सरकार बनने के बाद प्रोजेक्ट को रोक दिया गया था.

महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजित पवार ने कहा था-

“सरकार की ऐसी आर्थिक स्थिति नहीं है कि हाइपरलूप जैसे कॉन्सेप्ट को प्रयोग में लाया जा सके. सरकार फिलहाल ट्रांसपोर्ट के दूसरे माध्यम पर विचार कर रही है. इस तरह के काॅन्सेप्ट को कहीं दूसरी जगह आजमाया जाए. अगर वह सफल होता है, तो हम इसकेे बारे में सोच सकते हैं.”

लेकिन इसके बाद भी वर्जिन ग्रुप लगातार भारत से हाइपरलूप प्रोजेक्ट को लेकर बात कर रही है. इस साल की  शुरूआत में भी मुंबई-दिल्ली के बीच हाइपरलूप ट्रेन चलाने को लेकर वर्जिन ग्रुप ने अपना प्रस्ताव केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी के सामने रखा था. कोरोना के चलते अब तक इस प्रोजेक्ट पर बात नहीं बढ़ पाई है.


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adminNovember 10, 20202min4160

IPL2020 खत्म होने वाला है. हर बार की तरह इस बार भी इस टूर्नामेंट ने कई कमाल की यादें दी. कई प्लेयर्स धूमकेतु की तरह आए और छा गए. अपने प्रदर्शन से तमाम उम्मीदें जगा दीं. तो वहीं कुछ फ्लॉप भी रहे.

फ्लॉप और हिट दोनों लिस्ट कई ऐसे नाम रहे जिन्हें खुद से जोड़ने के लिए टीमों ने खूब रकम खर्च की थी. इस आर्टिकल में हम बात करेंगे IPL2020 के सबसे महंगे फ्लॉप प्लेयर्स की.

 

# आरोन फिंच

लिस्ट का पहला नाम आरोन फिंच, ऑस्ट्रेलिया के कप्तान. डीविलियर्स और कोहली पर लोड कम करने के लिए बैंगलोर ने इस बार आरोन फिंच पर दांव लगाया. टीम ने सोचा होगा कि अनुभवी फिंच के आने से टीम का टॉप ऑर्डर और मजबूत हो जाएगा. कोहली तीसरे नंबर पर बैटिंग करेंगे तो चौथे नंबर पर डीविलियर्स आएंगे और ये दोनों साथ मिलकर कमाल करेंगे.

लेकिन इसके लिए जरूरी था कि फिंच अच्छी बैटिंग करें. फिंच से यह हो ना पाया. 4.40 करोड़ में खरीदे गए फिंच इस सीजन कुल 268 रन ही बना पाए. अब हम वो गणित नहीं बताएंगे कि उनका एक रन कितने लाख का बना, वो आप लोग देखें.

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हम ये जरूर बताएंगे कि फिंच ने इस सीजन 12 पारियां खेली. इन पारियों में उनका हाईएस्ट स्कोर रहा, 52 रन. फिंच ने इस सीजन 22.33 की ऐवरेज और 111.20 की स्ट्राइक रेट से रन बनाए. हालांकि आंकड़े देखेंगे तो वह इस सीजन RCB के लिए रन बनाने वालों की लिस्ट में चौथे नंबर पर दिखेंगे.

उनसे ज्यादा रन सिर्फ देवदत्त पडिकल, विराट कोहली और एबी डीविलियर्स ने बनाए. इन तीनों ने 450+ रन बनाए हैं. और जाहिर है कि टीम का बड़ा स्टार होने के नाते फिंच को इन चारों से इतना पीछे नहीं होना चाहिए था.

# पीयूष चावला

चावला सालों से IPL खेल रहे हैं. कई टीमों के लिए खेल चुके पीयूष ने IPL में कई दफ़ा मैच विनिंग परफॉर्मेंस की है. उनके पिछले प्रदर्शन को देखते हुए ही चेन्नई सुपर किंग्स ने उन्हें 6.75 करोड़ रुपये में खरीदा. हालांकि उन्हें खरीदने के पीछे एक वजह यह भी थी कि चेन्नई ने पूरी टीम चेपॉक को ध्यान में रखकर बनाई थी. ऐसे में उन्हें पीयूष से काफी उम्मीदें थीं. लेकिन कोरोना के चलते टूर्नामेंट UAE में शिफ्ट हो गया.

चावला नई कंडीशंस में ढलने में नाकाम रहे. इस सीजन उन्हें सिर्फ सात मैच ही खेलने को मिले. इन मैचों में कई बार वह अपने कोटे के पूरे चार ओवर भी नहीं फेंक पाए. IPL2020 के सात मैचों में चावला ने 21 ओवर फेंके और उन्हें सिर्फ छह विकेट ही मिले. इस सीजन चावला का बेस्ट रहा 33 रन देकर दो विकेट. इस सीजन उनका ऐवरेज 31.83 और स्ट्राइक रेट 21 का रहा. चावला ने इस बार IPL में नौ से ज्यादा की इकॉनमी से रन लुटाए.

 

# शेल्डन कॉट्रेल

IPL2020 ऑक्शन से ठीक पहले शेल्डन कॉट्रेल और विराट कोहली के सेलिब्रेशन ने खूब सुर्खियां बटोरी थीं. कोहली को बोल्ड कर कॉट्रेल ने अपना सेलिब्रेशन किया तो कोहली भी बदला लेने में पीछे नहीं रहे. इसके बाद हुई नीलामी. 50 लाख की बेस प्राइज वाले कॉट्रेल के लिए खूब बोलियां लगीं. अंत में वह 8.5 करोड़ में किंग्स इलेवन पंजाब से जुड़े.

पंजाब को उम्मीद थी कि कॉट्रेल और शमी की जोड़ी कमाल कर देगी. लेकिन ऐसा हो नहीं पाया. कॉट्रेल को बल्लेबाजों ने मनचाहे अंदाज में धुना. हालात ऐसे हो गए कि वह इस सीजन सिर्फ छह मैच ही खेल पाए. इन छह मैचों में भी कई बार वह अपने कोटे के पूरे ओवर नहीं फेंक पाए.

 

 

कॉट्रेल ने 6 मैचों में कुल 20 ओवर बोलिंग की. इन ओवर्स में सिर्फ छह विकेट लेने वाले कॉट्रेल की इकॉनमी 8.80 की रही. जबकि उनका ऐवरेज 29.33 और स्ट्राइक रेट 20 का रहा. अगर आपको ना याद हो तो जान लें- राहुल तेवतिया ने एक ही ओवर में पांच छक्के कॉट्रेल को ही मारे थे.

 

# ग्लेन मैक्सवेल

मैक्सवेल इस सीजन के सबसे बड़े फ्लॉप कहे जा सकते हैं. पंजाब ने उन्हें 14 में से 13 मैचों में मौका दिया. 11 बार उन्हें बैटिंग भी मिली. लेकिन मैक्सी का बल्ला नहीं चला तो नहीं चला. इस सीजन मैक्सवेल एक भी छक्का नहीं मार सके.

11 पारियों में सिर्फ 108 रन बना पाए मैक्सवेल का स्ट्राइक रेट 101.88 का रहा. पंजाब की टीम ने हरसंभव कोशिश कर ली लेकिन मैक्सवेल इस सीजन पूरी तरह से फ्लॉप रहे. 10.75 करोड़ की बड़ी रकम में खरीदे गए मैक्सवेल से पंजाब ने बोलिंग भी कराई. सोचा गया कि बल्ले से ना सही, गेंद से ही कुछ हो जाए. लेकिन… नहीं हो पाया.

 

 

मैक्सवेल ने सात पारियों में कुल 21 ओवर बोलिंग की. इन ओवर्स में उन्होंने 8.04 की इकॉनमी से रन देकर तीन विकेट लिए.

 

# पैट कमिंस

अब बात बीते ऑक्शन की सबसे महंगी खरीद की. नाम होता है पैट कमिंस और खेलते हैं ऑस्ट्रेलिया से. कमिंस के लिए ऑक्शन में ऐसी मार मची कि देखते ही देखते वह IPL2020 के सबसे महंगे प्लेयर बन गए. कोलकाता नाइट राइडर्स ने उन्हें15.50 करोड़ में खरीदा. अब पैसा प्रधान समाज में इत्ती मुद्रा मिलेगी तो स्क्रुटनी भी तगड़ी होगी.

वही हो रही है. कमिंस ने पूरे 14 मैच खेले. 52 ओवर फेंके, लेकिन विकेट मिले सिर्फ 12. उन्होंने 2-4 मैचों में जरूर वर्ल्ड क्लास खेल दिखाया लेकिन ओवरऑल संतुष्ट नहीं कर पाए. कमिंस की इस सीजन की इकॉनमी 7.86 रही. ये अलग बात है कि पहले 10 मैचों में सिर्फ तीन विकेट लेने के बाद उन्होंने बेहतरीन वापसी की. आखिरी चार मैचों में उनके नाम नौ विकेट रहे.

 

 

हालांकि बल्ले से उन्होंने अपनी टीम की हेल्प करने की कोशिश जरूर की. कोलकाता के लिए सबसे ज्यादा रन बनाने वालों की लिस्ट में वह सुनील नरेन और आंद्रे रसल, दोनों से ऊपर रहे. कमिंस ने इस सीजन की 11 पारियों में 146 रन बनाए. इसमें एक हाफ सेंचुरी भी शामिल थी.


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adminNovember 10, 20204min3860

मुंडया थकता नहीं कर-कर के, तेरियां तरीफां,
जी करदा दिला दूं तैनूं बुर्ज़ ख़लीफ़ा.
ओ तैनूं बुर्ज़ ख़लीफ़ा…

अक्षय कुमार की लेटेस्ट मूवी, ‘लक्ष्मी’ का ट्रेंडिंग गाना. ‘लक्ष्मी’ 09 नवंबर, 2020 को रिलीज़ हुई. डिज़्नी हॉटस्टार पर. पहले आप गीत ही देख लीजिए, फिर आगे की बात करते हैं. या फिर आप ड्रीम इलेवन में टीम बना लीजिए, गीत भी हम ही देख लेते हैं. (ये था इस स्टोरी का पहला पीजे.)

 

 

देखा गीत? इस गीत में सब कुछ बड़ा अच्छा-अच्छा और हरा-हरा सा है न? 5 ट्रिलियन वाली इकॉनमी के सरकारी आंकड़ों सा. पर एक छोटी सी चीज़ मिसिंग है. वही ‘छोटी सी चीज़’ जिसका ट्रम्प के ट्वीट और बयानों में मिसिंग रहने का लंबा इतिहास है- ‘वास्तविकता’. और वो हम आपको बताते हैं. वास्तविकता ये है कि बुर्ज़ ख़लीफ़ा की दीवारों पर 3 मिनट के विज्ञापन की कॉस्ट पड़ती है 50 लाख से एक करोड़ रुपए के बीच. यानी अपनी प्रेयसी को बुर्ज़ ख़लीफ़ा दिलाने की बात तो छोड़ ही दें, अगर आप उसकी तस्वीर भी 3 मिनट तक बुर्ज़ ख़लीफ़ा की दीवारों पर लगाएंगे, तो आपकी लव-कॉस्टिंग, आउट ऑफ़ बजट चली जाएगी. और जहां तक हमें सूचना है, वित्त मंत्री ने प्रेम के लिए कोई ‘राहत पैकेज’ की बात आज तक नहीं की है. बेशक उनके बजट में 100 दर्द हों, 100 राहतें…

 

इनकम टैक्स डिपार्टमेंट को नहीं, ख़ुद निर्मला सीतारमण को इस गीत पर स्वतः संज्ञान लेना चाहिए. (PTI)

 

रही बात पूरे बुर्ज़ ख़लीफ़ा की, तो उसका कुल मूल्य ठहरा- डेढ़ बिलियन डॉलर. मने 1,50,00,00,000 डॉलर. मने 1,10,75,76,75,000 रूपये. बोले तो, ग्यारह हज़ार पिचहत्तर करोड़ रुपए.

और ये तो इसकी कॉस्ट है. प्राइस की बात तो हमने की ही नहीं. न GST जोड़ा, न एजुकेशन सेस.

कितना हुआ ये अमाउंट वैसे? गणित के बदले हिंदी में बोलें तो, बहुत-बहुत ज़्यादा. इतने रुपयों में भारत के एक-एक जीवित व्यक्ति को एक दिन, सुबह-शाम का भोजन, विद ब्रेकफास्ट एंड टी मिल जाए. या फिर अगर ‘कौन बनेगा करोड़पति’ रोज़ आता रहे और हर दिन एक व्यक्ति करोड़पति बने, तो भी ये धारावाहिक 30 साल तक अबाध्य रूप से चल सकता है. वो भी तब, अगर इंट्रेस्ट ऑन इन्वेस्टमेंट की बात न की जाए. चलिए उससे अमिताभ बच्चन का भुगतान कर दिया जाएगा.

 

बुर्ज़ ख़लीफ़ा पर इंडियन फ़्लैग. अगर कोई भारतीय इसे किसी दूसरे भारतीय को गिफ़्ट में दे दे, तो ये नज़ारे केवल इंडिपेंडेस डे पर ही नहीं, रोज़ दिखेंगे.

 

तुलसीदास के ‘हनुमंत जी की पूंछ में लगन न पाई आग…’ वाले कथन से क्यू लेकर अगर बात करें, तो इतने रुपयों में न केवल गंगा-जमुना स्वच्छ हो जाएंगी, बल्की सरस्वती भी धरती पर अवतरित हो जाएंगी.

लब्बोलुआब ये कि बुर्ज़ ख़लीफ़ा दिलाने की बात कहकर अक्षय कुमार कुछ ज़्यादा ही आगे बढ़ गए. जिस तरह ‘लक्ष्मी’ मूवी का पुराना नाम धार्मिक भावना को चोट करता था, उसी तरह फ़िल्म का ये गीत आर्थिक भावना को करता है. कुछ लोगों को ये आम्रपाली और जेपी की याद दिलाता है. तू छेड़ न मेरे दर्दां नूं…

मतलब अक्षय सा’ब, तब तक तो ठीक था, जब तक आप चंडीगढ़ में फ़्लैट दिलाने की बात कर रहे थे. कनाडा में भी दिला देते, तो मान लेते. चल जाता. पर बुर्ज़ ख़लीफ़ा? सीरियसली?

 

 

कुछ और फ़ैक्ट्स, जो बुर्ज़ ख़लीफ़ा से जुड़े हैं, वो ये कि 4 जनवरी, 2009 को बनकर तैयार हुई 820+ मीटर की इस बिल्डिंग में कुल 168 मंज़िलें हैं. ये इतनी ऊंची है कि 100 किलोमीटर दूर से भी दिखाई दे जाती है.

बाई दी वे, वो कौन मासूम लोग हैं, जो इसे युगल गीत, यानी दो गाना, यानी ड्यूएट बता रहे हैं. अरे मासूमों, ये दरअसल एक विज्ञापन है. प्रोडक्ट प्लेसमेंट. रियल एस्टेट वालों का. जो पहले खुल्ले में प्रॉमिस करते थे. 3-4 BHK. लग्ज़री अपार्टमेंट. अलां लोकेशन. फ़लां बिल्डर्स. ढिमका फ़ैसिलिटी. लेकिन फिर मोदी जी ने एक तरफ़ ढेर सारे शौचालय खोले और दूसरी तरफ़ रेरा लाए. तो शौच और रियल एस्टेट बिल्डर्स की प्रॉमिस, दोनों ही खुले में होना बंद हो गईं. गोया शराब, सिगरेट के विज्ञापन या ऑल्ट बालाजी का सब्सक्रिप्शन या गूगल क्रोम की इंकोगनिटो विंडो.

 

आम्रपाली के ख़रीदार, प्रोटेस्ट करते हुए. (तस्वीर: इंडिया टुडे)

 

प्लान ये था कि जब-जब आपके प्रेमी या प्रेमिका बुर्ज ख़लीफ़ा के सामने अक्षय कुमार को गाते हुए देखेंगे, तो उनके मन में कसक जगेगी. कि कियारा अगर ‘बुर्ज डिजर्विंग ब्यूटीफ़ुल’ हैं, तो हम भी कुछ नहीं भी तो 2-3 BHK इन ग़ाज़ियाबाद, नोएडा एक्सटेंशन वाला हुस्न तो रखते ही हैं. और सदियों पहले गुलाब के फूल से शुरू हुआ गिफ़्ट का ये सिलसिला, ‘इंफ़्लेशन’ की फ़ास्ट लेन से होता हुआ फ़्लैट या पैंट हाउस तक जा पहुंचेगा. ऑफ़ कोर्स, ताजमहल जैसे इक्का-दुक्का एक्सेप्शन्स को छोड़कर.

 

उपमाओं में म्हारा ताजमहल, बुर्ज़ ख़लीफ़ा से कम है के? (तस्वीर: PTI)

 

इसलिए इस गीत के नीचे वैधानिक चेतावनी होनी चाहिए- ‘कमज़ोर दिल वाले, जो उस मकान की किश्त भर रहें हैं, जिसका पोज़ेशन उन्हें सन 2075 में मिलेगा, या जो प्राइम लोकेशन पर फ़्लैट नहीं एफ़ोर्ड कर सकते, इस गीत को न देखें.’

और बाकी लोग अगर देख रहे हैं, तो जान लीजिए कि नायक, नायिका से कोई वादा नहीं कर रहा. बस अपने मन की इच्छा बता रहा है. ‘जी करता दिला दूं…’

जैसे माया सारभाई की इच्छा थी अपनी मिडिल क्लास बहू मोनीशा का क़त्ल करने की. या जैसे कुछ लोगों कि इच्छा है, US में कमल खिलाने की. और अगर आपने इंटर में प्रायिकता पढ़ी है, तो यक़ीन कीजिए US में कमल खिलने की ज़्यादा संभावना है, प्रेमी द्वारा प्रेमिका के लिए बुर्ज़ ख़रीद लाने की तुलना में. बल्कि सुनने में आ गया है ‘कमला’ तो वहां खिल भी गई हैं. और वैसे, POTUS-LOTUS के बीच भी तो एक टाइपो भर का ही अंतर है.

 

उम्मीद है कि डेमोक्रेट्स के जीतने के बाद, ‘कमला हारिस, तो जीतिस कौन’ टाइप के चुटकुले बंद हो जाएंगे. (PTI)

 

पर मुझे ‘बुर्ज़ ख़लीफ़ा’ की इच्छाभर से भी आपत्ति है. क्यों है? एक ट्रेजिक चुटकुला सुनिए:

कुछ भिखारी लाइन से बैठे थे. लॉकडाउन के चलते उनका धंधा, मंदा चल रहा था. फटे कपड़ों और क़रीने से पिचकाए गए कटोरों और उस पर खुद से ही रख दिए गए कुछ सिक्कों पर भी ‘रिटर्न ऑन इंवेसमेंट’ ज़ीरो था. ऐसे में एक भिखारी जिसने दो दिन से कुछ नहीं खाया, वो खाने की एक्टिंग करने लगा. उसे बग़ल के एक भिखारी ने टोका-
पहला भिखारी: अबे! क्या कर रहा है?
दूसरा भिखारी: खाने की एक्टिंग कर रहा हूं.
पहल भिखारी: क्या खा रहा?
दूसरा भिखारी: खिचड़ी. प्याज़ और अचार.
पहला भिखारी: जब एक्टिंग ही करनी है, तो कुछ अच्छा खा. मलाई कोफ्ता. दाल मखनी. दम पुख्त.
दूसरा भिखारी: मैं खा तो लूं ये सब. पर इतना सब पचाएगा कौन? तू?

तो इस चुटकुले से ये शिक्षा मिलता है कि अगर सोते हुए सपना भी सोने का आ रहा है, तो उस सपने में भी ‘तेते पांव पसारिए, जेते लंबी सौर.’ मतलब सपना भी औक़ातानुसार देखना चाहिए. ग़लत कहते हैं वो विज्ञापन वाले. मेक इट लार्ज. वैसे भी वो ‘मेगा म्यूज़िक’ का विज्ञापन है. ये ‘मेगा म्यूज़िक’ क्या होता है, पता नहीं. पर ये पता है कि ये शराब नहीं होती.

और हां. अगर मेक इट लार्ज करना ही है, तो बता देते हैं कि मानवों द्वारा बनाई गई सबसे महंगी बिल्डिंग, इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन है. आउट ऑफ़ दी वर्ल्ड. शब्दशः ये ‘है ही नहीं इस दुनिया की.’ पृथ्वी की अंदरूनी कक्षा में स्थित है. और इसका कुल मूल्य? 150 बिलियन अमेरिकन डॉलर. मतलब इस अमाउंट का अनुवाद ‘बुर्ज़ ख़लीफ़ा’ में करो तो, कुल 10 बुर्ज़ ख़लीफ़ा.

 

इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन. 22 साल पहले वो भी नवंबर का महीना था, जब इसका काम शुरू हुआ था.  (तस्वीर: नासा)

 

वैसे गाना क्या होता फिर:

मुंडया थकता नहीं कर-कर के, तेरियां इमेजिनेशन,
जी करदा दिला दूं तैनूं इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन.
ओ इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन…

ये स्टोरी हल्के-फुल्के ढंग से लिखी गई है, जिसमें ढेर सारी क्रिएटिव लिबर्टी ले ली गई है. बोले तो इसको एक आंख से पढ़ें और दूसरे से निकाल दें.


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adminNovember 10, 20201min4660

दीपावली का त्योहार इस साल शनिवार, 14 नवंबर को मनाया जाएगा. दिवाली (Diwali 2020) के शुभ मौके पर इस साल ग्रहों का अद्भुत संयोग बन रहा है. दिवाली पर धन और ज्ञान का कारक बृहस्पति ग्रह अपनी स्वराशि धनु और शनि (Shani) अपनी स्वराशि मकर में रहेगा. जबकि शुक्र ग्रह कन्या राशि में रहेगा. ज्योतिषविदों का कहना है कि दिवाली पर ऐसा संयोग 499 साल बाद बन रहा है. इससे पहले ग्रहों की ऐसी स्थिति 1521 में देखी गई थी.

इस वर्ष एक बड़ा संयोग ये भी बन रहा है कि दिवाली और नरक चतुदर्शी एक ही दिन होगी. नरक चतुर्दशी को छोटी दिवाली भी कहते हैं. इस दिन सुबह स्नान करके यम तर्पण और शाम के वक्त आंगन में दीप जलाने और दान करने का बड़ा महत्व होता है.

नरक चतुर्दशी पर स्नान का शुभ मुहूर्त सुबह 5:23 से सुबह 6:43 बजे तक रहेगा. इस तिथि को नरक चतुर्दशी के साथ दिवाली भी मनाई जाएगी. हालांकि चतुर्दशी तिथि दोपहर 1 बजकर 16 मिनट तक ही रहेगी. इसके बाद अमावस्या तिथि आरंभ हो जाएगी जो 15 नवंबर की सुबह 10.00 बजे तक रहेगी. इस अवधि में दिवाली मनाई जाएगी.

 

ग्रहों की स्थिति से किसे लाभ

 

बृहस्पति ज्ञान और शनि धन-संपत्ति के कारक माने जाते हैं. दीपावली पर गुरु-शनि के स्वराशि में रहने से कई लोगों का भाग्य चमक सकता है. यह दीपावली आपके लिए कई शुभ संकेत लेकर आएगी. ज्योतिषियों के मुताबिक वृषभ, कर्क, तुला और कुंभ राशि के जातकों के लिए समय काफी शुभ रहने वाला है. जबकि मिथुन, सिंह और कन्या राशि के जातकों को थोड़ा संभलकर रहना होगा.

ज्योतिषविदों का कहना है कि 11 नवंबर से 14 नवंबर तक सर्वार्थ सिद्धि योग भी बन रहा है. दिवाली, धनतेरस और सर्वार्थ सिद्धि योग के बीच खरीदारी करना बड़ा शुभ होगा. खासतौर से कोई वाहन खरीदने या व्यापार के शुभारंभ के लिए यह समय बड़ी ही खास रहने वाला है.

दिवाली के दिन हनुमानजी, यमराज, चित्रगुप्त, कुबेर, भैरव, कुलदेवता और पितरों का पूजन करना ना भूलें. मां लक्ष्मी के साथ भगवान विष्णु का भी पूजन करें. पूजा के वक्त श्री सूक्त का पाठ करें. चाहें तो विष्णुसहस्रनाम, गोपाल सहस्रनाम का पाठ भी कर सकते हैं.


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adminNovember 6, 20201min6280

व्हाट्सऐप में जल्द ही आपको “डिसैपीयरिंग मैसेज” का नया विकल्प मिलेगा, जो मैसेज भेजने वाले और मैसेज प्राप्त करने वाले के बीच हुई चैट को सात दिन बाद ख़ुद-ब-ख़ुद ही ग़ायब कर देगा.

मतलब अगर आपने इस विकल्प को एनेबल किया तो सात दिन पुराने मैसेज अपने आप हटते जाएंगे.

फ़ेसबुक के स्वामित्व वाले इस ऐप के दुनिया भर में दो अरब यूज़र हैं. व्हाट्सऐप का कहना है कि इस नई सेटिंग से चैट को प्राइवेट रखने में मदद मिलेगी.

हालाँकि व्हाट्सऐप ने ये भी कहा कि अगर मैसेज प्राप्त करने वाला किसी मैसेज, फ़ोटो या वीडियो को सात दिन बाद भी अपने पास रखना चाहता है तो वो पहले ही उसका स्क्रीनशॉट लेकर रख सकता है या उसे फ़ॉरवर्ड कर सकता है.

यानी आपने तो डिसैपीयरिंग मैसेज का विकल्प चुन लिया, लेकिन सामने वाला फिर भी मैसेज को कहीं और सेव करके रख सकता है.

“डिसैपीयरिंग मैसेज” का विकल्प इस साल नवंबर के अंत तक दिखने लगेगा.

एक ब्लॉग में कंपनी ने कहा कि मैसेज सात दिन में एक्सपायर होने का विकल्प मिलने से “दिमाग़ की शांति मिलेगी कि आपकी कोई बातचीत परमानेंट नहीं है. साथ ही आप प्रैक्टिकल भी रहेंगे ताकि आप ये भूल ना जाएं कि आप किस बारे में चैट कर रहे थे.”

फ़ेसबुक के संस्थापक मार्क ज़करबर्ग ने अप्रैल 2019 में यूज़र्स को अधिक गोपनीयता प्रदान करने के लिए सोशल नेटवर्क में कई बदलाव करने का वादा किया.

उनके प्रस्तावित बदलावों में ऐसे ऑप्शन पेश करना शामिल था जिसके ज़रिए सामग्री बहुत कम वक़्त तक सोशल नेटवर्क पर रहे. डिसैपीयरिंग मैसेज का विकल्प इसी का हिस्सा है.

कंपनी अपने मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स व्हाट्सऐप, इंस्टाग्राम और फ़ेसबुक मैसेंजर को साथ जोड़ने की कोशिश कर रही है ताकि इनमें से किसी भी एक प्लेटफॉर्म से दूसरे पर सामग्री साझा की जा सके. यानी आप अपने व्हाट्सऐप से किसी को उसके फ़ेसबुक या इंस्टाग्राम पर भी मैसेज कर पाएंगे.

व्हाट्सऐप के प्रतिद्वंद्वी मैसेजिंग ऐप स्नैपचैट में “डिसैपीयरिंग मैसेज” का विकल्प पहले से मौजूद है.

 


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adminNovember 6, 20201min3860

मनोज कुमार केवी एक एमबीबीएस स्नातक हैं और कोविड​​-19 के फ्रंटलाइन वर्कर्स में से एक हैं, जो कर्नाटक के गडग जिला अस्पताल में डॉक्टर के रूप में कार्यरत हैं। उनकी मां ने उनकी परवरिश की, जिन्होंने एक दुर्घटना में अपने पिता को खोने के बाद एक कृषि मजदूर के रूप में काम किया था।

एक युवा लड़का होने के बाद से डॉक्टर बनने का उनका दृढ़ निश्चय था। 14 साल की उम्र में, मनोज एक जानलेवा स्वास्थ्य स्थिति से बच गया जिसने उनके संकल्प को आगे बढ़ाया। हालांकि, शिबुलाल फैमिली फिलेंथ्रॉफिक इनिशियेटिव से उच्च अध्ययन के लिए छात्रवृत्ति कार्यक्रम, विद्यादान के समर्थन के बिना उनके सपने को साकार करना मुश्किल था।

वह उच्च अध्ययन के लिए धन की आवश्यकता में 30,000 आवेदकों में से है, जिसमें से 1,000 का चयन किया जाता है।

कुमारी शिबूलाल, 1999 में स्थापित शिबुलाल फैमिली फिलेंथ्रॉफिक इनिशियेटिव (SFPI) की फाउंडर और चेयरपर्सन कहती हैं, “कई साल पहले कर्नाटक में विद्यादान कार्यक्रम में शामिल होने के दौरान, मनोज ने बताया कि वह अन्य लोगों की ज़िंदगी को डॉक्टरों की तरह बचाना चाहते थे जिन्होंने उन्हें बचाया और उनकी माँ को भी एक आरामदायक जीवन प्रदान किया। आज, वह दोनों कर रहे हैं।”

वह कहती है, इसके पीछा मकसद है कि कम उम्र के बच्चों को एक समग्र शिक्षा देने में मदद करना है जो उन्हें अपने समुदायों की मदद करने में सक्षम बनाएगा। परोपकारी संगठन ने एक और पहल अंकुर की शुरूआत, बेंगलुरू और कोयम्बटूर में कैम्पस के साथ सीबीएसई से मान्यता प्राप्त स्कूल समिता एकेडमी में एक छात्र आवासीय छात्रवृत्ति के रूप में की।

इन वर्षों में, संगठन ने 2012 में नेतृत्व विकास के लिए शिक्षालोकम और एडुमेंटम, 2015 में शिक्षा में सामाजिक उद्यम के लिए एक ऊष्मायन सहित कई कार्यक्रमों के साथ काम किया है। साथिया उन छात्रों के लिए एक और कार्यक्रम है जो आतिथ्य में अपना कैरियर बनाना चाहते हैं।

 

जीवन संवारना

कहा जाता है कि एक हजार मील की यात्रा एक कदम के साथ शुरू होती है। SFPI के लिए, विद्यादान कार्यक्रम केरल में दो छात्रों को छात्रवृत्ति के साथ शुरू हुआ। अब इसकी देखभाल के तहत 4,300 छात्र हैं। पिछले 20 वर्षों में, कार्यक्रम ने पूरे भारत के आर्थिक रूप से पिछड़े परिवारों के 17,000 से अधिक मेधावी बच्चों की मदद की है।

इन बच्चों ने विभिन्न व्यावसायिक क्षेत्रों में 230 डॉक्टरों और 940 इंजीनियरों के साथ प्रमुख कार्यक्रम पर मंथन किया है। अपनी शिक्षा के वित्तपोषण के अलावा, यह सामाजिक और संचार कौशल और कैरियर परामर्श सहित समग्र विकास के लिए कार्यशालाओं का आयोजन करता है।

10 राज्यों में मौजूद, वह कहती हैं कि उनके कक्षा दस के परिणाम के आधार पर विद्यादान के लिए चयन प्रक्रिया सबसे चुनौतीपूर्ण हिस्सा है। कुमारी ने कहा, “हमारी योजना प्रत्येक राज्य से 100 छात्रों को लेने की है लेकिन हमेशा 100 से अधिक योग्य छात्र होते हैं।”

यह तब है जब उन्होंने प्रायोजकों – दोनों व्यक्तियों और कॉरपोरेट्स – को बोर्ड पर लाने के लिए इच वन, टीच वन की शुरुआत की और हर साल एक हजार अतिरिक्त छात्रों की मदद करने में सक्षम रही है। कुमारी का कहना है कि प्रायोजक छात्रों को सीधे पैसा भेज सकते हैं और संगठन केवल चयन प्रक्रिया में मदद करता है। इसमें UST Global, Flex India, Fanuc India और ऐसे व्यक्ति शामिल हैं जो सॉफ्ट स्किल ट्रेनिंग भी देते हैं और अक्सर चयन प्रक्रिया में भी बैठते हैं।

लिखित परीक्षा और इंटरव्यू राउंड के लिए पात्र होने के लिए, छात्र की वार्षिक पारिवारिक आय 2 लाख रुपये से कम होनी चाहिए और उसने दसवीं कक्षा में कम से कम 95 प्रतिशत हासिल किया हो।

कुमारी कहती हैं, “उनके पेट में आग है। और हम साक्षात्कार के दौरान उत्साह देख सकते हैं जहां 99 प्रतिशत छात्र दिखाते हैं कि वे कुछ करना चाहते हैं और अपने परिवार के सदस्यों की मदद करना चाहते हैं।”

आईआईएम-कोझिकोड के साथ साझेदारी में संगठन द्वारा किए गए एक हालिया सर्वे से पता चला है कि अधिकांश लाभार्थी अपनी शिक्षा पूरी करने के दो साल के भीतर अपने परिवारों को गरीबी से ऊपर उठाने में सक्षम हो गए हैं। वे अपने गांवों और समुदायों में रोल मॉडल भी बनते हैं।

कुमारी की ग्राउंडवर्क और बच्चों की यात्रा में स्पष्ट रूप से शामिल है, क्योंकि वह उन छात्रों के नाम साझा करती है जिन्होंने प्रतियोगी प्रवेश परीक्षाओं में भाग लिया और टॉप किया, जैसे “कर्नाटक के विनीत कुमार ने 2009 में NEET में टॉप किया और AIIMS में प्रवेश किया, केरल की अनीता ने JEE में पहला रैंक हासिल किया…और यह सूची खत्म ही नहीं होती।”

ध्यान देने वाली बात यह है कि कई लाभार्थी अन्य बच्चों को प्रायोजित करते हैं। SFPI में जीवन तब पूरा हो गया जब पहली छात्रवृत्ति छात्र ने उच्च अध्ययन पूरा किया और दस साल पहले एक वित्त नियंत्रक के रूप में संगठन में शामिल हो गया।

 

भविष्य की योजनाएं

कोविड-19 मामलों में उछाल के साथ, कुमारी का कहना है कि कनेक्टिविटी के मुद्दों का सामना करने वाले कुछ छात्रों को छोड़कर, सॉफ्ट स्किल, करियर काउंसलिंग और NEET और JEE के लिए प्रशिक्षण सफलतापूर्वक ऑनलाइन आयोजित किया जा रहा है।

किसानों के परिवार से खुश, कुमारी कहती है कि वह अपने जीवन में निभाई गई भूमिका के कारण अधिक बच्चों को शिक्षा प्रदान करना चाहती है। इसलिए, जब छात्र कुमारी को बताते हैं कि वे उनके जैसा बनना चाहते हैं और परोपकारी काम करते हैं, तो वह सुझाव देती है कि वे एक किताब लें और उसे एक बच्चे की पढ़ाई में मदद करें।



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